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मोतीलाल नेहरु का जीवन परिचय | Motilal Nehru Biography in Hindi

मोतीलाल नेहरु का जीवन परिचय ( Motilal Nehru Birth,Caste,Education, Political carrer, Death, Biography in Hindi)

मोतीलाल नेहरु भारत देश के बड़े नेताओं मे से एक थे. यह नेता होने के साथ देश के बड़े वकील थे उस समय बहुत कम लोग पढ़ाई करते थे और इतनी आगे जाते थे. जब उन्होने देश की स्थिति देखी तो उन्होंने अपनी वकालत छोड़ने का फैसला लिया और राजनीति मे घुस गये और देश के हालत सुधारने मे जुट गये.

Moti Lal Nehru

मोतीलाल नेहरु जी का जन्म तथा शिक्षा की जानकारी (Life And Education Information of Motilal Nehru)  

नेहरू जी का जन्म आगरा मे 6 मई 1861 मे हुआ था. इनके जन्म से तीन महीने पहले ही फरवरी 1961 मे इनके पिता का निधन हो चूका था इनको इनके बड़े भाई नन्दलाल ने रखा तथा उनकी शिक्षा पूरी कराई. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा कानपुर से हुई यहाँ से इन्होंने मैट्रिक पास किया. इसके बाद इन्होंने इलाहाबाद के मुइर सेंट्रल कॉलेज से बीए मे दाखिला लिया पर बीए के अंतिम वर्ष मे उन्होंने अपनी आखरी परीक्षा नही दी. सन् 1883 मे इन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की तथा उसमे अच्छे अंको से पास हुए और वकील बन गये. इन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पश्चिमी शैली मे करी. इनको हिन्दी के साथ अंग्रेजी, अरबी तथा फारसी भाषा का भी ज्ञान था. उस समय पश्चिमी सभ्यता से पढ़ाई करने वाली यह पहली पीढ़ी थी.  

नाम (Name)मोतीलाल नेहरु
पूरा नाम (Full Name)पंडित मोतीलाल नेहरु
जन्म तारीख(Date of birth)6 मई 1861
जन्म स्थान(Birth Place)आगरा (उत्तरप्रदेश)
उम्र( Age) 70 साल
मृत्यु (Died)6 फरवरी 1931
मृत्यु स्थान (Death Place)लखनऊ (उत्तरप्रदेश)
पता (Address)स्वराज भवन, इलाहाबाद
कॉलेज(College)कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय
शिक्षा (Educational Qualification)वकालत (LL.B)
भाषा(Languages)हिंदी , इंग्लिश
पेशा( Profession)वकील, नेता
नागरिकता(Nationality)इंडियन
धर्म(Religion)हिन्दू
जाति(Caste)कश्मीरी ब्राह्मण
खास दोस्त (Best

 Friend’s)

चित्तरंजन दास
मुख्य पार्टी (Major Team)कांगेस
दिलचस्पी (Hobbies)किताबे पढ़ना

 मोतीलाल नेहरु की पारिवारिक जानकारी (Family Information of Motilal Nehru)-

यह कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थे, इनके पिता पेशे से एक कोतवाल थे. इनके घर मे इनसे बड़े दो भाई तथा दो बहने थी, इनके सबसे बड़े भाई ब्रिटीश सरकार के न्यायिक विभाग मे कार्यरत थे. तथा दूसरे भाई राजपूताना मे खेत्री राज्य के दीवान के तौर पर नियुक्त थे. इनके पिता गंगाधर ने अपनी दोनों बेटियों  पटरानी तथा महारानी का विवाह समय के साथ कश्मीरी ब्राह्मण लड़कों से कर दिया था. इनका विवाह रूपरानी नाम की कन्या से हुआ, इनके तीन बच्चे थे दो बेटियां तथा एक बेटा, जों बाद में, स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने.

पिता का नाम (Father’s Name)गंगाधर नेहरु
माता का नाम(Mother’s Name)जीवरानी नेहरु
भाई (Brother)दो भाई (बड़े भाई)
1)    बंसीधर
2)    नन्दलाल
बहन (Sister)दो बहन – (बड़ी बहने)
1)    पटरानी
2)    महारानी
मेरिटल स्टेट्स(RelationshipStatus)मेरिड
पत्नी (Wife)स्वरूपरानी नेहरु
बच्चे (Children’s)तीन
बेटी (Daughter)दो
1)    विजयालक्ष्मी पंडित
2)    कृष्णा नेहरु
बेटे (Son)एक
1)    जवाहरलाल नेहरु

 मोतीलाल नेहरु का करियर(Career of Motilal Nehru)-

  • इन्होंने शुरुआती दौर मे थोडा संघर्ष किया पर जब एक बार इनकी वकालत जम गई उसके बाद इनके ठाटबाट कुछ और ही थे इन्होंने बहुत कम उम्र मे सफलता हासिल कर ली थी. सन् 1909 मे ये ग्रेट ब्रिटेन की प्रिवी काउन्सिल मे सम्मिलित हुए उसके बाद इनका करियर सातवें आसमान पर था तथा कई बार यह यूरोप गये.
  • इन्होने सन् 1910 मे पहला चुनाव लड़ा था यह चुनाव विधानसभा का था जिसमे यह खड़े हुए और पहले ही चुनाव मे जीत हासिल की थी.
  • सन् 1919 की बात थी जब महात्मा गांधी के कहने पर इन्होंने राजनीति मे सक्रिय रहना चालू किया जिसके चलते यह अपना ज्यादा से ज्यादा समय गांधीजी के साथ बिताने लगे जब इनको विदेशीयों की सच्चाई का पता लगा तब इन्होंने उनके लिये काम करना छोड़ दिया तथा अपने देश के लिये काम करने लगे.
  • इन्होंने जब जलियांवाला बाग की घटना देखी तब उनकी रूह काप गई तथा उन्होंने अपनी वकालत को पूरी तरह से छोड़ कर भारत की स्वतंत्रता पर ध्यान दिया. जलियांवाला बाग की घटना इतनी बड़ी थी की इसकी जाँच जरुरी हो गई थी इसमें ब्रिटिश सरकार ने स्वयं जाँच करी जिसका काँग्रेस ने विरोध किया तथा उन्होंने स्वयं की जाँच समिति बनाई जिसमे महात्मागांधी ने अपने साथ मुख्य रूप से चितरंजनदास तथा मोतीलाल नेहरु तथा अन्य सदस्यों को रखा. जाँच के बाद ब्रिटिश सरकार की सच्चाई सामने आई तथा इनको ब्रिटिश सरकार से और नफरत होने लगी जिसके चलते इन्होंने सारी विदेशी वस्तुओं का त्याग कर दिया तथा स्वदेशी वस्तुओं का अपनाना चालू किया गाँधी जी के साथ रहकर यह वस्त्र भी खादी के पहनने लगे थे.
  • सन् 1919 से सन् 1929 तक दस वर्ष तक इन्होंने काँग्रेस का अध्यक्ष पद संभाला.
  • सन् 1927,साइमन कमीशन की नियुक्ति के बाद इनको पहली बार आजाद भारत के संविधान का खाका(प्रारूप) बनाने को कहा गया. बाद मे यह स्वराज पार्टी से जुड़े तथा उसके लिये काम किया. स्वराज पार्टी मे इनको सबसे पहले सचिव का तथा कुछ समय बाद अध्यक्ष का पद प्राप्त हुआ. अब इन्होंने गांधीजी के साथ मिलकर भारत के बड़े क्रांतिकारी नेताओं को इक्कट्ठा कर भारत की स्वतंत्रता का बिगुल छेड दिया था. कांग्रेस ने सभी नेताओं की आजादी की मांग करी जिसके चलते कई अन्दोलन हुए, सन् 1930 मे इनको जेल भी जाना पड़ा. सरोजिनी नायडू के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े। 

मोतीलाल नेहरु के जीवन की दिलचस्प बाते (Interesting Facts Of Motilal Nehru’s Life)

  • इनके बड़े भाई नन्दलाल जी ने इनका पालनपोषण किया उनकी भी सन् 1887 मे मृत्यु हो गई उनके परिवार की जिम्मेदारी इन्होंने उठाई उनके सात बच्चों को इन्होंने अपने साथ रखा, इस समय यह अपना घर चलाने वाले एक मात्र व्यक्ति बचे थे.
  • प्रारम्भ से पश्चिमी शैली मे पढ़ना, उसके बाद यूरोप आना-जाना विदेशी लोगों के साथ उठाना-बैठना, इन सबके चलते उन्होंने ने भी विदेशीयों की सभ्यता और संस्कृति को अपना लिया था. यहाँ तक की इन्होंने अपने घर मे हर विलासिता की चीज रखी थी तथा अपने आवास का नाम इन्होंने “आनंद भवन” रखा था.  इंदिरा गाँधी के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े 
  • सन् 1916 मे इनकी सहायता के लिये इनके बेटे जवाहरलाल नेहरु ने राजनीति मे सक्रियता दिखाई तथा अपने पिता के पद चिन्हों पर चलकर काँग्रेस पार्टी मे पद संभाला और आजादी के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने. लाला लाजपत राय के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े। 

मोतीलाल नेहरु की मृत्यु (Death oF Motilal Nehru) सन् 1930 मे जब यह जेल गये तब वहा इनकी तबीयत बिगड़ गई जिसके चलते इनको जेल से सन् 1931 मे रिहा कर दिया गया पर इनके स्वास्थय  मे कोई सुधार नही हुआ. 6 फरवरी 1941 को उत्तरप्रदेश के एक शहर लखनऊ मे इनकी मृत्यु हो गई.  

मोतीलाल नेहरु के नाम पर धरोहर (Heritage based on Motilal Nehru’s Name) – यह एक बहुत बड़ी शख्सियत थी, जिनके नाम पर कई संस्था, विश्वविद्यालय, तथा कई किताबे निकाली गई थी. इनके नाम पर बड़े विधि महाविद्यालय खोले गये उनमे से एक मध्यप्रदेश के खंडवा मे मोतीलाल नेहरु विधि महाविद्यालय भी है.

 एक वकील की हैसियत से अपने जीवन की शुरुआत कर अपने देश के एक बड़े नेता बने तथा देश को अंग्रेजों के चुंगुल से छुडाया तथा आजादी के लिये हर सार्थक प्रयास किया.

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