महान अकबर का जीवन परिचय| Biography of King Akbar in Hindi

महान अकबर का जीवन परिचय(Biography of King Akbar in Hindi)

जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर , जिसे अकबर महान के नाम से भी जाना जाता था. यह बाबर और हुमायूं के बाद मुगल सम्राट के तीसरे सम्राट के रूप में उभर के सामने आए. अकबर नसीरुद्दीन हुमायु  के पुत्र थे. अकबर जैसे महान योद्धा ने 1556 ई. में मात्र 13 वर्ष की आयु में सम्राट के रूप में उत्तराधिकारी का पदभार संभाला. अपने पिता की गंभीर अवस्था के दौरान सम्राट अकबर ने धीरे-धीरे मुगल समराज के सीमा को बढ़ाना शुरू किया , जिसमें लगभग सभी भारतीय उपमहाद्वीप भी शामिल थे. उन्होंने अपनी सैन्य, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभु तत्व के बल पर पूरे देश में अपनी शक्ति और अपने प्रभाव को बढ़ाया. उन्होंने अपने अच्छे प्रशासन के लिए एक केंद्रीकृत प्रणाली की स्थापना की और विवाह गठबंधन और कूटनीति जैसी नीतियों को स्वीकार किया. उनकी धार्मिक नीतियों के कारण उन्होंने अपने गैर-मुस्लिम लोगों का दिल जीता और उनका उनको पूरा समर्थन मिला. वह मुगल राजवंश के सबसे महान सम्राटों में से एक थे और उन्होंने कला और संस्कृति के लिए अपने संरक्षण का विस्तार किया. वे साहित्य के बहुत शौकीन थे, और उन्होंने कई भाषा में साहित्य का समर्थन किया. इस प्रकार अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान एक बहु सांस्कृतिक समराज की नींव रखी थी.

The king Akbar

परिचय बिंदु (Introduction Points)परिचय (Introduction)
पूरा नाम ((Full Name)अबुल-फतह जलाल-उद्दीन मोहम्मद अकबर
जन्म दिन(Birth Date)15 अक्टूबर 1542
जन्म स्थान (Birth Place)अमरकोट सिंध
पेशा (Profession)योद्धा मुगल सम्राट
राजनीतिक पार्टी (Political Party)
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
उम्र (Age)63 वर्ष
गृहनगर (Hometown)अमरकोट सिंध
धर्म (Religion)इस्लाम, दीन-ए इलाही
वंश (Genus)तैमूरी वंशावली के मुगल वंश का  वंशज
जाति (Caste)मुगल
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित
राशि (Zodiac Sign)

सम्राट अकबर का परिवार एवं निजी जानकारी

सम्राट अकबर का जन्म मुगल समराज के राजवंश में हुआ था. उनके पिता नसरुद्दीन हुमायूं थे. सिर्फ और सिर्फ के 13 वर्ष की आयु में उन्होंने सम्राट का पदभार संभाला था. उनकी धार्मिक नीतियों के कारण उनको गैर- मुस्लिम लोगों का भी समर्थन मिला था. सम्राट अकबर साहित्य के बहुत शौकीन थे, और उन्होंने कई भाषाओं में साहित्य का समर्थन भी किया था. अकबर ने अपने शासनकाल के दौरान बहुसांस्कृतिक साम्राज्य की नींव खड़ी कर दी थी. उन्होंने अपने साहस और नीतियों के दम पर मुगल साम्राज्य का खूब विस्तार किया था. इसीलिए उनको महान सम्राट अकबर भी कहा जाता था.

सम्राट अकबर का प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा

सम्राट अकबर का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था. इसलिए उनका नाम बदरुद्दीन मोहम्मद अकबर भी था. बद्र का अर्थ होता है, पूर्ण चंद्रमा और अकबर उनके नाना जी शेख अली अकबर से लिया गया है, जिससे उनका नाम बदरुद्दीन अकबर भी पड़ा है . वैसे तो जाना जाता है, कि अकबर का जन्म 15 अक्टूबर 1542ई. अविभाजित भारत के अमरकोट में हुआ था. परंतु कुछ कहना सुनना तो यह भी है, कि हुमायु  की एक सेविका जोहर ने सम्राट अकबर की जन्म तारीख 23 नवंबर 1542 ई. लिखी हुई थी. लेकिन यह भी एक भ्रांति मानी जाती है, कि काबुल पर विजय प्राप्त करने के बाद उनके पिताजी हुमायूं ने बुरी नजर से बचने के लिए अकबर की जन्म तारीख को बदल दिया था. भारत के लोगों ने उनके सफल एवं कुशल शासन के लिए उनका नाम अकबर रखा था. अकबर का अर्थ होता है, महान या फिर बड़ा. अकबर ने अपनी पूरी जवानी को शिकार करने में ,युद्ध कला सीखने में, लड़ने में और एक शक्तिशाली निडर और बहादुर योद्धा बनने में लगाया था. परंतु किन्ही कारणों से अकबर लिखना-पढ़ना नहीं सीख पाए. ऐसा कहा जाता है ,कि यदि अकबर को कुछ पढ़ने एवं कुछ लिखवाने की आवश्यकता पड़ती थी, तो अपने पास उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को रखा था, जिसे लिखना पढ़ना आता था.

सम्राट अकबर का पारिवारिक जानकारी

माता-पिता (Father & Mother )नसीरुद्दीन हुमायु  -हमीदा बानो बेगम
दादा-दादी ( Grand- Father & Grand- Monther )बाबर – महम बेगम
पत्नियाँ  (Wifes)पत्नी हीर कुँवारी, हीरा कुँवारी, हरका बाई, जोधा बाई, सलीमा सुल्तान बेगम
पुत्र (Son)जहाँगीर, दानियाल, सुल्तान मुराद मिर्जा, हवर्ष, हुसैन

सम्राट अकबर का प्रारंभिक जीवन और बचपन


अकबर के पिता नसीरुद्दीन हुमायु  मुगल समराज के दूसरे सम्राट थे. 1540 में उनके पिता शेरशाह सूरी से कन्नौज के युद्ध में अपना राजपाठ के साथ-साथ सब कुछ हार चुके थे. जब अकबर के पिता के पास कुछ नहीं था तो उसी समय उनकी पत्नी हमीदा बानो बेगम गर्भवती हुई थी. उस समय हुमायु  की स्थिति इतनी खराब थी कि उसके पास रहने के लिए घर बार नहीं था. हुमायु  की ऐसी स्थिति देख उमरकोट किले के हिंदू शासक राणा प्रसाद ने उनको शरण दी थी. हुमायु  लगातार मुगल सत्ता फिर से स्थापित करने के लिए प्रयत्न कर रहा था. जिस समय जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर का जन्म हुआ था. उस समय उनके पिताजी को पुत्र जन्म की प्रसन्नता में मित्रों को भेंट देने के लिए कुछ भी नहीं था , सिर्फ कस्तूरी थैली के उन्होंने कस्तूरी थैले को देकर के ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहां की इस मुस्क की खुशबू की भांति अकबर की कृति भी चारों ओर फैले. विषम परिस्थितियां होने की वजह से हुमायु  ने उसके पैतृक चाचा कामरान मिर्जा और अक्षरी मिर्जा के घर पर छोड़ कर चले गए. बड़े होकर अकबर ने वहां पर शिकार करना, हथियारों का उपयोग करना और युद्ध कौशल सीखना, महान योद्धा बन्ना के सभी चीजों का अध्ययन किया और जो आगे चलकर भारत का सबसे बड़ा सम्राट बना. 1555 में हुमायु  ने फारसी शासक शाह तहमास प्रथम के सैन्य समर्थन के बल पर कामरान की उसकी धृष्टता तथा विश्वासघात का बदला लेने के लिए उस पर आक्रमण करके दिल्ली को उससे वापस जीत लिया. हुमायूं दिल्ली तक सको तो पुनः हासिल कर लिया परंतु उस पर ज्यादा समय तक शासन नहीं कर पाया. जनवरी 1956 में एक दुर्घटना में हुमायु  की मृत्यु हो गई. परंतु हुमायु  के भरोसेमंद और अकबर के संरक्षक बैरम खान ने अकबर के युवा होने तक शासनकाल को संभाले रखा. बैरम खां के नेतृत्व में 14 फरवरी 1956 को कलानौर, पंजाब में सम्राट अकबर को हुमायूं का उत्तराधिकारी बना कर सम्राट घोषित कर दिया. नवंबर 1591 में अपने मामा हिंडाल मिर्जा की बेटी रुकैया सुल्तान बेगम से अकबर ने शादी की. रुकैया के सिंहासन चढ़ने के बाद अकबर की मुख्य पत्नी के रूप में वह सामने आई.

पानीपत का दूसरा युद्ध


जब मुगल साम्राज्य स्थापित था तो अकबर के साम्राज्य में काबुल कंधार, दिल्ली और पंजाब के कुछ हिस्से शामिल थे. उसी दौरान अफगान के सुल्तान मोहम्मद आदिल शाह ने भारत के सिंहासन पर कब्जा पानी और मुगलों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए योजना बनाई थी. 1556 में हुमायु  की मृत्यु के तुरंत बाद हिंदू जंगल सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य हेमू के सहयोग से दिल्ली पर अफगान सेना ने कब्जा कर लिया. अपमानजनक हार का सामना मुगलों को करना पड़ा और वे जल्दी अपने कमांडर तार्डी बेग के साथ भाग गए. हेमू ने 7 अक्टूबर 1556 में मुगल सिंहासन पर विराजमान हो गया. और इसी के साथ 350 साल की मुस्लिम साम्राज्यवाद के बाद उत्तर भारत में हिंदू शासन की स्थापना हुई. हिंदू शासन के कुछ समय बाद बैरम खान के निर्देश और नेतृत्व पर अकबर ने दिल्ली में सिंहासन पर अपने अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के इरादे की घोषणा की. मोबाइल से 9 स्वर के रास्ते पानीपत चली गई और 5 नवंबर 1556 को हेमू की सेना का सामना किया. अकबर की सेना हेमू की सेना की तुलना में काफी कम पड़ रही थी. हेमू की सेना में 30,000 घुड़सवार और 1500 हाथी थे उन्हें हिंदू मूल और अफगान शासकों का समर्थन भी था. बैरम खान ने मुगल सेना का नेतृत्व किया और सामने आकर लड़े. नौजवान अकबर को युद्ध स्थल से कुछ दूरी पर उनकी सेना द्वारा उनको सुरक्षित रखा गया था. युद्ध के शुरुआती में हेमू की सेना एक मजबूत स्थिति में थी, लेकिन बैरम खान और एक अन्य जनरल अल्वी कुली खान द्वारा रणनीति बनाकर युद्ध में अचानक बदलाव किया गया और दुश्मन की सेना पर काबू पा लिया गया . दुर्भाग्यपूर्ण मुगल सेना का तीर हेमू की आंखों में जा लगा , और उसका हाथी चालक अपने राजा को लेकर युद्ध के मैदान से दूर जाने लगा. सैनिकों का पीछा किया और उसे पकड़ लिया. इसी वजह से हेमू की विजय पराजय में बदल गई और उसे अकबर के सामने ले जाया गया. बैरम खान ने अकबर से कहा कि हेमू का वध कर गांधी पथ की उपाधि प्राप्त कर लीजिए. परंतु अकबर ने ऐसा करने से मना कर दिया और अपने शत्रु के साथ ऐसा व्यवहार करने से मना कर दिया. परंतु बैरम खान ने अपनी तलवार से हेमू का वध कर डाला. किस पानीपत के ऐतिहासिक युद्ध में मुगलों को 1500 हाथी तथा बहुत बड़ी मात्रा में चांदी सोना और धन मिला. दिल्ली एवं आगरा तथा उसके निकटवर्ती है , क्षेत्रों पर मुगल शासन का राज्य स्थापित हो गया. यह पानीपत का युद्ध अफ़गानों और मुगलों के बीच दिल्ली की सत्ता हासिल करने के लिए बहुत ही निर्णायक साबित हुआ. इसके बाद मुगलों ने पूरे आने वाले 300 वर्षों तक दिल्ली पर शासन की भागदौड़ अपने हाथों चलाते रहे.

साहित्य और कला के शौकीन 

अकबर अपने पिता हुमायूं और दादा बाबर से विपरीत थे और उनको साहित्य और कला से बहुत लगाव था. अकबर कोई कवि या डायरिस्ट नहीं थे. तब पर भी उन्होंने कला सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रवचन की सहाना की और उनका विस्तार क्या है. अकबर ने वास्तु कला के क्षेत्र में भी बहुत विस्तार किया और मुगल शैली का भी प्रचार किया. अकबर ने एक पुस्तकालय की भी स्थापना की थी. जिसमें लगभग 24,000 से अधिक संस्कृत, उर्दू , पार्शियन, ग्रीक, लेटिन अरबी और कश्मीरी भाषाएं की किताबें थी. इसके अतिरिक्त वहां पर कई सारे विद्वान, अनुवादक, कलाकार , सुलेख , लेखक, जिल्दसाज और वाचक भी मौजूद थे. अकबर खुद पढ़ा लिखा नहीं था परंतु उसने महिलाओं के लिए फतेहपुर सीकरी में एक पुस्तकालय की भी स्थापना की थी. हिंदू एवं मुस्लिम लोगों के लिए भी स्कूलों का निर्माण करवाया था. जलालुद्दीन अकबर ने दिल्ली, आगरा और फतेहपुर सीकरी के दरबार को कला साहित्य और शिक्षा के मुख्य केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया.

अकबर साम्राज्य का विस्तार
अकबर ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से संपूर्ण उत्तरी हिंदुस्तान, उत्तरी पश्चिम बंगाल से लेकर पूर्व में आसाम और उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में बीजापुर और गोलकुंडा की सरहद तक अकबर ने अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया था. सम्राट अकबर ने अपनी मृत्यु होने तक इन निम्नलिखित समराज को व्यवस्थित रूप से अपने अंदर जोड़ा.

(1) काबुल, (2) लाहौर, (3) मुल्तान, (4) देहली, (5) आगरा, (6) अवध, (7) अजमेर, (8) गुजरात, (9) मालवा, (10) इलाहाबाद, (11) बंगाल, (12) बिहार, (13) खानदेश, (14) यरार, (15) अहमदनगर. इन सभी राज्यों से अकबरपुर 1602 में लगभग 17 करोड़ 45 लाख रुपए की आय प्राप्त हुई थी.

जोधाबाई से अकबर के विवाह का इतिहास

1542 में जोधाबाई, उर्फ मरियम- उज-जमानी का जन्म एक राजवंशी राजकुमारी के रूप में हुआ था. वे जयपुर के आमेर के राजा भारमल की पुत्री थी. 6 फरवरी 1592 को सांभर , हिंदुस्तान में उनका विवाह सम्राट अकबर से हुआ. अकबर के साथ विवाह से उनके जीवन में धार्मिक और सामाजिक नीति में एक क्रमिक बदलाव आया था. अकबर के साथ विवाह होने के बाद उनको मल्लिका-ए-हिंद के नाम से जाने जाने लगी. अकबर की तीनों पत्नियों में से उनकी तीसरी प्रमुख महिलाओं में से यह एक थी. शहजादे के पैदा होने के बाद जोधा बेगम को मरियम- उज- ज़मानी का बेगम साहिबा का किताब दिया गया.

अकबर के नवरत्न

अकबर के दरबार में विराजमान नवरत्न के बिना उल्लेख के अकबर की भव्यता की कहानी मानो अधूरी ही रह जाती है. अकबर पढ़ना लिखना नहीं जानता था परंतु उसको सांस्कृतिक कला विभिन्न भाषाओं की जानकारी और शिक्षा के प्रति उसका अत्यधिक लगाव रहा है. अकबर के साम्राज्य को शोभायमान करने के लिए नवरत्न रखें , जो उसके दरबार को चार चांद लगाते थे. अकबर के नवरत्न जो इस प्रकार निम्नलिखित हैं.
1 . अब्दुल फजल
सम्राट अकबर के शासन काल की प्रमुख घटनाओं को अब्दुल फजल ने कलमबद्ध किया था. इन्होंने अकबरनामा और आइन -ए – अकबरी की रचना की थी.

2 . तानसेन
अकबर के दरबार में कवि तानसेन एक अद्भुत विलक्षण संगीतज्ञ थे. तानसेन ने मल्हार राग की खोज की थी. तानसेन के बचपन का नाम तन्ना मिश्रा या फिर राम पांडे था. माना जाता है कि तानसेन को दीपक राग का बहुत संपूर्ण और अथक ज्ञान था.

3 .फैजी
यह एक बहुत प्रसिद्ध कवि थे और अबू फजल के भाई भी थे. इसके अलावा अकबर के बेटे के गणित के शिक्षक भी बने.

4 . बीरबल
राजा बीरबल सम्राट अकबर के विशेषज्ञ सलाहकार थे. इसके अलावा वह विशेष महान कवि भी. उनके द्वारा लिखी ब्रह्म के नाम से कविताएं आज भी भरतपुर संग्रहालय के राजस्थान में आज भी मौजूद है.

5 . राजा टोडरमल
राजा टोडरमल सम्राट अकबर के राजस्व और वित्तमंत्री थे. इन्होंने भूमि की पैमाइश इसके लिए पूरे विश्व में सर्वप्रथम मानक प्रणाली खोज की थी. यह अकबर के समराज के राजस्व प्रणाली सुधार के लिए जिम्मेदार थे.
6 . राजा मानसिंह

राजा मान सिंह जोधा बेगम के भाई थे और यह अकबर के एक प्रमुख सेनापति भी थे.
7 . मुल्लाह दो प्याजा
इन्होंने अकबर के कलाकार के रूप में भी अपना योगदान दिया हुआ है. और इनको बात काटने और प्याज खाने का भी बहुत शौक था.
8 . अब्दुल रहीम खान-ऐ-खाना

यह बैरम खान के बेटे थे और इनको गजल दोहो को लिखने का बहुत शौक था. इसीलिए एक प्रसिद्ध कवि के रूप में भी जाने जाते थे.
9 . फ़क़ीर अज़ियोद्दीन
यह अकबर के नवरत्नों में से एक थे. और इसके अतिरिक्त अकबर के प्रमुख सलाहकारों में से भी एक थे.

अकबर की मृत्यु

सम्राट अकबर को 63 साल की आयु में पेचिश जैसी घातक बीमारी का सामना करना पड़ा. जिससे वह कभी उभर नहीं पाए और उसके 3 सप्ताह के अंदर ही उस से पीड़ित होकर 27 अक्टूबर 1605 को फतेहपुर सीकरी में उनका देहांत हो गया. उनका दफन कक्ष सिकंदरा, आगरा में एक मकबरे के रूप में बनाया गया.

Other Links:

  1. गुरु तेग बहादुर का जीवन परिचय
  2. पानीपत के तीनो युद्धों का विस्तारपूर्वक वर्णन 

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