कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय  | Karl Marx Biography in Hindi

कार्ल मार्क्स का जीवन परिचय  (Karl Marx Biography in Hindi)

जर्मनी के फिलोसोफर, समाजवादी, इतिहासकार रिवोल्यूशनरी इकोनॉमिस्ट और नेता के रूप में पहचाने जाने वाले कार्ल मार्क्स की ख्याति विश्व-भर में हैं.  मार्क्स ने ही आधुनिक एवं वैज्ञानिक समाजवाद की खोज की थी, जिसमें एक ऐसे समाज की परिकल्पना की गयी जिसमें कोई सम्पति निजी नहीं होती. उनके सिद्धांतों और विचारों को ही मार्क्सिज्म कहा जाता हैं, जिसमें समाजवाद और कम्युनिस्ट की बात की गयी थी जिसके अनुसार आर्थिक और सरकारी तन्त्र में नागरिकों के पास समान प्रोपर्टी और निजता को महत्व दिया गया था और ये आंदोलन ही पूरी दुनिया में फैला.

Karl Marx biography

क्र. .(s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.        पूरा नाम ((Full Name) कार्ल,हेनिरीच मार्क्स (Karl Heinrich Marx)
2.        जन्म (Birth Date) 5 मई 1818
3.        जन्म स्थान (Birth Place) जर्मनी में ट्राईयेर,रहेनिश प्रुशिया(Trier, Rhenish Prussia)
4.        पेशा (Profession) दार्शनिक, क्रांतिकारी, राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी, अर्थशास्त्री, पत्रकार, इतिहासकार, समाजवादी
5.        राजनीतिक पार्टी (Political Party) सोश्यलिस्ट रिवोल्यूशनरी (socialist revolutionary)
6.        अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations)
7.        राष्ट्रीयता (Nationality)
8.        उम्र (Age) 64 वर्ष
9.        गृहनगर (Hometown) ट्रायर,प्रुशिया
10.    धर्म (Religion)
11.    जाति (Caste)
12.    वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13.    राशि (Zodiac Sign)

 

कार्लमार्क्स: परिवार और निजी जानकारी (Karl Marx :Family and Personal Information)

  • कार्ल मार्क्स के पिता पेशे से वकील थे और माँ एक होलेन्ड की डच महिला थी. हालाँकि  उनके माता-पिता दोनों ही रेबाईज (rabbis )के वंशज थे, जो कि यहूदी धर्म की शिक्षा देते थे.
  • कार्ल मार्क्स अपने माता-पिता के 9 बच्चो में से पहले जीवित बच्चे थे, उनके पिता कान्त (kant) और वोल्टेयर (Voltaire)  के प्रति  समर्पित थे, और उन्होंने प्रुसिया के लिए सम्विधान के लिए होने वाले आंदोलन में भाग लिया था.
  • कार्ल के जन्म से एक वर्ष पूर्व उनके पिता ने एवन्जेइयल एस्टाब्लिश्मेंट चर्च (Evangelical Established Church)में ईसाई धर्म ग्रहण किया था. उन्हें किसी कैथोलिक नहीं बल्कि ल्युथेरन ने बेपटाईज किया था इसलिए कहा जा सकता हैं की उन्होंने ल्युथेरेनिज्म (Lutheranism) अपना लिया. कार्ल की माँ ने उनके पिता की मृत्यु तक धर्म परिवर्तन नहीं किया था.

कार्ल मार्क्स का विवाह  ( Karl Marx Marriage details)

1836 में जब मार्क्स राजनैतिक गतिविधयों में उत्साह से भाग ले रहे थे तब उनका जेनी वोनवेस्टफालेन नाम की महिला से सगाई हो गयी, वो महिला  ट्रायर के सम्मानीय परिवार से थी. मार्क्स के गैर-जिमेदाराना रवैये को देखते हुए उनके पिता बहुत गुस्सा हुए और उन्होंने अपने बेटे को समझाया कि उनकी पत्नी कुलीन वर्ग से सम्बंध रखती हैं इसलिए वो भी जिम्मेदाराना व्यवहार करे लेकिन इसके भी अगले 7-8 वर्षों के बाद उन्होंने विवाह किया और विवाह के बाद दोनों पेरिस चले गए. 

पिता  (Father) हेईनरिच मार्क्स
माता (Mother) हेनरीएट प्रिजबर्ग
पत्नी (Wife) जेनी वोन वेस्टफलेन(Jenny von Westphalen)
पुत्री (Daughter) एलेनर मार्क्स(Eleanor

 Marx), लौरा मार्क्स( Laura  Marx), जेनी मार्क्स लोंग्युएट (Jenny Marx Longuet), हेलेन डेम्युथ (Helene Demuth), जेनी एवेलिन फ्रांसिस मार्क्स(Jenny Eveline Frances Marx)

पुत्र (Son) एडगर मार्क्स (Edgar Marx)

कार्ल का बचपन और प्रारम्भिक जीवन  (Karl Marx’s early life and Childhood)

  • कार्ल के यहूदी पृष्ठभूमि से होने के कारण उन्होंने समाज में भेदभाव और पूर्वाग्रह का सामना किया था और इसी कारण उनमें ये इस दिशा में विचार उपजे कि समाज में धर्म का किस हद तक योगदान हो सकता हैं और कैसे धर्म किस व्यक्ति के जीवन को और सामजिक परिवर्तन को प्रभावित  कर सकता हैं.
  • कार्ल भी उसी चर्च में 6 वर्ष की उम्र में बेप्टाइज(baptized) हुए. कार्ल ने ल्युथेरन एलीमेंट्री स्कूल से पढ़ाई की थी लेकिन बाद में वो एथीस्ट बन गये,जो भगवान पर विशवास नहीं करते और उन्होंने मटीरियलिस्टिक सच को माना एवं यहूदी और ईसाई दोनों धर्मों को रिजेक्ट किया. उन्होंने ही कहा था कि धर्म एक ओपियम मतलब ड्रग हैं जो कि आधुनिक कम्युनिज्म हैं.
  • मार्क्स एक औसत छात्र थे,उन्होंने 12 वर्ष तक की शिक्षा अपने घर में ही ली थी,और इसके बाद 5 वर्ष 1830 से लेकर 1835 तक ट्रायर के जेस्युट हाई स्कूल में पढ़ाई की, जो कि उस समय फ्राईएड्रीच विल्हेल्म जिम्नेजियम (Friedrich Wilhelm Gymnasium)के नाम से जानी जाती थी. स्कूल के प्रिंसिपल कार्ल के पिताजी का दोस्त था जो कि एक लिबरल और कन्तियन था और रैनलैंड के लोग उसकी इज्जत करते थे लेकिन ऑथोरिटीज उस पर संदेह करती रहती थी, और गहन निगरानी में रहने के बाद आखिर में 1832 में स्कूल पर छापा पड गया. इस दौरान मार्क्स के लिखे गये लेखों में ईसाई समुदाय के लिए समर्पण और मानवता के लिए त्याग की भावना दिखाई देती हैं जबकि जिम्नेजियम में उन्होंने इतिहास,गणित,साहित्य और ग्रीक एवं लेटिन ऐसी भाषा का ध्ययन किया था.
  • कार्ल फ्रेंच और लेटिन में सिद्ध हो गये थे और वो इन दोनों भाषाओँ को पढ़ भी सकते थे और लिख भी सकते थे, बाद के वर्षों में उन्होंने स्पेनिश,इटेलियन,डच ,स्केनडीनेवियन (Scandinavian),रशियन और इंग्लिश जैसी भाषाएँ भी सीखी थी, वो शेक्सपियर को पसंद करते थे. उनका दी न्यू-यॉर्क डेली ट्राईब्यून शो में छपे आर्टिकल को देखकर समझा जा सकता हैं कि उन्हें इंग्लिश का कितने अच्छे से ज्ञान हो गया था, हालांकि बोलने में उनका जर्मन एसेंट ही झलकता था.

कार्ल मार्क्स का करियर (Karl Marx’s Carrier)

  • अक्टूबर 1835 में मार्क्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोन में पढना शुरू किया और यहाँ के विद्रोही माहौल में मार्क्स ने अपने छात्र जीवन को खुलकर एन्जॉय किया. एक साल के 2 सेमेस्टर में ही उन्हें शराब पीने, शांति भंग करने और अनुशासन हीनता के आरोप में जेल हो गयी. कार्ल ने जो कोर्स किये उनमे मानवता के प्रति समपर्ण ज्यादा था. उन्होंने टावेर्न क्लब की अध्यक्षता भी की और कवियों (पोएट) के क्लब में शामिल हो गये जिसमे राजनैतिक एक्टिविस्ट भी शामिल थे. इस तरह बोन में एक विद्रोही और राजनैतिक जीवन से कार्ल मार्क्स का सामना हुआ. फ्रेंकफर्ट में फेडरेल डाईट के सेशन को बाधित करने के लिए बहुत से छात्रों को निष्कासित किया गया. साल के अंत में उनके पिता ने उनसे बर्लिन की यूनिवर्सिटी में पढने के लिए जोर दिया इसलिए मार्क्स ने एक साल बाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्लिन में लॉ और फिलोसोफी पढने के लिए बॉन छोड़ दिया था.
  • बर्लिन में मार्क्स ने फिलोसोफी और लॉ की पढाई की, यहाँ उन्हें जी.डब्लू.एफ हेगल ने फिलोसोफी पढाई. मार्क्स को शुरू में हेगल में रूचि नहीं थी लेकिन बाद में वो कई युवा हेगेलीयन से जुड़ गये (हेगेलियन ऐसे छात्रों का समूह था जो उन दिनों धार्मिक और राजनैतिक स्थितियों की निंदा किया करते थे,इसमें ब्रूनो ब्युर (Bruno Bauer )और ल्युडविग फ्यूरबेच (Ludwig Feuerbach) भी शामिल थे)
  • मार्क्स ने 1841 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ जेना से डोक्टरेट की उपाधि ग्रहण की,लेकिन उनकी कट्टरपंथी राजनीति ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में कोई मुकाम नहीं दिलाया. 1842 में उन्होंने जर्नलिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया और कोलोग्ने के एक लिबरल न्यूजपेपर  रहेइन्स्चे ज़ितुंग(Rheinische Zeitung) में एडिटर बन गए. इसके एक वर्ष बाद सरकार ने न्यूजपेपर को दबाने के आदेश जारी किये. जो कि 1 अप्रैल 1843 से लागू होने वाले थे लेकिन मार्क्स ने 18 मार्च को ही इस्तीफा दे दिया.
  • कार्ल ने पेरिस में एर्नोल्ड र्युज के साथ मार्क्स ने एक राजनीतिक जर्नल ड्युटश्च-फ़्रांजोसिस्चे जाहर्बुचर (Deutsch-Französische Jahrbücher) नाम का जर्मन-फ्रेंच वार्षिक जर्नल शुरू किया. वास्तव में 1843 में पेरिस यूरोप की राजनीति का मुख्य केंद्र था, लेकिन केवल एक इश्यु के पब्लिश होते-होते एर्नोल्ड र्युज और मार्क्स के बीच में मतभेद पैदा हो गये जिसके कारण जर्नल ज्यादा चल नहीं सका.
  • 1844 के अगस्त में जर्नल के कोंट्रीब्यूटर फ्राईएड्रीच एंगल्स(Friedrich Engels) के साथ मार्क्स की दोस्ती हो गयी जो आजीवन चली, उन दोनों ने एक साथ युवा हैगीलियन ब्रूनो ब्युर (Bruno Bauer) के दार्शनिक सिद्धांतों की क्रिटिसिज्म का काम शुरू किया, मार्क्स और एंगल्स का एक साथ पहला पब्लिकेशन 1845 में आया था जिसका नाम दी होली फॅमिली था.
  • बाद के वर्षों में मार्क्स बेल्जियम के ब्रुसेल चले गए और एक अन्य न्यूजपेपर वोर्टवार्ट्स (Vorwärts) के लिए लिखने लगे,जो कि बाद में कमुनिस्ट लीग बनकर उभरा. ब्रुसेल्स में मार्क्स ने समाजवाद पर काम करना शुरू किया और हैगीलियन के दर्शन शास्त्र से पूरी तरह अलग हो गए, वहां उन्होंने जर्मन आइडियोलोजी लिखी जिसमें उन्होंने सबसे पहले ऐतिहासिक मटेरियलिजम की थ्योरी के बारे में लिखा लेकिन मार्क्स इसके लिए प्रकाशक नही खोज पाए  और इसके अलावा उस समय लिखी  थीसिस ऑन फ्यूरबेच भी उनके देहान्त तक पब्लिश नहीं हो सकी थी.
  • अगले दो वर्ष ब्रुसेल में रहते हुए कार्ल ने एंगेल के साथ काम किया. मेनचेस्टर,इंग्लॅण्ड में एंगेल उनसे मिले थे जहां एंगेल के पिता की टेक्सटाइल फर्म की ब्रांच फैक्ट्री थी. एंगेल्स यंग हैगीलियन (Young Hegelian) भी थे और कम्युनिस्ट रेबी (communist rabbi) मोसेस हेस ने उन्हें कम्युनिज्म में कन्वर्ट किया था. इस तरह एंगेल और मार्क्स एक ही विचारधारा के थे और दोनों ने मिलकर 1845 में डाई हेइलिज फेमिली(Die heilige Familie ) पब्लिश की थी. इसके बाद उन्होंने 1845-46 में डाई ड्युटश्चे आइडियोलोजी (Die deutsche Ideologie) भी लिखी जो कि 1932 में पब्लिश हुयी,जिसमें समाज के ऐतिहासिक ढाँचे को समझाया गया हैं कि कैसे आर्थिक सक्षम वर्ग समाज को डोमिनेट करता आया हैं,लेकिन उस समय इस किताब को कोई पब्लिशर नहीं मिला और लेखक के जीवित रहते ये अनपब्लिश्ड ही रही.
  • इस तरह ब्रुसेल में कार्ल ने मजदूर वर्ग के नेताओं के आंदोलन के साथ सामंजस्य बिठाया और बुद्धिमत्ता के साथ इसे आगे बढ़ाया लेकिन इसे सहीदिशा 1846 की शुरुआत में तब मिली जब मार्क्स ने यूरोप और आस पास के समाजवादियों को जोड़ने के लिए कम्युनिस्ट कोरेसपोंड़ेंस कमिटी की नींव रखी. उनके आइडिया से प्रेरित होकर इंग्लैंड के समाजवादियों ने एक कांफ्रेंस का आयोजन किया और कम्युनिस्ट लीग बनाई और 1847 में लन्दन के सेन्ट्रल कमिटी मीटिंग में ऑर्गेनाइजेशन ने मार्क्स और एंगलस से कम्युनिस्ट पार्टी के लिए मेनिफेस्टो लिखने का आग्रह किया.
  • उन्होंने 1847 में आई दी पोवेरटी पावर्टी ऑफ फिलासफी थिंकर पियर जोसफ प्राउडहोन (Pierre-Joseph Proudhon)का भी विरोध किया. प्राउडहोन आर्थिक संस्थाओं में सामंजस्य बनाना चाहते थे और बुरे को हटाकर कुछ अच्छे लक्षणों को बचाया रखना चाहते थे जबकि मार्क ने कहा कि किसी भी आर्थिक सिस्टम में दो विपरित ध्रुवों के मध्य कोई तरह का सामंजस्य नहीं बन सकता.
  • कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो 1848 में पब्लिश हुआ और इसके तुरंत बाद 1849 में मार्क्स को बेल्जियम से निष्कासित कर दिया गया वो फ़्रांस गए जहां उन्होंने एक समाजवाद वाली क्रांति की कोशिश की ;लेकिन उन्हें वहां से भी बाहर भगा दिया गया, प्रुसिया ने उन्हें शरण देने से मना कर दिया इसलिए मार्क्स लन्दन चले गए,हालाँकि ब्रिटेन ने भी उन्हें नागरिकता देने से साफ़ इंकार कर लेकिन वो अपने देहांत तक लन्दन में ही रहे.
  • 1848 में यूरोप के फ़्रांस, इटली और ऑस्ट्रिया में क्रांति हुयी. मार्क्स को बेल्जियम सरकार द्वारा निष्कासित करने पर पेरिस की प्रोविजनल सरकार के सदस्य ने आमंत्रित किया. जैसे ही ऑस्ट्रिया और जर्मनी में क्रांति शुरू हुयी मार्क्स राइनलैंड लौट गए.  कोलोग्ने (Cologne) में मार्क्स ने वर्किंग क्लास और डेमोक्रेटिक बोर्जियोसी (bourgeoisie) के मध्य  गठबंधन की नीति को पसंद किया, जिसके कारण फ्रेंकफर्ट असेम्बली में  मजदुर संघ के उम्मीदवार के नामांकन का विरोध किया.  उन्होंने एंगल्स के इस फैसले का समर्थन किया कि कम्युनिस्ट के मेनिफेस्टो को नष्ट कर दिया जाये और कम्युनिस्ट लीग को भंग कर दिया जाए.
  • मार्क्स ने जून 1849 में शुरू हुए न्यूज पेपर न्यु रेइंश्ची ज़ित्युंग (Neue Rheinische Zeitung) के पन्नो में अपनी नीति समझाई भी थी जिसमें नए संविधान की मांग और रशिया से युद्ध की मांग की थी. अगस्त 1848 में पहली राइनलेंड डेमोक्रेटिक कांग्रेस भी आयोजित की.
  • लंदन में मार्क्स ने जर्मन वर्कर्स एज्युकेशनल सोसायटी की मदद कीऔर वहां उन्होंने कम्युनिस्ट लीग का हेडक्वार्टर भी शुरू किया, उन्होंने जर्नलिस्ट के तौर पर काम करना जारी रखा जिसमें 1852 से 1862 तक उन्होंने न्यूयॉर्क डेली ट्राईब्यून के लिए काम किया,लेकिन इससे उन्हें आजीविका के लिए आवश्यक धन भी नहीं कमा सके, इसके लिए एंगलस ने उनकी सहायता की.
  • मार्क्स ने कैपिटलिज्म और इकनोमिक थ्योरी पर ध्यान देना शुरू किया और 1867 में उन्होंने दास केपिटल का पहला वोल्यूम प्रकाशित किया. मार्क्स का बचा हुआ जीवन इसके दुसरे वोल्यूम को वापिस लिखने और रिवाइज करने में ही बीत गया लेकिन वो उनकी मृत्यु तक पूरे नहीं हो सके और बचे हुए दोनों वोल्यूम उनकी मृत्यु के बाद ही एंगल्स ने संग्रहित करके प्रकाशित करवाए.

कार्ल मार्क्स की मृत्यु (Karl Marx ‘s Death)

मार्क्स की मृत्यु 14 मार्च 1883 को लन्दन में हुयी थी,उनके वास्तविक मकबरे पर केब्व्ल एक पत्थर था लेकिन 1954 में ग्रेट ब्रिटेन ने एक बड़ा सा मकबरा बनवाया, इस स्टोन की अंतिम लाइन में “दी कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो”  और फ्यूरबेच की थीसिस से लिया एक प्रेरक वाक्य लिखा हैं

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