व्योमेश चन्द्र बनर्जी का जीवन परिचय | Womesh Chunder Bonnerjee biography in Hindi

व्योमेश चन्द्र बनर्जी का जीवन परिचय (Womesh Chunder Bonnerjee biography in hindi)

इंडियन नेशनल कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष के रूप में पहचान रखने वाले व्योमेश (उमेश) बनर्जी का योगदान राजनीतिक गतिविधयों के अतिरिक्त वकालात एवं भारतीय स्वतंत्रता में भी था. बंगाली पृष्ठभूमि से होने के कारण उनका वास्तविक नाम व्योमेश चन्द्र बनर्जी माना जाता हैं लेकिन उनका दूसरा प्रचलित एवं हिंदी नाम उमेश चन्द्र बनर्जी था. कांग्रेस के 133 वर्ष के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष बनर्जी थे.

Womesh Chunder Bonnerjee

क्र. म.(s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.    पूरा नाम ((Full Name) व्योमेश  चन्द्र बनर्जी
2.    जन्म (Birth Date) 29 दिसम्बर 1844
3.    जन्म स्थान (Birth Place) किड्डेरपोर (Kidderpore) कोलकाता
4.    पेशा (Profession) वकील, स्वतंत्रता सेनानी
5.    राजनीतिक पार्टी (Political Party) इंडियन नेशनल कांग्रेस
6.    अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations)
7.    राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
8.    उम्र (Age) 61वर्ष
9.    गृहनगर (Hometown) कोलकाता
10.           धर्म (Religion) हिंदू
11.           जाति (Caste) ब्राह्मिन
12.           वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13.           राशि (Zodiac Sign)
14.           मृत्यु 21 जुलाई 1906

व्योमेश का प्रारंभिक जीवन (Womesh Chandra banarji’s childhood and early life)

व्योमेश ने कोलकाता में ओरिएंटल सेमिनार और हिन्दू स्कूल से पढाई की थी, हालांकि उनके 10वीं कक्षा पास करने से पहले ही 1861 में उनके पिताजी ने उन्हें एक लोकल कानूनविद के साथ पास काम सीखने भेज दिया. इसके एक वर्ष बाद उन्होंने क्लर्क के तौर पर काम करना शुरू किया. गिल्नार्ड के पास काम करते हुए उन्होंने कानून की पेचीदगियां सीखी. अपने प्रारम्भिक जीवन से ही उन्हें राजनीति में रूचि बनने लगी थी. व्योमेश के परिवार में उनसे पहले दो पीढियां वकालत का काम कर रही थी, इसलिए ये स्वाभाविक था कि व्योमेश भी वकालत में अपना करियर बनाते. 

व्योमेश बनर्जी का निजी जीवन और पारिवारिक जानकारी (Womesh Chandra banarji’s personal life and family details)

व्योमेश ने 1874 में अपने 4 वर्षीय बेटे शेली और अन्य बच्चों को पढने के लिए ब्रिटेन भेजा था.

पिता (Father) गिरीश चन्द्र बनर्जी
माता (Mother) सरस्वती देवी
पत्नी (Wife) हेमांगिनी  बनर्जी
पुत्री (Daughter) जानकी अग्नेस पेनेलोप मजुमदार,नोलीन हेलोईस बनर्जी,प्रमिला बनर्जी,सुशीला अनीता बनर्जी
पुत्र (Son) कमल कृष्णा शेली बनर्जी,रत्न कृष्ण कुरण बनर्जी
कजिन (Cousin) रेवडपिट बनर्जी

वकील के तौर पर करियर (Womesh Chandra banarji’s Career as a lawyer)

  • 1862 में व्योमेश का करियर वकालत के क्षेत्र में तब शुरू हुआ था जब उन्होंने  गिलान्देर्स की फर्म में काम करना शुरू किया था. वो कोलकाता सुप्रीम कोर्ट के क्लर्क थे. इस पद पर रहते हुए उन्हें कानून का बहुत अच्छा ज्ञान हो गया  जो कि बाद में उन्हें बहुत काम आया.
  • 1864 में बनर्जी को शिक्षा के लिए आर.जे. जीजीभाई स्कालरशिप मिली थी, इसलिए वो आगे की पढाई के लिए लन्दन चले गए, जहां उन्होंने 19 नवम्बर को मिडल टेम्पल में प्रवेश लिया और 11 जून 1867 को उन्हें बार से बुलावा आ गया. 1868 में वो भारत लौटे कोलकाता हाई कोर्ट में बेरिस्टर-एट-लॉ सर चार्ल्स पॉल के संरक्षण में काम शुरू किया.
  • इंग्लैंड जाने से पहले व्योमेश ने दैनिक पत्रिका बंगाली में गिरीश चन्द्र घोष के सहायक के तौर पर भी काम किया था, इस पत्रिका में व्योमेश चन्द्र 20 रूपये प्रति महीने के हिसाब से साप्ताहिक न्यूज लिखते थे. व्योमेश चन्द्र ने इस काम का पर 3 वर्षों तक  अनुभव लिया.
  • लन्दन में उन्होंने 2 बड़े वकीलों टी.एच. डार्ट और एडवर्ड फ्राई के पास अध्ययन किया था. उन्होंने लन्दन में राजनीतिक उद्देश्यों के साथ इंडियन सोसायटी की स्थापना करने का भी प्रयास किया था.
  • एक अन्य बेरिस्टर जे.पी. केनेडी ने भी उनको वकील के तौर पर आगे बढने में मदद की और कुछ वर्षों में ही वो हाई-कोर्ट में बहुत बड़े बेरिस्टर बन गए. वो पहले भारतीय थे जिन्होंने स्टेंडिंग काउंसिल की तरह काम किया था.
  • 3 वर्ष बाद उन्हें कोलकाता बार से आमन्त्रण मिला और 1868 में वो भारत लौट आये. पहले उन्होने अपने पिताजी की फर्म में काम करना शुरू किया. सर चार्ल्स पॉल के सहायता से वो कोलकाता हाई कोर्ट में बेरिस्टर-एट-लॉ बने और जे.पी. केनेडी की मदद से उन्होंने कोलकाता हाई कोर्ट में अपनी जगह बनाई.
  • 1883 में उन्होंने जब सुरेन्द्र बनर्जी के पक्ष में केस लड़ा तब उनके वकालात के करियर में नया मोड़ आया. 1886 में उन्हें कोलकाता यूनिवर्सिटी में फेलो नियुक्त किया गया और वो लॉ फेकल्टी के प्रेसिडेंट भी बने.
  • व्योमेश चन्द्र बनर्जी वो पहले भारतीय थे जिन्हें 3 बार 1882,1884 और 1886 में स्टेंडिंग काउंसिल की नियुक्ति मिली थी. 1901 में वो कोलकाता बार से रिटायर हुए थे.

व्योमेश चन्द्र बनर्जी का राजनीतिक करियर (Womesh Chandra banarji’s Political Career)

  • ब्रिटेन में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था. ब्रिटेन में उन्होंने फाउंडेशन ऑफ़ लन्दन इंडियन सोसाइटी में सहयोग दिया था और वो लन्दन इंडियन सोसायटी के सेक्रेटरी और संस्थापक भी बने, जो कि भारत में एक जिम्मेदार सरकार की मांग करती थी. इसके बाद वो ईस्ट इण्डिया एसोशियेशन के सदस्य भी बने.
  • कांग्रेस के पहले सेशन में 72 सदस्य थे. एलेन ओक्टेवियन हूमे के प्रस्ताव पर वो निर्विरोध इन्डियन नेशनल कांग्रेस के पहले प्रेसिडेंट बने, तब वो मात्र 41 वर्ष के थे. इस तरह 1885 में बोम्बे में हुए पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस के शुरूआती सेशन की अध्यक्षता व्योमेश ने की थी जबकि कांग्रेस के दूसरा सेशन की अध्यक्षता दादाभाई नैरोजी ने की थी.
  • 1886 में कोलकाता में हुए सेशन में उन्होंने कांग्रेस के लिए सलाहकार के समूहों को आगे बढाने का प्रस्ताव दिया था. इस सेशन में उन्होंने इस बात की भी वकालत की थी कि सामाजिक सुधार और अन्य संस्थाओं की चिंता छोडकर कांग्रेस को राजनीतिक मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करनी चाहिए और प्रत्येक प्रोविंस में कांग्रेस को स्टैंडिंग कमिटी बनानी चाहिए,जिससे देश भर में कम करने में आसानी हो सके.
  • एक प्रसिद्ध वकील होने के नाते उन्होंने भारत में कानूनविद सरजेम्स फिट्ज़ द्वारा शुरू किये गये “एमेंडेंट ऑफ़ दी क्रिमिनल प्रोसीजर कोड “Amendment of the Criminal Procedure Code) की निंदा की, जिसके अनुसार न्यायधीशों को किसी भी अपील पर सजा बढ़ाने का अधिकार था.
  • नमक पर लगे कर की भी व्योमेश ने निंदा की थी. उनका कहना था कि ये जीवन की मुलभूत आवश्यकता हैं इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता.
  • बनर्जी अपने जीवन में सिर्फ एक बार ही कांग्रेस के अध्यक्ष नहीं बने थे, 1892 में इलाहबाद में भी उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्षता की थी. कांग्रेस के काम को आगे बढ़ाने के लिए बनर्जी ने प्रत्येक प्रोविंस में स्टैंडिंग कमिटी बनाने का प्रस्ताव रखा था जिससे कि कामों में सामंजस्य बनाया रखा जा सके.
  • वो ब्रिटिश पार्लियामेंट के चुनाव में खड़े होने वाले वो पहले भारतीय थे, हालांकि इसमें उनकी हार हुयी थी. इंग्लैंड में भारत के समर्थन में आवाज़ उठाने के लिए 1888 में लन्दन एंजेंसी बनाई गयी, इस एजेंसी को सपोर्ट करने के लिए भारत में दादाभाई निरोजी और बनर्जी फंड की व्यवस्था करते थे. उन्होंने फ़ौज के खर्चे को कम करने के लिए रॉयल कमिशन बनाने की वकालत की थी ये भारत और इंग्लॅण्ड में मध्य होए वाला विभाजन था.
  • अन्य राष्ट्रवादियों के तरह बनर्जी भी देश में औद्योगिकरण चाहते थे. इसलिए उन्होंने भी स्वदेशी आंदोलन की वकालत की थी. उन्होंने 1894-95 में बंगाल लेजिस्लेटिव काउंसिल में कोलकाता यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधत्व किया था.
  • 1902 में बनर्जी प्राइवेसी काउंसिल में प्रैक्टिस करने के लिए इंग्लैंड गये थे. वहन भी उन्होंने अपनी राजनैतिक गतिविधयां चालु रखी और भारत के मुद्दों पर कई तरह के भाषण दिए. वहां उन्होंने पार्लियामेंट में भारत सम्बन्धित मुद्दों पर भाषण देने के 2 असफल प्रयास भी किये. सुरेन्द्रनाथ बनर्जी को लगता था कि वो एक सामान्य आंदोलनकारी नहीं थे, कांग्रेस से उनके जुड़ने से इसकी प्रतिष्ठा एवं जिम्मेदारीयां और ज्यादा बढ़ गयी थी.

व्योमेश चन्द्र बनर्जी के जीवन के पिछले वर्ष एवं मृत्यु (Womesh Chandra banarji’s Later life and death)

1890 में व्योमेश ने  लन्दन में एक आलिशान मकान खरीदा था जिसका नाम उन्होंने अपनी जन्मभूमि की याद में  किड्डरपोर रखा था. 1902 में बनर्जी अपनी पत्नी हेमांगिनी मोतीलाल और तीनों बच्चों के साथ वापिस लन्दन चले गये. लम्बी बीमारी के कारण लन्दन में ही उनकी मृत्यु हो गयी’

व्योमेश बनर्जी से जुडी अन्य रोचक जानकारी (Interesting facts about Womesh Chandra banarji)

  • बनर्जी वैसे भी ब्रिटेन और भारत के बीच यात्रा करते रहते थे और इस तरह 1902 तक वो आधे समय भारत और आधे समय लन्दन में रहते थे. 1888 में वो अपनी पत्नी हेमांगिनी और अन्य बच्चों के साथ लन्दन में ही बस गये थे. उनकी पत्नी हेमांगिनी ने धर्म परिवर्तन कर लिया था और वो ईसाई बन गयी थी लेकिन बनर्जी अंत तक हिन्दू ही रहे थे.
  • उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनका अंतिम-संस्कार इंग्लैंड में बिना किसी धर्म के पालन करते हुए हुआ था, उनकी मृत्यु के बाद हेमांगिनी भारत लौट आई थी और 1910 में हेमांगिनी की मृत्यु हुयी थी. अब व्योमेश के वंशज भारत और ब्रिटेन दोनों जगह रहते हैं.

     इस तरह देश के भविष्य के लिए एक स्पष्ट विजन और कानून की समझ के साथ व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने इंडियन नेशनल कोंग्रेस की नीव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

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