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सरदार वल्लभभाई पटेल का जीवन परिचय | Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi

सरदार वल्लभभाई पटेल जी का जीवन परिचय (Sardar Vallabhbhai Patel Biography in Hindi)

सरदार वल्लभभाई पटेल हमारे भारत देश के एक बहुत ही प्रसिद्ध सामाजिक और राजनीतिक नेताओं में से एक थे. वे एक वकील एवं राजनीतिक कार्यकर्ता भी थे जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष में एक अहम भूमिका निभाकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. वे गाँधी जी के विचारों और उनके सिद्धांतों से बहुत प्रेरित थे, जिन्होंने देश के लिए कई कार्य किये. आजादी के बाद उस समय भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में वल्लभभाई पटेल जी लोगों की पहली पसंद थे, किन्तु महात्मा गाँधी जी के आग्रह पर इन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया. वे स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री थे, और देश के एकीकरण की दिशा में उनके प्रयासों ने उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ नाम दे दिया. आइये जानते है इनके जीवन, विचार एवं इनके द्वारा किये गये कार्यों के बारे में.

Sardar Vallabhbhai Patel

परिचय (Introduction)

क्र. म.परिचय बिंदु (Introduction Points)परिचय (Introduction)
1.पूरा नाम (Full Name)सरदार वल्लभभाई पटेल
2.अन्य नाम (NickName)सरदार एवं सरदार पटेल
3.शीर्षक (Title)भारत के लौह पुरुष, भारत के संस्थापक पिता, भारत के बिस्मार्क एवं भारत के यूनिफायर
4.जन्म (Birth)31 अक्टूबर, 1875
5.जन्म स्थान (Birth Place)नाडियाड, बॉम्बे प्रेसीडेंसी (वर्तमान में गुजरात)
6.पेशा (Profession)वकील, राजनेता, कार्यकर्ता एवं स्वतंत्रता सैनानी
7.राजनीतिक पार्टी (Political Party)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
8.आंदोलन (Movement)भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
9.राजनीतिक विचारधारा (Political Ideology)मध्यम एवं दायें पंथी
10.मृत्यु (Death)15 दिसम्बर, 1950
11.मृत्यु स्थान (Death Place)बॉम्बे, बॉम्बे स्टेट, भारत
12.मृत्यु का कारण (Death Cause)दिल का दौरा
13.उम्र (Age)75 वर्ष
14.धर्म (Religion)हिन्दू
15.राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
16.गृहनगर (Hometown)नाडियाड, गुजरात
17.जाति (Caste)पाटीदार
18.पसंदीदा खाना (Food Habit)शाकाहारी, उबली हुई सब्जियां, चांवल
19.पसंद (Hobby)एक कार्ड गेम (प्लेयिंग ब्रिज)
20पसंदीदा राजनेता (Favourite Leader)महात्मा गाँधी
21.राशि (Zodiac Sign)वृश्चिक
22.वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित

जन्म एवं परिवार की जानकारी (Birth and Family Details)

1.माता का नाम (Mother’s Name)लाडबाई
2.पिता का नाम (Father’s Name)झावरभाई पटेल
3.भाइयों के नाम (Siblings’s Name)सोमाभाई पटेल, नर्शिभाई पटेल, विथलभाई पटेल (विधायक), काशीभाई पटेल
4.बहनों के नाम (Sister’s Name)दहीबेन (छोटी बहन)
5.पत्नी का नाम (Spouse’s Name)झावरबा पटेल
6.शादी (Marriage Date)सन 1891
6.बेटे का नाम (Son’s Name)दाह्यभाई पटेल
7.बेटी का नाम (Daughter’s Name)मणिबेन पटेल

इनका जन्म नडियाद गाँव में एक मध्यमवर्गीय लेवा पाटीदार जाति के एक आत्मनिर्भर भूमिगत परिवार में हुआ था. इनके पिता झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई जी की सेना में कार्यरत थे. वहीं इनकी माता जी एक बहुत ही आध्यात्मिक महिला थी. ये केवल 16 वर्ष के थे, जब इनकी शादी झावेरबा पटेल जी से हुई. इनके कुल 2 बच्चे हुए. इनके बेटे एक बीमा कंपनी में कार्यरत थे, वहीँ दूसरी तरफ इनकी बेटी थी जोकि एक स्वतंत्रता सैनानी थी.

शिक्षा एवं शुरूआती जीवन (Education and Early Life)

इन्होने अपनी शुरूआती प्राथमिक एवं माध्यमिक पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से की. इसके बाद वे अंग्रेजी मीडियम स्कूल में स्थानांतरित हो गए. सन 1897 में उन्होंने अपनी हाई स्कूल की पढाई पूरी करने के बाद कनून की पढ़ाई करने का फैसला किया. सन 1910 में कानून की डिग्री प्राप्त करने के लिए इंग्लैंड गये, और उन्हें यह डिग्री सन 1913 में प्राप्त हो गई. डिग्री मिलने के बाद वे भारत वापस आ गये. यहाँ उन्होंने गुजरात के गोधरा में अपना कानून का अभ्यास करना शुरू कर दिया.

उनकी कानून में निपुणता को देखते हुए वल्लभभाई पटेल जी को ब्रिटिश सरकार द्वारा कई आकर्षक पदों के लिए ऑफर दिए गये, किन्तु उन्होंने वे सभी ऑफर को ठुकरा दिया. वे ब्रिटिश सरकार और उसके कानून को बहुत ही गलत मानते थे और इसलिए उन्होंने अंग्रेजों के लिए काम न करने का फैसला किया. उन्होंने अपनी कानून की ट्रेनिंग गोधरा से अहमदाबाद में स्थानांतरित कर ली. वे वहां गुजरात क्लब के सदस्य बने, वहां उन्होंने गाँधी जी के लेक्चर में भाग लिया. गाँधी जी के शब्दों से वे बहुत प्रभावित हुए, और उन्होंने जल्द ही गाँधीवादी सिद्धांतों को अपनाने का फैसला कर लिया.

‘सरदार’ का ख़िताब (‘Sardar’ Title)

सन 1918 में, उन्होंने कर के भुगतान से जुड़े एक अभियान की शुरूआत की जोकि बड़े पैमाने पर किया गया था. यह अभियान ‘नो टैक्स अभियान’ था, जिसमें किसानों ने सरकार से टैक्स पर जोर देते हुए टैक्स का भुगतान न करने का आग्रह किया था. इस शांतिपूर्ण आंदोलन से ब्रिटिश अधिकारीयों को मजबूरन किसानों से ली गई भूमि वापस करनी पड़ी. इसके बाद सन 1928 में बारडोली के किसानों को फिर से ‘टैक्स – हाइक’ की समस्या का सामना करना पड़ा. इस समस्या से लड़ते हुए जब किसानों ने अतिरिक्त टैक्स देने से इनकार कर दिया तो सरकार ने उनसे उनकी भूमि छीन कर जब्त कर ली. इससे आंदोलन शुरू हुआ. यह आंदोलन 6 माह से भी अधिक समय तक चला. पटेल द्वारा कई बार बातचीत के बाद, सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके बाद भूमि किसानों को वापस कर दी गई थी. अपने क्षेत्र के किसानों को एक साथ लाने के उनके प्रयास ने उन्हें ‘सरदार’ का खिताब दिलवाया.

राजनीतिक करियर (Political Career)

सन 1917 में ये पहली बार अहमदाबाद के स्वच्छता आयुक्त के रूप में चुने गए थे. इसके बाद इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गुजरात विंग, गुजरात सभा के सचिव के रूप में निर्वाचित किया गया था. सन 1920 में उन्हें ‘गुजरात प्रदेश की कांग्रेस कमेटी’ के अध्यक्ष के रूप में चुना गया और वहां उन्होंने सन 1945 तक सेवा दी. उन्होंने सक्रिय रूप से गाँधी जी द्वारा शुरू किये गये असहयोग आंदोलन का समर्थन किया. पटेल ने उनके साथ देश का दौरा किया और उन्होंने 3,00,000 सदस्यों को भर्ती किया और 1.5 मिलियन से अधिक लोगों को एकत्र करने में मदद की. सन 1924 से 1928 के बीच ये अहमदाबाद में नगर समिति के अध्यक्ष बने थे.

सन 1931 में कराची सत्र के दौरान उन्हें कांग्रेस पार्टी ने पार्टी के अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित करने का फैसला लिया. इस सत्र में यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि उस समय पटेल जी ही वे व्यक्ति थे जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के सपने पूरा कर सकते थे. सन 1934 के विधायी चुनाव के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए प्रचार किया. हालाँकि उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा, किन्तु उन्होंने चुनाव के दौरान अपने पार्टी के साथी की मदद की. सरदार पटेल की इस यात्रा में अक्सर कांग्रेस के अन्य महत्वपूर्ण नेताओं के साथ कुछ – कुछ अनबन होती रहती है. जब उन्होंने सन 1936 में समाजवाद को अपनाया तब जवाहरलाल नेहरु पर अपनी परेशानियों को लेकर आवाज उठाई. पटेल नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी से भी काफी सावधान रहते थे.

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलनों में भूमिका एवं जेल (Role of Sardar Vallabhbhai Patel in Indian National Movements and Prison)

सन 1930 में राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी ने नमक सत्याग्रह शुरू किया था जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल जी की भी भागीदारी थी. इसके चलते जेल जाने वाले लोगों में सरदार जी भी शामिल थे. नमक आंदोलन के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे प्रेरणादायी भाषण दिए जिससे लोगों का दृष्टिकोण ही बदल गया, ऐसा करते हुए उन्होंने इस आंदोलन को सफल बनाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई. गुजरात में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व करने के दौरान जब वे जेल में थे, तब गांधीजी ने कांग्रेस के सदस्यों से उन्हें जेल से निकालने का अनुरोध किया. उस समय भारत के तत्कालीन वाइसराय लार्ड इरविन ने महात्मा गाँधी जी के साथ मिलकर एक समझौता किया, उसके बाद सन 1931 में सरदार पटेल को मुक्त कर दिया गया था. इस संधि को गाँधी – इरविन संधि के रूप में जाना जाता था.

सन 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में पटेल ने गाँधी को अपना प्रभावशाली समर्थन देना जारी रखा, जब उस समय के कई नेताओं ने फैसले की आलोचना की. उन्होंने दिन भर में भाषणों की एक श्रृंखला में आंदोलन के एजेंडों का प्रचार करते हुए पूरे देश में यात्रा जारी रखी. इस आंदोलन के चलते उन्हें फिर से गिरफ्तार होना पड़ा, और सन 1945 तक अहमदनगर किले में अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ उन्हें जेल में रहना पड़ा.

भारत का विभाजन और सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Patel and Partition of India)

मुस्लिम लीग नेता मोहम्मद अली जिन्ना वे व्यक्ति थे, जिन्होंने अलगाववादी आंदोलन का नेतृत्व किया था. और आजादी से ठीक पहले पूरे देश में हिंसक हिन्दू – मुस्लिम दंगों का कारण भी इन्हें ही बताया जाता था. सरदार पटेल का मानना था कि दंगों द्वारा उभरते खुले सांप्रदायिक संघर्षों में स्वतंत्रता के बाद केंद्र में एक कमजोर सरकार स्थापित करना, एक लोकतांत्रिक राष्ट्र को मजबूत करने के लिए विनाशकारी साबित होगा. पटेल जी दिसंबर 1946 के दौरान वी.पी. मेनन के साथ एक सिविल सर्वेंट के रूप में इसके समाधान का काम करने के लिए गये. और राज्यों के धार्मिक सुझाव के आधार पर एक अलग राज्य बनाने के प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार कर लिया. उन्होंने विभाजन परिषद में भारत का प्रतिनिधित्व किया था. मुस्लिम लीग का इतिहास जानने के लिए यहाँ क्लिक करें 

स्वतंत्रता के बाद देश के लिए योगदान (Contribution in Post – Independence India)

भारत में आजादी हासिल कर लेने के बाद पटेल जी ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने देश के पहले गृहमंत्री के साथ – साथ उप प्रधानमंत्री के पदभर को भी संभाला. और इस पदभार को सँभालते हुए उन्होंने भारत के लिए एक अहम भूमिका अदा दी, जिसमें उन्होंने भारत के लगभग 562 रियासतों को सफलतापूर्वक एक साथ जोड़ा. दरअसल ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के सामने 2 विकल्प रखते हुए आजादी दी गई थी. वे विकल्प ये थे कि या तो वे भारत और पाकिस्तान का विभाजन होने दें और स्वतंत्र हो जाये. या स्वतंत्र न रहते हुए भारत और पाकिस्तान को अलग न होने दें. बाल गंगाधर तिलक के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े

इससे देश में कई कठिनाइयां आई. कांग्रेस सरकार ने सरदार पटेल जी को एक बहुत ही अहम कार्य सौंप दिया. उन्होंने 6 अगस्त, 1947 को भारत के इन राज्यों को जोड़ने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी. वे देश के लगभग सभी राज्यों को एक साथ जोड़ने में सफल रहे, किन्तु इसमें जम्मू-काश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद शामिल थे. और अंत में उन्होंने अपने तेज राजनीतिक कौशल के चलते स्थिति का सामना किया और देश को सुरक्षित कर लिया. जिस भारत को आज हम देखते हैं वह सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा किये गये प्रयासों का परिणाम ही था. पटेल जी को डॉ भीमराव आंबेडकर जी द्वारा भारत की संविधान सभा के एक अग्रणी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया. उनका भारतीय सेवाओं जैसे प्रशासनिक सेवा एवं पुलिस सेवा करने में एक महत्वपूर्ण बल था.

गुजरात के सौराष्ट्र शहर में स्थित सोमनाथ मंदिर को पुनर्स्थापित करने में उनकी व्यक्तिगत रूप से रूचि थी. पटेल ने सितंबर 1947 में कश्मीर पर आक्रमण करने के पाकिस्तान के प्रयासों के साथ उसका निर्दयतापूर्वक सामना किया. उन्होंने सेना को तत्काल तैयार कर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार कर यह किया. अक्सर ऐसा होता था कि उनके और नेहरु जी के विचारों एवं उनकी नीतियों में काफी असमानताएं थी, फिर चाहे वह पाकिस्तान के साथ वाला कोई मुद्दा हो या नेहरु जी के व्यवहार का कोई मुद्दा हो. उन्होंने पंजाब, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसी कई जगहों पर बहुत से शिविर आयोजित किये. गोपाल कृष्ण गोखले के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े 

सरदार वल्लभभाई पटेल को ‘लौह पुरुष’ क्यों कहा जाता है? (Why Sardar Patel is Known As ‘Iron Man’ ?)

सरदार पटेल सिद्धांतों वाले व्यक्ति थे. वे एक महान राष्ट्रवादी थे. उन्होंने कभी भी राष्ट्र के लिए किसी भी प्रकार का समझौता करने में विश्वास नहीं किया, वे राष्ट्र को प्रथम मानते थे. दरअसल भारत में आजादी से पहले कुल 565 रियासतें थी, और भारत में उन्हें शांतिपूर्ण रूप से मिलाने के लिए यह कांग्रेस के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती थी. कांग्रेस पार्टी ने सरदार पटेल को इस जिम्मेदारी को सौंपा और पटेल जी ने भी इसे अपने जीवन की चुनौती के रूप में लिया और इसे सफतापूर्वक एक्सीक्यूट किया. भारत की स्वतंत्रता के बाद लगभग 565 रियासतों को एक साथ जोड़ने में उनकी सफलता ने ही उन्हें ‘लौह पुरुष’ का नाम दिया. और तब से वे भारत के लौह पुरुष कहे जाने लगे. पटेल जी ने अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए ‘साम – दाम – दंड – भेद (दोस्ती, लेना-देना, सजा और विभाजन – एवं – शासन) की नीति का उपयोग करने में संकोच नहीं किया. यहाँ तक कि गाँधी जी भी यह मानते थे कि केवल पटेल जी थे जो सैकड़ों रियासतों को एकजुट करने की चुनौती को पूरा कर सकते हैं.

गाँधी जी का प्रभाव (Influence of Gandhiji)   

पटेल जी गाँधी जी के विचारों से काफी प्रभावित थे. इसलिए वे उनकी हर बात मानते भी थे. इसके चलते उन्होंने महात्मा गाँधी जी को अविश्वसनीय समर्थन देने का वचन दिया और अपने जीवन में वे उनके सिद्धांतों के साथ खड़े रहे. दरअसल जवाहरलाल नेहरु, चक्रवर्ती राजगोपालाचारी और मौलाना आजाद जैसे कई नेताओं ने महात्मा गाँधी जी के नागरिक अवज्ञा आंदोलन की आलोचना की थी. गाँधी जी का कहना था कि यह आंदोलन अंग्रेजों को राष्ट्र छोड़ने के लिए मजबूर कर देगा. इस फैसले में पटेल जी ने उनका समर्थन किया था. कांग्रेस हाई कमांड की अनुमति न मिलने के बावजूद, महात्मा गाँधी और पटेल जी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को नागरिक अवज्ञा आंदोलन को मंजूरी देने और इसे आगे न बढ़ाते हुए तुरंत ही लांच करने के लिए मजबूर कर दिया. वे गाँधी जी के हर फैसले में उनका साथ देते थे. गाँधी जी के ही कहने पर उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी उम्मीदवारी को त्याग दिया.

मृत्यु (Death)

गाँधी जी की मृत्यु हो जाने के बाद सरदार जी को गहरा सदमा पहुंचा. उन्हें दिल का दौरा पड़ा, लेकिन फिर वे ठीक हो गए हालाँकि वे अपने गुरु की मृत्यु के शोक से अब तक उभर नहीं पाए थे. किन्तु उन्होंने अपने आप को संभाला और वे स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले उप प्रधानमंत्री बने और इसके साथ ही उन्हें गृह मंत्री एवं राज्यों के सूचना प्रसारण मंत्री के रूप में भी नियुक्त किया गया. सन 1950 में उनका स्वास्थ्य ख़राब रहने लगा. उन्हें यह एहसास होने लगा कि वे अब ज्यादा समय तक नहीं जी पायेंगे. उनकी मृत्यु के कुछ दिन पहले ही उनका स्वास्थ्य ज्यादा ख़राब हो गया, और वे बिस्तर पर ही सीमित हो गये. इसके बाद 15 दिसंबर को उन्हें फिर से बड़े रूप में दिल का दौरा पड़ा. गंभीर रूप से पीढित होने के बाद उनकी एक महान आत्मा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया. उनकी मृत्यु के 40 साल बाद उन्हें भारत का सबसे बड़ा सम्मान ‘भारत रत्न’ दिया गया.

राष्ट्रीय एकता दिवस (National Unity Day)

प्रधानमंत्री मोदी जी ने सन 2014 से हर साल राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को मनाने की घोषणा की थी. यह सरदार पटेल जी का जन्मदिवस है और यह उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिया गया सम्मान है. वे ऐसे महापुरुष हैं जिन्होंने भारत को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके जन्मदिन के दिन ही राष्ट्रीय एकता दिवस इसलिए मनाया जाता है, क्योकि भारत के गृहमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान स्वतंत्रता अधिनियम (1947) द्वारा 1947-49 से भारत में 550 से अधिक स्वतंत्र रियासतों को एक साथ करने के लिए उन्हें श्रेय दिया जाता है. उन्हें ‘भारत के बिस्मार्क’ के रूप में भी जाना जाता है. इस उत्सव को भारत के प्रधानमंत्री के भाषण के साथ ‘एकता के लिए दौड़’ टैग लाइन के साथ इसे शुरू किया गया. सन 2016 के उत्सवों के लिए विषय ‘भारत का एकीकरण’ था.

एकता की प्रतिमा (Statue of Unity)

इसके लिए उन्होंने सरदार पटेल जी को समर्पित गुजरात में 182 मीटर ऊंचाई वाली दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ती जिसे एकता की प्रतिमा नाम दिया स्थापित करने की भी घोषणा की. यह वडोदरा के पास साधू बेत से 3.2 किमी दूर नर्मदा बाँध के सामने बनाई जा रही है. इस मूर्ती की संरचना इस तरह से की गई है कि इसे 20,000 वर्ग मीटर से भी अधिक दूरी से देखा जा सकता है. यह 12 किमी की दूरी पर फैली एक बड़ी झील से घिरा हुआ है. इसके लिए अनुमानित 29.8 अरब रूपये खर्च किये गये हैं. 31 अक्टूबर सन 2018 को पटेल जी के जन्मदिन की 143 वीं वर्षगांठ पर इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किया था.

स्मारक एवं संस्थान (Sardar Patel Memorial and Institution)

 

क्र.म.स्मारकशहरसंस्थानशहर
1.सरदार पटेल मेमोरियल ट्रस्ट       –सरदार वल्लभभाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीसूरत
2.सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल मेमोरियलअहमदाबादसरदार पटेल विश्वविध्यालयगुजरात
3.सरदार सरोवर धाम,गुजरातसरदार पटेल विश्वविध्यालय पुलिस, सुरक्षा और अपराधिक न्यायजोधपुर
4.सरदार वल्लभभाई पटेल चौकउत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ के कटरा गुलाब सिंह मेंसरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीवासद
5.सरदार वल्लभभाई पटेल अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा,अहमदाबादसरदार पटेल विद्यालयनई दिल्ली
6.सरदार पटेल स्टेडियमगुजरातसरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमीहैदराबाद
7.सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियमअहमदाबादसरदार पटेल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंगमुंबई
8.स्टेचू ऑफ यूनिटी,गुजरातसरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीमुंबई

सरदार पटेल के सुविचार (Sardar Patel Quotes)

  • धर्म मनुष्य और उसके निर्माता के बीच में एक मैटर है.
  • मित्रहीन का मित्र बनना यह मेरी प्रकृति है.
  • भारत के प्रत्येक नागरिक को यह याद रखना चाहिए कि वह एक भारतीय है और उसके पास इस देश में हर अधिकार है लेकिन कुछ कर्तव्यों के साथ.
  • ताकत के बिना विश्वास का कोई फायदा नहीं है. विश्वास और ताकत दोनों किसी भी महान काम को पूरा करने के लिए आवश्यक है.
  • आज हमें उच्च और निम्न, समृद्ध और गरीब, जाति और पंथ के बीच के भेद को दूर करना होगा.
  • जाति, समुदाय तेजी से गायब हो जायेंगे, हमें इन सभी चीजों को तेजी से भूलना होगा, ऐसी सीमाएं हमारी वृद्धि में बाधा डालती है.
  • हमारे देश की मिट्टी में कुछ तो खास बात जरुर है, क्योकि यह कई बाधाओं के बावजूद हमेशा महान आत्माओं का निवास बनी रहती है.
  • देश के प्रत्येक नागरिक को यह महसूस करना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है कि उसका देश स्वतंत्र रहे, और उसकी आजादी की रक्षा करना उसका कर्तव्य हो.
  • मेरी एक मात्र इच्छा यह है कि भारत एक अच्छा निर्माता होना चाहिये, और देश में भोजन के लिए आंसुओं को बहाल करने के लिए कोई भी भूखा नहीं होना चाहिए.

सरदार पटेल की कुछ रोचक बातें (Sardar Patel Interesting Facts)

  • बचपन से सरदार जी एक सहनशील व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे. उन्होंने कभी भी जीवन के दर्द और दुखों की शिकायत नहीं की.
  • गरीब परिवारिक परिस्थितियों के कारण, उन्होंने एक बार कॉलेज में कानून का अध्ययन करने की अपनी उम्मीद को छोड़ दिया था.
  • चूंकि वे बैरिस्टर बनना चाहते थे, इसलिए उन्होंने परिवार से दूर कई साल बिताये और साथ ही अपने दोस्तों से अध्ययन करने के लिए किताबें उधार ली. पटेल ने अपना घर छोड़ दिया और वे कानून के अभ्यास के लिए अपनी पत्नी के साथ गोधरा में रहने लगे.
  • एक बार पटेल जी को एक गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा था, उन्होंने अपने परिवार को उस बीमारी के संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए घर छोड़ दिया और उस समय वे मंदिर में रहे जहाँ वे धीरे – धीरे ठीक हो गये.
  • जब पटेल जी गोधरा, आनंद, बोर्साड में कानून का अभ्यास कर रहे थे. तब उन्होंने वहां ‘एडवर्ड मेमोरियल हाई स्कूल’ की स्थापाना की जोकि वर्तमान में झावरभाई दजीभाई पटेल हाई स्कूल के नाम से जाना जाता है.
  • पटेल जी की पत्नी की सन 1909 में कैंसर से पीढित होने के चलते मृत्यु हो जाने के बाद उनके परिवार वाले उन्हें दूसरी शादी करने के लिए मजबूर करने लगे, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया और अपने बच्चों को खुद की पाला और उन्हें मुंबई के एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में भेज दिया.
  • जब भारत विभाजन के समय पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा हो रही थी. उस दौरान पटेल जी ने भारत छोडकर जाने वाले मुस्लिम शरणार्थियों की एक ट्रेन में होने वाले हमले को सफतापूर्वक रोक दिया था.

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  1. अबुल कलाम आजाद का जीवन परिचय
  2. नरसिम्हा राव का जीवन परिचय

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