बाबर का जीवन परिचय | Biography of Babar in Hindi

बाबर का जीवन परिचय ( Biography of Babur in Hindi)

1526 में बाबर ने उस समय के तत्कालीन सुल्तान इब्राहिम लोधी को हराकर भारत में मुगल वंश की स्थापना की. मुगल साम्राज्य का सर्वप्रथम शासक अकबर बना था और उसने मुगल साम्राज्य की नींव रखी जो 300 वर्षों तक चलता रहा. बाबर ने अपने पिता की मृत्यु के बाद केवल 12 वर्ष की आयु में ही शासन करना शुरू कर दिया था. उस समय तुर्किस्तान के फरगना प्रदेश पर आक्रमण करके उसे जीत लिया और वहां पर उसने शासन करना शुरू कर दिया. बचपन से ही बाबर का स्वभाव बहुत महत्वाकांक्षी था और वह अपने लक्ष्य को सदैव पाने के लिए तैयार रहता था. बाबर अपने आपको चंगेज खान के परिवार से बताता था. आज हम इस लेख के माध्यम से आपको बाबर का वंश क्या था ? बाबर कौन था ? बाबर का जन्म कब हुआ था ? बाबर की मृत्यु कब हुई ? बाबर के जीवन से संबंधित सभी प्रकार की जानकारियां इस लेख में हम देने वाले हैं.

Babur Biography

परिचय बिंदु (Introduction Points)

 

परिचय (Introduction)
पूरा नाम (Full Name)जहीर-उद-दीन मुहम्मद बाबर

 

 लोकप्रिय नाम (Popular Name)बाबर
जन्म दिन(Birth Date)

 

14 फरवरी 1483

 

जन्म स्थान (Birth Place)

 

अन्डिझान  (उज्बेकिस्तान)

 

पेशा (Profession)

 

मुग़ल सम्राट
राजनीतिक पार्टी (Political Party)

 

——
राष्ट्रीयता (Nationality)

 

उज्बेकिस्तानी
उम्र (Age)

 

47 वर्ष
गृहनगर (Hometown)

 

उज्बेकिस्तान
धर्म (Religion)

 

इस्लाम
वंश (Genus)

 

तैमुर लंग
जाति (Caste)

 

मंगोल जाति
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)

 

विवाहित
राशि (Zodiac Sign)

 

—-

बाबर का परिवारिक परिचय –

बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 में उज्बेकिस्तान के फ़रगना घाटी  के अन्दीझ़ान नाम के एक शहर में जन्मा था. बाबर का पूरा नाम जहिरुदीन मुहम्मद बाबर था , उज़्बेकिस्तान के लोगों को उनका नाम लेने में कठिनाई होती थी इसीलिए उनको वहां के लोग बाबर कह-कर बुलाते थे.  बाबर के पिता का नाम उमर शेख मिर्जा था , जो फरगना घाटी के शासक हुआ करते थे. बाबर अपनी माता कुतलुग निगार खानम का सबसे बड़ा बेटा था. बाबर की मातृभाषा जगताई थी. परंतु उस समय वहां की आम बोलचाल भाषा फारसी थी. बाबर को फारसी भाषा का भी संपूर्ण रूप से ज्ञान था. बाबर ने अपनी मातृभाषा जगताई में बाबरनामा के नाम से अपनी जीवनी को लिखवाया है. बाबर की कुल 11 पत्नियां थी. बाबर के कुल 19 बच्चे थे. 

पारिवारिक परिचय (Introduction Of Family )

 

परिचय (Introduction)
माता / पिता  (Mother & Father )उमरशेख मिर्जा, कुतलुग निगार खानम
 पत्नियाँ  ( Wife )आयशा सुल्तान बेगम,जैनाब सुलतान बेगम,मौसमा सुल्तान बेगम,महम बेगम,गुलरुख बेगम,दिलदार बेगम,मुबारका युरूफझाई,गुलनार अघाचा
 पुत्र – पुत्री  ( Son )हुमायूँ, कामरान मिर्ज़ा, अस्करी मिर्ज़ा, हिन्दाल मिर्ज़ा, फख्र-उन-निस्सा,गुलरंग बेगम,गुलबदन बेगम,अलतुन बिषइक(गोद लिया गया बेटा)

 बाबर की शारीरिक क्षमता के बारे में –

माना जाता है कि बाबर शारीरिक रूप से बहुत ही शक्तिशाली था और उसे व्यायाम करना अति प्रिय था. कहा जाता है, कि वह अपने कंधे को मजबूत करने के लिए दो लोगों को अपने कंधों पर बैठाकर दौड़ता था. व्यायाम करने के लिए बाबर जब दौड़ता था, तब यदि उसके सामने कोई नदी आ जाती थी, तो उसे वह तैर कर पार भी करता था. कुछ लोगों का कहना यह भी है, कि बाबर ने गंगा नदी को दो बार तैरकर पार किया था.

बाबर को  भारत आने का क्या कारण था ?

जब बाबर का शासनकाल शुरू हुआ सब उसने मध्य एशिया में अपना शासन फैलाने की सूची परंतु वहां पर बाबर अपना समराज नहीं फैला पाया. इसके बाद उसकी नजर भारत पर पड़ी. उस समय भारत की राजनीतिक परिस्थिति बहुत ही कमजोर थी जो बाबर को भारत आने के लिए अनुकूल परिस्थिति लगी. उस दौरान इब्राहिम लोधी दिल्ली का सुल्तान हुआ करता था, परंतु उसने बहुत ही लड़ाइयां भी लड़ी और वह लगातार उन लड़कियों में हारता भी रहा. इब्राहिम लोधी के चाचा आलम खान उसकी इस असफलता से बहुत ही चिंतित थे , क्योंकि वे दिल्ली के सल्तनत पर एक छत्र राज करना चाहते थे. उसी दौरान पंजाब के गवर्नर दौलत खान को भी लोधी का कार्य पसंद नहीं आ रहा था. आलम खान और दौलत खान बाबर को भलीभांति जानते थे. उसी दौरान उन्होंने बाबर को दिल्ली आने का न्योता भेजा. बाबर को यह अच्छा लगा की उसे दिल्ली आकर अपने साम्राज्य को बढ़ाने का भी अवसर मिलने वाला है.

बाबर के द्वारा लड़ी गई कुछ प्रमुख लड़ाइयां –

बाबर ने अपने शासनकाल में बहुत से ऐतिहासिक लड़ाइयां लड़ी जो, इस प्रकार वर्णित हैं.

युद्ध सन
पानीपत का प्रथम युद्ध21 अप्रैल 1526 ई (इब्राहिम लोदी एवं बाबर) इस युद्ध में बाबर विजयी हुआ था।
खानवा का युद्ध17 मार्च 1527 ई (राणा सांगा एवं बाबर) इस युद्ध में बाबर विजयी हुआ था.
चंदेरी का युद्ध29 जनवरी 1528 ई (मेदनी राय एवं बाबर) इस युद्ध में बाबर विजयी हुआ था।

 

घाघरा का युद्ध6 मई 1529 ई (अफगानों एवं बाबर के बीच) इस युद्ध में भी बाबर विजयी हुआ था।

पानीपत का प्रथम युद्ध –

बाबर ने पानीपत का प्रथम युद्ध 1526 में इब्राहिम लोधी के साथ लड़ा था. बाबर ने इस युद्ध के पहले चार बार उस युद्ध स्थल की जांच पड़ताल की थी जहां पर पानीपत का प्रथम युद्ध हुआ था. उसने ऐसा युद्ध में रणनीति बनाने के लिए ही किया हुआ था, जिससे उसे आसानी से विजय प्राप्त हो जाए. मेवाड़ के महाराजा राणा संग्राम सिंह जी भी यही मंशा थी, कि अकबर और लोधी के बीच में युद्ध हो, क्योंकि लोधी राणा संग्राम सिंह का भी शत्रु था. राजा संग्राम सिंह ने भी पानीपत का प्रथम युद्ध को कराने हैं, आग में घी डालने का काम किया था. बाबर को इस पानीपत के प्रथम युद्ध में विजय प्राप्त हुई. इब्राहिम लोदी ने खुद को हारता और विवश देखकर, स्वयं की हत्या कर ली.

खानवा का युद्ध –

बाबर ने जितनी भी लड़ाइयां लड़ी थी, उनमें से यह खानवा की लड़ाई एक प्रमुख लड़ाई थी. खानवा गांव के आसपास बाबर ने इस युद्ध को लड़ा था. राणा संग्राम सिंह ने सोचा कि पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद बाबर अपने स्वदेश लौट जाएगा परंतु ऐसा नहीं हुआ. बाबर ने भारत में ही रहकर शासन करने का मन बना लिया था. परिणाम स्वरूप राणा संग्राम सिंह को भी बाबर के साथ युद्ध करने के लिए आना पड़ा. इस युद्ध को 17 मार्च 1527 में लड़ा गया था. इसमें राजपूत अपनी वीरता से लड़े थे, परंतु बाबर के तोप खानों की वजह से वह ज्यादा देर तक युद्ध मैदान में अपनी बढ़त नहीं जमा पाए और युद्ध हार गए. मेवाड़ के महाराजा राणा संग्राम सिंह ने अपनी पराजय को देख आत्महत्या कर ली. मेवाड़ की महिलाओं ने बाबर के सामने खुद को विवश के रूप में नहीं दिखानी चाहती थी और उन्होंने भी जोहर कर लिया.

चंदेरी का युद्ध –

चंदेरी दुर्ग मध्य प्रदेश के गुना के नजदीकी में अशोकनगर जिले में मौजूद है. आज भी यहां की भूमि राजपूतों का पराक्रम, जटों की वीरता और महिलाओं के जोहर के लिए भी जाना जाता है. खानवा के युद्ध में राणा संग्राम सिंह को हराने के बाद बाबर की नजर चंदेरी दुर्ग पर पड़ी. उस समय पर मालवा के राजा मेदनी राय थे, उस समय वहां उनका आधिपत्य था. खानवा के युद्ध में मेदनी राय और उनकी सेना का सामना बाबर से पहले ही हो चुका था. जिससे बाबर तो पहले ही दुश्मन के रूप में था ही. बाबर ने राजा मेदनी राय की से उनका किला मांगा. इसके बदले में बाबर ने युद्ध में जीते हुए जिलो में से कई जिला देने को कहा और कई अन्य भी उपहार देने की भी बात कही थी. परंतु राजा मेदनी राय को उनका किला बहुत महत्वपूर्ण था और उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहते थे. सबसे बड़ी बात उन्होंने बाबर के सामने खुद को समर्पित करना सही नहीं समझा. इसी वजह से बाबर ने 1528 में मेदनी राय को युद्ध के लिए ललकारा. उसकी किले को पाने की चाहत ने उसे युद्ध में विजई बना दिया. इसके साथ ही राजा मेदनी राय की बहुत ही बुरी तरीके से पराजय हुई.

घाघरा का युद्ध –

बाबर अब तक कई शासकों और राजपूतों को युद्ध में हरा चुका था. इसी के कारण बिहार और बंगाल में अफगानी शासकों ने बाबर का विरोध किया और उसे वापस भेजने के लिए रणनीति बनाने लगे . बाबर को एक के बाद एक युद्ध में विजय मिली. जिससे उसको खुद पर और भी अभिमान हुआ इसके फलस्वरूप 1529 में बाबर और अफगान शासकों के बीच में युद्ध छिड़ गया. बाबर ने घाघरा का युद्ध भी आसानी से जीत लिया. घागरा युद्ध के बाद बाबर और उसकी सेनाओं ने हिंदुस्तान के अन्य राज्यों को भी लूटना शुरू कर दिया.

भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना –

बाबर ने भारत में 5 बार आक्रमण किए थे. पानीपत के प्रथम युद्ध के बाद बाबर ने 1526 में मुगल साम्राज्य की स्थापना की. बाबर के इस मुगल वंश ने कुल 300 वर्ष से अधिक भारत में शासन किया. बाबर ने अपने शासनकाल में बहुत ही महत्वपूर्ण प्रसिद्धया प्राप्त कर ली थी. बाबर के द्वारा लिखवाई गई बाबरनामा में बाबर के जीवन काल की सभी बातों को उसमें बाबर ने खुद वर्णित करवाया था.

बाबर की क्रूरता 

बाबर ने मुगल साम्राज्य की स्थापना करने के बाद भारत में बाबर की सेना ने खूब लूटपाट मचाई थी. बाबर अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए किसी भी हद तक क्रूरता दिखाता था और उसने खूब नरसंहार भी किया था. बाबर को किसी भी प्रकार का ग्लानि या अफसोस नहीं होता था. बाबर के क्रूरता के बहुत से आपको इतिहास में प्रमाण मिल जाएंगे. बाबर किसी भी धर्म पर विश्वास नहीं करता था. इसीलिए उसने कभी भी यहां के लोगों को इस्लाम धर्म में परिवर्तित होने के लिए दबाव नहीं डाला था. बाबर का स्वभाव थोड़ा अइयाश किस्म का भी था .

बाबर की विरासत और इमारतें 

बाबर का फारसी संस्कृति से ताल्लुक होने के कारण उन्होंने भारत में फारसी कला का विस्तार किया था. बाबर को उज्बेकिस्तान में लोग एक राष्ट्रीय नायक की तरह मानते हैं. अक्टूबर 2005 में बाबर क्रूज नामक मिसाइल को बाबर के सम्मान में पाकिस्तान द्वारा इसे विकसित किया गया था. बाबर की कुछ खास इमारतें भी , जो इस प्रकार हैं :- पानीपत मस्जिद, जमा मस्जिद, बाबरी मस्जिद.

बाबर से बाबरी मस्जिद और राम मंदिर का विवाद 

जैसा कि हम सभी जानते हैं, कि अभी हाल ही में राम जन्मभूमि पर जो विवाद हुआ था, वह समाप्त हो चुका है, इस पर निर्णय आ चुका है. यह विवाद करीब 550 वर्षों से भी अधिक पुराना था. ऐसा कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बाबर ने राम मंदिर को ध्वस्त करके वहां पर बाबरी मस्जिद का जबरन निर्माण कराया था. राम मंदिर के कार्य सेवकों ने 6 दिसंबर 1992 में राम जन्मभूमि से जुड़ा आंदोलन प्रारंभ कर दिया. इसके अलावा राम जन्म भूमि के कार्य सेवकों ने बाबरी मस्जिद को भी ध्वस्त कर दिया. अब जाकर इस बड़े विवाद का अंत हो चुका है.

बाबर की मृत्यु :

बाबर महान की मृत्यु 26 दिसंबर 1530 में आगरा में हुई थी. आगरा उस समय मुगल साम्राज्य के अधीन था. मृत्यु से पहले बाबर ने हुमायूं को मुगल समराज का उत्तराधिकारी बनाया.

Other Links:

  1. पानीपत के तीनो युद्धों का विस्तारपूर्वक वर्णन
  2. पारस छाबड़ा का जीवन परिचय

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