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प्रणब मुख़र्जी का जीवन परिचय | Pranab Mukherjee Biography in Hindi

प्रणब मुख़र्जी का जीवन परिचय (Pranab Mukherjee Biography in Hindi)

प्रणब मुख़र्जी हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति हैं. जिन्हें साल 2019 में 70 वें गणतंत्र दिवस पर भारत के तत्कालिक राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद जी द्वारा भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया हैं. अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान इन्होने कई अहम फैसले लिए थे जिनके लिए ये प्रसिद्ध हुए. इन्होने अपने जीवन में किस तरह से उपलब्धि हासिल की यह जानकारी के लिए हमारे इस लेख को पढ़ें.

Pranab Mukherjee

जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र. म. (s. No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name) प्रणब कुमार मुख़र्जी
2. अन्य नाम (Nick Name) पोल्टू, प्रणब दा
3. पेशा (Profession) भारतीय राजनीतिज्ञ
4. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
5. जन्म (Birthdate) 11 दिसंबर, 1935
6. जन्म स्थान (Birth Place) मिराती, ब्रिटिश बंगाल, ब्रिटिश भारत
7. उम्र (Age) 83 साल
8. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
9. गृहनगर (Hometown) मिराती, पश्चिम बंगाल
10. धर्म (Religion) हिन्दू
11. जाति (Caste) बंगाली कुलीन ब्राह्मण
12. वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13. नेट वर्थ (Net Worth) 3 करोड़ भारतीय रूपये
14. पसंद (Hobbies) पढ़ना, गार्डनिंग करना और गाने सुनना
15. पसंदीदा राजनीतिज्ञ (Favourite Politician) डेंग क्सिओपिंग
16. राशि (Zodiac Sign / Sun Sign) धनु राशि
17. कद (Height) 5 फुट 4 इंच
18. वजन (Weight) 70 किलोग्राम
19. आँखों का रंग (Eye Colour) काला
20. बालों का रंग (Hair Colour) काला

 परिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)

प्रणब मुखर्जी एक बंगाली ब्राह्मण परिवार में जन्मे और पले बढ़े. इनका परिवार पश्चिम बंगाल में मिराती गाँव का रहने वाला है. इनके पिता भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रीय रूप से शामिल थे जिसके कारण वे उस दौरान कई बार जेल भी गए. आजादी के बाद सन 1952 से सन 1964 तक वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य थे, और साथ ही एआईसीसी के सदस्य भी थे. उनकी माता एक हाउसवाइफ के साथ – साथ भारतीय स्वतंत्रता सैनानी भी थीं. 

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शिक्षा (Education)

प्रणब मुखर्जी जी ने अपनी शुरूआती शिक्षा स्थानीय स्कूल से पूरी की, इसके बाद में कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए वे कलकत्ता गए. वहाँ उन्होंने सूरी (बीरभूम) में सूर्या विद्यासागर कॉलेज में हिस्सा लिया, और उसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय में शामिल हो गए. वहाँ से उन्होंने एलएलबी की डिग्री हासिल की. इसके प्रणव जी ने राजनीतिक विज्ञान और इतिहास में एमए भी किया. 

व्यक्तिगत जानकारी (Personal Life)

प्रणब मुखर्जी जी ने 13 जुलाई 1957 को सुव्रा मुखर्जी से शादी की. सुव्रा मुखर्जी का जन्म बांग्लादेश की नारेल में हुआ वहीं उनका शुरूआती जीवन भी व्यतीत हुआ. वे 10 साल की उम्र में कोलकाता चली गई और सन 1957 में प्रणब मुखर्जी जी से शादी कर ली. इनके 2 बेटे और 1 बेटी हुए. 74 साल की उम्र में सुव्रा का देहवसान हो गया. मुखर्जी जी के बड़े बेटे ने अपने पिता के नक्से कदम पर चलने का फैसला किया, और वे पश्चिम बंगाल राज्य के जंगीपुर से कांग्रेस के सांसद बन गये. उनके पिता यानि प्रणब मुखर्जी द्वारा अपनी सीट खाली करने के बाद, उपचुनावों में अभिनीत को इस पद के लिए चुना गया था. लोक सभा के चुनाव से पहले अभिजीत बीरभूम के नलहाटी से विधायक थे. मुखर्जी जी की बेटी शर्मिष्ठा कत्थक डांसर और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राजनीतिज्ञ हैं.

परिवार की जानकारी (Family Detail)

1. पिता का नाम (Father’s Name) कमादा किंकर मुख़र्जी
2. माता का नाम (Mother’s Name) राजलक्ष्मी मुख़र्जी
3. बहन का नाम (Sister’s Name) अन्नपूर्णा बनर्जी एवं अन्नानापुर्ना बंदापधाय
4. पत्नी का नाम (Wife’s Name) स्वर्गीय श्री मती सुव्रा मुख़र्जी
5. बेटी का नाम (Daughter’s Name) शर्मिस्ठा
6. बेटे का नाम (Son’s Name) अभिजीत मुख़र्जी एवं इंद्रजीत मुख़र्जी

प्रणव मुखर्जी करियर (Career)

  • मुखर्जी जी अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कलकत्ता में डिप्टी अकाउंटेंट – जनरल (पोस्ट एंड टेलीग्राफ) के कार्यालय में एक उच्च – स्तरीय क्लर्क के रूप में कार्यरत थे. इसके बाद सन 1963 में वे विद्यानगर कॉलेज में एक लेक्चरर (असिस्टेंट प्रोफेसर) थे, वे वहां राजनीतिक विज्ञान पढ़ाया करते थे. फिर बाद में वे एक पत्रकार के रूप में देशर डाक के साथ भी काम किया था.
  • मुखर्जी जी 4 दिन की पूजा में भाग लेने के लिए हर साल मिराती गाँव में अपने पैतृक घर जाते हैं. 4 अक्टूबर 2011 को एक पूजा के दौरान उन्होंने कहा कि – ‘वे इस अवसर का लाभ अपने क्षेत्र के लोगों के साथ उठाना चाहते हैं’.       

राजनीतिक करियर (Political Career)

  • मुखर्जी जी ने सन 1969 में राजनीति में कदम रखा, उस समय उन्होंने मिदनापुर उपचुनाव अभियान में हिस्सा लिया. उस समय भारत की प्रधानमंत्री रही इंदिरा गाँधी जी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल किया.
  • मुखर्जी जी ने राजनीति में अपने शुरूआती वर्षों के दौरान इसके बारे में उल्लेख भी किया है और साथ ही उन्होंने एक राजनीतिज्ञ के रूप में उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
  • मुखर्जी जी सन 1969 में राज्यसभा के सदस्य बने. इसके बाद वे धीरे – धीरे इंदिरा गाँधी जी के मंत्रीमंडल में रैंक में ऊपर उठने लगे. सन 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से उन्हें सदन के लिए चुना गया था.
  • सन 1979 में वे राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता बने, और सन 1980 में सदन के नेता नियुक्त किये गये थे.
  • इंदिरा गाँधी जी के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान मुखर्जी जी ने सन 1982 से सन 1984 तक वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया.
  • सन 1984 में इंदिरा गाँधी जी की हत्या हो जाने के बाद वे कांग्रेस पार्टी से बाहर हो गए. उस दौरान प्रधानमंत्री पद की कमान राजीव गाँधी जी ने संभाली थी.
  • सन 1991 में राजीव गाँधी जी की भी हत्या कर दी गई थी. उस समय पी वी नरसिम्हा राव भारत के प्रधानमंत्री बने. इन्हीं के कार्यकाल में प्रणब मुखर्जी जी दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए.
  • राव जी ने प्रणब जी को सन 1991 में भारतीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया. और उसके बाद वे केन्द्रीय कैबिनेट मंत्री बने. इस तरह से नरसिम्हा राव जी ने प्रणब मुखर्जी जी के राजनीतिक करियर को फिर से जीवित किया.
  • नरसिम्हा राव जी ने मुखर्जी जी को अपने कार्यकाल के दौरान अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया, और उन्हें विदेश मंत्री का कार्यभार सौंपा. मुखर्जी जी इस पद पर सन 1995 से 1996 तक कार्यरत थे.
  • मुखर्जी जी ने सन 2004 से सन 2012 तक संसद के निचले सदन के नेता के रूप में कार्य किया. इसलिए उनके पास कई वर्षों का कूटनीतिक अनुभव भी हैं.
  • मुखर्जी जी सन 1980 के दशक से सन 2012 तक आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ़्रीकी विकास बैंक के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में भी शामिल थे.
  • इसके अलावा मुखर्जी जी ने सन 1982, 1983 और 1984 में कामनवेल्थ वित्त मंत्रियों के सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था.

सरकारी कार्यलय (Government Offices)

मुखर्जी जी ने कई प्रमुख पदों पर कार्य किया, जिसके बारे में नीचे दर्शाया गया है–

  • रक्षा मंत्री के रूप में :- सन 2004 में कांग्रेस पार्टी फिर से सत्ता में आई उस दौरान भारत के प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी बने थे. इनके कार्यकाल में मुखर्जी जी ने रक्षा मंत्री का कार्यभार संभाला. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सहयोग को बढ़ावा दिया.
  • विदेश मंत्री के रूप में :- सन 2006 में मुखर्जी जी पुनः भारत के विदेश मंत्री बने. पहली बार वे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव जी के कार्यकाल के दौरान विदेश मंत्री बने थे. दूसरी बार विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रणब जी ने अमेरिकी सरकार के साथ असैनिक परमाणु समझौते पर सफल रूप से हस्ताक्षर किये थे और साथ ही साथ असैन्य परमाणु व्यापार में भाग लेने के लिए परमाणु सप्लायर्स समूह के साथ भी हस्ताक्षर किये. यह उनके द्वारा किया गया एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य था.
  • वाणिज्य मंत्री के रूप में :- मुखर्जी जी ने तीन बार भारत के वाणिज्य मंत्री के रूप में कार्य किया है. जब इंदिरा गाँधी जी सत्ता में थीं तब उनका इस पद के लिए पहला कार्यकाल सन 1980 – 82 तक रहा था और फिर सन 1984 में फिर से वे वाणिज्य मंत्री बने. सन 1990 के दशक में मुखर्जी जी ने तीसरी बार इस पद का कार्यभार संभाला था.
  • वित्त मंत्री के रूप में :- सन 2009 में प्रणब मुखर्जी जी भारत के दोबारा वित्त मंत्री नियुक्त किये गये थे. इस पद पर उन्होंने सन 2012 तक कार्य किया. इससे पहले सन 1980 के दशक की शुरुआत में वित्त मंत्री के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था सुधारक होने का श्रेय दिया गया था. अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने सन 2009, 2010 और सन 2011 में वार्षिक बजट प्रस्तुत किया. उन्होंने जवाहरलाल नेहरु राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन सहित कई सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए धन का विस्तार किया था.   
  • अन्य पद :- मुखर्जी जी कोलकाता में भारतीय स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट के अध्यक्ष थे. वे रबिन्द्र भारती विश्वविद्यालय और निखिल भारत बंगा साहित्य सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष और अध्यक्ष होने के साथ – साथ बंगीय साहित्य परिषद और बिधान मेमोरियल ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी भी हैं. उन्होंने एशिएटिक सोसाइटी के प्लानिंग बोर्ड में भी कार्य किया है.

इस तरह से मुखर्जी जी कांग्रेस पार्टी में रहते हुए कई सारे पद के लिए कार्य कर चुके हैं. इसके बाद उनका राष्ट्रपति के रूप में कार्यकाल आरम्भ हुआ.

भारत के राष्ट्रपति के रूप में (As a President of India)

मुखर्जी जी को सन 2012 में यूपीए सरकार द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के पद में नामित किया गया था. राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करने के लिए, मुखर्जी जी ने सरकारी कार्य से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने राष्ट्रपति के चुनाव में पी ए संगमा को हराते हुए आसानी से चुनाव जीता. और 25 जुलाई सन 2012 को भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की. सन 2013 को भारत के राष्ट्रपति के रूप में, उन्होंने आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश को लागू किया, जो यौन अपराधों से सम्बंधित कानून भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, और अपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 में संशोधित कर लागू किया गया था.  

प्रणब मुखर्जी द्वारा लिखी गई पुस्तकें (Books)

प्रणब मुखर्जी जी एक राजनेता और भारत के राष्ट्रपति होने के साथ ही साथ एक प्रसिद्ध लेखक भी हैं. और उन्होंने सन 1969 में ‘मिड – टर्म पोल’, सन 1984 में ‘बियॉन्ड सर्वाइवल – इमर्जिंग डाइमेंशन्स ऑफ़ इंडियन इकॉनमी’, सन 1987 में ‘ऑफ द ट्रैक’, 1992 में ‘सागा ऑफ़ स्ट्रगल एंड सैक्रिफाइस’ एवं ‘चैलेंजेज बिफोर द नेशन’ और सन 2014 में ‘द ड्रामेटिक डिकेड : द डेज ऑफ़ इंदिरा गाँधी इयर्स’ जैसी पुस्तकों का लेखन भी किया है.

उपलब्धियां (Awards and Achievements)

प्रणब मुखर्जी जी को साल 2019 में गणतंत्र दिवस के मौके पर ‘भारत रत्न’ पुरस्कार से नवाजा गया था. इससे पहले इनके द्वारा प्राप्त की गई उपलब्धियों की जानकारी इस प्रकार है –

  • प्रणब मुखर्जी जी को राष्ट्रीय पुरस्कार ‘भारत रत्न’ मिलने से पहले सन 2008 में ‘पद्मा श्री’ जैसे राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
  • प्रणब मुखर्जी जी को विदेश में भी सम्मान मिला है, इन्हें सन 2013 में बांग्लादेश की ओर से बांग्लादेश के दुसरे सर्वोच्च पुरस्कार ‘बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ऑनर’ सम्मान दिया गया था. इसके अलावा सन 2016 में आइवरी कोस्ट की ओर से ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ नेशनल ऑर्डर ऑफ़ द आइवरी कोस्ट’ से भी सम्मानित किया गया था.
  • युरोमनई पत्रिका के सर्वे के अनुसार, सन 1984 में मुखर्जी जी को विश्व के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री से सम्मानित किया गया था, और उसके बाद सन 1997 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ सांसद के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
  • सन 2010 में विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के लिए दैनिक समाचार पत्र ‘इमर्जिंग मार्केट्स’ द्वारा उन्हें एशिया के लिए वित्त मंत्री के रूप में नामित किया गया था.
  • सन 2011 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ वोल्वरहैंपटन ने उन्हें डॉ ऑफ़ लेटर्स डिग्री से सम्मानित किया था.
  • मार्च 2012 में विश्वेस्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी और असम विश्वविद्यालय ने उन्हें आनररी डी लिट पुरस्कार से नवाजा गया.
  • मार्च 2013 में ढाका विश्वविद्यालय में, मुखर्जी जी ने बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद जिल्लुर रहमान और डीयू चांसलर द्वारा कानून की डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त की.
  • मार्च 2013 में ही मॉरीशस विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टर ऑफ सिविल लॉ ऑनोरिस कॉसा के लिए शुभकामनायें दी थी.

प्रणब मुखर्जी के बारे में रोचक जानकारी (Interesting Facts)  

  • जब प्रणब मुखर्जी जी भारत के राष्ट्रपति बने तब उनके पास कुछ दया की याचिकाएं आई, जिनमें से उन्होंने 7 दया याचिकाओं को रद्द कर दिया था. इन दया याचिकाओं में कसाब जैसे आतंकवादी की याचिका भी शामिल थी.
  • पूर्व कम्युनिस्ट लीडर सोमनाथ चटर्जी ने मुखर्जी जी को ‘सर्वश्रेष्ठ सांसदों और भारत के स्टेट्समैन में से एक के रूप में नामित किया और यह कहा कि देश को सबसे टॉप जॉब के लिए सबसे सक्षम व्यक्ति मिला है.
  • राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान मुख़र्जी जी ने 7,13,763 वोट्स के साथ जीत हासिल की थी, जबकि उनके विरोधी संगमा जी को 3,15, 987 वोट्स मिले थे. और इस जीत के साथ वे पहले बंगाली थे जिन्होंने इस प्रतिष्ठित पद को धारण कर अपने नाम किया.
  • वे अपने जीवन के बारे में 40 वर्षों से एक डायरी लिख रहे हैं, जिसे उनके मरणोपरांत प्रकाशित किया जायेगा.
  • सन 1986 में, मुख़र्जी जी ने पश्चिम बंगाल में एक अन्य पार्टी राष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस (आरएससी) स्थापित की थी, जोकि बाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के साथ जुड़ गई.  

प्रणव मुखर्जी जी भारत देश की एक ऐसी शख्सियत हैं जिनके द्वारा किये गये कार्य को लोग हमेशा याद रखेंगे. प्रणव मुखर्जी द्वारा किये गए कार्यों के चलते ही उन्हें सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

Other Links:

  1. आधुनिक भारत का इतिहास | रॉलेट एक्ट क्या था
  2. एनी बेसेंट का जीवन परिचय 

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