लाल कृष्ण आडवाणी का जीवन परिचय | Lal Krishna Advani Biography in Hindi

लाल कृष्ण आडवाणी का जीवन परिचय (Lal Krishna Advani Biography in Hindi)

लाल कृष्ण आडवाणी, भारतीय जनता पार्टी की नीव के पत्थर मे से एक है अर्थात भारतीय जनता पार्टी(BJP) की शुरुआत मे इनका महत्वपूर्ण योगदान है. ये सन् 1991 से बीजेपी से जुड़े तथा आज वरिष्ट नेता मे सबसे पहले इनकी गिनती होती है इनके  परामर्श के बिना कोई कार्य नही होता. इन्होंने पार्टी के हित मे बहुत कार्य किये तथा बहुत से नये कामों की शुरुवात करी. राजनीति मे बहुत उम्दा कार्य करने के लिये सन् 2015 मे इनको पद्म विभूषण से नवाजा गया था.

Lal Krishna Advani

लाल कृष्ण अडवाणी के जीवन की जानकारी  (Information of Lal Krishna Advani’s life) –

इनका जन्म सिंधी हिन्दू समाज मे, 8 सन् 1927 को कराची (वर्तमान मे पाकिस्तान का एक बड़ा शहर) मे हुआ था. इनके परिवार मे सभी शिक्षित होने की वजह से बचपन से इनको वैसा ही माहोल मिला. यह शुरू से एक मेधावी छात्र रहे थे. इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पैट्रिक हाई स्कूल, कराची से की थी यह एक नामी-ग्रामी स्कूल था. बाद मे इन्होने हैदराबाद (सिंध) नेशनल कोलीजीऐट बोर्ड तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, बॉम्बे से अपनी वकालत की शिक्षा हासिल करी.

लाल कृष्ण आडवाणी के जीवन की संपूर्ण जानकारी संक्षिप्त में :

नाम (Name)लाल कृष्ण आडवाणी
जन्म तारीख(Date of birth)8 नवंबर 1927
जन्म स्थान(Place)कराची (पाकिस्तान)
उम्र( Age)91 वर्ष
पता (Address)30, पृथ्वीराज रोड़ , नई दिल्ली
स्कूल (School)सेंट पैट्रिक हाई स्कूल
कॉलेज(College)नेशनल कोलीजीऐट बोर्ड तथा गवर्नमेंट लॉ कॉलेज
ओक्यूपेशन(Occupation)भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता
कुल संपत्ति (Total Assets) 7.59 करोड़ लगभग
भाषा(Languages)हिंदी , इंग्लिश, सिंधी
नागरिकता(Nationality)इंडियन
खास दोस्त (Best

 Friend’s)

अटल बिहारी वाजपेयी
दिलचस्पी (Activities)पढ़ना, मूवी देखना

लाल कृष्ण आडवाणी की पारिवारिक की जानकारी (Birth and Family information of Lal Krishna Advani)

आडवाणी जी  एक बहुत ही संपन्न परिवार से थे. इनका बड़ा संयुक्त परिवार था जिसमे इनके दादा-दादी, माता-पिता तथा पिता के भाई और उनके बच्चे साथ रहते थे. इनके दादा जी उस समय मे संस्कृत के विद्वान तथा सरकारी स्कूल के प्राचार्य थे. परिवार का हर एक सदस्य किसी ना किसी पद या व्यापार मे कार्यरत थे. एक इंटरव्यू के दौरान इन्होंने कहा था इनके कुल काका-ताऊ के मिलाकर 24 भाई-बहन है जिनके साथ रह कर यह बड़े हुए है. इनके बचपन की बहुत सारी यादे है क्यों कि इनके जन्म के समय देश का विभाजन नही हुआ था पर जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ तो इनके परिवार के दो हिस्से हो गये जिनमे कुछ पाकिस्तान मे रह गये तथा कुछ भारत मे. विभाजन के कारण इनको अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा जों इनके लिए एक क्षति के सामान ही था. परिवार जरुर विभाजित हुआ था पर इनके दिल से अपने परिवार की यादें नही गई थी. इनका पच्चीस फरवरी सन् उन्नीस सौ पैसठ में विवाह हुआ था, इस विवाह से इनके दो बच्चे है.

पिता का नामकिशनचंद आडवाणी
माता का नामज्ञानदेवी अडवाणी
पत्नी का नामकमला अडवाणी
पुत्रएक
1.    जयंत अडवाणी
पुत्रीएक
1.    प्रतिभा अडवाणी

लाल कृष्ण अडवाणी का राजनीति जीवन (Information of  political life of Lal Krishna Advani ) –  

इन्होंने मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र मे सबसे पहली बार सन् 1942 मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य के रूप मे कार्य शुरू किया. इन्होंने पूरे जोश के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे अपना योगदान दिया तथा जगह-जगह इसके केन्द्र खुले तथा लोगों को इससे जोड़ा. इन्होंने शुरुवाती दौर से ही बहुत अच्छा कार्य किया जिससे राजनीति मे भी इनकी छवि बहुत अच्छी बनी तथा साल दर साल इन्होंने राजनीति जैसे क्षेत्र मे काम कर एक अलग मुकाम हासिल किया. इनके राजनीतिक जीवन का संक्षिप्त ब्यौरा इस प्रकार है –

कार्यकालराजनीति जीवन की संक्षिप्त जानकारी
1947वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा कराची से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सचिव का पद मिला. 
1951श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इनको भारतीय जनसंघ का सदस्य बनाया.
1996-1967जनसंघ के सदस्य के रूप मे कार्यरत रहे.
1970-1976दिल्ली राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये.
1976-1982सन् 1973 मे इनको भारतीय जनसंघ का अध्यक्ष के रूप मे मनोनीत किया गया, इसके कुछ वर्ष पश्चात सन् 1977  मे गुजरात राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये.सन् 1977 मे जब लोकसभा के चुनाव हुए तब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तथा उनके कार्यकाल मे इनको सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया. सन् 1976 से  सन् 1978 तक इन्होने गुजरात राज्यसभा के सदस्य के रूप मे कार्य किया. सन् 1980 मे कुछ महीनों के लिये यह राज्यसभा मे विपक्ष के नेता के रूप मे रहे. बाद मे सन् 1980 मे इनको भारतीय जनता पार्टी का महासचिव बनाया गया यह पद उन्होंने लगभग सात साल तक संभाला. इसी के साथ तीसरी बार सन् 1982 मे राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुने गये.
1986इस साल मे इन्होंने सबसे पहली बार भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष का पद ग्रहण किया तथा सन् 1991 तक यह उस पद पर रहे.
1988यहाँ एक बार फिर चौथी बार इनको राज्यसभा के सदस्य के रूप मे चुना गया.
19899 लोकसभा मे, लोकसभा सदस्य के रूप मे इनको चुना गया.
1991सन् 1991 तक लोकसभा मे भारतीय जनता पार्टी के संसदीय पार्टी के नेता रहे, सन् 1991 से सन् 1993 विपक्ष के नेता रहे.
1993सन् 1993 से सन् 1998 तक बीजेपी के अध्यक्ष रहे.
19981998 मे बारहवी लोकसभा के सदस्य रहे.
1999इस साल मे तेरहवी बार यह लोकसभा के सदस्य बने,

सन् 1999 से सन् 2004 तक केन्द्रीय केबिनेट मंत्री रहे.

2002जुलाई 2002 से अगस्त 2002 तक प्रेसोंनेल, पेंशन एंड पब्लिक ग्रेवियेंस (अडिशनल चार्ज) के केबिनेट मंत्री रहे. इसी के साथ मई 2002 से  अगस्त 2004 तक इन्होंने उपप्रधानमंत्री का पद संभाला.
20042004 मे चौदहवीं लोकसभा मे मनोनीत किया गया तथा एक बार फिर यह प्रतिपक्ष के नेता बने.
2006

 

सन् 2006 से सन् 2009 तक ग्रह मामलों मे समिति के सदस्य रहे.
2009यह एक बार फिर पन्द्रहवी लोकसभा के सदस्य बने, इसी साल मे मई से दिसंबर तक यह विपक्ष के नेता रहे. सन् 2009 मे एक बार पुनः ग्रह मामलों मे इनको समिति का सदस्य बनाया गया. 
2013जून 2013 मे जब नरेन्द्र मोदी ने पार्टी मे सभी महत्वपूर्ण पद घोषित किये तब उससे यह संतुष्ट नही हुए तथा इन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया जिसके चलते उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया तथा कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब आदर्शवादी पार्टी नही रही. तब राजनाथ सिंह ने इनसे सभी मुदों पर चर्चा करी तथा आश्वासन दिया, फिर इन्होंने अपना इस्तीफा वापस लिया तथा पार्टी मे वापस आये.  

 लाल कृष्ण अडवाणी की रथ यात्रा की जानकारी (Lal Krishna Advani’s Rath Yatra) –

रथ यात्रा जिसकी शुरुआत सबसे पहले आडवाणी जी ने की थी, यह यात्रा कोई साधारण यात्रा नही हुआ करती थी इस यात्रा की लहर पूरे देश मे होती थी इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय धर्म और संस्कृति को बढ़ावा देना तथा लोगों को अपने धर्म के प्रति जागरूक करना होता था. इन्होंने जों मुददे उठाये वह सही भी थे और आमजनता तक उनको पहुचना बहुत बड़ी बात थी. इन्होंने जितनी यात्राओ के जयघोष किये वह सफल भी रही. इससे भारतीय जनता पार्टी को बहुत फायदा हुआ तथा उसकी तरफ लोगों का नजरिया बदला.  

यात्रा के नामयात्रा की जानकारी
राम रथ यात्राइसका जयघोष सितम्बर,1990 मे सोमनाथ,गुजरात से हुआ शुरू हुआ तथा अक्टूबर,1990 मे अयोध्या तक पंहुचा. इसमें मुददा अयोध्या राम मंदिर तथा बाबरी मस्जिद का था. इसलिये इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य राम जन्मभूमि,अयोध्या मे राम मंदिर का निर्माण करना था. किसी ने इसे बीजेपी की राजनीतिक चाल समझी तो किसी ने इसको हिन्दुओं का अधिकार, इस मुददे को उत्तरप्रदेश के मंत्री मुलायमसिंह तथा लालूप्रसाद यादव के द्वारा रोक दिया गया था पर इनकी किसी बात का असर नही हुआ क्योंकि तब तक यह मुददा बहुत बड़ गया था और आज की तारीख तक इस पर विवाद चल रहे.     
जनादेश यात्रानाम से साफ समझ मे आ रहा है कि, ऐसा आदेश जों जनता के हित मे हो और यही इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य था जिसमे लोगों के प्रतिनिधित्व के लिये जों विधेयक पास हुआ तथा अस्सी संविधान संशोधन (80 th Amendment) के खिलाफ लोगों को जनादेश का अधिकार दिलाना. जिसके लिये भारत की चार दिशाओं से 11 सितम्बर 1993 से इस यात्रा का शंखनाद हुआ तथा इसमें इन्होंने मैसूर को संबोधित करते हुए 25 सितम्बर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल मे एकत्रित हुये और बहुत बड़ी रैली निकाली गई. यह रैली बहुत ही विशाल रूप मे थी जिसमे भारत के चौदह राज्य तथा दो केन्द्र शासित प्रदेश ने भी हिस्सा लिया.     
स्वर्ण जयंती रथ यात्राइस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के पचास साल पूरे होने उसका उत्साह तथा जों महापुरुषों ने देश को आजाद कराया उनको नमन करना था, यह यात्रा मई से जुलाई 1997 तक चली.
भारत उदय यात्रायह यात्रा सन् 2004 मे निकली गई जिसमे यह बताया गया कि भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद देश मे क्या बदलाव हुए तथा भारत ने कैसे उन्नति करी.
भारत सुरक्षा यात्रायह यात्रा 2006 में की गई थी इस यात्रा का नेतृत्व दो लोगों ने किया जिसमे एक अडवाणी जी थे और दूसरे राजनाथसिंह. आडवाणी जी ने दिल्ली से तथा राजनाथ सिंह ने ओडिसा के जगन्नाथपुरी से यात्रा शुरू करी. इसका मुख्य उद्देश्य जगह-जगह हो रहे बम धमाकों से भारत की रक्षा करना तथा भारत मे बाढ़ आतंकवाद, मूल्यों मे वृद्धि, भ्रष्टाचार को रोकना था.     
जन चेतना यात्राइस यात्रा का मुख्य उद्देश्य यूपीए सरकार द्वारा फैल रहे भ्रष्टाचार से जनता को अवगत कराना था. इस यात्रा की उद्घोषणा 11 अक्टूबर 2011 को बिहार के सीताब दीरा से हुई थी.

लाल कृष्ण अडवाणी के अनजानें तथ्य (Unknown Facts about Lal Krishna Advani) – इनके जीवन मे बहुत सी घटनाये हुई पर सभी का वर्णन संभव नही है, उनमे से कुछ इस प्रकार है.   

  • इनका भारतीय जनता पार्टी मे एक ऐसा योगदान था जिसे हर कोई नही समझ सकता पर सही मायने मे इन्होंने पार्टी के लिये बहुत मेहनत करी थी जब बीजेपी की शुरुवात हुई थी तब मात्र एक-दो सांसद थे पर इनके लगातार प्रयास से डेढ सौ से ज्यादा सांसद जुड गये और आज पार्टी ने एक बड़े वट वृक्ष का रूप ले लिया है.
  • आडवाणी तथा अटल बिहारी वाजपेई जी जोड़ी को सच्ची दोस्ती का नाम दिया गया जिसके चलते इन्होंने केंद्र मे साथ मे कई नये कार्यों की योजनाएं बनाई तथा सफल भी हुये.
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचार के दौरान जब यह राजस्थान के अलवर जिले मे गये वहा एक तालाब मे उनके साथीयों के साथ गये तब देखा की यह तालाब नही एक बावड़ी है. वहा मस्ती मे सभी साथियों ने कहा कि कूद जाओ मजा आयेगा और वह कूद गये. जब बाहर निकल कर देखा तो उस बावड़ी मे अनगिनत सांप थे सबके होश उड़ गये पर ये सबसे अच्छी बात थी किसी को कोई हानि नही हुई.

लाल कृष्ण अडवाणी से संबन्धित विवाद (Controveries of  La Krishna Advani) –  

इन को अपने राजनीतिक जीवन मे कुछ विवादों का सामना भी करना पड़ा जिसके चलते इनसे पार्टी ने इस्तीफा मांगा तथा कई बार लोकसभा मे विपक्ष मे भी बैठना पड़ा.

  • इन पर आरोप था कि इन्होंने हवाला ब्रोकर से रिश्वत लेकर काम किया है. जिसके चलते इनका यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट तक चला बहुत विवादों के बाद कोई सबूत ना मिलने के कारण इनको निदोर्ष घोषित किया गया. अमित शाह के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़े 
  • सन् 2005 मे पाकिस्तान यात्रा के समय वहाँ अपने बयानों के चलते इन्हे अपनी पार्टी में ही विरोधो का सामना करना पड़ा और इस्तीफा देना पड़ा हालाकि बाद मे कुछ कार्यकर्ता जों इनके पक्ष मे थे उनके कहने पर इनका इस्तीफा वापस ले लिया गया.

इस प्रकार इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन मे कई परेशानियां भी झेली. सन् 2009 के चुनाव मे न्यूज़ चेनल पर इनको प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित किया पर उस समय सत्ता मे काँग्रेस की सरकार आई और इन्हे इस मौके से हाथ धोना पढ़ा. यह राजनीति मे इनका बुरा दौर था जिसका फायदा अन्य नेताओं ने उठाया अब धीरे-धीरे पार्टी मे  इनकी जगह पीछे हो रही थी. इसका असर सन् 2014 के चुनावों पर हुआ जब हर जगह नरेन्द्र मोदी आगे आये तब इन्होंने पहली बार कहा की अब पार्टी मे पहले जैसी बात नही रही. तथा इन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया पर फिर एक बार राजनाथसिंह ने इनको आश्वासन दिया तथा कहा पार्टी मे आप जैसे अनुभवी लोगों की जरुरत है और इस्तीफा वापस लेने को कहा. इस प्रकार एक दौर का सामना करते हुए उन्होंने आज भी आम जनता मे अपनी बहुत अच्छी छाप छोड़ी है.   

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