सर जॉन आलसेब्रूक साइमन जीवन परिचय | John Allsebrook Simon Biography in Hindi

सर जॉन आलसेब्रूक साइमन जीवन परिचय  (John Allsebrook Simon Biography in Hindi ) 

भारत की स्वतंत्रता में बड़े परिवर्तन करने वाली घटनाओं में साइमन कमिशन का नाम अग्रणी माना जा सकता हैं, इस कमिशन के आने और इसके विरोध के दौरान देश में ऐसा बहुत कुछ हुआ था जिसके कारण देश स्वतंत्रता की नीव पड़ी थी. वास्तव में साइमन उस व्यक्ति का नाम था जिसके नेतृत्व में ये कमिशन गठित किया गया था और सर जॉन आल्सेब्रूक साइमन ही वो व्यक्ति थे जो ये कमिशन लेकर भारत आये थे. साइमन ब्रिटेन के बुद्धिजीवी और सक्रिय राजनेता थे. साइमन ने ब्रिटिश सरकार की नीतियों में तीन दशक तक योगदान दिया था.साइमन कमिशन के बारे में विस्तार से जानने के लिए यहाँ पढ़े 

सर जॉन आलसेब्रूक साइमन

क्र.म.(S.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.    पूरा नाम ((Full Name) सर जॉन आलसेब्रूक साइमन
2.    जन्म दिन (Birth Date) 28 फरवरी 1873
3.    जन्म स्थान (Birth Place) मेनचेस्टर.इंग्लैंड
4.    पेशा (Profession) ब्रिटिश गृह सचिव (1915–16, 1935–37), विदेश सचिव (1931–35), चांसलर ऑफ़ एक्सचेकर (1937–40), और लार्ड चांसलर (1940–45)
5.    राजनीतिक पार्टी (Political Party) लिब्रल पार्टी
6.    अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations) 1931 से नेशनल लिबरल पार्टी का नेतृत्व किया  और  1940 में कंजर्वेटिव पार्टी को जॉइन किया.  

 

7.    राष्ट्रीयता (Nationality) ब्रिटिश
8.    उम्र (Age) 81 वर्ष
9.    गृहनगर (Hometown)
10.           धर्म (Religion) क्रिश्चियन
11.           जाति (Caste)
12.           वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13.           राशि (Zodiac Sign)
14.           मृत्यु 11 जनवरी 1954 को लन्दन में

साइमन का प्राम्भिक जीवन और बचपन (Simon’s Early life and childhood)

साइमन अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे, उनके पिता हुल्मे जिले (Hulme district) में सामुदायिक मंत्री थे. साइमन ने प्रारम्भिक शिक्षा किंग एडवर्ड स्कूल से ली इसके बाद 1892 में उन्हें वधम कॉलेज (Wadham College), ऑक्सफ़ोर्ड  के लिए स्कालरशिप मिल गयी. 1896 में वो ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन के प्रेसिडेंट भी बने थे.

साइमन का परिवार और निजी जानकारी (Simon’s family and personal information)

 1899 में साइमन का पहला विवाह हुआ था, वो अपनी पत्नी से ऑक्सफ़ोर्ड में मिले थे. 1900 और 1901 में उन्हें पुत्रियाँ हुयी, लेकिन सितम्बर 1902 में पुत्र को जन्म देने के बाद साइमन की पत्नी का देहांत हो गया. इस घटना का साइमन पर गहरा असर पड़ा और साइमन का व्यक्तित्व पूरी तरह से बदल गया.

दिसम्बर 1917 में साइमन ने केथ्लिन मेनिंग से विवाह कर लिया,इस विवाह में उन्हें काफी समस्या आई. केथ्लिन का स्वास्थ सही नही रहता था. 

पिता (Father) रेव एडविन
माता (Mother) फेनी साइमन
पत्नी (Wife) एथल मैरी वेनाब्लेस (Ethel Mary Venables) और केथ्लीन मेनिंग (Kathleen Manning)
पुत्र (Son) जॉन गिल्बर्ट साइमन
पुत्री (Daughter) मार्गरेट एलिजाबेथ एडवर्ड और जोआन एंजल आल्सेब्रुक बिकफोर्ड स्मिथ
भाई (Brother) मार्गरेट पोल मोर्गन

 साइमन का करियर (Simon’s Career)

  •  साइमन ने बहुत समय तक प्रैक्टिस के बाद 1906 में हाउस ऑफ़ कॉमन्स में प्रवेश किया, और वो वाल्थमस्टो (Walthamstow) के पार्लियामेंट में लिब्रल पार्टी के तरफ से चुने गये.
  • 37 वर्ष की उम्र में 1910 में वो नाईटहुड की उपाधि के साथ सोलिसिटर-जनरल (Solicitor-General) बने एवं 1913 में कैबिनेट में एटोर्नी जनरल के पद पर उनका प्रोमोशन हो गया.
  • मई 1915 में साइमन ने एस्क्विथ (Asquith) के लार्ड चांसलरशिप के प्रस्ताव को ठुकराकर गृह सचिव बनना पसंद किया, उस समय हर्बर्ट एच. एस्किथ (Herbert H.Asquith) प्रधानमंत्री थे. जनवरी 1916 में उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सेना में अनिवार्य भर्ती के विरोध में सेक्रेटरी पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन नवम्बर 1918 तक वो पार्लियामेंट में बने रहे.
  • 1918 में साइमन कूपन की सीट पर जनरल इलेक्शन हार गये, लेकिन नवम्बर 1922 को स्पेन वैली के सदस्य के तौर पर पार्लियामेंट में लौटे. 1922 से 1924 तक उन्होंने लिब्रल पार्टी के लिए डिप्टी  लीडर के तौर पर कार्य किया.
  • लिब्रल पार्टी के मध्य आंतरिक लड़ाई और मतभेदों ने मंत्रालय में नियुक्तियों को रोक दिया. 1920 से 30 के दशक में लिओयद जॉर्ज (Lloyd George) के साथ उनके रिश्ते काफी जटिल थे और धीरे-धीरे साइमन के लिए लिबरल पार्टी के भीतर मुश्किलें बढने लगी. साइमन ने 1926 में जनरल स्ट्राइक का विरोध किया,उन्होंने बार से रिटायरमेंट की घोषणा से पहले कनाडा के साथ सीमा विवाद को सुलझाने का कहा.
  • 1927-1930 में साइमन को भारत में सरकार की जांच करने और वहां सुधार कार्यों को देखने के लिए भेजा था. साइमन कमीशन यूनाइटेड किंगडम के 7 एमपी का समूह था,जिन्हें ब्रिटिश इंडिया में संवैधानिक सुधार-कार्यों के लिए भेजा गया था,इसका नेतृत्व साइमन कर रहे थे. क्लेमेंट रिचर्ड एटली (Clement Richard Attlee) को साइमन का असिस्टेंट नियुक्त किया गया था, उनके अतिरिक्त हैरी लेवी लॉसन, फर्स्ट विस्काउंट बर्नहम(Harry Levy-Lawson, 1st Viscount Burnham), सर एडवर्ड सेसिल जॉर्ज कैडोगन (Sir Edward Cecil George Cadogan), वेरनोन हार्टशोर्न (Vernon Hartshorn) जॉर्ज रिचर्ड लेन-फॉक्स,फर्स्ट बैरन बिंगले
    (George Richard Lane-Fox, 1st Baron Bingley) और डोनाल्ड स्टर्लिंग पामर होवार्ड (Donald Sterling Palmer Howard) भी इसके सदस्य थे. ये कमिशन 3 फरवरी 1928 को बोम्बे पहुंचा था लेकिन यहाँ इसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा,क्योंकि इसमें एक भी भारतीय नहीं था. सैकड़ों लोग हाथों में साइमन गो बैक और साइमन वापिस जाओ की तख्तियां लिए खड़े थे और नारे लगा रहे थे. इसके बाद भी जब तक साइमन कमिशन भारत में रहा तब तक इसे विरोध झेलना पड़ा. 30 अक्टूबर को कमिशन जब लाहौर पहुंचा तो वहां भी लाल लाजपत राय के नेतृत्व में इसका विरोध हुआ और वहां के घटनाक्रम से भारतीयों में अंग्रेजों के खिलाफ रोष और ज्यादा बढ़ गया. मई 1930 में साइमन कमिशन ने जो रिपोर्ट दी थी उसके रिकमंडेशन से ही 1935 में “गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट” आया था.
  • नवम्बर 1931 में रामसे मैक्डोनाल्ड की नेशनल कोएलिशन सरकार में वो वापिस विदेश सचिव चुने गये.
  • 1929-31 तक पार्लियामेंट के दौरान लेबर मेजोरिटी में नहीं थे लेकिन वो लिब्रल की वजह से वहां टिके हुए थे, साइमन उन लिब्रल के प्रतिनिध थे जो लिओयद जॉर्ज (Lloyd George) को नापसंद करते थे.
  • 1930 में उन्होंने लिब्रल पार्टी का नेतृत्व किया था, ये एक ऐसी पार्टी थी जो समाजवाद का विरोध करती थी और कंजर्वेटिव पक्ष का समर्थन करती थी. उन्होंने ब्रिटेन और नाजी जर्मनी के मध्य मैत्री का समर्थन किया इस कारण 1936 से तुष्टिकरण के नेता के रूप में जाना जाने लगा.
  • जून 1931 में राष्ट्रीय सरकार बनने से पहले साइमन ने लिब्रल पार्टी से इस्तीफा दे दिया और उस समय साइमन के साथ इतनी संख्या में लिब्रल विधायक हो गये थे कि वो लिबरल नेशनल ग्रुप के नाम से अलग पार्टी बना सके,जिसे 1947 के बाद नेशनल लिबरल के नाम से जाना गया. ये पार्टी रामसे मैकडोनल्ड के सरकार का समर्थन करती थी.
  • 1931 में हुए मंचूरियन त्रासदी के लिए उन्हें काफी आलोचना का सामना करना पड़ा, इसके बाद उस समय विदेश सचिव के तौर पर काम करना उनके लिए आसान नहीं था. साइमन को कभी कट्टरवादियों (कंजर्वेटिव) के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन कुछ विधायक नेशनल लिब्रल के रूप में पहचाने जाने लगे, और ये क्रम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद एक दशक तक चला.
  • साइमन गृह-मंत्रालय के लिए ज्यादा उपयुक्त थे इसलिए जून  1935 में उन्हें स्टेनले बाल्डविन द्वारा एक बार फिर से होम सेक्रेटरी चुना गया. अपने गृह सचिव के कार्यकाल के दौरान साइमन ने पब्लिक ऑर्डर एक्ट 1936 भी पास किया, और उन्होंने उन्मूलन से जुडी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया. मई 1937 में वो चांसलर ऑफ़ एक्सचेकर (Chancellor of the Exchequer) बने थे जहां उन्होंने देश को आर्थिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था, इसके लिए उन्होंने देश के चौथे स्तम्भ सुरक्षा के लिए इसे आर्थिक मजबूत बनाने में विशेष ध्यान दिया था.
  • मई 1937 में उन्हें चेम्बेरलेन (Chamberlain) द्वारा चांसलर ऑफ़ एक्सचेकर (chancellor of the exchequer) चुना गया. उन्होंने म्युनीच में 30 सितम्बर 1938 को हुए एंग्लो-फ्रेंच समझौते का समर्थन किया था.
  • मई 1940 को साइमन को विंस्टन चर्चिल के गठबन्धन सरकार में लार्ड चांसलर नियुक्त किया था और उन्हें विसकाउंट (viscount) भी बनाया गया. 1945 में विश्व युद्ध की समाप्ति तक उन्होंने वाईस चांसलर के तौर पर कार्य किया था. उस समय विश्व-युद्ध से पहले नाजी जर्मनी के प्रधानमन्त्री नेविली चेम्बेरलेन के साथ तुष्टिकरण की नीति रखना थी.    
  • अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी वर्षों में साइमन लिब्रल नेशनल के साथियों  से दूर होने लगे और 1940 में उन्होंने इसका नेतृत्व ही छोड़ दिया और कंजर्वेटिव पार्टी को जॉइन किया.   

वास्तव में साइमन अपने समय के जाने-माने वकील थे, ऐसा कहा जाता हैं कि प्रथम युद्ध से पहले तक उनकी वार्षिक आय 50,000 डालर थी. विंस्टन चर्चिल के आलावा वो ही ऐसे व्यक्ति थे जो दोनों विश्व युद्ध के समय ब्रिटिश कैबिनेट में मौजूद थे. 1992 में एक मोडर्न बायोग्राफी ,साइमन प्रकाशित हुयी. उनकी आत्मकथा रेट्रोस्पेक्ट 1952 में प्रकाशित हुयी थी.

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