लियोनार्डो दी विंची का जीवन परिचय | Leonardo Da Vinci Biography in Hindi

लियोनार्डो दी विंची का जीवन परिचय (Leonardo Da Vinci Biography in Hindi)

लियोनार्डो दी विंची की पहचान वैसे तो एक पेंटर के रूप में ज्यादा हैं लेकिन वो एक बुद्धिजीवी और अन्य कई कलाओं के विशेषज्ञ भी थे. हालांकि विंची ने और भी बहुत सी कृतियाँ तैयार की थी लेकिन उनकी लास्ट सपर (The Last Supper) और दी मोनालिसा (The Monalisa)सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ हैं. विंची का जीवन थोडा रहस्यमयी और थोडा विवादित माना जा सकता हैं, क्योंकि उनके निजी जीवन से जुड़े कई तथ्यों और उनकी कृत्यों पर अब तक शोध होता हैं. उनके कार्य ना केवल उस समय के कई आर्टिस्ट के लिए प्रेरणादायी थे बल्कि आज भी हैं.  

Leonardo Da Vinci

क्र. म.(s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.    पूरा नाम ((Full Name) लियोनार्डो दा विंची
2.    जन्म दिन (Birth Date) 15 अप्रैल 1452
3.    जन्म स्थान (Birth Place) विंची, इटली
4.    पेशा (Profession) पेंटर
5.    राजनीतिक पार्टी (Political Party)
6.    अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations)
7.    राष्ट्रीयता (Nationality) इटेलियन
8.    उम्र (Age) 67 वर्ष
9.    गृहनगर (Hometown) टुस्केनी(Tuscany)
10.           धर्म (Religion) क्रिश्चियन/रोमन कैथोलिक/नॉन-बिलिवर (शोध एवं विवाद का विषय)
11.           जाति (Caste)
12.           वैवाहिक स्थिति (Marital Status) अविवाहित
13.           राशि (Zodiac Sign) वृषभ
14.           मृत्यु (Death) 2 मई 1519

प्रारम्भिक जीवन और बचपन (Early Life and Childhood)

विंची ने कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, उसने घर पर ही पढना-लिखना और गणित सिखा था. विंची के अंकल ने उनकी शिक्षा में काफी मदद की थी. टस्कनी के ग्रामीण इलाके में रहते हुए उनका ज्यादातर बचपन प्रकृति के पास बीता था और उनके जर्नल्स बताते हैं कि उन्हें पानी ,पक्षी और प्रकृति में कितनी रूचि थी. लियोनार्डो के प्रकृति और विज्ञान के सिद्धांतों के प्रति आकर्षण का प्रभाव उनके आर्ट-वर्क में भी दिखाई दिया. वास्तव में उनके प्रारम्भिक स्तर पर लिए गये ज्ञान ने ना केवल उनकी पेंटिंग में मदद की बल्कि विज्ञान की  जानकारियों ने उनके भीतर छुपे स्कल्पचर, ड्राफ्ट्समैन और अन्वेषक को भी तराशा.

विंची का निजी जीवन और परिवार (Vinci’s Personal life and Family)

  • विंची के पिता वकील थे और उनकी माता किसान थी. उनके पिता ने तीन विवाह किये थे, और कहा जाता हैं उनके लगभग 12 सौतेले भाई-बहिन थे.
  • विंची अपने पिता के साथ रहते थे. वैसे 1493 में मिलान में रहते हुए लियोनार्डो ने अपने टैक्स के डॉक्यूमेंट में एक महिला का नाम जोड़ा था, वो महिला जब 1495 में मरी तब उसके अंतिम-संस्कार के खर्चों से पता कला कि वो विंची की माँ थी.
माता (Mother) केटरीना दी मिओ लिप्पी (Caterina di Meo Lippi)
पिता (Father) सेर पियोरो (Ser Piero)

 विंची का शुरूआती करियर ( Vinci’s Career in early age)

  • 14 वर्ष की उम्र में लियोनार्डो की उस जमाने के सबसे सफल आर्टिस्ट एंड्रीया दी साइओनी (Andrea di Cione) ने तारीफ़ की थी,जिन्हें वेरोचियो (Verrocchio) भी कहा जाता था. वेरोचिओ के वर्कशॉप में लियोनार्डो ने मानवता सम्बन्धित बातों की शिक्षा ली थी, इस वर्कशॉप में विंची के अतिरिक्त कई बड़े-बड़े पेंटर भी शामिल हुए थे. वेरोकिओ की वर्कशॉप में ज्यादातर काम उसके कर्मचारियों ने किये थे.
  • लिओनार्डो ने वेरोकिओ के साथ मिलकर बैपतिस्म ऑफ़ क्राइस्ट (Baptism of Christ) नाम की पेंटिंग बनाई, इस पेंटिंग में ऑइल पेंट की तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. इसके अलावा विंची ने वेरोचियो (Verrocchio) के पास 6 वर्षों में मेटल वर्किंग, लेदर पर काम, लकड़ी का काम, मूर्तिकला, ड्राइंग और पेंटिंग जैसी विधाएं और तकनीक का प्रशिक्षण ले लिया.
  • 1472 में 20 वर्ष की उम्र में लियोनार्डो खुद एक अच्छे आर्टिस्ट बन गये थे और उनके पिता ने उनके लिए एक वर्कशॉप तक बनवा दी, लेकिन उन्होंने वेरोकिओ के साथ काम करना जारी रखा. लियोनार्डो की पहली ड्राइंग 5 अगस्त 1473 को पेन और इंक से बनाई गयो आरनो वैली की ड्राइंग हैं.

लियोनार्डो का प्रोफेशनल जीवन (Leonardo’s professional life)   

  • लियोनार्डो का प्रोफेशनल जीवन काफी उतार-चढाव वाला रहा था, उन्होंने बहुत बार जगह बदली और विभिन्न तरह के काम किए. 1476 में कोर्ट के रिपोर्ट्स से पता लगता हैं कि लियोनार्डो और उसके 3 साथियों पर कुछ गलत काम के आरोप लगे थे और उन्हें रिहा कर दिया गया था. हालाँकि इसके बाद 1478 तक उनके काम के कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, जबकि 1476 से 1481 तक फ्लोरेंस में लियोनार्डो के खुदकी वर्कशॉप थी.
  • 1478 में लियोनार्डो ने अपना स्टूडियो शुरू किया था और लियोनार्डो को 1481 में चैपल ऑफ़ सेंट बर्नार्ड (Chapel of St Bernard) और 1481 में सेन डोनाटो अ स्कोपेटो (San Donato a Scopeto) के लिए  दी एडोरेशन ऑफ़ दी मेगी (The Adoration of the Magi)  पेंट करने का मौका भी मिला था.
  • 1481 में उसे एक अल्टरपिस (altarpiece) दी एडोरेशन ऑफ़ दी मेगी का काम मिला, लेकिन ये कृति अधूरी रह गयी थी क्योकि लियोनार्डो ने 1482 में फ्लोरेंस छोड़ दिया था और कोर्ट में आर्टिस्ट के पद पर काम करना शुरू कर दिया था. इस अधूरी पेंटिंग ने लियोनार्डो की नई सोच को विकसित किया था.
  • 1482 में लोरेंजो दी मेडिसी ने लियोनार्डो दा विंची को ड्यूक ऑफ़ मोनेको (the Duke of Monaco) के लिए एक कृति बनायी, जो कि शान्ति का प्रतीक थी. विंची ने कृति के साथ एक लेटर भी लिखा और बताया कि वो कैसे एक परफेक्ट पेंटर बन सकते हैं, और कैसे आगे कोर्ट के लिए काम कर सकते हैं. कृति के साथ ही उनका पत्र भी एक्सेप्ट कर लिया गया, और इस तरह लियोनार्डो को 1482 से 1499 तक के लिए कोर्ट में नियुक्ति मिल गयी. इसके अलावा लियोनार्डो ने लास्ट सपर भी मिलान में ही बनाई थी. इसमें लियोनार्डो ने पारम्परिक फ्रेस्को (फ्रेश प्लास्टर पर विशेष प्रकार के वाटर कलर से पेंट करना) की जगह ऑइल बेस्ड मीडियम का उपयोग किया. लेकिन दुर्भाग्यवश उसकी ये पेंटिंग ज्यादा समय तक नहीं चली और 50 वर्षों में ही इस पर कुछ स्पॉट्स दिखाई देने लगे, अभी जो पेंटिंग हैं वो वापिस बनाई गयी.
  • लियोनार्डो ने ड्यूक ऑफ़ मिलान के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया जिसमें भी विशेषकर मिलिट्री इंजीनियरिंग का काम ज्यादा देखा. उसने स्टेज सेट-अप्स के लिए बहुत सी मशीनरी भी बनाई, दोनों ही गतिविधियों ने उसके गति और संचालन के प्रति आकर्षण पैदा किया. लियोनार्डो की पहली मिलानिज पेंटिंग वर्जिन ऑफ़ दी रॉक्स थी.
  • लियोनार्डो ने काले से घोड़े का बहुत बड़ा मोडल बनाया था जिसे ग्रान केवलो के नाम से जाना जाता हैं. इसमें 70 टन का कांसा लगा था, ये मोन्यूमेंट कुछ वर्षों तक अधुरा रहा और 1492 में जाकर पूरा हुआ. 1499 में दुसरे इटालियन युद्ध की शुरुआत में फ्रेंच सेना ने इसे ध्वस्त कर दिया. और उसी वर्ष फ्रांस ने ड्यूक ऑफ़ मिलान पर कब्जा कर लिया तो लियोनार्डो ने मिलान छोड़ दिया और वेनिस और वहां से मानटुआ (Mantua) चले गए.
  • 1500 में जब लियोनार्डो फ्लोरेंस लौटा तो सेंटीसीमा एन्युंजीआटा (Santissima Annunziata) की मोनेस्ट्री में एक संत के यहाँ रुका और यहाँ उसने एक वर्कशॉप की जिसमें उसने वर्जिन एंड चाइल्ड विथ सेंट एन और सेन जॉन बापटिस्ट के कार्टून बनाये, इस काम को बहुत सराहना मिली. 1502 में लियोनार्डो ने मिलट्री आर्किटेकट के तौर पर पॉप एलेक्जेंडर सिक्स्थ (vi) के बेटे सेजर बोर्गिया (Cesare Borgia) के पास काम शुरू किया और अपने पेट्रोन के साथ  पूरी इटली की यात्रा की, उसके बाद फ्लोरेंस लौटकर 18 अक्टूबर 1503 को वो गिल्ड ऑफ़ सेंट ल्युक में शामिल हो गए जहां उन्होंने 2 वर्ष का समय एक भित्तिचित्र को डिजाइन करते हुए बिताया.
  • फ्लोरेंस की युवा पीढ़ी उनके किये कार्यों से बहुत प्रभावित थी. लियोनार्डो का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट 1503 में शुरू हुआ था जो कि शहर में घुड़सवारों के युद्ध का दृश्य था जिसे काउंसिल हॉल में सजाने के लिए बनाया जाना था. वर्तमान में कुछ घुड़सवारों के रफ स्केच, आदमियों के सर की ड्राइंग और पूरी रचना की कुछ प्रतियाँ ही उपलब्ध हैं. इसका कारण ये हैं कि लियोनार्डो ने जब काम शुरू किया था तब काम खत्म होने से पहले ही उसे मिलान वापिस बुला लिया गया था, और उसके थोड़े समय बाद ही कमरा तोड़ दिया गया और पेंटिंग वाले हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया गया.
  • मोनालिसा (Mona Lisa): 1505 से लेकर 1507 तक विंची ने निजी कार्य किया, इसी दौरान उन्होंने विश्व प्रसिद्द कृति बनाई जिसका नाम मोनालिसा था. कहा जाता हैं ये फ्लोरेंस के नागरिक की तीसरी पत्नी की पोट्रेट थी, इस पेंटिंग की मुस्कान काफी रहस्यमयी हैं क्योंकि समझ नही आता कि महिला की मुस्कान आ रही हैं या जा रही हैं. वैसे इस रचना के पीछे बहुत सी थ्योरी और कहानियाँ हैं, जिसमें कुछ का मत हैं कि उस लड़की को पीलिया था वही कुछ उसे गर्भवती मानते हैं तो कुछ का दावा था कि ये महिला ही नहीं हैं बल्कि पुरुष पर बनाई गयी कृति हैं. लेकिन इनमे से भी कुछ सिद्ध नही हो सका था. मोनालिसा एक ऐसा काम था जिसे लियोनार्डो ने कभी खत्म नही किया था वो इसे हमेशा बेहतर बनाने की कोशीश करते रहते थे. कहा जाता हैं कि अपनी मृत्यु तक लियोनार्डो ने इस पेंटिंग को बेचा नहीं था. अभी ये पेरिस में हैं और इस पर बहुत मोटे बुलेट प्रूफ ग्लास लगे हैं. इसे ना केवल राष्ट्रीय कृति का सम्मान मिला हैं बल्कि आर्ट के क्षेत्र में आज तक की सबसे सुंदर कृति भी माना जाता हैं.
  • 1506 में वो मिलान लौट आये लेकिन वो मिलान में ज्यादा नहीं रुके क्योंकि उनके पिता का देहांत हो गया और 1507 में अपने भाई के साथ पिता की सम्पति का मामला सुलझाने के लिए वो वापिस फ्लोरेंस आ गये. 1508 में वो वापिस मिलान लौट गये जहां उनका खुद का बंगला था.
  • वास्तव में फ्रेंच गवर्नर ने लियोनार्डो को मिलान वापस बुलाया था, ताकि उन्हें एक स्टेच्यु बनाने का काम सौंप सके. लेकिन लियोनार्डो ने विज्ञान में अध्ययन और रिसर्च जरुरी हैं ऐसा कहते हुए कोई नयी पेंटिंग नहीं बनाई. विंची को एनाटोमी में रूचि थी, और उसने कुछ एनाटॉमिकल ड्राइंगस बनाई जिन्हें आज तक फोलो किया जाता हैं.
  • लियोनार्डो ने एक नोटबुक में डेटा और ड्राइंग बनाये थे जिससे उनकी विज्ञान में गहन रूचि का पता चलता हैं, इसमें फायरमैन,एक्शन ऑफ़ वाटर, पक्षियों की उड़ान, पौधों की वृद्धि और पृथ्वी के इतिहास और अध्ययन के कुछ ड्राइंगस थे. उनका काम प्रोसेस ऑफ़ एक्शन, गति, दबाव और ग्रोथ पर था. ये कहा जाता हैं कि उनकी ड्राइंग्स मानव के शरीर के बारे में बताने से ज्यादा इस पर थी कि शरीर काम कैसे करता हैं.

 लियोनार्डो के जीवन के पिछले वर्ष (Leonardo’s Old age life)

  • 1513 में लियोनार्डो रोम चले गये और वहां पर 1516 तक रहे. वहां उन्हें काफी सम्मान और ख्याति मिली लेकिन विंची इन सबसे अप्रभावित थे वो ज्यादा से ज्यादा विज्ञान में अध्ययन करते और अपने नोटबुक में आर्टिस्टिक काम करते.
  • फ्रेंच राजा ने लियोनार्डो को Fontainebleau, में अपने कोर्ट में बुलाया, और उन्हें पहले पेंटर, आर्किटेक्ट और मैकेनिक का खिताब और क्लौक्स (Cloux) में एक घर (country house )दिया.
  • 1513 से 1516 तक लियोनार्डो ने अपना ज्यादातर समय रोम के वेटिकन सिटी में बेलवेडेरे में बिताया. अक्टूबर 1515 में फ्रांस के फ्रांकोइस प्रथम ने मिलान पर कब्जा कर लिया. 19 दिसम्बर को लियोनार्डो फ़्रन्कोइस प्रथम और पॉप लियो दशम (X) की मीटिंग में बोलोगना (Bologna) गया. लियोनार्डो ने अपने जीवन के अंतिम 3 वर्ष अपने मित्र काउंट फ्रेंसेसो मेल्ज़ी (Count Francesco Melzi) के साथ बिताये.
  • 2 मई 1519 को क्लोस ल्यूस में लियोनार्डो की मृत्यु हुयी, उनके अंतिम दिनों में फ़्रन्कोइस प्रथम (François I) उनका अच्छा मित्र बन गया था. मरते वक्त लियोनार्डो का सर राजा की बांहों में ही था, ये कहानी इन्ग्रेस ने रोमांटिक पेंटिंग बताई गयी.
  • वसारी की दी जानकारी के अनुसार लियोनार्डो ने पुजारी को बुलवाया और कुछ कन्फेस किया एवं पवित्र ज्ञान लिया. उसे एम्बोईस (Amboise) के महल में चापेल ऑफ़ संत-ह्यूबर्ट (Chapel of Saint-Hubert) में दफनाया गया. उसके उत्तराधिकारी मेल्ज़ी थे जिन्हें लियोनार्डो की पेंटिंग, पैसे, टूल्स और लाइब्रेरी मिली. उसके भाई को कुछ भूमि मिली और उसके आस-पास रहने वाले लोग जैसे दोस्त एवं नौकरानी को भी कुछ ना कुछ मिला.

        इस तरह लियोनार्डो दा विंची का जीवन-सफर बेहद रोमांचक था,और उनकी पेंटिंग्स के अतिरिक्त उनके जीवन के भी कई ऐसे पहलू हैं जिन पर विस्तृत चर्चा की जा सकती हैं.

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