किरण बेदी का जीवन परिचय | Kiran Bedi Biography in Hindi

किरण बेदी का जीवन परिचय |Kiran Bedi Biography in Hindi

किरण बेदी का नाम किसी भी परिचय की आवश्यकता नहीं  रखता क्योंकि बेदी ने आइपीएस के तौर पर ही नहीं बल्कि समाजसेवा एवं राजनीति में भी काफी यश प्राप्त किया हैं. उन्होंने देश की प्रथम आइपीएस ऑफिसर बनकर भारतीय समाज में सशक्त महिला की छवि प्रस्तुत की हैं.  

Kiran Bedi

क्र. .

(s.No.)

परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.        पूरा नाम ((Full Name) किरण बेदी
2.        जन्म (Birth Date) 9 जून 1949
3.        जन्म स्थान (Birth Place) अमृतसर, पंजाब
4.        पेशा (Profession) पूर्व आईपीएस अधिकारी, बीजेपी नेता, पुन्डूचेरी की राज्यपाल
5.        राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय जनता पार्टी
6.        अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations)
7.        राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
8.        उम्र (Age) 70 वर्ष
9.        गृहनगर (Hometown) अमृतसर
10.    धर्म (Religion) हिन्दू
11.    जाति (Caste) खत्री
12.    वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13.    राशि (Zodiac Sign) कन्या

किरण बेदी का प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा (Early Life and Education of Kiran Bedi)

बचपन से किरण की परवरिश हिन्दू और सिख परम्पराओं से हुयी थी. किरण बेदी के माता-पिता ने अपनी बच्ची की शिक्षा के लिए कई तरह के त्याग किये थे और उन्हें पुरुष प्रधान समाज में आगे बढने का पूरा मौका दिया था. बहुत कम उम्र से ही किरण को खेलों में रूचि हो गयी थी. उन्हें अपने पिता से टेनिस खेलने की प्रेरणा मिली थी, जो कि खुद एक टेनिस प्लेयर थे, और किरण ने जब टेनिस खेलना शुरू किया तब वो मात्र 9 वर्ष की थी. हालांकि उस समाय भारतीय समाज महिलाओं के लिए इतना जागरूक नहीं था, लेकिन बेदी शिक्षा और खेल दोनों में अपने समर्पण और मेहनत से आगे बढती रही, किरण बेदी ने अमृतसर के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से पढाई की थी.  बेदी जब स्कूल में थी तब उन्होंने नेशनल कैडेट कॉर्प्स (एनसीसी) जॉइन किया था और उस समय वो अन्य गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थी.

किरण बेदी का पारिवारिक जीवन और निजी जानकारी (Kiran bedi’s Family and Personal life)

बेदी के पिता टेक्सटाइल में बिजनेस मैन थे, उनकी तीन बहिनों में रीता टेनिस खिलाड़ी और लेखिका और अनु टेनिस खिलाडी हैं.  किरण का विवाह 1972 में जबकि उनकी बेटी का जन्म 1975 में हुआ था. किरण के पति की मृत्यु 2016 में कैंसर से हो गयी. 

पिता (Father) प्रकाश लाल पेश्वारीया
माता (Mother) प्रेमलता पेश्वरिया
पति (Husband) बृज बेदी
बेटी (Daughter) सायना
बहिनें   (Sisters) शशि, रीता और अनु

 किरण बेदी की शिक्षा (Kiran Bedi’s Education) 

  • 1968 में किरण ने अमृतसर गवर्नमेंट कॉलेज से इंग्लिश में स्नातक की डिग्री ली थी, जबकि 1970 में किरण बेदी ने पंजाब यूनिवर्सिटी से राजनीति विज्ञान में मास्टर्स की डिग्री में टॉप किया था और उस पुरुष प्रधान समाज में इस बात को सिद्ध किया कि महिला कही से भी पुरुषों से कम नहीं हैं.
  • किरण बेदी के शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ में पढाई के लिए प्रेरित किया और 1988 में पुलिस में डायरेक्टर जनरल के पद पर रहते हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ में डिग्री की. 1993 में बेदी ने सामाजिक विज्ञान (सोशल साइंस) में आईआईटी से पीएचडी की थी और अपनी थीसिस ड्रग एब्यूज एंड डोमेस्टिक वायलेंस पर लिखी थी.
  • किरण बेदी ने युवावस्था से ही समाज के लिए कुछ करने का संकल्प ले रखा था और इसी दिशा में अपने सपने को पहचानते हुए उन्होंने 1972 में आइपीएस जॉइन किया, वो पहली महिला थी जिन्होंने आइपीएस में अपनी सेवाएँ दी थी और उनके कारण ही देश की महिलाओं में बदलाव की उम्मीद की किरण जगी थी.

किरण बेदी का करियर  (Kiran bedi’s Carrier)

  • किरण बेदी ने अमृतसर के खालसा कॉलेज में राजनीति विज्ञान में प्राध्यापक के तौर पर पढाने के साथ अपने करियर की शुरुआत की और वहां 2 साल तक पढ़ाने के बाद जुलाई 1972 में उन्होंने इंडियन पुलिस सर्विस में चयनित होकर इतिहास रचा था.
  • 1972 में किरण ने मसूरी नेशनल अकादमी ऑफ़ एडमिनिस्ट्रेशन से पुलिस ट्रेनिंग लेनी शुरू की थी. फाउंडेशन कोर्स के बाद उन्होंने 9 महीने तक राजस्थान के माउंटआबू में ट्रेनिंग ली. अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम- यूनियन टेरिटरी(एजीएमयूटी) में वो 80 पुरुषों के मध्य इकलौती महिला थी.
  • बेदी की पहली पोस्टिंग दिल्ली के सब डिविजन में चाणक्य – पूरी में हुयी थी, उसी वर्ष उन्होंने रिपब्लिक-डे की परेड में पुरुषों का प्रतिनिधित्व किया था.
  • 15 नवम्बर, 1978 के दिन अकाली-सिख और निरंकारी के मध्य उपजे विवाद में जब निरंकारी और अकाली सिख दिल्ली के इंडिया गेट पर उलझ गए थे तब किरण बेदी ने अपने दल-बल के साथ हिंसा पर नियंत्रण किया था.
  • 1979 में किरण को दिल्ली के पश्चिमी जिले में तैनात किया गया था जहां पर अपराध नियन्त्रण के लिए पर्याप्त ऑफिसर नहीं थे. बेदी ने पास के ग्रामीण नागरिकों को ही स्वयंसेवी बना दिया और पुलिस पेट्रोलिंग के साथ उनकी मदद के लिए सशस्त्र पुलिस बल को तैनात किया, इसके अलावा उन्होंने वार्ड में शिकायती बॉक्स भी लगा दिया, जिससे नागरिक अपनी शिकायत सीधे पुलिस तक पहुंचा सके.
  • 1988 में उन्होंने वकीलों के हड़ताल पर लाठी-चार्ज का आदेश दे दिया, और राजेश अग्निहोत्री नाम के वकील के हाथ बाँध दिए, इसके बाद वकीलों ने हडताल की जिसके कारण दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की जाँच के लिए वाधवा कमिशन बिठाया. और कमिशन की जाँच के बाद उनका ट्रांसफर डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर मिज़ोरम कर दिया गया.
  • अक्टूबर 1981 को जब किरण दिल्ली में ट्रेफिक डीसीपी बनी तो उन्होंने अगले वर्ष 1982 में एशियन गेम के कारण होने वाली ट्रेफिक से जुड़े सभी समस्याओं को बखूबी काम किया.  किरण ने दिल्ली इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग, म्युनिसिपल कोरपोरेशन और डेवलपमेंट ओथॉरिटी ऑफ़ दिल्ली के साथ भी ट्रैफिक की व्यवस्था को सही करने के लिए  सामंजस्य बिठाया. बेदी ने कुछ नयी नीतियां जैसे गलत वाहन चालकों और गलत पार्किंग करने वालों के लिए चालान बनाने की जगह तुरंत फाइन भरने जैसे नए कानून बनाये. बेदी ने प्रायोजकों की मदद से 3,500,000 रूपये का ट्रैफिक गाइडेंस मटिरियल शिक्षा सामग्री की व्यवस्था भी की. बेदी ने दिल्ली पुलिस के लिए ट्रैफिक में काम करने वाले इंस्पेक्टर के लिए पहली बार चौपहिया वाहनों की व्यवस्था की. किरण को उनके निष्पक्ष ट्रेफिक नियमों के लिए क्रेन बेदी भी कहा गया, क्योंकि उन्होंने इंदिरा गाँधी की कार गलत पार्किंग में लगे होने पर भी जुर्मना कर दिया था.
  • 1983 में किरण का स्थानान्तरण 3 वर्ष के लिए गोवा कर दिया गया, ये माना जाता हैं कि इंदिरा गाँधी के अलावा आर.के धवन और यशपाल कपूर भी उनके इस ट्रांसफर के पीछे थे.
  • उनकी अंतिम पोस्टिंग डायरेक्टर जनरल ऑफ़ इंडिया ब्यूरो ऑफ़ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट में मई 2005 में हुयी थी. उन्हें कैदियों की स्थिति सुधारने के कार्यों एवं पुलिस कार्यों के लिए डॉक्टर ऑफ़ लॉ की डिग्री भी प्रदान की गयी.
  • वास्तव में डॉक्टर किरण बेदी पहली महिला हैं जिन्होंने इंडियन पुलिस सर्विस में ऑफिसर रैंक हासिल की थी. उन्होंने 35 वर्ष तक इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दी, इस तरह आइपीएस के तौर पर किरण बेदी ने कभी मुश्किल कामों से मुंह नहीं मोड़ा, उन्होंने मिजोरम में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस के तौर पर अपना काम संभाला तो इसके बाद चंडीगढ़ में लेफ्टिनेंट गवर्नर जनरल के सलाहकार का काम भी देखा, फिर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में डायरेक्टर जनरल  और यूनाइटेड नेशन में शांति बनाये रखने के लिए ऑपरेशन में सिविलियन पुलिस एडवाइजर के तौर पर भी काम किया. अंतत: 2007 में उन्होंने डायरेक्टर जनरल पद से स्वैछिक सेवानिवृति ली थी.

किरण का टेनिस करियर (Kiran’s Tennis Carrier)                                                                     

किरण ने 1964 में टेनिस खिलाड़ी के तौर पर करियर शुरू किया था और उन्होंने दिल्ली के जिमखाना में जूनियर लॉन टेनिस चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था. उन्होंने बहुत से टेनिस चैंपियनशिप जैसे जूनियर नेशनल लॉन टेनिस चैंपियनशिप (1966), आल इंडिया इंटरवेर्सिटी टेनिस टाईटल (1968) , नॉर्थरन इंडिया लॉन टेनिस चैंपियनशिप (1970) और नेशनल विमेंस लॉन टेनिस चैंपियनशिप  (1976) में भी भाग लिया था. `1973 में श्रीलंका के विरुद्ध हुए लियोनेल फोंसेका मेमोरियल ट्रॉफी (Lionel Fonseka Memorial Trophy) में ये भारतीय टीम का भी हिस्सा थी. इसके अलावा  उन्होंने एशिया महिला लॉन टेनिस चैंपियनशिप का अवार्ड भी जीता था.

किरण का राजनैतिक करियर (Kiran’s Political Carrier)

किरण बेदी ने 2015 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन की थी और तुरंत ही उन्हें दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिए विधानसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट मिल गया. हालांकि कृष्णा नगर निर्वाचन क्षेत्र में वो ये चुनाव आप प्रतिनिधि एस. के. बग्गा से मात्र 2277 वोट से हार गयी, लेकिन इसके बाद भी उनका राजनैतिक कैरियर रुका नहीं बल्कि आगे बढने लगा.  2016 में 22 मई के दिन किरण बेदी को पुंडूचेरी में लेफ्टिनेंट गवर्नर के पद पर नियुक्ति मिली.

किरण बेदी और सामजिक कार्य (Kiran Bedi and Social work)

  • 1986 में जब वो डीसीपी के तौर पर नार्थ डिस्ट्रिक्ट ऑफ़ दिल्ली में तैनात थी, तो उन्होंने ड्रग्स पर काबू करने के लिए बहुत से डेटोक्स सेंटर शुरू किये. इससे पहले कि उनकी किसी और पोस्ट पर ट्रांसफर होती उन्होंने 17 अन्य पुलिस अधिकारीयों के साथ मिलकर नवज्योति पुलिस फाउंडेशन (एनआईएफ) की स्थापना की थी. संस्था को ड्रग एडिक्ट को एडिक्शन छुडवाने और उनके रिहेबिलीशन के उद्देश्य से शुरु किया गया था, लेकिन अब इसका कार्य महिला सशक्तिकरण के अतिरिक्त और कई आयाम तक पहुँच चूका हैं.
  • दिल्ली की जेल में इंस्पेक्टर जनरल पद पर बेदी को 1993 में नियुक्त किया गया, उन्होंने तिहाड़ जेल की तरह कैदियों के लिए कई तरह के सुधार कार्य शुरू किये जिनमें डिटोक्सीफिकेशन प्रोग्राम, आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन परिजन कोर्स, योग, विपसना मेडिटेशन, कैदियों कि शिकायत के शिक्षा संबंधित कार्यक्रम मुख्य थे.
  • 1994 में बेदी ने इंडिया विजन फाउंडेशन को भी सेट किया था, जिसमे पुलिस सुधार, कैदियों की स्थिति सुधार कार्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण एवं कम्युनिटी विकास के कार्य किये थे.
  • इस तरह अभी किरण बेदी के दो एनजीओ चल रहे हैं जिनके नाम नवज्योति और इंडिया विज़न फाउंडेशन हैं, इन एनजीओ का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैदियों समेत सभी के शिक्षा और अन्य स्किल का विकास करना हैं. इसके अलावा किरण बेदी “इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी)” की सदस्य भी थी जिसमें उनके साथ अन्ना हजारे और अरविन्द केजरीवाल भी शामिल थे.

विवाद (Controversy)

  • 1983 में जब किरण बेदी गोवा की एसपी थी तब उन्होने अनौपचारिक तौर पर “जौरी ब्रिज का आम-जनता के लिए उद्घाटन करके विवाद को आमन्त्रण दिया था.
  • किरण तब भी विवादों में उलझी थी जब उन्होंने अपनी बेटी सायना की देखभाल के लिए छुट्टी का आवेदन दिया था, हालांकि उनहोंने आईजीपी द्वारा छुट्टी को रिकमंड करवाया था लेकिन गोवा सरकार ने इसको आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी, प्रतापसिंह राने जो कि उस समय गोवा के मुख्यमंत्री थे उन्होंने भी किरण को बिना अवकाश दिए छुट्टी पर होने की घोषणा की थी.
  • बेदी की तब भी आलोचना हुयी थी जब उन्होंने दिल्ली में लाल किले पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठी चार्ज का आदेश दिया था.
  • 1988 में किरण ने दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले वकील राजेश अग्निहोत्री  को हाथ बांधकर कोर्ट में पेश किया था, जिसके कारण किरण को वकीलों के आक्रोश का सामना करना पड़ा था.
  • 1992 में किरण फिर से विवादों में उलझ गयी जब उनकी बेटी ने मिजोरम का निवासी बताते हुए लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में आवेदन किया. मिजोरम के छात्रों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया और ये दावा किया कि वो मिजोरम के नहीं हैं, बाद में इस कारण से बेदी को मिज़ोरम छोड़ना पड़ा था.
  • किरण बेदी ने तिहाड़ में इंस्पेक्टर के कार्यकाल के दौरान प्रबंधन में बहुत से परिवर्तन किये थे फिर भी बेदी जब तिहाड़ जेल में इंस्पेक्टर जनरल के तौर पर कार्य कर रही थी तब उन पर अपने सम्मान को बढाने और यश प्राप्ति के लिए कैदियों की सुरक्षा को नजरंदाज करने का आरोप लगा था और काफी आलोचना की गयी थी.
  • 1993 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने बेदी को एक अंडर-ट्रायल कैदी की मेडिकल स्थिति को नजरंदाज करने के लिए अल्टीमेटम दिया था.
  • 1994 में दिल्ली सरकार से बेदी को तब समस्या हुयी थी जब उन्हें यूएस प्रेसीडेंट बिल क्लिंटन द्वारा वाशिंगटन डीसी में नेशनल प्रेयर ब्रेकफास्ट के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने इस आमन्त्रण को स्वीकार नहीं किया था, फिर अगले वर्ष 1995 में उन्हें फिर से आमन्त्रण मिला और सरकार ने फिर से मना कर दिया, जिसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में न्यूज लेटर पब्लिश किया और ये बताया कि उनके कुछ उच्च अधिकारी उनसे जलते हैं.
  • किरण की इस बात पर भी आलोचना की गयी थी कि उन्होंने भयानक अपराधी चार्ल्स सोभराज को तिहाड़ जेल में टाईपराईटर उपलब्ध करवाया था जोकि जेल के नियमों के अनुसार ये प्रतिबंधित था,
  • 26 नवम्बर 2011 को उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच में एक केस दर्ज किया गया जिसमें उन पर उनके एनजीओ के फंड के दुरूपयोग का आरोप लगाया गया. ये केस दिल्ली के ही एक वकील देविंदर सिंह चौहान के द्वारा लगाया गया था.

अवार्ड्स एंड अचीवमेंट्स (Awards and Achievements)

  • 1980 में उन्हें भारत के प्रधानमंत्री ने पुलिस मैडल फॉर गैलेंट्री से नवाजा था. यूनाइटेड नेशन में वो शान्ति के लिए सिविलियन पुलिस एडवाइजर बनी थी वहां उनकी मेहनत और समर्पण को यूएन में सम्मान मिला एवं उन्हें यूएन मैडल से भी नवाजा गया था.
  • डॉक्टर बेदी को साप्ताहिक मैगज़ीन रीडर डाइजेस्ट द्वारा भारत में सबसे ज्यादा मानी जाने वाली और विश्वसनीय महिला के लिए वोट मिला हैं. उनके जीवन पर ऑस्ट्रेलियन फिल्म मेकर ने ‘यस मैडम सर’ नाम की बायोपिक भी बनाई हैं.
  • उन्हें पुलिस और आम लोगों के मध्य बेहतर सम्बन्ध बनाने के लिए एशिया का नोबेल शांति पुरूस्कार माना जाने वाला रेमन मेगन्ससे अवार्ड भी मिला था,
  • डॉक्टर किरण बेदी ने आई डेयर (I Dare), इट्स ऑलवेज पॉसिबल, क्रिएटिंग लीडरशिप जैसी कुछ किताबें लिखी हैं, इसके अलावा बेदी मलेशिया में लीडरशिप ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट आइक्लिफ (Iclif) में विजिटिंग फैकल्टी और अकादमिक भी हैं,
  • किरण को तिहाड जेल के किये कार्य पर लिखने पर जवाहर लाल नेहरु फ़ेलोशिप भी मिली थी. उनकी संस्था नवज्योति पुलिस फाउंडेशन को यूनाइटेड नेशन से ड्रग एब्यूज प्रिवेंशन के लिए सर्ज सोइटरोफ मेमोरियल अवार्ड (Serge Soitiroff Memorial Award’ )से भी सम्मानित किया गया था.
वर्ष  उपलब्धि
1972  भारत की प्रथम आईपीएस ऑफिसर
1976  नेशनल वीमेनस लॉन टेनिस चेम्पियनशिप की विजेता
1979 प्रेजिडेंट्स गेलेंट्री अवार्ड की विजेता(President’s Gallantry Award)
1981 वीमेन ऑफ़ दी नेशनल सोलिडेरीटी वीकली, इंडिया   (Women of the Year Award by National Solidarity Weekly, India)
1991 एशिया रीजन अवार्ड फॉर ड्रग प्रिवेंशन एंड कंट्रोल बाय इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ़ गुड टेम्पलर्स (आईओजीटी), नोर्वे
1992 इंटरनेशल वुमन अवार्ड
1994  रमन मेग्न्सेसे अवार्ड
1995 महिला शिरोमणि अवार्ड, Father Machismo Humanitarian Award, लायन ऑफ़ दी इयर बाय डॉन बोस्को श्राइन ऑफिस, बोम्बे- इंडिया
1999 अमेरिकन फेडेरेशन ऑफ़ मुस्लिम्स ऑफ़ इंडियन ओरिजिन (एएफएमआई) में अवार्ड
200२ ब्लू ड्राप ग्रुप मैनेजमेंट, कल्चरल और आर्टिस्टिक एसोसिएशन, इटली  से वुमन ऑफ़ दी इयर अवार्ड,
2004 यूनाइटेड नेशन मैडल
2005 हार्मोनी फाउंडेशन द्वारा सामाजिक न्याय के लिए मदर टेरेसा अवार्ड
2007 सुर्यद्त्ता ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट से सूर्यदत्ता नेशनल अवार्ड
2009 आज तक द्वारा वीमेन एक्सीलेंस अवार्ड
2010  तरुण क्रांति पुरस्कार
2011 इन्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ प्लनिंग and मैनेजमेंट द्वारा भारतीय मानवता विकास पुरस्कार
2013 राय यूनिवर्सिटी द्वारा ऑनरी डिग्री ऑफ़ डॉक्टर ऑफ़ पब्लिक सर्विस (Honorary Degree of Doctor of Public Service by Rai University)

 किरण बेदी का जीवन पूरे भारतीय समाज के लिए गौरव का विषय हैं, उनका काम के प्रति समर्पण, निडरता और समाज हित में किये गये कार्य समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायी हैं.

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