मदर टेरेसा का जीवन परिचय | Mother Teresa Biography in Hindi

मदर टेरेसा का जीवन परिचय (Mother Teresa Biography in Hindi)

मदर टेरेसा एक रोमन कैथोलिक नर्स थी जिन्होंने अपना जीवन गरीब और जरुरतमंदों की मदद को समर्पित कर दिया. उन्होंने मिशनरी की स्थापना, जरुरतमंदो की मदद एवं धर्म के प्रचार-प्रसार का कार्य किया, जिसके कारण वो दया करुणा और ममता का प्रतीक मानी जाती हैं.

Mother Teresa

परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
पूरा नाम (Full Name) एनेजे गोनक्सा बोजाक्सजू
जन्म दिन (Birth Date) 26 अगस्त, 1910
जन्म स्थान (Birth Place) रिपब्लिक मेक्डोनिया की राजधानी
पेशा (Profession) नर्स एवं समाज सेवा
राष्ट्रीयता (Nationality) ओटोमन (ottoman), भारतीय, युगोस्लोवोकीयन
उम्र (Age) 87 वर्ष
मृत्यु 5 सितम्बर 1997
गृहनगर (Hometown) स्कोप्जे (Skopje)
धर्म (Religion) ईसाई
जाति (Caste) ईसाई
वैवाहिक स्थिति (Marital Status) अविवाहित
राशि (Zodiac Sign) कन्या

 मदर टेरेसा का प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा  (Mother Teresa’s Early life and Education)

  • मदर टेरेसा के जन्म का नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू (Anjezë (Agnes) Gonxha Bojaxhiu) था. उनका जन्म अल्बेनियन परिवार में हुआ था. वो अपने परिवार में सबसे छोटी थी. उनके पिता निकोला बोजाक्स्जू कंस्ट्रकटर, कांट्रेक्टर और ट्रेडर का काम करते थे जबकि उनकी माता ग्जाकोवा (Gjakova) के पास गाँव से की थी.
  • मदर टेरेसा का पूरा परिवार कैथोलिक था और उनके पिता अल्बेनियन स्वतंत्रता के समर्थक थे. टेरेसा जब मात्र 8 वर्ष की थी तब निकोला बीमार हो गए और 1919 में उनकी मृत्यु हो गयी. उनके मां चेरिटी के कामों में सक्रिय धार्मिक महिला थी और वो अपनी मां से काफी प्रभावित थी
  • युवावस्था में ही अगनेस को संत जीवन प्रभावित करने लगा था, उन्होंने अपनी शिक्षा कान्वेंट संचालित स्कूल में शुरू कर दी थी और चर्च में लोकल सेक्रेड हार्ट क्वायर (local Sacred Heart choir) को ज्वाइन कर लिया था. उन्होंने जब कैथोलिक मिशनरी की कहानियां सुनी और तब ही उन्होंने मानवता की भलाई के लिए कार्य करने का निश्चय किया.
  • 12 वर्ष की उम्र में उन्हें समझ आया कि उन्हें आगे जाकर यही करना हैं. उन्होंने बहुत से कैथोलिक चर्च की धार्मिक यात्राएं की और विशेषकर ब्लैक मेडोना के श्राइन विटिना लेट्निस (shrine of the Black Madonna of Vitina-Letnice) के कारण उनके विचारों को संबल मिला.
  • उन्होंने मिशनरी के संत सेंट थेरेसे ऑफ़ लिजियुक्स (St Therese of Lisieux) को आदर्श मानते हुए 1931 में अपना नाम बदलकर टेरेसा रख लिया.

मदर टेरेसा का परिवार और निजी जानकारी (Mother Teresa’s Family and Personal Information) 

पिता (Father) निकोला बोजक्श्यु (Nikola Bojaxhiu)
माता (Mother) ड्रानाफ़ाइल् बोजक्श्यु (Dranafile Bojaxhiu)
भाई (Brother) लेजर बोजक्षियु  (Lazar Bojaxhiu)
बहिन (Sister) आगा बोजाक्शियु (Aga Bojaxhiu)

संत जीवन में प्रवेश (Induction into Monastic Life)

1928 में टेरेसा ने स्कोप्जे (Skopje) छोड़ दिया और आयरलैंड के लोरेटो ऐबीके (Loreto Abbey) राथ्फर्न्हम (Rathfarnham)में ब्लेस्ड वर्जिन मेरी का इंस्टिट्यूट जॉइन कर लिया, जिसे सिस्टर ऑफ़ लोरेटो के नाम से जाना जाता था. वहां टेरेसा ने नन के काम शुरू किये और उन्हें संत थेरेसे ऑफ़ लिजिक्स (Saint Therese of Lisieux) के सम्मान में सिस्टर मेरी टेरेसा का नाम दिया गया, आयरलैंड के कैपिटल डबलिन में 6 महीने की ट्रेनिंग के बाद उन्हें भारत में दार्जलिंग भेज दिया गया.

मदर टेरेसा का भारत में जीवन (Mother Teresa’s Life in India)

  • भारत पहुँचने पर उन्होंने शिक्षिका के तौर पर कार्य करना शुरू किया. कोलकाता में फैली गरीबी ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया और इस कारण ही उन्होंने “दी मिशनरी ऑफ़ चेरिटी” भी शुरू किया. इस मिशन का पहला उद्देश्य उन लोगों की देखभाल करना था जिनकी और कोई नहीं करता. मदर टेरेसा ने जीसस क्राइस्ट के अन्य मूलभूत सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार भी शुरू किया.
  • उन्होंने भारतीय परिधान आसमानी बॉर्डर वाली सफेद साडी पहनना शुरू किया. बहुत सालों तक मदर टेरेसा और उनके साथ की नन ने बहुत कम पैसो और भोजन पर जीवन यापन किया था, वो चंदा एकत्र करती थी, और धीमे-धीमे उनक गरीबों के लिए जाने वाला सेवा कार्य समाज और राजनेताओं की नजरों में आने लगा उन्हें अधिकाधिक सहायता मिलने लगी.
  • हालांकि मदर टेरेसा सेंट मेरी में बच्चों को पढ़ाते और उन्हें दिशा देती हुयी काफी खुश थी और अपने काम का पूरा लुत्फ़ उठा रही थी, लेकिन आस-पास फैली दरिद्री उनका मन विचलित कर देती थी. 24 मई 1931 को उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय कार्य शरू किया, यही पर उन्हें मदर का टाइटल मिला और उन्हें मदर टेरेसा के नाम से पहचाना जाने लगा.
  • 1943 में बंगाल में पड़े अकाल ने उन्हें भीतर तक प्रभावित किया इसके बाद 1946 में हिन्दू-मुस्लिम दंगों के दौरान हुयी हिंसा के कारण होने वाली सामाजिक तबाही ने भी उन्हें बेहद विचलित किया और इन दोनों ही घटनाओं ने टेरेसा को प्रेरित किया कि वो अपना जीवन गरीबों के हितों की रक्षा और उनकी सेवा में पूरी तरह समर्पित कर दे.
  • 10 सितम्बर 1946 को जब टेरेसा कान्वेंट के वार्षिक समारोह के लिए दार्जलिंग की यात्रा कर रही थी तब उन्हें अपनी अंदर की आवाज़ सुनाई दी थी, उन्होंने महसूस किया कि स्वयं जीसस उनसे कह रहे हैं कि उन्हें समाज की सेवा करनी चाहिए और भगवान की इसी प्रेरणा के कारण मदर टेरेसा ने 17 अगस्त 1947 को कान्वेंट छोड़ दिया.

मदर टेरेसा और मिशनरी (Mother Teresa and Missionaries)

  • 7 अक्टूबर 1950 से कलकता में वेटिकन की पहचान के साथ चेरिटी की मिशनरी शुरू हुयी थी. मदर टेरेसा और उनकी मिशनरी का एक ही उद्देश्य था कि गरीबों, बेघरों, अंधों और नि:शक्तों को खाना खिलाना और वो सभी लोग जो बेचारे हैं, जिनका समाज में यथोचित स्थान नहीं हैं जिन्हें देखभाल की आवश्यकता हैं. समाज के हर पिछड़े वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना ही इस मिशनरी का उद्देश्य था.
  • 1952 में उन्होंने मरणासन्न लोगों के लिए पहला घर बनाया जिससे उन्हें सम्मानजनक मृत्यु मिल सके. इस तरह कालीघाट में “निर्मल ह्रदय” की शुरुआत हुयी जहां पर मरते लोगों की देखभाल की जाती थी, और उन्हें मरने से पहले यथोचित सम्मान दिया जाता और देखभाल की जाती थी, इसके बाद मदर टेरेसा ने शान्ति नगर की स्थापना की जहां पर कुष्ठ रोगियों की सेवा कार्य किया जाता था.
  • उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया और पटना के होली फेमिली से मेडिकल ट्रेनिंग ली, अगले कुछ वर्षों तक उन्होंने घर-घर जाकर आर्थिक सहायता और खाना मांगने का कार्य किया, उससे मिलने वाली राशि में से टेरेसा बहुत कम अपने लिए रखती थी और ज्यादा तो वो अपने आस-पास के लोगों की मदद में खर्च कर देती थी. धीमे-धीमे उनके निस्वार्थ प्रयासों को पहचान मिली और उन्हें विविध स्त्रोतों से सहायता मिलने लगी.
  • 1955 में उन्होंने अनाथों के लिए अनाथालय की शुरुआत की और 1960 में चेरिटी और मिशनरी को पूरे भारत में फैलाना शुरू कर दिया.
  • 1965 में पॉप पॉल vi ने उन्हें डिक्री (Decree) दी और उन्हें प्रेरित किया कि वो अन्य देशों में भी अपने कार्यों का प्रचार-प्रसार करे और इस तरह ये सोसायटी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक परिवार बन गयी. इस डिक्री का अनुसरण करते हुए मिशनरी ऑफ़ चेरिटी ने बहुत से देशों में अपना कार्य फैलाया और वेनेज्युएला से शुरू करके ईस्ट अफ्रीका, नार्थ यूरोप और साउथ अमेरिका तक अपना कार्य-क्षेत्र को विस्तार दिया.
  • संस्था को मजबूत करने के लिए और अंतर्राष्ट्रीय बंधुत्व की भावना बताने के लिए मदर टेरेसा ने कुछ संस्थाएं शुरू की उन्होंने 1963 में भाइयों के लिए “मिशनरी ऑफ़ चेरिटी” जबकि 1976 में बहिनों के लिए एक शाखा प्रारम्भ की और 1979 में भाइयों के लिए भी एक समकालीन शाखा प्रारम्भ की.
  • आज मिशनरी ऑफ़ चेरिटी में 4000 नन हैं, और संस्था ने अपना कार्य 100 देशों में फैला लिया हैं. इस मिशनरी का उद्देश्य बीमार, बुजुर्ग,कमजोर एवं निशक्त लोगों तक सहायता पहुंचाना हैं. मिशनरी ने कलकता में गली के बच्चों को मिलाकर कुल 20 घर खोल लिए हैं. इस तरह उनका काम पूरी दुनिया में फैला, 2013 तक 130 देशों तक उनके 700 मिशनरी फ़ैल गए. उनका कार्यक्षेत्र भी भयंकर बीमारी वाले अनाथ बच्चों तक बढ़ गया. चेरिटी और मिशनरी की अब पूरी दुनिया में शाखाएं हैं. जिनमे वो बेघरों से लेकर एड्स से प्रभावित लोगों के लिए भी काम करते हैं. मदर टेरेसा किसी भी दूसरे के मत या विशवास को प्रभावित नहीं करती थी, उनकी सेवा में रहने वाले सभी लोगों धार्मिक स्वतंत्रता थी. हालांकि वो कैथोलिक विश्वास वाली महिला थी और गर्भपात, मृत्यु दंड एवं तलाक पर का उन्होंने कड़ा विरोध किया था तब भी जब वो इतनी प्रसिद्ध नहीं थी. उनका पूरा जीवन धर्म और विशवास पर टिका था, यहाँ तक कि उन्होंने खुद माना था उन्हें भगवान पर विशवास नहीं हैं.

मृत्यु (Death)                                              

1980 के बाद से मदर टेरेसा को स्वास्थ्य और हृदय सम्बंधित समस्या रहने लगी. अपनी स्वास्थ सम्बन्धित समस्याओं के साथ भी मदर टेरेसा मिशनरी के चेरिटी कार्यों और इसकी शाखाओं को पहले की तरह सम्भालती रही थी. अप्रैल 1996 मदर टेरेसा के गिरने से कोलर बोन टूट गयी, इसके बाद मदर टेरेसा का स्वास्थ तेजी से गिरने लगा और 5 सितमबर 1997 को उनका देहांत हो गया.  

अवार्ड्स और पहचान (Awards and Recognition)

  • 1960 में मदर टेरेसा का जीवन सबकी नजरों में तब आया था जब मेकलोम मगेरिज (Malcolm Muggeridge) ने एक किताब लिखी और डोक्युमेंट्री बनाई इसका नाम “समथिंग ब्यूटीफुल फॉर गॉड” था.
  • भारत में मदर टेरेसा को सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें बहुत से अवार्ड्स और सम्मान मिले. उन्हें 1962 में पद्मश्री से जबकि 1980 में भारत रत्न से सम्मानित किया.
  • मदर टेरेसा को साउथ-ईस्ट एशिया में शान्ति और अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना के लिए 1962 में मेग्नेसेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया. उन्हें 1979 में नोबेल पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था लेकिन उन्होंने इसके कार्यक्रम में शामिल होने से मना कर दिया और कार्यक्रम की राशि को दान करने का आग्रह किया. उन्हें यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे कई देशों से नागरिक सम्मान दिया था. रोमन कैथोलिक चर्च ने 1979 में उन्हें पहला पॉप जॉन XXIIII पीस प्राइज से सम्मानित किया.  
वर्ष (Year) पुरूस्कार (Awards)
1971 पहला पॉप जॉन XXIII शांति पुरूस्कार
1971 केनेडी पुरुस्कार
1972 शान्ति और सद्भावना के प्रचार के लिए नेहरु पुरुस्कार
1975 अल्बर्ट श्वेइत्जर (Albert Schweitzer) इंटरनेशनल पुरुस्कार
1979 नोबेल शांति पुरुस्कार
1985 फ्रीडम के लिए स्टेट्स प्रेजिडेंशियल मेडल
1994 कांग्रेशनल गोल्ड मेडल (Congressional Gold Medal)
1994  यू थांत पीस अवार्ड (U Thant Peace Award)
16 नवंबर 1996 औनोरेरी सिटीजनशिप ऑफ़ दी यूनाइटेड स्टेट्स (Honorary citizenship of the United States)

विवाद (Controversies)

  • मदर टेरेसा का जीवन जितना गरीबों के लिए समर्पित और करुनामयी रहा उतना पर्याप्त हैं कि कोई भी उनसे प्रभावित हो जाए, फिर भी मदर टेरेसा से सम्बंध में काफी विवादित तथ्य सामने आते रहे हैं.
  • मदर टेरेसा को अपने मानवाधिकारों एजेंसी के लिए काफी आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि उन्होंने गर्भपात और गर्भ-निरोध का विरोध किया था.  उन पर कुछ ऐसे आरोप भी लगे थे कि वो मरते हुए लोगों का पूरा ध्यान नहीं रखती और उन्हें दर्द निवारक समाधान उपलब्ध नहीं करवाती है. जबकि  उन्हें मिलियन डॉलर का चंदा इसी उद्देश्य के लिए मिलता हैं.  

केननाइजेशन (Canonization)

  • मदर टेरेसा के देहांत के बाद उनके केननाइजेशन की प्रक्रिया पॉप जॉन पॉल द्वितीय द्वारा पूरी की गयी. इस प्रक्रिया के लिए ये अनिवार्य हैं कि संत के चमत्कार का कोई प्रमाण हो. वेटिकन ने मोनिका बेसरा के उस केस को उनके चमत्कारी होने के प्रमाण के रूप में माना जिसमें मदर टेरेसा की चित्र के लॉकेट से उसका एब्डोमिनल ट्यूमर ठीक हो गया था. 2002 में पॉप जॉन पॉल द्वितीय ने मदर के अंतिम केननाइजेशन को मान्य किया था.
  • 19 अक्टूबर 2003 को पॉप ने मदर को सेंट पीटर के स्क्वेयर में बहुत से अनुयायियों के सामने अंतिम संस्कार किया. 2015 में उनका दूसरा चमत्कार तब स्वीकार किया गया जब एक ब्राजीलियन आदमी ने उनके कारण ब्रेन ट्यूमर ठीक होने की बात को स्वीकारा,इसके बाद पॉप फ्रांसिस ने 4 सितम्बर 2016 को मदर टेरेसा की सेंट पीटर स्क्वेयर की केननाइजड (canonised) सेरेमनी की और उन्हें कलकता में संत टेरेसा के नाम से जाना जाने लगा.

     मदर टेरेसा को उनके मानवीय सद्भवाना और सहिष्णुता जैसे  गुणों के कारण पहचाना जाता हैं उनका मानना था कि हम बड़े और महान कार्य नहीं कर सकते लेकिन छोटे-छोटे काम स्नेह के साथ कर सकते हैं और उनका यही संदेश जीवन का आधार बन सकता हैं. उन्होंने बच्चों को पढ़ाने और समाज के उत्थान में बहुत कार्य किए. मदर टेरेसा ने ना केवल एक बड़ी संस्था बनाई बल्कि उन्होंने अपने दृष्टिकोण से समाज के पिछड़े वर्ग का उत्थान किया और पूरे विश्व में इस कार्य हेतु ख्याति अर्जित की.

Other Links:

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