राजा राममोहन राय का जीवन परिचय | Raja Ram Mohan Roy Biography in Hindi

राजा राममोहन राय  का जीवन परिचय (Raja Ram Mohan Roy Biography in Hindi )

राजा राम मोहन राय पिछली दो शताब्दी में भारत में किए गए उल्लेखनीय सुधारो के लिए अग्रणी रूप से जाने जाते है. इन्होने समाज में मौजूद कुप्रथाओं को समाप्त किया , सती प्रथा को खत्म किया और महिलाओ को उनका अधिकार दिलाया और एक आधुनिक भारत का निर्माण किया . इन्होने धर्म ग्रंथो का वास्तविक अर्थ आम लोगो को समझाया और समाज में व्याप्त अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास किया .

 Raja Ram Mohan Rai

राजा राममोहन राय के बारे मे कुछ जानकारी

नाम (Name)राजा राम मोहन राय
कार्य (Profession)  ज़मीदार , समाजसुधारक , नौकरी पेशा
जन्म तारीख (DOB)14 अगस्त 1774
मृत्यु  (Deid )27 सितम्बर 1833
राशी (Zodiac Sign)तुला
नागरिकता (Nationality)इंडियन
धर्म (Religion)हिन्दू

 शिक्षा , जन्म स्थान एवं पारिवारिक जानकारी ( Education , Early Life , Birth and Family)

  • राजा राम मोहन राय का जन्म एक बेहद साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनके माता पिता बेहद धार्मिक प्रवृत्ति के थे , जोकि अपना अधिकतम समय ईश्वर की अर्चना करने में व्यतीत करते थे. राजा राम मोहन रॉय अपने माता पिता से अपने इस पूजा अर्चना करने के लिए तर्क मांगते थे उनका कहना था कि हम यह मूर्ति पूजा और वृक्ष की पूजा क्यों करते है और ऐसा क्यों कहते है कि इससे सभी पाप नष्ट हो जाते है. उनके इन सवाल के लिए माता पिता के पास कोई तर्क नही होने की वजह से अक्सर उनके घर में क्लेश होते रहते थे .
  • राजा राम मोहन रॉय को एक मौलवी घर पर ही पारसी भाषा सिखाने आता था , इनकी तीन पीडिया  बंगाल के नवाबो के यहाँ कार्य करती थी और  उनका ऐसा मानना था राम राम मोहन का भविष्य उज्जवल होगा . इन्हें अपने गाँव की ही एक स्कूल में संस्कृत और बंगाली की शिक्षा प्राप्त हुई .
  • इनकी तीन शादिया हुई थीं पर दुर्भाग्यवश इनकी तीनो ही पत्निया कम समय में ही मृत्यु को प्राप्त हो गई . इनकी पहली शादी 9 वर्ष की आयु में हुई और किसी कारणवश इनकी पहली पत्नी की मृत्यु हो गई , फिर जब ये 10 वर्ष के हुए तब इनकी दूसरी शादी हुई और इनके दो पुत्र भी हुए पर इनकी दूसरी पत्नी का भी देहांत हो गया. फिर इनकी एक बार पुनः शादी हुई और इनकी तीसरी पत्नी भी अधिक समय इनके साथ नही रही और इन्हें छोड़ भगवान को प्यारी हो गई .
  • इन्होने अपने जीवन में एक बार अपने घर को छोड़ने का निर्णय भी लिया था.  जब ये अपना घर छोड़ कर चले ले गए थे तब इन्होने कई राज्यों का भ्रमण किया  अलग अलग भाषाएँ सीखी इन्होने पटना में रह कर अरबी और  फारसी भाषा का अध्ययन किया , पटना उस समय मुस्लिम संस्कृति का प्रसिद्ध केंद्र था . इसके बाद ये वाराणसी गए वाराणसी में इन्होने संस्कृत का ज्ञान अर्जित किया हिन्दू धर्म में सभी ग्रंथो को पढ़ा .  ये बेहद विद्वान थे इन्होने कई धर्मों के धर्म ग्रन्थ का अध्ययन किया और उनका वास्तविक अर्थ समझा .

पारिवारिक जानकारी संक्षिप्त में :

माता (Mother)तैरिनी राय
पिता (Father)रामकंतो राय
पुत्र (Son)रामप्रसाद , राधाप्रसाद
जन्म स्थान (Birth Place)राधानगर गाँव , हूगली जिला बंगाल

जीवन की कुछ झलकियां: 

शिक्षा पूर्ण करने के बाद ये ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत रहे , इन्होने श्री जॉन डीगबी के साथ कलेक्टरेट में काम किया , यहां इन्हें पदोन्नत कर दीवान बनाया गया और इन्हें एक अधिकारी का पद प्राप्त हुआ .  

समाज सुधार में अहम भूमिका :

  • 18 वी शताब्दी के आरंभ में बंगाल में समाज में लोग रीती रिवाजो के बोझ तले दबे हुए थे , कुछ धर्म के ज्ञानी धर्म के नाम पर लोगो को भटका रहे थे धर्म के नाम पर कई कुरीतियों और रिवाजो को चलाया जा  रहा था . बंगाल का विभाजन कैसे हुआ यहाँ जाने ?
  • ये मुक्त भाषण और अभिव्यक्ति में सशक्त थे , इन्होने फारसी में मिरातुल नामक अखबार चलाया और एक बंगाली साप्ताहिक अख़बार का भी प्रकाशन किया . उनका कहना था कि सच्चाई को कभी भी दबाना नही चाहिए .

सती प्रथा क्या है और कैसे हुआ इसका अंत  :

  • सती प्रथा नारियों के लिए एक अकाल मृत्यु थी. इस प्रथा के अनुसार जब भी किसी महिला के पति का स्वर्गवास हो जाता था तो अंतिम संस्कार में पत्नी को भी अपना विसर्जन करना होता था . इस प्रथा के साथ समाज में एक और कुरीति प्रचलित थी कुछ कम उम्र की लड़कियों की शादी दहेज़ के कारण अपने से दुगुनी आयु के व्यक्ति के साथ कर दी जाती थी और पति की मृत्यु पर उसे सती होना पढता था और अपना जीवन कम उम्र में त्यागना होता था . ऐसा कहा जाता था पत्नी के सती होने से उसका कर्मिक फल पति को प्राप्त होता है .
  • राजा राम मोहन राय ने ईस्ट इंडिया कंपनी में इस प्रथा के प्रति अपने विचारो को प्रकट किया और कई कठिनाइयों का सामना करने के बाद गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बेंटीनक ने सहानुभूति व्यक्त की और इस प्रथा को बंद कर दिया. इन्होने एक अधिनियम पास किया और इसे एक दंडनीय अपराध बताया , इससे महिलाओ की स्थिति में सुधार आया और उन्हें अपना जीवन जीने का अवसर प्राप्त हुआ .
  • राजा राम मोहन राय ने समाज को नई  दिशा दिखाने का प्रयास किया , इन्होने धर्म के नाम पर हो रहे अत्याचारों का विरोध किया. इन्होने कई कुरीतियों के विरोध में आवाज उठाई इसके लिए इन्हें अपने परिवार और समाज से भी बहुत विद्रोह प्राप्त हुआ .

 राजा राममोहन राय के बारे में कुछ रोचक बातें ( Some interesting  information about Raja Ram Mohan Roy ) :

  • 1815 में ये बंगाल आए और इन्होने बंगाल में एक अंग्रेजी कॉलेज खोलने की पहल की और एक वर्ष के बाद ही इन्होने एक कॉलेज की स्थापना की , बंगाल में सरकार द्वारा कॉलेज खोलने पर इनका विरोध किया गया, इनका मानना था की यदि छात्र अंगेजी , गणित , भूगोल और लेटीन भाषा का अध्यन नही करगे तो भारतीय छात्र पीछे ही रह जाएगे . सरकार ने इनकी इस बात को स्वीकार किया. अपनी मातृभाषा को महत्व देने वाले ये पहले व्यक्ति थे, कहा जाता है कि रवीन्द्रनाथ टेगोर और बंकिमचन्द्र भी राजा राम मोहन राय का अनुसरण करते थे . स्वामी विवेकानंद का जीवन परिचय जाने के लिए यहाँ पढ़े 
  • इन्होने बेहतर रोजगार पाने के लिए हिन्दी के साथ अंग्रेजी भाषा सीखी . इन्होने गणित , और विज्ञान जैसे वैज्ञानिक विषयो को पढ़ाने के लिए देश में अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली की शुरुआत करने की वकालत की . इन्होने डेविड हरे के साथ 1817 में हिन्दू कॉलेज की स्थापना की और भारत की शिक्षा प्रणाली में क्रान्तिकारी परिवर्तन किया. इनके संस्थान देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान साबित हुए इन्होने 1822 में एग्लो वैदिक स्कूल की स्थापन की जो बाद में 1824 में वेदांत कॉलेज में परिवर्तित हुआ .
  • इन्होने बंगालियों के साथ एक ब्रह्म समाज की स्थापना की ये बेहद प्रभावशाली साबित हुआ. इसके द्वारा इन्होने सामाजिक धार्मिक सुधार , जातिवाद , दहेज़ , महिलाओं की बीमार होने पर उनका उपचार जैसी बुराइयों के खिलाफ आन्दोलन किया .
  • राजा राम मोहन राय को 1931 में मुग़ल सम्राट अकबर द्वितीय द्वारा राजा शीर्षक दिया गया और यह राममोहन से राजा राम मोहन राय के नाम से जाने जाने लगे .

राजा राम मोहन राय के बोले हुए अनमोल वचन (Famous Quotes of Raja RamMohan Rai)

  • यह व्यापक विश्व ब्रमह का पवित्र मंदिर है , शुद्ध शास्त्र है , श्रद्धा का मूल है , प्रेम ही परम साधन है स्वार्थो का त्याग ही वैराग्य है .
  • प्रत्येक स्त्री को पुरुषो की तरह अधिकार प्राप्त हो , क्योकि स्त्री ही पुरुष की जननी है. हमें हर हाल में स्त्री का सम्मान करना चाहिए .

राजा राम मोहन राय का निधन (Death of Raja Ram Mohan Rai)

  • इन्हे 1830 में मुगल सम्राट द्वारा कुछ कार्य को सुनिश्चित करने के लिए इंग्लेंड भेजा गया . यात्रा के दौरान राममोहन राय को  मेनिंगजइटिस होने से 27 सितंबर 1833 में  इनकी मृत्यु हो गई . इन्हें इंग्लैंड के ब्रिस्टल में अनोर्स वेले कब्रिस्तान में दफनाया गया . इस प्रकार एक नए भारत के रचिता का स्वर्गवास हो गया, इनके सम्मान में ब्रिस्टल की सड़क को इनका नाम दिया गया है .

राजा राम मोहन राय ने हमें एक नया भारत सौपा है लेकिन आज समाज में महिलाओं की असुरक्षा को देख कर एसा लगता है दोबारा राजा राम मोहन राय को भारत की धरती पर जन्म  लेना होगा . हम इनके प्रशंसनीय कार्यो के लिए इन्हें नमन करते है और भावपूर्ण श्रधांजलि देते है .

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