काका कालेलकर का जीवन परिचय | Kaka Kalelkar Biography in Hindi

काका कालेलकर का जीवन परिचय (Kaka Kalelkar Biography in Hindi)

भारत को स्वतंत्रता दिलाने में बहुत से ऐसे स्वतंत्रता सैनानी थे, जिन्होंने गाँधी जी की अहिंसावादी विचारधारा को अपनाते हुए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था. उन्हीं में एक हैं काका साहिब कालेलकर, जोकि ऐसे स्वतंत्रता सैनानी थे जोकि गाँधी जी के प्रमुख अनुयायी भी थे. इसके अलावा वे एक प्रमुख लेखक एवं साहित्यकार भी थे. उन्हें कई भाषाओँ का ज्ञान था. कालेलकर जी को भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्मानित किया गया था. इनके द्वारा की गई रचनाओं एवं इनके जीवन के सभी पहलूओं के बारे में जानने के लिए नीचे नजर डालें.

Kaka sahab Kalelkar

जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र. म. परिचय बिंदु जीवन परिचय
1. पूरा नाम (Full Name) दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर
2. अन्य नाम (Other Name) काका कालेलकर, सवई गुजराती एवं आचार्य कालेलकर
3. पेशा (Profession) समाज सुधारक, लेखक, साहित्यकार, कार्यकर्ता एवं पत्रकार
4. प्रसिद्धि (Famous As) स्वतंत्रता सैनानी के रूप में एवं महात्मा गाँधी के प्रमुख अनुयायी
5. जन्म (Birth Date) 1 दिसंबर, 1885
6. जन्म स्थान (Birth Place) सतारा, महाराष्ट्र
7. नागरिकता (Nationality) भारतीय
8. भाषा का ज्ञान (Knowledge of Language) हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला एवं गुजराती
9. मातृभाषा (Mother Toungue) मराठी
10. गृहनगर (Hometown) कलेली गाँव, सावंतवाड़ी, महाराष्ट्र
11. मृत्यु (Death) 21 अगस्त, 1981
12. उम्र (Age) 96 साल
13. मृत्यु स्थान (Death Place) नई दिल्ली में उनके संनिधि आश्रम में

शुरूआती जीवन एवं शिक्षा (Early Life and Education)

काका कालेलकर जी महाराष्ट्र के एक छोटे से गाँव कलेली के मूल निवासी थे, जहाँ से इन्हें इनका उपनाम कालेलकर मिला. कालेलकर जी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा वहां के स्थानीय स्कूल से ही प्राप्त की. इसके बाद सन 1903 में इन्होने अपनी मेट्रिक की परीक्षा पास की, और सन 1907 में पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से इन्होने दर्शनशास्त्र में बीए से स्नातक पूरा किया. इसके बाद कालेलकर जी ने एलएलबी प्रथम वर्ष की परीक्षा भी दी थी और सन 1908 में उन्होंने बेलगाँव में गणेश विद्यालय में प्रवेश किया.

काका कालेलकर का करियर (Career)

  • काका कालेलकर जी ने ‘राष्ट्रमत’ नाम के एक राष्ट्रवादी मराठी दैनिक के एडिटोरियल स्टाफ के रूप में कुछ समय के लिए कार्य किया था और फिर सन 1910 में बड़ौदा में गंगानाथ विद्यालय नाम के एक स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्य किया.
  • कुछ सालों बाद, ब्रिटिश सरकार ने सन 1912 में अपनी राष्ट्रवादी भावना के कारण स्कूल को बंद करवा दिया. तब कालेलकर जी ने पैदल ही हिमालय की यात्रा करने का फैसला किया, और वे चल दिए. इसके बाद में उन्होंने सन 1913 में बर्मा यानि म्यांमार की यात्रा की, जहाँ वे आचार्य कृपालनी के साथ शामिल हुए.

गाँधी जी से मुलाकात (Meeting With Gandhi ji)

बर्मा की यात्रा के बाद इनकी मुलाकात सन 1915 में महात्मा गाँधी जी से हुई. गाँधी जी से मिलने के बाद वे उनसे बहुत प्रभावित हुए, और उनसे प्रभावित होकर वे साबरमती आश्रम के सदस्य बने. इसके बाद कालेलकर जी ने साबरमती आश्रम की राष्ट्रीय शाला में भी पढ़ाया. कुछ समय के लिए उन्होंने सर्वोदय के सम्पादक के रूप में सेवा की, जिसे आश्रम के परिसर द्वारा चलाया जाता था. गाँधी जी ने कालेलकर जी को प्रोत्साहित किया, जिसके बाद उन्होंने अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई और सन 1928 में वे इसके वाइस – चांसलर बने. गाँधी जी के साथ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में कालेलकर जी पूरी निष्ठा से शामिल होते थे. इस कारण से उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा. इसलिए वे एक भारतीय स्वतंत्रता सैनानी भी कहे जाते थे. सन 1939 में काका कालेलकर जी ने गुजरात विद्यापीठ से रिटायरमेंट ले लिया.  

कालेकर जी के महत्वपूर्ण कार्य (Kaka Kalelkar Important Works)

  • सन 1935 में कालेलकर जी राष्ट्रभाषा समिति के सदस्य बने, इस समिति का मुख्य उद्देश्य हिंदी जोकि हिन्दुस्तानी भाषा है, को भारत की राष्ट्रीय भाषा के रूप में लोकप्रिय बनाना था.
  • वे सन 1948 में गाँधी जी की मृत्यु के बाद से गाँधी स्मारक निधि से अपनी मृत्यु तक जुड़े हुए थे.
  • सन 1952 से सन 1964 तक काका कालेलकर जी को राज्य सभा के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था.
  • सन 1959 में कालेलकर जी ने गुजराती साहित्य परिषद की अध्यक्षता की थी.
  • इसके बाद सन 1967 में इन्होंने एक वेदशाला ‘गाँधी विद्यापीठ’ की स्थापना की, और इसके उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया.
  • महात्मा गाँधी जी ने कालेलकर जी को ‘सवई गुजराती’ नाम दिया था. जिसका मतलब था कि वे एक चौथाई गुजराती थे. दरअसल उनकी मातृभाषा मराठी होने के बावजूद भी कालेलकर जी को गुजराती भाषा का बहुत अच्छे तरीके से ज्ञान था. इसलिए गाँधी जी ने कालेलकर जी को यह नाम दिया.

काका कालेलकर आयोग (Kaka Kalelkar Commission)

29 जनवरी सन 1953 में भारत के संविधान के अनुच्छेद 340 का पालन करते हुए पहले पिछड़े वर्ग आयोग की स्थापना की गई थी. यह उस समय के भारत के राष्ट्रपति के आदेश पर काका कालेलकर जी की अध्यक्षता में की गई थी. इस पहले पिछड़े वर्ग आयोग को काका कालेलकर आयोग के नाम से भी जाना जाता है.

लेखक के रूप में कार्य (As a Writer)

काका कालेलकर जी ने हिंदी, गुजराती, मराठी एवं अंग्रेजी भाषाओँ में उल्लेखनीय एवं शानदार किताबें लिखी, इसके अलावा कुछ मल्टी – पार्ट ग्रंथावली भी है. इन सभी के बारे में नीचे दी हुई तालिका में दर्शाया गया है –

क्र. म. भाषा एवं ग्रंथावली किताबें
1. हिंदी महात्मा गाँधी का स्वदेशी धर्म एवं राष्ट्रीय शिक्षा का आदर्श आदि
2. अंग्रेजी क्विंटेसेंस ऑफ गांधियन थॉट, प्रोफाइल्स इन इंस्पिरेशन, स्ट्रे ग्लिमप्सेस ऑफ बापू, महात्मा गाँधी’स गॉस्पेल ऑफ स्वदेशी आदि  
3. मराठी स्मरण यात्रा, उत्तरेकादिल भिंती (मराठी एवं अंग्रेजी दोनों में), हिंदाल्ग्याचा प्रसाद, लोक – माता, लाटांचे ताण्डव, हिमालयातिल प्रवास आदि
4. गुजराती हिमालायानो प्रवास, जीवन – व्यवस्था, पुरवा अफ्रिकामन, जीववानो आनंद, जीवता तेह्वारो, मारा संस्मरणों, उगमानो देश, ओत्तेरती दीवारो (गुजराती एवं अंग्रेजी दोनों में), ब्रह्मदेशानो प्रवास, रखादवानो आनंद आदि
5. मल्टी – पार्ट ग्रंथावली ·        पार्ट 5 – आत्मचरित्र

·        पार्ट 6 – चरित्र कीर्तन

·        पार्ट 7 – गीता दर्शन

·        पार्ट 8 – धर्म

·        पार्ट 9 – साहित्य

·        पार्ट 10 – डायरी

·        पार्ट 11 – पत्र

 उपलब्धियां (Achievements)

कालेलकर जी द्वारा किये गये कार्यों के चलते इन्हें कुछ उपलब्धियाँ भी हासिल हुई है जोकि इस प्रकार है –

  • सन 1965 में काका कालेलकर जी को गुजराती भाषा में लिखी गई जीवन – व्यवस्था किताब जोकि गुजराती भाषा में निबंधों का संग्रह है, के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ.
  • कालेलकर जी की साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें सन 1971 में साहित्य अकादमी फेलोशिप भी दी गई थी.
  • इसके अलावा भारत सरकार द्वारा कालेलकर जी को सन 1964 में पद्म विभूषण पुरस्कार जोकि भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है से सम्मानित किया गया था.
  • सन 1985 में कालेलकर जी के सम्मान में एक स्मारकीय डाक टिकट भी शुरू की गई थी.    

गाँधी विचारधारा को अपनाने वाले भारत के महान साहित्यकार एवं लेखक काका कालेलकर जी को, उनके द्वारा किये गये कार्यों के लिए आज भी याद किया जाता है.

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  1. आधुनिक भारत का इतिहास 
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