मनमोहन सिंह का जीवन परिचय | Manmohan Singh Biography in Hindi

मनमोहन सिंह का जीवन परिचय (Manmohan Singh Biography in Hindi)

मनमोहन सिंह भारत देश के पूर्व प्रधानमंत्री, एक अर्थशास्त्री और राजनेता के रूप में जाने जाते है. मनमोहन जी ने भारत देश की वित्तीय व्यवस्था को सुधारने के लिए अनेक कार्य किये, उन्हें देश का वास्तुकार भी कहा जाता है. जिस समय मनमोहन जी भारत देश की राजनीती में उतरे थे, और उनके हाथ में अधिकार आये थे, उस समय भारत देश की अर्थव्यवस्था बहुत ख़राब थी, देश आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. मनमोहन जी ने एक अर्थशास्त्री के रूप में इसके सुधार के लिए अहम भूमिका निभाई थी. सिंह जी ने लगातर 10 साल प्रधानमंत्री के पद में रहते हुए देश की सेवा की है. आज हम मनमोहन सिंह जी के परिवार, करियर, राजनैतिक सफ़र के बारे में करीब से जानेंगें.

Manmohan Singh

  परिचय बिंदु परिचय
1 पूरा नाम (Full Name) मनमोहन सिंह
2 जन्मतिथि (Date of Birth) 26 सितम्बर 1932
3 उम्र (Age) 86
4 जन्मस्थान (Birth Place) गाह, पंजाब, पाकिस्तान
5 धर्म (Religion) सिख्य
6 जाति (Caste) सिख्य
7 राशि (Sign) तुला
8 रहवासी (Hometown) अमृतसर
9 काम (Profession) राजनेता, अर्थशास्त्री
10 राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
11 राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
12 वैवाहिक स्थिति (Merital Status) वैवाहिक
13 आय (Net Worth) $100 मिलियन (अप्रैल 2017)

मनमोहन सिंह का प्रारंभिक जीवन (Manmohan Singh Early life, Birth, Education, Family)

जन्म – सिख परिवार में मनमोहन जी का जन्म ब्रिटिश भारत के समय पंजाब (अभी पाकिस्तान में है) के चकवाल जिले के गह गाँव में हुआ था. मनमोहन जी ने बहुत छोटी उम्र में ही अपनी माँ को खो दिया था, जिसके बाद उनको बड़ा उनकी दादी ने किया. मनमोहन जी के लिए उनकी दादी ही माँ के सामान थी. 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद सिख परिवार होने की वजह से मनमोहन सिंह के परिवार को गह छोड़कर भारत आना पड़ा था, क्यूंकि वो हिस्सा पाकिस्तान के हिस्से में गया था. भारत आने के बाद सिंह परिवार पंजाब के अमृतसर में बस गया था.

शिक्षा –

  • मनमोहन जी को शिक्षा से बहुत लगाव था, उनकी पढ़ने में गहन रूचि थी. उन्होंने पहले अमृतसर के हिन्दू कॉलेज फिर होशियारपुर के पंजाब युनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की थी.
  • 1952 में मनमोहन जी ने अर्थशास्त्र विषय में ग्रेजुएशन पूरा किया, फिर 1954 में पोस्ट ग्रेजुएशन की भी डिग्री हासिल की. मनमोहन जी अपने विद्यार्थी जीवन में हमेशा अच्छे नंबर लाकर अव्वल आते थे.
  • आगे की पढाई के लिए मनमोहन जी ने भारत से बाहर का रुख किया. अर्थशास्त्र में ऑनर्स की डिग्री प्राप्त करने के लिए सिंह जी ने इंग्लैंड के कैंब्रिज युनिवर्सिटी का रुख किया. यह डिग्री उन्होंने 1957 में प्राप्त की थी.
  • इंग्लैंड से वापस आने के बाद मनमोहन जी ने 3 सालों तक प्रोफ़ेसर के रूप में पंजाब युनिवर्सिटी में काम किया था.
  • मनमोहन जी को अभी आगे और पढाई करनी थी, जिसके लिए वे 1960 में इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड युनिवर्सिटी गए. यहाँ उन्होंने न्यूफील्ड कॉलेज में दाखिला लिया. यहाँ से उन्होंने डी फिल की डिग्री हासिल की थी.

मनमोहन सिंह परिवार की जानकारी (Manmohan Singh Family Details)

साल 1932 में 26 सितंबर के दिन गुरमुख सिंह और अमृत कौर के यहाँ पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई. इनके जन्म के वक़्त इनके माता पिता को क्या पता होगा कि उनका यह पुत्र उन्हे भारत में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में पहचान दिलाएगा. साल 1958 वह साल था जब श्री सिंह के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आया और इनका विवाह गुरुशरण कौर जी के साथ हुआ. मनमोहन जी और उनकी पत्नी का कोई पुत्र नहीं है, परंतु इनकी बेटियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कर्ष प्रदर्शन कर इनका नाम बहुत रोशन किया है. इनकी एक पुत्री मानव अधिकार के क्षेत्र में वकील है, तो दूसरी लेखक, इनकी तीसरी पुत्री दिल्ली विशावविद्यालय में इतिहास की प्रोफेसर है और  इसी के साथ ये एक लेखक भी है.   

पिता का नाम गुरुमुख सिंह
माता का नाम अमृत कौर
पत्नी का नाम गुरशरण कौर
शादी की तारीख 1958
बेटियां 1.     उपिन्दर सिंह

2.     दमन सिंह

3.     अमृत सिंह

मनमोहन सिंह करियर (Manmohan Singh Career details)

  • पढाई पूरी करके भारत आने के बाद मनमोहन जी ने 1966 में व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCTAD) ज्वाइन किया, यहाँ उन्होंने अगले तीन वर्षों तक काम किया था.
  • 1969 में सिंह जी ने फिर से प्रोफ़ेसर लाइन में वापसी की, और दिल्ली विश्वविद्यालय में 1971 तक कार्य किया था.
  • 1971 में इंदिरा गाँधी सरकार के समय ललित नारायण मिश्रा विदेश व्यापार मंत्रालय के मंत्री थे. एक बार जब वे कम सिलसिले में विदेश यात्रा में थे, तब फ्लाइट में उनकी मुलाकात मनमोहन सिंह जी से हुई. बातों के दौरान ललित नारायण मिश्रा जी ने सिंह जी की क्षमता को परख लिया था, मिश्रा जी पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने सिंह जी के अंदर भारत का भावी अर्थशास्त्री को देखा था. इसी के बाद मिश्रा जी ने उन्हें अपने सलाहकार के रूप में नियुक्त कर लिया था.
  • 1972 में मनमोहन जी को वित्त मंत्रालय में शामिल किया गया था, उस समय वित्त मंत्री यशवंतराव चावन थे. मंत्रालय के मुख्य सलाहकार के रूप में सिंह जी नियुक्त हुए.
  • मनमोहन जी अपने काम के प्रति बहुत सचेत रहते थे, वे पूरी लगन से अपना काम करते थे, जिस वजह से वे सभी बड़े नेताओं की नजर में आने लगे थे. वित्त मंत्रालय में सलाहकार के बाद 1976 में सिंह जी को इस मंत्रालय का मुख्य सचिव बना दिया गया था.
  • 1976 में ही सिंह जी को भारतीय रिजर्व बैंक में सेवा देने के लिए चुना गया. अगले चार सालों तक वे यहाँ डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे.
  • साल 1980 से लेकर साल 1982 तक मनमोहन जी योजना आयोग मे कार्यरत थे, इसके बाद साल 1982 से लेकर साल 1985 तक ये भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर पद पर आसीन रहे और वहाँ इन्होने अपनी सेवाए दी.
  • इसके बाद साल 1985 में श्री सिंह ने योजना आयोग के उपाध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला और फिर साल 1987 तक वे इस पद बने रहे और अपनी सेवाएँ देते रहे.
  • इसके बाद इन्होने साल 1987 से लेकर साल 1990 तक दक्षिण आयोग के महासचिव के रूप में कार्य किया. यह एक स्वतंत्र आर्थिक थिंक टेंक है जो जिनेवा स्विट्ज़रलैंड में स्थित है.
  • साल 1990 में श्री सिंह पुनः भारत लौटे और फिर इन्होने उस समय से तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार के रूप में कार्य किया. इसके बाद साल 1991 में ये यूनिवर्सिटि ग्रांट् कमिशन के अध्यक्ष बने.
  • इसके बाद साल 1991 में ही प्रधानमंत्री पी वी नरसिम्हा राव की सरकार में इन्हे भारतीय वित्त मंत्री का कार्यभार सौपा गया, और इसके बाद साल 1996 तक सतत इन्होने यह कार्य बखूबी संभाला.
  • साल 1998 से लेकर साल 2004 तक जब बीजेपी सत्ता मे थी, तब मनमोहन सिंह जी ने विरोधी पार्टी के लीडर के रूप मे प्रमुख भूमिका निभाई.
  • इसके बाद साल 2004 ने कॉंग्रेस ने गठबंधन के साथ सरकार बनाई और तब कांग्रेस प्रमुख श्रीमति सोनिया गांधी ने मनमोहन जी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया, और इस तरह ये इस वर्ष भारत के चौदहवे प्रधानमंत्री बने.
  • इसके बाद साल 2009 मे यूपीए पुनः सत्ता मे आने मे कामयाब रही और फिर एक बार मनमोहन जी भारत के प्रधानमंत्री बने. परंतु साल 2014 मे बीजेपी द्वारा यूपीए को भारी मतों से पछाड़ दी गई जिसके बाद मनमोहन जी को अपना प्रधानमंत्री पद त्यागना पड़ा.

मनमोहन जी के द्वारा किए गए मुख्य बदलाव (Major Changes Done By Manmohan Singh)-

  • एक भारतीय वित्त मंत्री के रूप मे मनमोहन जी प्रमुख आर्थिक सुधारों को करने मे सफल रहे, इन सुधारों के द्वारा ये उत्पादन की क्षमता को बढ़ाने और अर्थव्यवस्था का उदारीकरण करने में सफल रहे. इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था के धीमे आर्थिक विकास और भृष्टाचार के मूल कारण “लाइसेंस राज” को हटाने का श्रेय भी मनमोहन जी को जाता है.
  • प्रधानमंत्री के रूप में मनमोहन जी ने कई राष्ट्रीय मुद्दो जैसे अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, आतंकवाद और विदेशी मामलो के लिए काम किया. सिंह जी ने भारत में गरीबों की हालत में सुधार करने, पाकिस्तान के साथ चल रहे संघर्ष को दूर करने और विभिन्न भारतीय संप्रदाय के बीच सदभावना बनाए रखने के लिए कई काम किए.
  • मनमोहन जी के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान ही राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम और सूचना का अधिकार अधिनियम पारित किए गए. इन्होने यूएपीए में संशोधन के साथ आतंकवाद विरोधी कानून को मजबूत बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए और इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, यूनाइटेड किंग्डम, फ़्रांस और जर्मनी के साथ संबंधो को सुधारने के लिए भी मनमोहन सिंह जी का योगदान अहम था.

मनमोहन सिंह विवाद (Manmohan Singh’s Controversy) –

हर बड़ी शख्सियत के साथ कई विवाद भी जुड़े होते है, ठीक इसी तरह से मनमोहन जी और इनके राजनैतिक कैरियर के साथ भी कई विवाद जुड़े. परंतु इसके बाद भी आज विश्व के सभी अर्थशास्त्री इस बात को अच्छी तरह से समझते होंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधारने और उसे मजबूती प्रदान करने में मनमोहन जी का क्या योगदान है. मनमोहन जी के जीवन और राजनैतिक कैरियर से जुड़े विवाद निम्न है –

  • मनमोहन जी को अंतर्मुखी व्यक्तित्व और शांत स्वभाव के कारण अपने राजनैतिक कैरियर में कई विवादो का सामना करना पड़ा. सिंह जी पर कई बार आरोप लगाए गए कि प्रधानमंत्री की कुर्सी से इनके द्वारा लिए गए सारे फैसले किसी अन्य का निर्णय होते थे.
  • मनमोहन जी पर यह भी आरोप लगे कि इनकी सरकार में इन्हे प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुसार सम्मान नहीं मिला, परंतु 10 साल तक देश के प्रतिष्ठित पद पर रहते हुये और देश में कई पॉज़िटिव परिवर्तन करते हुये मनमोहन जी ने हर आरोप का खंडन बिना बोले ही किया.
  • मनमोहन जी की सरकार के समय हुये देश के सबसे बड़े घोटाले 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले ने इन्हे और इनकी सरकार को फिर एक बार विवादो में लाकर खड़ा कर दिया था. यह घोटाला इतना बड़ा था और इसने इतना तूल पकड़ा कि इसके चलते उस समय के देश के संचार मंत्री को ना केवल अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा बल्कि जेल भी जाना पड़ा. इस समय मनमोहन जी को कई विवादों और सवालो का सामना करना पड़ा था.
  • इसके अलावा मनमोहन जी के कार्यकाल में हुआ कोयला आवंटन घोटाला भी इन्हे विवादों के घेरे में ले आया था. इस घोटाले में मनमोहन जी का नाम इसलिए भी उछला क्योंकि इस समय इस मंत्रालय के प्रमुख भी श्री सिंह ही थे.
  • इसके बाद मनमोहन जी के जीवन के कुछ मुद्दो पर आधारित फिल्म “द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर” भी विवादों का कारण बनी. यह फिल्म श्री सिंह के मीडिया सलाहकर संजय बारू की किताब पर आधारित थी. इस फिल्म में यह बताया गया था कि श्री सिंह का अपनी सरकार पर कोई कंट्रोल नहीं था, साथ ही परमाणु करार के मुद्दे पर इनके और इनकी पार्टी प्रमुख के बीच विवाद भी रहे थे.

मनमोहन सिंह जी को प्राप्त अवार्ड्स और उपलब्धियां (Awards and Achievements)-

  • साल 1987 में मनमोहन सिंह जी को द्वितीय सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. यह सिंह जी के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी, जिसे इन्होने अपने जीवन में बहुत ही जल्दी हासिल कर लिया था.
  • साल 1993 में मनमोहन सिंह जी को यूरोमनी और एसियमनी द्वारा “फ़ाइनेंस मिनिस्टर ऑफ दी इयर” के पुरूस्कार से सम्मानित किया गया था.
  • साल 1976 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और फिर 1996 में दिल्ली स्कूल ऑफ इक्नोमिक्स द्वारा मनमोहन जी को मानद प्रोफेसरशिप की उपाधि से सम्मानित किया गया.
  • मनमोहन जी ने कई विदेशी प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे यूनिवर्सिटी ऑफ अल्बर्टा, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनिवरसिटि ऑफ कैम्ब्रिज और किंग साऊदी यूनिवरसिटि से डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की.
  • साल 2005 में टाइम मैगज़ीन द्वारा मनमोहन जी को 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया था.
  • साल 2014 में मनमोहन जी को जापान सरकार द्वारा “ग्रैंड कॉर्डन ऑफ द ऑर्डर ऑफ द पालाउनिया फ्लावर्स” की उपाधि से सम्मानित किया गया.

मनमोहन सिंह की किताबें (Manmohan Singh’s Books) –

मनमोहन जी डॉक्टर की उपाधि प्राप्त और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. मनमोहन जी ने अपने जीवन में एक प्रोफेसर, एक अर्थशास्त्री और एक राजनेता का किरदार बखूबी निभाया. इसके अलावा भी सिंह जी में कई प्रतिभाए थी, जिसके चलते इन्होने नाम कमाया. मनमोहन जी ने अपने कैरियर में कई किताबें लिखी और इनके जरिये अपने विचार व्यक्त किए, मनमोहन सिंह जी द्वारा लिखी गई कुछ सफल किताबे निम्न है.

क्रमांक किताब का नाम पब्लिश होने का साल
1 द कुएस्ट फॉर इक्यूटी इन डेव्लपमेंट 1986
2 इन घोस्ट’स डेन 2005
3 कोल्लेटरल (Collateral) फ़ाइनेंष्यल प्ल्म्बींग 2014
4 चिल ; इंस्टीट्यूशन एंड पॉलिसीस अंडरपिननिंग स्टेबिलिटी एंड ग्रोथ  2004
5 टु द नेशन एंड फॉर द नेशन 2006
मेकिंग ओटीसी डेरिवैटिव सेफ ; अ फ्रेश लूक  2011
7 शेडो बैंकिंग ; इक्नोमिक्स एंड पॉलिसी 2012

 

मनमोहन सिंह के जीवन पर लिखी गई किताबें (Books Written On Manmohan Singh’s Life)-

मनमोहन जी एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने बिना बोले ही देश में कई प्रभावशाली परिवर्तन किए. मनमोहन जी के द्वारा किए गए कार्यो और इनके व्यक्तित्व ने कुछ लेखको को इनके जीवन पर किताब लिखने के लिए मजबूर कर दिया. कुछ ने मनमोहन जी के जीवन के पॉज़िटिव तथ्यों को व्यक्त किया तो कुछ ने इनके जीवन की कमियों को. इनके जीवन पर लिखी गई किताबे निम्न है –

  • द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर – यह किताब श्री सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू जी के द्वारा लिखी गई है. इस किताब में श्री सिंह के राजनैतिक जीवन की कमियो को उजागर किया गया. संजय जो इस किताब के लेखक है उन्होने काफी लंबा समय मनमोहन जी के साथ उनके कार्यकाल के समय बिताया था और अपने इसी अनुभव के आधार पर उन्होने यह किताब लिखी.
  • स्ट्रिक्टली पर्सनल ; मनमोहन एंड गुरुशरण – यह किताब स्वयं मनमोहन जी की बेटी द्वारा लिखी गई है और इस किताब के जरिये उन्होने अपने पिता और उनकी ज़िंदगी के कई अनजाने पहलुओं दुनिया को अवगत करवाया है.
  • चेंजिंग इंडिया – अपने मूक स्वभाव और अपने द्वारा किए गए कार्यो को विरोधी पार्टी द्वारा अनदेखा किए जाते देख मनमोहन जी ने अपने द्वारा किए गए देश हित के कार्यो और उनके द्वारा हुये परिवर्तन को अपनी एक किताब के जरिये व्यक्त किया. उनकी यह किताब साल 2018 के दिसम्बर में लॉंच हुई, जिसे पाँच खंडो में लिखा गया है.

मनमोहन सिंह के बारे में रोचक तथ्य (Interesting Facts about Manmohan Singh’s Life)

मनमोहन जी का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है, उनके जीवन से हमे यह शिक्षा मिलती है कि कैसे हम बिना व्यक्त किए भी बड़े स्तर पर बड़े परिवर्तन कर सकते है. मनमोहन जी के जीवन से जुड़े रोचक और अनजाने तथ्य निम्न है –

  • नेहरू जी के बाद श्री सिंह ही एक ऐसे व्यक्ति है जिन्होने प्रधानमंत्री के रूप में 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया. इसी के साथ मनमोहन जी ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जो हिन्दू नई थे बल्कि सिख्क समाज से संबंध रखते थे.
  • मनमोहन जी अपने परिवार के ऐसे पहले व्यक्ति थे जिन्होने हाइ स्कूल के बाद भी पढ़ाई की. इनके पिता केवल मिडिल क्लास तक पढे थे जबकि इनके दादा तो कभी स्कूल ही नई गए थे.
  • श्री सिंह से अल्पायु में ही अपनी माँ को खो दिया था और कुछ समय बाद ही इनके पिता भी लापता हो गए थे. उनके पिता के लापता होने के बाद इनकी सौतेली माँ ने भी अपना मानसिक संतुलन खो दिया.
  • श्री सिंह जब पेशावर में थे और उनकी वार्षिक परीक्षा चल रही थी और शहर का माहौल ठीक ना होने के कारण हर गली में लाशों के ढेर बिखरे थे परंतु तब भी छोटी सी उम्र के मनमोहन डरे नहीं और इस माहौल में भी परीक्षा देने अपनी स्कूल पँहुचे.
  • श्री सिंह ने अपना कक्षा 6 से लेकर 10 तक का शिक्षण गाह में किया यहाँ इनकी स्कूल का नाम दौलत राम स्कूल था, परंतु इन्होने जब साल 1947 में पेशावर में अपनी मेट्रिक की परीक्षा दी और भारत का विभाजन हो गया, पेशावर छोड़ते वक़्त इनका रिज़ल्ट नहीं आया था और इन्हे भारत आकर यह क्लास रिपीट करनी पड़ी जिससे इनका एक साल खराब हुआ.
  • साल 1945 में श्री सिंह ने कक्षा 8 में अपनी स्कूल में टॉप किया और यही से उनकी प्रतिभा सबके सामने आना शुरू हुई. इसके बाद मनमोहन जी ने पेशावर में खालसा बॉयस स्कूल में दाखिला लिया यहाँ इन्होने कई वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लिया. मनमोहन जी खेलने में अच्छे नहीं थे फिर भी अपने स्कूल के समय में इन्हे हॉकी और फूटबाल खेलना पसंद था.
  • श्री सिंह ने अपने जीवन में कठिन हालातो का सामना करते हुये अपना एजुकेशन पूर्ण किया, अपने विदेश अध्यन के दौरान कई बार पैसो की कमी के चलते इन्होने पूरा दिन चोकलेट खाकर गुजारा.
  • शादी के समय मनमोहन और उनकी पत्नी स्वभाव में एकदम विपरीत थे मनमोहन जी जहां शांत स्वभाव के धनी थे वही उनकी पत्नी चंचल स्वभाव की लड़की थी. शादी से पूर्व मनमोहन जी ने अपनी अपनी के एजुकेशन के बारे में जानकारी स्वयं उनके विश्वविद्यालय जाकर एकत्रित की थी.
  • मनमोहन सिंह देश के ही नहीं अपितु पूरे विश्व में सबसे ज्यादा एजुकेटेड प्रधानमंत्री है, इनकी इसी योग्यता के कारण ही यह 1991 में कठिन आर्थिक स्थिति के बावजूद भी देश को सफलता पूर्वक चलाने में कामयाब रहे.
  • मनमोहन जी हिन्दी नहीं पढ़ सकते थे इसीलिए इनकी स्पीच उर्दू में लिखी जाती थी और अपनी स्पीच के पहले इन्हे हिन्दी का अभ्यास करना पड़ता था.
  • मनमोहन जी की प्रतिभा को देखते हुये प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने इनके राजनैतिक बैकग्राउंड से ना होने के बावजूद भी इन्हे अपने कार्यकाल में वित्त मंत्री न्यूक्त किया और इन्हे आसाम से राज्यसभा का सदस्य घोषित किया.
  • साल 2007 में मनमोहन सरकार ने सबसे अधिक ग्रोस डोमेस्टिक प्रॉडक्ट ग्रोथ रेट हासिल की थी जो कि 9 प्रतिशत थी और यह विश्व की दूसरी सबसे अधिक बढ्ने वाली अर्थव्यवस्था थी.
  • मनमोहन जी ने हमेशा अपनी दोस्ती को महत्व दिया है, जब ये प्रधानमंत्री थे तब साल 2008 में इनके एक मित्र राजा मोहम्मद अली पाकिस्तान से इनसे मुलाक़ात करने भारत आए थे.
  • साल 2005 में सेल्स टैक्स को वैल्यू एडेड टैक्स में परिवर्तित करने का श्रेय भी इनकी सरकार को ही जाता है. साल 2008 में मुंबई में हुये आतंकी हमले के बाद आतंकवाद से निपटने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी की जरूरत महसूस हुई और तब इनकी सरकार ने नेशनल इन्वैस्टिगेशन एजेंसी की नीव रखी.

मनमोहन सिंह के जीवन पर आधारित फिल्म (Film On Manmohan Singh’s Life) –

साल 2019 में श्री सिंह के जीवन पर आधारित किताब को एक फिल्म के रूप में बनाया गया. इस फिल्म में मनमोहन जी के जीवन को नकारात्मक रूप में दर्शाया गया था इसलिए यह फिल्म सिनेमा घरो में आने के पूर्व ही कई विवादो से घिर गई. इस फिल्म का निर्देशन विजय रत्नाकर गुतते द्वारा किया गया था, जिसमे प्रमुख भूमिका में अनुपम खैर थे. इसके अलावा इस फिल्म में अक्षय खन्ना, सुज़ैन बेरनेर्ट मुख्य किरदारो में थे. यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज तो हुई परंतु यह श्री सिंह की छवि को धूमिल करने में नाकाम रही.

मनमोहन जी शांत स्वभाव के और प्रतिभाशाली व्यक्तित्व से धनी व्यक्ति थे. इन्होने बिना बोले ही अपने कार्यकाल में भारत के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए है और आने वाले कई वर्षो के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मनमोहन जी की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी. आज भी मनमोहन सिंह जी जैसे अर्थशास्त्री की भारतीय जनता को जरूरत है ताकि देश प्रगति के पथ पर गतिमान हो सके. 

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