Home / Itihas / भारत के संविधान का इतिहास | History of Constitution of India

भारत के संविधान का इतिहास | History of Constitution of India

भारत के संविधान का इतिहास (History of Constitution of India)

किसी भी देश को चलाने के लिए उसके खुद के नियम कायदे होते हैं जो देश के धर्म, विचारधारा, रहन – सहन और जलवायु को देख कर बनाये जाते हैं जिससे देश एक दिशा में प्रगति की तरफ अग्रसर होता रहे । इसी प्रकार 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान भी बनाया गया। भारत का संविधान क्यूँ बना, कैसे बना, कब बना एवं इसे किसने बनाया जैसे सवालो के जवाब के लिए इस आर्टिक्ल को पढ़े।

History of Constitution of India

1 शीर्षक भारत का संविधान
2 भारत का संविधान किसने लिखा?  डॉ बीआर अंबेडकर
3 भारत का संविधान कब बनकर तैयार हुआ? 24 जनवरी 1950
4 भारत संविधान कब लागू हुआ था ? 26 जनवरी 1950
5 संविधान कितने दिनों में बना ? 2 वर्ष, 11 माह, 18

भारत का संविधान क्यूँ बना (Why the Constitution of India has been made?)

भारत कई वर्षो से गुलाम था अर्थात बाहर की शक्तियाँ भारत पर अपना शासन करती आ रही थी। और देश पर अपने नियमों के अनुसार कार्य कर रही थी, सभी के अपने नियम थे । भारत आजादी के पहले 200 वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा इसलिए यहाँ ब्रिटिश नियमोंनुसार कार्य होते रहे । इसलिये आजादी जितनी जरूरी थी उतना ही जरूरी देश का संविधान था । भारत हमेशा से एक बहुत आबादी वाला देश रहा हैं और इस आबादी को सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए देश के पास अपने नियमों, अधिकारों एवं कर्तव्यों की नियमावली होना बहुत जरूरी था । और इसलिये ही भारत का संविधान बना ।

भारत का संविधान कैसे बना (How the Constitution of India has been made?)

भारत में आजादी की लड़ाई सन 1857 की क्रांति से ही शुरू हो चुकी थी इसलिये कहा जाता हैं कि उस लड़ाई के समय भारतीय सिपाहियों ने भारत के संविधान को बनाने की सोच जाहीर की थी. लेकिन उस समय आपसी लड़ाई एवं फुट के कारण आजादी का संघर्ष थम गया और इसी के साथ संविधान बनाने की प्रक्रिया भी रुक गई ।

किस तरह भारत संविधान की तरफ बढ़ा ?

सबसे पहले अंग्रेजी हुकूमत ने 1935 में भारतीयों के सामने एक नये एक्ट का ऐलान किया जिसे भारतीय सरकार अधिनियम 1935 (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट) कहा गया । इस कानून के कई नियम आज भी भारतीय संविधान का हिस्सा हैं । लेकिन यह कानून पूरी तरह से भारतीयो को कभी पसंद नहीं आया और भारत में द्वेष बढ़ गया । बाहर से दिखने पर यह अधिनियम संघीय शासन का था लेकिन वास्तविक तौर सभी अधिकार गवर्नर के पास थे जिससे कई जानकार लोग ना खुश थे । पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे बिना इंजिन की मशीन कहकर संबोधित किया । इस तरह इसका विरोध पूरे देश में हुआ । और काँग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच मतभेद बढ़ गया ।

सभी दलो और जानकारो के मतानुसार 1945 में डॉक्टर तेज बहादुर सप्रू  संविधान का एक प्रारूप तैयार किया । लेकिन अब तक भारत परतंत्र ही था लेकिन इस वक्त ब्रिटिश सरकार की स्थिती द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण खराब होती जा रही थी । और उसी समय देश मे एक के बाद एक नये आंदोलन जैसे भारत छोड़ो आंदोलन और आजाद हिन्द फौज के गठन ने ब्रिटिश हुकूमत को हिला कर रख दिया था । ब्रिटिश सरकार के अपने देश की स्थिती उन दिनों बिगड़ रही थी क्यूंकि वर्तमान प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल की हार हो चुकी थी । और क्लेमेंट अट्टेली नये प्रधानमंत्री बन चुके थे । ऐसे में सत्ता में आते ही भारत पर अपना कब्जा छोड़ना इन्हे रास नहीं आ रहा था और इन्होने अपनी फुट की नीति को अपना और काँग्रेस और मुस्लिम लीग को अलग कर देश के विभाजन की योजना बनाई । क्लेमेंट अट्टेली ने केबिनेट के 3 मंत्रियों को भारत भेजा और अपनी बात सभी के सामने रखी। इस मीशन को केबिनेट मिशन कहा गया ।

केबिनेट मिशन :

यह मिशन 1946 में भारत आया जिसमें 3 मुख्य सदस्य भारत भेजे गए जिनके नाम लार्ड पैथिक लारेंस, सर स्टेफर्ड क्रिप्स एवं ए.वी. अलेक्जेंडर थे। यह सभी क्लेमेंट एटली के द्वारा भारत एक विशेष उद्देश्य से भेजे गए थे । वैसे इस मिशन का मुख्य उद्देश्य उन विकल्पों को तलाशना था जिसके जरिये भारत की सत्ता भारत के हाथों सौंपी जा सके जिसके लिए हिन्दू मुस्लिम लड़ाई को रोकना बहुत जरूरी था । उस समय कुछ ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हुई की कैबिनेट कमीशन की पहली बैठक का कोई हल नहीं निकला। इस बैठक में मौलाना आजाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरू, खान अब्दुल गफ्फर खां, लियाकत अली खां, जिन्ना, नवाब इस्माइल खां, और सरदार नीशतर तथा नवाब मोहम्मद हमीदुल्लाह हाजिर थे । यह बैठक शिमला में हुई थी । लेकिन अंग्रेजों ने अपनी जिद्द नहीं छोड़ी और 16 जून 1946 को देश ने विभाजन का फैसला ले लिया । और इस एक फैसले के साथ यह भी तय हुआ कि देश को आजादी मिल जायेगी और यहाँ से शुरुवार हुई संविधान बनाने की प्रणाली की ।

संविधान लिखने की शुरुवात :

  • जैसे ही यह स्पष्ट हुआ कि अंग्रेज़ भारत की सत्ता देश को सौंप देंगे वैसे ही चिंता इस बात की थी कि अब देश का अपना संविधान होना बहुत आवश्यक हैं । संविधान की पहली बैठक डॉ. सच्चिदानन्द की अगुवाई में हुई जो कि 9 दिसंबर 1946 को हुई जिसमें मोहम्मटद अली जिन्ना एवं मोहनदास करमचंद गांधी शामिल नहीं थे । इस सभा का अध्यक्ष पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को चुना गया ।
  • इसके बाद 13 दिसंबर 1946 को संविधान की एक रूप रेखा तैयार की गई जिसे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सभी के सामने पढ़ा.  इस संविधान में सबसे महत्वपूर्ण बात रखी गई कि देश में से राजाओं का शासन समाप्त कर दिया जायेगा और सभी को भारत की प्रभुता स्वीकार करनी होगी । और 22 जनवरी 1947 को कई तरह के विरोध के बाद इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया। वैसे तो यह एक कठिन समझौता था लेकिन सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे नेताओं ने सभी राजाओं को एकजुट किया  और राजाओं ने काँग्रेस को अपना समर्थन दिया ।
  • 14 जुलाई 1947 को नेहरू जी संविधान की बैठक में देश के चिन्ह “तिरंगा ध्वज” का ऐलान किया जिसका सभी ने तह दिल समर्थन किया इसमे कई मुस्लिम लीग के लोग भी शामिल थे । इसी सबके साथ अंग्रेज़ो से हुई बातचीत के आधार पर भारत पाकिस्तान का विभाजन हो गया और इतने संघर्षों के बाद 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया । इसका जश्न पूरे देश ने हर्षोउल्लास  के साथ मनाया ।
  • देश आजाद तो हो चुका था लेकिन इसे एक दिशा में सुचारु रूप से गति देने के लिए संविधान का बनाना और अधिक महत्वपूर्ण  हो गया था । पहले भी संविधान का ढांचा बनाया गया था लेकिन कई लोगो ने इसे स्वीकार नहीं किया था इसलिए एक नयी  कमेटी का गठन किया गया ।

संविधान का निर्माण करने के लिए उसमें कुछ सदस्यो को जोड़ा गया जिसमें हर क्षेत्र को नेतृत्व देने की दृष्टि से प्रमुख लोगो को शामिल किया गया, संविधान को तैयार करने में 389 सदस्यो की भूमिका रही हैं और इस कमेटी के सदस्य डॉ. भीम राव अंबेडकर को बनाया गया । कुछ सदस्य निम्नानुसार हैं :

संविधान कमेटी में कौन कौन से सदस्य शामिल थे ?

  1. बी.आर अंबेडकर,
  2. संजय फेक,
  3. जवाहरलाल नेहरू,
  4. राजगोपालाचारी,
  5. राजेंद्र प्रसाद,
  6. वल्लभभाई पटेल,
  7. कन्हैयालाल मानेकलाल मुंशी,
  8. गणेश वासुदेव मावलंकर,
  9. संदीपकुमार पटेल,
  10. अबुल कलाम आजाद,
  11. श्यामा प्रसाद मुखर्जी,
  12. नलिनी रंजना घोशाल
  13. फ्रैंक एंथोनी [एंग्लो-इंडियन समुदाय ]
  14. एच पी मोदी [पारसी समुदाय ]
  15. हरेंद्र कोमार मुकर्जी
  16. अरी बहादुर गुरुंग [गोरखा समुदाय]
  17. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, बेनेगल नरसिंग राऊ, के.एम. मुंशी और गणेश मावलंकर जैसे न्यायाधीश
  18. महिला सदस्यों में सरोजिनी नायडू, हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, अमृत कौर और विजया लक्ष्मी पंडित भी इस सभा में शामिल थीं।

सभी के विचार विमर्श,लड़ाई झगड़ो के साथ संविधान का प्रारूप तैयार करना शुरू कर दिया गया जिसकी घोषणा 9 दिसम्बर 1947 को की गई । सभी सदस्यो के साथ मिलकर संविधान तैयार हुआ जिसमें कई निर्णय हुये जैसे मातृभाषा, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय गान, अधिकार, कर्तव्य आदि ।

संविधान कब बन कर तैयार हुआ ? कितना समय लगा ?

इतनी जनसंख्या वाले देश का संविधान जहां कई तरह के धर्म, जाति प्रजाति के लोग पाये जाते हैं का संविधान लिखना आसान नहीं था इसे लिखने में 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन लगे । जिसमे 114 दिनों तक आपसी बहस हुई जिसमें 12 अधिवेशन भी पेश किये गये । 166 दिनों तक मीटिंग की गई और कई बार जनता से सलाह मशविरा भी किया गया जिसके लिए प्रेस का सहारा लिया गया और इस तरह 284 सदस्यो के हस्ताक्षर के बाद हमारे देश का संविधान 24 जनवरी 1950 को संविधान तैयार हो गया और इसे 26 जनवरी 1950 को पूरे देश में लागू किया गया जिसे हम गणतंत्र दिवस के रूप में प्रति वर्ष मानते हैं ।

संविधान 26 जनवरी को ही क्यूँ लागू हुआ ?

वैसे तो तारीख कोई भी हो सकती थी लेकिन 26 जनवरी हमारे इतिहास की एक यादगार तारीख मानी जाती हैं  क्यूंकि गणतंत्र दिवस के 20 वर्ष पहले 26 जनवरी 1930 को भारत में पूर्ण स्वराज का संकल्प लेकर काँग्रेस ने इस दिन को स्वतंत्रता दिवस घोषित कर दिया था जिसके बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली और 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान घोषित हुआ । इस तरह 26 जनवरी का महत्व हमारे इतिहास में बहुत अधिक हैं ।

भारत के संविधान का संक्षिप्त विवरण :

भारत का संविधान 2016 तक 101 बार संशोधित किया जा चुका हैं । इस प्रकार इस संविधान में 448 अनुच्छेद [25 भाग], एक संविधान उद्देशिका, 12 अनुसूचित जातियाँ एवं 5 अनुलग्नक शामिल हैं । सबसे अंतिम संशोधन जीएसटी को लेकर किया गया था ।

भारत का संविधान सबसे बड़े लोकतंत्र का संविधान हैं जिसकी विश्व में अपनी एक पहचान हैं । वैसे तो यह संविधान ब्रिटिश संविधान से प्रभावित हैं लेकिन समय – समय पर इसमे भारतवासियों के अनुसार संशोधन किए जाते रहे हैं ।

Other Link:

  1. भारत छोड़ो आंदोलन 1942
  2. भारत-पाकिस्तान युद्ध का इतिहास

About JIH

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *