संजय गांधी का जीवन परिचय | Sanjay Gandhi Biography in Hindi

संजय गांधी का जीवन परिचय (Sanjay Gandhi Biography in Hindi)

संजय गांधी भारत के जाने माने नेहरु – गांधी परिवार के सदस्य थे, जोकि भारतीय राजनेता और भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी के सुपुत्र थे. वे अपने जीवनकाल के दौरान व्यापक रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख के रूप में और अपनी माँ को सफलता दिलाने के लिए कार्य किया करते थे. लेकिन इनकी कम आयु में ही मृत्यु हो गई. इतने समय में इन्होंने देश में क्या – क्या कार्य किये यह सभी जानकारी को आप यहाँ देख सकते हैं.

Sanjay Gandhi

जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र. . (s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) जीवन परिचय (Life Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name) संजय गांधी
2. पेशा (Profession) भारतीय राजनेता
3. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
4. जन्म (Birth Date) 14 दिसंबर, 1946
5. जन्म स्थान (Birth Place) नई दिल्ली, ब्रिटिश भारत
6. मृत्यु (Date of Death) 23 जून, 1980
7. मृत्यु स्थान (Place of Death) नई दिल्ली, भारत
8. मृत्यु का कारण (Cause of Death) नई दिल्ली में सफ़दरजंग एयरपोर्ट के पास हवाई दुर्घटना के कारण
9. उम्र (Age) 33 साल
10. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
11. गृहनगर (Hometown) नई दिल्ली, ब्रिटिश भारत
12. धर्म (Religion) हिन्दू
13. जाति (Caste) ब्राह्मण
14. वैवाहिक स्थिति (Marital Status) जब उनकी मृत्यु हुई तब वे विवाहित थे
15. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications) ऑटोमोटिव इंजिनियर और प्रशिक्षित पायलट
16. राशि (Zodiac Sign / Sun Sign) धनु राशि
17. कद (Height) 5 फुट 9 इंच
18. वजन (Weight) 69 इंच
19. आँखों का रंग (Eye Colour) काला
20. बालों का रंग (Hair Colour) काला
21. पसंद (Likes) स्पोर्ट्स कार

परिवार की जानकारी (Family Details)

1. पिता का नाम (Father’s Name) स्वर्गीय श्री फिरोज गांधी
2. माता का नाम (Mother’s Name) स्वर्गीय श्रीमति इंदिरा गांधी
3. भाई का नाम (Brother’s Name) स्वर्गीय श्री राजीव गांधी
4. भाभी का नाम (Sister-in-law Name) श्रीमति सोनिया गांधी
4. पत्नी का नाम (Wife’s Name) श्रीमति मेनका गांधी
5. बेटे का नाम (Son’s Name) वरुण गांधी
6. नाना जी का नाम (Grandfather’s Name) पंडित जवाहर लाल नेहरु
7. भतीजे का नाम (Nephew’s Name) राहुल गांधी
8. भतीजी का नाम (Niece’s Name) प्रियंका गांधी

शुरूआती जीवन (Early Life)

संजय गांधी इंदिरा गांधी जी के छोटे बेटे हैं. संजय गांधी जी का पूरा परिवार भारत की राजनीति से संबंध रखता हैं. संजय गांधी जी के नाना स्वतंत्र देश में पहले प्रधानमंत्री बने थे. वहीँ उनकी माता देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं. इसके साथ ही संजय गांधी जी के परिवार के अन्य सभी सदस्य भी राजनीति में ही हैं. संजय अपनी माँ के बेहद करीब थे, इसलिए वे हमेशा अपनी माँ का समर्थन किया करते थे.

शिक्षा (Education)

संजय गांधी ने भी देहरादून के उन्हीं दोनों स्कूल से अपनी स्कूली पढाई पूरी की, जहाँ से उनके भाई ने पढ़ाई की थी. वे दोनों स्कूल वेल्हम बॉयज स्कूल एवं दून स्कूल है. बाद में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जी ने भी इसी स्कूल से पढ़ाई की.

करियर (Career)

संजय ने विश्वविद्यालय में पढ़ाई नहीं की. लेकिन ऑटोमोटिव इंजीनियरिंग को उन्होंने अपने एक करियर के रूप में लिया. और 3 साल के लिए इंग्लैंड के क्रेवे में रोल्स – रॉयल्स के साथ एक ट्रेनी के रूप में काम किया. उन्होंने सन 1976 में एक पायलट लाइसेंस प्राप्त किया क्योकि वे विमान कलाबाजी में रूचि रखते थे, जिसमें उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते. हालाँकि उनके बड़े भाई राजीव गांधी भी एक पायलट थे, जोकि इंडियन एयरलाइन्स में बोइंग 737 – 200 एडीवी विमान के कैप्टेन थे.

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व्यक्तिगत जानकारी (Personal Details)   

अक्टूबर 1974 में नई दिल्ली में संजय गांधी ने मेनका आनंद से शादी की, जो उनसे उम्र में 10 साल छोटी थी. उनके बेटे वरुण गांधी संजय की मृत्यु के कुछ समय पहले ही पैदा हुए थे. मेनका गांधी और वरुण गांधी दोनों ने ही कांग्रेस के विपरीत भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया. और अब दोनों भाजपा का प्रतिनिधित्व करते हैं.  

आपातकाल में संजय की भूमिका (Role During Emergency)

संजय गांधी जी का इंदिरा गांधी जी के कार्यकाल में लगे आपातकाल में अहम भूमिका थी. सन 1974 में देश की हालत बहुत ही ख़राब हो गई थी, उस समय देश के कई हिस्सों में व्यापक रूप से विपक्ष द्वारा किये जाने वाले विरोध और हमलों ने हिंसात्मक रूप ले लिया था. जिससे सरकार एवं देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई थी. 25 जून 1975 को अदालत के फैसले के बाद इंदिरा गांधी ने एक राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी. जिसके चलते कांग्रेस द्वारा पूरे देश में बिना किसी कानून का पालन किये कार्य किये जा रहे थे. पूरे देश में कांग्रेस के अलावा जितनी भी सरकारें थी उसे निरस्त कर दिया गया था. जय प्रकाश नारायण और जीवनराम कृपलानी जैसे कई स्वतंत्रता सैनानियों सहित हजारों लोगों को आपातकाल का विरोध करने के कारण उस दौरान गिरफ्तार कर लिया गया था.

आपातकाल के ठीक पहले और उसके तुरंत बाद के राजनीति के बहुत ही ख़राब माहौल में, संजय गांधी इंदिरा गांधी जी के सलाहकार के रूप में उभरे. धीरे – धीरे संजय का प्रभाव सरकार के साथ बढ़ता गया. हालाँकि उन्होंने कभी भी आधिकारिक या निर्वाचित तौर पर राजनीति में हिस्सा नहीं लिया. किन्तु संजय गांधी उस दौरान अपने मुताबित राजनीतिक कार्यों में हिस्सा ले रहे थे. संजय उस समय जो भी कार्य कर रहे थे, उनकी माँ ने उनके द्वारा किये गये किसी भी कार्य पर प्रतिबन्ध नहीं लगाया. उस समय सरकार को प्रधानमंत्री कार्यलय के बजाय प्रधानमंत्री सदन द्वारा चलाया जा रहा था. संजय ने हजारों युवा लोगों को पार्टी में भर्ती किया. उनमें से कई गुंडे थे, जिन्होंने प्रतिद्वंद्वियों को धमकाने और साथ ही श्रीमति गांधी जी के अधिकारों के लिए बल का प्रयोग किया. उस समय इंदिरा गांधी जी ने कुछ आर्थिक कार्यक्रमों की घोषणा की थी, जिसमें संजय ने अपने अलग से 5 कार्यक्रमों को इसमें शामिल किया और इसकी भी घोषणा की गई, जोकि साक्षरता, परिवार नियोजन (जन्म नियंत्रण), वृक्षारोपण, जातिवाद का नाश और दहेज समापन आदि थे. किन्तु इन सभी में से जन्म नियंत्रण के लिए किये गये कार्य के कारण लोग उन्हें याद करते हैं, उस दौरान उन्होंने जो कृत्य किये थे उससे देश को काफी नुकसान हुआ था. और लोगों द्वारा उनकी काफी आलोचना एवं निंदा भी की गई थी. इस तरह से संजय गांधीकी आपातकाल के दौरान अहम भूमिका रही थी.     

राजनीति एवं सरकार में संजय गांधी का हस्तक्षेप (Involvement in Politics and Government)

संजय गांधी ने राजनीति और सरकार में निम्न तरह से हस्तक्षेप किया –

  • संजय गांधी कभी भी निर्वाचित नहीं हुए, और उनके पास कोई पद नहीं था, लेकिन संजय ने कैबिनेट मंत्रियों, उच्च स्तरीय सरकारी अधिकारीयों और पुलिस अधिकारीयों के साथ अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया था. जिसके चलते कई कैबिनेट मंत्रियों और अधिकारीयों ने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया था. दरअसल संजय गांधी उस समय अपनी माँ के उत्तराधिकारी के रूप में खुद को देख रहे थे. और अपने मन मुताबित कार्य कर रहे थे.
  • उनके द्वारा दिए गये आदेश के चलते इंद्र कुमार गुजराल ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था. क्योंकि संजय ने अपने मंत्रालय के अन्य मामलों को निर्देशित करने और उन्हें आदेश देने का प्रयास किया था. कहा जाता है कि गुजराल ने इसके लिए संजय को फटकार लगाई थी और एक अयोग्य व्यक्ति से आदेश लेने से इनकार किया था. जिसके कारण उन्हें यह पद त्यागना पड़ा और उनकी जगह विद्या चरण शुक्ला को सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया.
  • इसी तरह एक बार एक और ऐसी ही घटना हुई थी जब लोकप्रिय गायक किशोर कुमार ने भारतीय युवा कांग्रेस के एक समारोह में गाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद संजय गांधी के कहने पर किशोर कुमार के गीतों को ऑल इंडिया रेडियो पर प्रतिबंधित कर दिया गया था.
  • इसके अलावा संजय मार्च सन 1977 में आपातकाल के बाद भारतीय संसद के लिए अपने पहले चुनाव के लिए खड़े हुए थे. इस चुनाव में न केवल संजय के अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में, बल्कि पूरे उत्तर भारत में इंदिरा को कांग्रेस पार्टी से हटाने की मांग की जा रही थी.
  • 3 साल बाद संजय ने जनवरी 1980 में होने वाले आम चुनाव में कांग्रेस के लिए अमेठी में जीत हासिल की थी. किन्तु इसी वर्ष उनकी मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु के ठीक एक महीने पहले उन्हें मई 1980 में कांग्रेस पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया था.

इस तरह से संजय गांधी जी का राजनीति एवं सरकारी कार्यों में नियंत्रण रहा था.

विवाद (Controversies)

संजय गांधी अपनी माता के कार्यकाल के दौरान काफी विवादों में घिरे पाए गये थे, यहाँ हम उसके बारे में जानकारी दे रहे हैं –

  • मारुति लिमिटेड कंपनी से जुड़ा विवाद :-

सन 1971 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल ने ‘पीपल्स कार’ के उत्पादन का प्रस्ताव दिया. जून 1971 में ही ‘मारुति मोटर्स लिमिटेड’ नामक कंपनी को कम्पनी अधिनियम के तहत शामिल किया गया और संजय गांधी इसके मैनेजिंग डायरेक्टर बन गए. संजय गांधी जी को इसके बारे में पिछला कोई अनुभव नहीं था फिर भी वे इसके प्रमुख बन गए, जिसके चलते काफी आलोचनायें हुई. इस कंपनी ने कोई भी वाहन नहीं बनाया और सिर्फ दिखाने के लिए एक शोपीस के रूप में एक परिक्षण मॉडल रख दिया गया था. जिससे भ्रष्टाचार का मामला सामने आने लगा. तब संजय गांधी ने इस कार के भारतीय संस्करण के उत्पादन के लिए वोक्सवैगन एजी से सम्पर्क किया. फिर सन 1977 में जब जनता सरकार सत्ता में आई तब उन्होंने इस कंपनी को पूरी तरह से बंद कर दिया था. किन्तु सन 1980 में इंदिरा गांधी जी के कहने पर केंद्र सरकार ने मारुति लिमिटेड कंपनी को फिर से शुरू किया. और इस नई कंपनी के सहयोगी की तलाश शुरू कर दी गई. इसके बाद जापानी कंपनी सुजुकी को भारत में लाने के लिए जापान से सम्पर्क किया गया, और फिर यह कंपनी भी भारत में कारों का उत्पादन करने लगी. भारत में यह दोनों कंपनी साथ में काम करने लगी और इस कंपनी का नाम भारत में वर्तमान में मारुति सुजुकी हो गया है.

  • जामा मस्जिद सौंदर्यीकरण और बस्तियों का विनाश :-

संजय गांधी जी द्वारा पुरानी जामा मस्जिद के सौंदर्यीकरण के लिए 13 अप्रैल 1976 को उसके आस – पास की बस्तियों पर बोल्डोज़र चला दिए गये थे, जिससे काफी विनाश हुआ. इस विनाश का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए पुलिस द्वारा गोलोबारी का सहारा भी लिया गया. इससे कम से कम 150 लोगों की मौत हो गई. इस घटना के दौरान करीब 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए थे. इन बेघर लोगों को यमुना नदी के पार एक नए अविकसित आवास स्थल में ले जाया गया था. और इसका जिम्मेदार पूरी तरह से संजय गांधी जी को ठहराया गया था. 

  • जबरन नसबंदी कार्यक्रम :-

जब भारत में आपातकाल लागू हुआ था उस दौरान सितंबर 1976 में संजय गांधी ने बढ़ती हुई जनसंख्या में कमी लाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कार्य किये, जिसमें उन्होंने बड़े स्तर पर नसबंदी कार्यक्रम शुरू किया. इस कार्यक्रम में लोगों को उनकी मर्जी के बिना नसबंदी करने के लिए उन्हें मजबूर किया गया और उन्होंने इसे अनिवार्य कर दिया. इसमें संजय गांधी जी की अहम भूमिका थी, जिससे यह विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया. इसमें भी संजय को उनके इस तरह के सत्तावाद के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया था.

  • हत्या का प्रयास किया गया :-

संजय गांधी जी के द्वारा किये गये कृत्य के चलते सारा देश उनके खिलाफ हो गया था. सन 1977 में उनकी हत्या करने का भी प्रयास किया गया था. अज्ञात बंदूकधारियों ने अपने चुनाव अभियान के दौरान नई दिल्ली से लगभग 300 मील दूर दक्षिण – पूर्व में उनकी कार पर गोलियां बरसा दी थी. हालाँकि वे इससे बाल – बाल बचे. इस तरह के हमले उन पर 2 बार और हुए थे.

  • किस्सा कुर्सी काफिल्म विवाद :-

सन 1975 में ‘किस्सा कुर्सी का’ इंदिरा गांधी और संजय गांधी पर बनी एक व्यंग्यात्मक फिल्म थी. जिसे अमृत नाहटा द्वारा निर्देशित किया गया था. इसे सत्यापित करने के लिए यह पहले सेंसर बोर्ड के पास गई, इसके बाद 7 सदस्यों की एक कमिटी और फिर सरकार के पास गई. सरकार द्वारा फिल्म पर 51 आपत्तियां जताई गई. इसके निर्देशक ने कहा कि यह फिल्म पूरी तरह से काल्पनिक हैं एवं इसमें किसी की भावना को दुखी नहीं किया गया है. इस फिल्म को क्लीन चिट मिलने के बाद भी फिल्म के सभी प्रिंट और मास्टर प्रिंट को गुरगाँव में मारुति की एक फैक्ट्री में जला दिया गया था. इस कार्य में संजय गांधी के साथ वी सी शुक्ला भी शामिल थे जोकि उस समय सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे. इसके चलते भारत सरकार द्वारा एक कमिटी बैठाई गई, जिसमें उन दोनों को दोषी ठहराया गया. फिर फरवरी सन 1979 में संजय को 1 महीने और शुक्ला को 2 साल की सजा सुनाई गई और उन्हें इसके लिए जमानत भी नहीं दी गई थी. हालाँकि बाद में फैसले को पलट दिया गया था. इस तरह से यह विवाद भी काफी बड़ा विवाद था.

इस प्रकार संजय गांधी जी को आपातकाल के समय एवं इसके अलावा भी लोगों पर अधिकार करने की अनुमति मिल गई थी, जिसके चलते वे इस तरह के कृत्य करते गये. और विवादों में घिरते रहे.

मृत्यु एवं विरासत (Death and Legacy)

नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे के पास 23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में सिर के चोट लगने की वजह से संजय गांधी की तुरंत मृत्यु हो गई. दरअसल वे दिल्ली फ़्लाइंग क्लब का एक नया विमान उड़ा रहे थे, और अपने कार्यालय पर एक हवाई युद्धाभ्यास करते हुए उन्होंने नियंत्रण खो दिया और विमान दुर्घटना ग्रस्त हो गया. और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. विमान में इनके अलावा एक मात्र यात्री कैप्टेन सुभाष सक्सेना भी थे उनकी भी इस दुर्घटना में मृत्यु हो गई. विकिलीक्स ने खुलासा किया है कि विमान दुर्घटना में मरने से पहले उन्हें जान से मरने के 3 बार प्रयास और किये जा चुके थे.   

रोचक जानकारी (Interesting Facts)

  • मेनका गांधी के अनुसार संजय अपने बच्चों को अपने परिवार के पारसी धर्म में लाना चाहते थे.
  • अपनी माँ के साथ राजनीतिक कार्यों में हिस्सा लेने के कारण संजय अपनी माँ के उत्तराधिकारी के रूप में जाने जा रहे थे, लेकिन उनकी प्लेन क्रेश में अल्पआयु में ही मृत्यु हो गई, जिसके परिणामस्वरुप उनके बड़े भाई कांग्रेस पार्टी का भविष्य बने.
  • संजय गांधी जी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और बेटे ने प्रधानमंत्री हाउस छोड़ दिया. मेनका ने अपनी खुद की एक नई पार्टी की स्थापना की, जिसका नाम था ‘संजय विचार मंच’. इसके अलावा वे कई गैर – कांग्रेसी सरकार की सेवा में लग गई थी. इसके बाद वे और उनके बेटे दोनों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया.
  • सन 2014 में भाजपा ने जीत हासिल की थी जिसके बाद नरेंद्र मोदी जी ने अपनी कैबिनेट में संजय गांधी की पत्नी यानि मेनका गांधी जी को शामिल किया. और कैबिनेट में शामिल करते हुए उन्हें देश के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई.
  • संजय गांधी जी के बेटे वरुण गांधी उत्तर प्रदेश में सुल्तानपुर निर्वाचन क्षेत्र से संसद के भाजपा के सदस्य हैं.
  • संजय गांधी और मेनका गांधी की लव मैरिज हुई थी. उनकी पहली मुलाकात एक बॉम्बे डाइंग के साथ मॉडलिंग के ऐड के दौरान हुई. जब संजय गांधी ने मेनका को देखा तो उन्हें उनसे प्यार हो गया. और दोनों ने शादी कर ली.
  • उनके निजी जीवन का एक अज्ञात अध्याय जनवरी सन 2017 में सामने आया, जब प्रिया सिंह पॉल ने दावा किया था कि संजय गांधी उनके बायोलॉजिकल पिता थे, और उनके बायोलॉजिकल परिवार द्वारा उन्हें गोद में लेने के लिए छोड़ दिया गया था.
  • जून 2017 में संजय गांधी पर बनी एक फिल्म को रोकने के लिए एक कानूनी नोटिस भी दिया गया था.

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