कुम्भलगढ़ किले का इतिहास | Kumbhalgarh fort History in Hindi

कुम्भलगढ़ किले का इतिहास (Kumbhalgarh fort History in Hindi)

मेवाड़ का इतिहास अपने-आप में इतना समृद्ध और गौरवशाली हैं कि यहाँ के प्रत्येक क्षेत्र, किले, महल और अन्य किसी भी ऐतिहासिक-स्थल के बारे में जानना स्वत: रुचिकर हो जाता हैं, इसी क्रम में कुम्भलगढ़ किले का इतिहास भी काफी रोचक एवं आकर्षक हैं. चीन के बाद विश्व में सबसे बड़ी दीवार के लिए भी कुम्भलगढ़ किला विख्यात हैं.  इसे राणा कुम्भा ने 15वीं शताब्दी में बनाया था, किले को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया गया हैं.Kumbhalgarh fort History

किले का नाम (Fort name) कुम्भलगढ़
किसने निर्माण करवाया (Who built the fort) राणा कुम्भा
कब निर्मित हुआ (When did fort built) 1458 ईस्वी में
क्यों प्रसिद्ध हैं?? (why it is famous) विस्तृत दीवार एवं गौरवशाली इतिहास के कारण

 किसने बनाया  कुम्भलगढ़?  (Who built  the Kumbhalgarh)

राणा कुंभा ने 1458 ईस्वी में कुम्भलगढ़ बनवाया था, इसीलिए इसका नाम कुम्भलगढ़ हैं. किले का निर्माण अशोक के पोते जैन राजा सम्प्रति के खंडरों पर हुआ था.  राणा  कुम्भा  सिसोदिया  वंश  के राजा थे उन्होंने वास्तुकार मंदान को  किले  की  वास्तुकला  निर्धारित  करने  का  काम  सौंपा था. इसे बनाने में लगभग 15 वर्ष लगे थे.  राणा  कुम्भा  का  साम्राज्य  मेवाड़ से  ग्वालियर  तक  फैला  हुआ  था,  अपने  राज्य  को  सुरक्षित  करने  के  लिए  राणा  कुंभा  ने  कुम्भलगढ़  किले  के अतिरिक्त  31  अन्य किले भी  बनवाए  थे, जबकि एक अन्य तथ्य के अनुसार उन्होंने अपने पूरे साम्राज्य में कुल 84 किले बनवाये थे.

किले के निर्माण-कार्य से जुड़े अन्य रोचक तथ्य (Other interesting facts about kumbhalgrah building)

  • ऐसा माना जाता हैं की वास्तव में राणा कुम्भा ने कुम्भलगढ़ नहीं बनाया था किले के 15 वी शताब्दी के पहले से होने के प्रमाण मिले हैं. साक्ष्यों के अनुसार प्रारम्भिक किला मौर्य काल के राजा सम्प्रति ने 6ठी शताब्दी में बनवाया था और इसका नाम मचिन्द्रपुर रखा था. तत्कालीन किला राणा कुंभा ने बनवाया हैं.
  • किले को बनाने की शुरुआती प्रक्रिया बेहद मुश्किल थी, इसकी दीवार बनने से पहले ही गिर गयी थी. इसके बाद एक साधु की सलाह पर मेहर बाबा नाम के व्यक्ति की मानव बलि दी गयी थी. पारम्परिक तौर पर उसके सर को धड से अलग किया गया, जहां उनका सर अलग हो गया और लुढ़ककर जहाँ जाकर रुका वहां पर मंदिर का निर्माण करवाया गया और जहाँ पर धड गिरा था वहां पर दीवार का काम शुरू करवाया गया.
  • 19 वीं शताब्दी के अंत में राणा फ़तेह सिंह ने इस गढ़ का पुनरुत्थान करवाया था, किले के इतिहास में मेवाड़ी शासकों के संघर्ष और शासन से जुडी कई कहानियाँ हैं .

राणा कुम्भा एवं कुम्भलगढ़ (Rana Kumbha and Kumbhalgarh)

  • राणा कुम्भा के पास बहुत सारे तेल के लैंप थे जिसे वो हर शाम को लगाते थे, इसके पीछे उनका उद्देश्य किले के नीचे काम कर रहे किसानों तक रोशनी पहुंचाना था. हालांकि ये भी माना जाता हैं कि जोधपुर की रानी को इन लाइट्स और राणा कुम्भा के प्रति बहुत आकर्षण हो गया था और वो कुम्भलगढ़ किले तक आ गयी थी लेकिन कुम्भा ने इस असहज स्थिति को सहज करते हुए उन्हें अपनी बहिन का सम्मान दिया था.
  • राणा कुम्भा जब 1468 में प्रार्थना कर रहे थे तब उनके बेटे उदय सिंह प्रथम ने उन्हें मार दिया था, हालांकि उनकी हत्या कुम्भलगढ़ किले में नहीं की गयी थी, बल्कि चित्तोड़ के  एकलिंग जी मंदिर में की गयी थी, लेकिन कुम्भलगढ़ अपने निर्माता की हत्या का साक्षी रहा था.

कुम्भलगढ़ किले पर हुए आक्रमण (Attacks on Kumbhalgarh Fort)

  • बहुत सारे युद्ध के साक्षी रहे इस गढ़ को भेदना आसान नहीं रहा हैं. राजपूत राजाओं ने खतरे की स्थिति में कई बार किले के महलों में शरण ली थी. अल्लाउदीन खिलजी  ने किले पर आक्रमण किया था इसके बाद दूसरा आक्रमण गुजरात के अहमद शाह ने किया था लेकिन उसे असफलता मिली थी. अहमद शाह ने  बनमाता  मंदिर  को  ध्वस्त कर दिया था हालांकि  ये भी माना  जाता  हैं कि देवताओं ने किले को आक्रमण और क्षति  से बचाया था.
  • महमूद खिलजी ने 1458, 1459 और 1467 में किले पर आक्रमण किया  लेकिन  वो  किला  जीत  नहीं सका था.  अकबर, मारवाड़ के राजा उदय सिंह, आमेर के राजा मान सिंह  और गुजरात के मिर्ज़ा ने भी किले पर आक्रमण किया था, राजपूतों  ने  पानी  की  कमी  के  कारण  समर्पण  कर  दिया  था.  वास्तव में कुम्भलगढ़ किले ने केवल एक युद्ध में हार का सामना किया था जिसके पीछे पानी की कमी होना कारण  था, ये माना जाता हैं कि 3 बागबानों ने किले के साथ विश्वासघात किया था. अकबर का सेनापति  शाहबाज खान ने किले को अपने नियन्त्रण में ले लिया था , 1818 में मराठो  ने किले पर  कब्जा  कर लिया.

किले के इतिहास से जुड़े किस्से और कहानियाँ (Stories and facts about Fort History)

  • 1535 में जब चित्तौड़गढ़ किले पर मुगलों का आधिपत्य हो गया तब राणा उदय सिंह काफी छोटे थे उस समय उन्हें कुम्भलगढ़ किले लाया गया था और यहाँ पर उदय सिंह को सुरक्षित रखा गया था. पन्नाधाय ने अपने बच्चे का बलिदान देकर राजवंश की रक्षा की थी, उदय सिंह ही वो राजा थे जिन्होंने उदयपुर को बसाया था.
  • किले में लाखो टैंक भी हैं जिसे राणा लाखा ने बनवाया था. किले में एक सुंदर महल भी हैं जिसका नाम “बादल महल” हैं, जिसे बादल का महल भी कहा जाता हैं. यहाँ पर महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था.

किले की विशेषताएं (Fort’s Special Characteristics) 

  • कुम्भलगढ़ किला राजस्थान में चित्तौडगढ़ के बाद दूसरा सबसे बड़ा किला हैं,ये उदयपुर से 64 किलोमीटर दूर राजसमंद जिले में पश्चिमी अरावली की पहाड़ियों में स्थित हैं. 13 पहाड़ियों पर बना किला समुन्द्र तल से 1914 मीटर ऊँचा हैं. किले की लंबाई 36 किलोमीटर हैं जिसके कारण इसने अंतर्राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया हैं. किले की दीवार 38 किलोमीटर तक फैली हुयी हैं. किले की दीवार इतनी चौड़ी हैं कि इस पर 8 घोड़े एक साथ खड़े हो सकते हैं.
  • किले में सात दरवाजे हैं, किले में बहुत से महल, मंदिर और उद्यान हैं जो इसे आकर्षित बनाते हैं. किले में 360 से ज्यादा मंदिर हैं, इन सब में शिव मंदिर सबसे महत्वपूर्ण हैं जिसमें एक बहुत बड़ा शिवलिंग हैं. यहाँ बहुत से जैन मंदिर भी हैं, किले में स्थित जैन और हिन्दू मन्दिर उस समय के राजाओं की धार्मिक सहिष्णुता को दिखाते हैं कि कैसे उन्होंने ध्रुवीकरण करते हुए जैन धर्म को भी राज्य में प्रोत्साहान दिया था.
  • कुम्भलगढ़ किले के रास्ते में घुमावदार सड़क आती हैं और आस-पास गहन जंगल दिखाई देता हैं, ये रास्ता अरैत पोल में खुलता हैं जहां से वाच- टावर और हुल्ला पोल, हनुमान पोल, राम पोल, भैरव पोल, पघारा पोल, तोप-खाना पोल और निम्बू पोल रस्ते में आते हैं.

कुम्भलगढ़ किला राजस्थान के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में से एक हैं, यहाँ प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ ऐतिहासिक जानकारी भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं.

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