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अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय | Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय | Atal Bihari Vajpayee (Bajpai) Biography in Hindi Health, Kavita, Family, Career

अटल बिहारी वाजपेयी  हमारे देश के एक पूर्व राजनेता हैं, जिन्हें भारतीय राजनीति में अपना काफी कंट्रीब्यूशन दिया हुआ है. वाजपेयी जी कि छवि हमेशा से ही काफी साफ रही है और इसी के कारण इनका सम्मान न केवल इनकी पार्टी, बीजेपी द्वारा किया जाता है, बल्कि विपक्षियों दलों द्वारा भी किया जाता है.

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93 वर्ष के वाजपेयी जी ने बतौर हमारे देश के पीएम रहते हुए हमारे देश की तरक्की के लिए कई सारे कार्य किए हुए हैं. इनके द्वारा हमारे देश को दी गई सेवाओँ के चलते ही, इन्हें साल 2015 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न भी दिया जा चुका है. इसके अलावा इनके जन्म दिवस के दिन को इंडियन गवर्नमेंट द्वारा सुशासन दिवस के रूप में भी घोषित किया है.

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अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी जानकारी

नाम (Name)अटल बिहारी वाजपेयी
निक नेम  (Nick Name)अटल जी
जन्मदिन (Birthday)25 दिसम्बर 1924
जन्म स्थान (Birth Place)ग्वालियर, भारत
राशि (Zodiac)मकर राशि
नागरिकता (Citizenship)भारतीय
गृह नगर (Hometown)ग्वालियर, म.प्र
शिक्षा (Education)

 

कला स्नातक और लॉ स्नातक
धर्म (Religion)हिन्दू
घर का पता (Home Address)6-ए, कृष्णा मेनन मार्ग, नई दिल्ली – 110011
भाषा का ज्ञान (Language)हिंदी
पेशा (Occupation)राजनीतिज्ञ, पूर्व प्रधानमंत्री
पार्टी का नामभारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
बुरी आदतें (Bad Habits)
कुल संपत्ति (Net Worth)2 मिलियन डॉलर
ट्विटर पेज (Twitter Page)
फेसबुक पेज(Facebook Page)
इन्स्टाग्राम अकाउंट(Instagram Account )

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म और परिवार (Birth and Family)

  • अटल बिहारी वाजपेयी का बर्थ भारत की ग्वालियर सिटी में सन् 1924 में हुआ था. इनके पिता कृष्णा बिहारी एक कवि और टीचर हुआ करते थे और इनका मां एक गृहणी थी जिनका नाम कृष्णा देवी था.
  • अटल बिहारी वाजपेयी के माता पिता की कुल सात संताने थीं, जिनमें से अटल जी के चार भाई और तीन बहनें थी.
  • अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपने जीवन में किसी से भी विवाह नहीं किया हुआ है और ये अविवाहित हैं. हालांकि इनकी एक दत्तक पुत्री , नमिता भट्टाचार्य है.

बिहारी वाजपेयी के परिवार के बारे में जानकारी (Family Information)

पिता का नाम (Father’s name)कृष्णा बिहारी वाजपेयी
माता का नाम (Mother’s name)कृष्णा देवी
दादा का नाम (Grandfather’s Name)पंडित श्याम लाल वाजपेयी
कुल भाई बहने (Totle Sibling) छह
पत्नी का नाम (Wife’s Name )
बेटी का नाम (Daughter’s Name)नमिता भट्टाचार्य
कुल बच्चेएक बेटी
भाई बहनों के नाम (Brothers, Sisters Name )भाईयों के नाम

प्रेम बिहारी वाजपेयी,

अवध बिहारी वाजपेयी,

सुदा बिहारी वाजपेयी,

बहनों के नाम

विमला मिश्रा,

उर्मिला मिश्रा और

कमला देवी

                                                                                                                      

अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी से जुड़ी निजी जानकारी (Personal Information)-

  • अटल जी के पूर्वजों का संबंध आगरा के बटेश्वर गांव से था और इनके दादा पंडित श्याम लाल वाजपेयी, आगरा से मध्य प्रदेश में जाकर बस गए थे.
  • अटल जी पढ़ाई में काफी तेज हुआ करते थे और इन्होंने राजनीति विज्ञान में प्रथम श्रेणी में स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की हुई थी.
  • अटल जी ने कानपुर के विश्वविद्यालय में वकालत की पढ़ाई करने के लिए दाखिला लिया था. हैरत की बात तो यह है कि इस कॉलेज में इनके साथ इनके पिता ने भी दाखिला लिया और पढाई के दौरान होस्टल में पिता पुत्र ने एक ही कमरा साझा किया.
  • अटल जी एक पत्रकार बनना चाहते थे और इन्होंने कई अखबारों में कार्य भी किया हुआ है. जिन अखबारों में इन्होंने कार्य किया हुआ है उनके नाम इस प्रकार हैं- राष्ट्र धर्म, पंचंज्य, दैनिक समाचार, वीर अर्जुन और स्वदेश अखबार. हालांकि अटल जी ने कुछ समय बाद पत्रकारिता छोड़ दी थी और ये राजनीति में आ गए थे.
  • अटल जी का नाम भारत के बेहतरीन हिंदी कवियों में गिना जाता है और एक साक्षात्कार में इन्होंने ये कबूला भी था कि इन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं थी और ये हमेशा से एक कवि बनना चाहते थे.
  • एक राजनेता बनने के बाद भी अटल जी कविताएं लिखा करते थे और जब भी ये भाषण दिया करते थे तो इनके भाषण में कविताएं सुनने के जरूर मिलती थी.
  • अटल जी प्रथम ऐसे व्यक्ति भी थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहली बार हिंदी भाषा में स्पीच दी थी.
  • अटल जी का नाता एक ब्राह्मण परिवार से होने के बावजूद भी वे मांसाहारी है. इनका पसंदिता मांसाहार प्रॉन (prawn) है और पूरानी दिल्ली का करीम नाम का रेस्टोरेंट इनका पसंदीदा रेस्टोरेंट है.

अटल बिहारी वाजपेयी का लुक (Looks Table)

अटल बिहारी वाजपेयी जी इस वक्त 94 वर्ष के थे और ये लंबे समय से विल चेयर पर थे और कम ही लोगों से बातचीत कर पाते थे . हालांकि ये अपनी  युवा अवस्था में काफी आकर्षक व्यक्तित्व के हुआ करते थे. इनका लुक इस प्रकार था :

रंग (color)गेहुँआ
लम्बाई (Height)56 फीट इन्च
वजन (Weight)76 किलो
आंखों का रंग (Eye color)काला
बालों का रंग (Hair color)सफेद
बॉडी साइज (Body Measurements)छाती (Chest Size) –  –

कमर (Waist Size) –  –

बाईसेप्स (Biceps Size) – –

जूतों का नंबर (Shoe Size) –

अटल बिहारी वाजपेयी की शिक्षा (Education)

  • अटल जी के परिवार के सदस्य काफी पढ़े लिखे हुआ करते थे और इनके परिवार में पढ़ाई को काफी महत्व दिया जाता था.
  • वाजपेयी जी ने अपनी स्कूली शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर, गोरखी, बारा, ग्वालियर से हासिल की हुई है. इनकी कॉलेज कि डिग्री विक्टोरिया कॉलेज ग्वालियर की है जबकि इनकी उच्चतम शिक्षा राजनितिक शास्त्र में एम. ए. है.

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक सफर (Political Journey)

  • अटल बिहारी वाजपेयी ने स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अपना राजनीति का सफर स्टार्ट किया था. अटल जी डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को काफी मानते थे और इसलिए इन्होंने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पार्टी भारतीय जनसंघ (बीजेएस), जो कि एक हिंदू राइट विंग राजनीतिक दल था, उसे ज्वाइन किया था.
  • भारतीय जनसंघ पार्टी से जुड़ने के बाद अटल जी को उत्तरी क्षेत्र का राष्ट्रीय सचिव बना दिया गया था और इसी पार्टी से अटल जी ने पहली बार लोकसभा चुनाव भी लड़ा था.
  • इन्होंने साल 1957 में अपना पहला लोकसभा चुनाव बलरामपुर, जो कि उत्तर प्रदेश का एक जिला है, वहां से लड़ा था. और इस सीट से ही इन्होंने भारतीय राजनीति में अपनी पहली जीत भी दर्ज करवाई थी.
  • अटल जी के कार्यों को देखते हुए इन्हें साल 1968 में जनसंघ के राष्ट्रीय प्रेजिडेंट बना दिया गया था.
  • अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 1975 में तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आंतरिक आपातकाल के खिलाफ जयप्रकाश नारायण (जेपी) द्वारा शुरू किए गए कुल क्रांति आंदोलन में भी भाग लिया था.
  • इस आंदोलन के कुछ सालों बाद यानी 1977 में इंदिरा गांधी सरकार से मुकाबला करने के लिए इनकी जनसंघ पार्टी ने जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया था.
  • साल 1977 में मोरारजी देसाई के नेतृत्व में इनकी पार्टी को जीत मिली. इसा जीत के साथ ही देसाई जी ने अटल बिहारी वाजपेयी को केंद्रीय मंत्री बना दिया था और इन्हें विदेश मामलों का मंत्रालय मिला था. बतौर विदेश मंत्री रहते हुए, वाजपेयी जी ने विदेश में हिंदी भाषा में स्चीप दी थी.
  • साल 1979 में किन्हीं कारणों के चलते मोरारजी देसाई की सरकार गिर गई थी और इसके कारण वाजपेयी जी को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

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साल 1980 में बनाई भारतीय जनता पार्टी

अपना मंत्रालय छोड़ने के एक साल बाद वाजपेयी जी ने लालकृष्ण आडवाणी, भैरों सिंह शेखावत और बीजेएस पार्टी के अन्य नेताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी का गठन किया था. साल 1980 में बनीं ये पार्टी काफी काम समय के अंदर ही कांग्रेस पार्टी की प्रतिद्वंदी पार्टी बन गई थी.

अटल बिहारी वाजपेयी का बतौर भारत के प्रधानमंत्री का सफर

  • साल 1996 में हुए लोकसभा इलेक्शन में बीजेपी पार्टी को पहली बार जीत मिली थी. इस समय इनकी पार्टी ने पहली बार हमारे देश में अपनी सरकार बनाई थी.
  • बीजेपी पार्टी की और से अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनाया गया था और इस तरह से ये हमारे देश के 10 वे प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हुए थे.
  • हालांकि राजनीतिक कारणों के चलते बीजेपी की ये सरकार महज 13 दिनों के अंदर ही गिर गई थी और इसी के साथ अटल बिहारी वाजपेयी को अपना पद छोड़ना पड़ा था.
  • सरकार गिरने के दो साल बाद, एक बार फिर से नेशनल डेमोक्रेट एलायंस केंद्रीय में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुए थी और इस तरह से साल 1998 में वाजपेयी जी एक बार फिर से हमारे देश के प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हुए थे .

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वाजपेयी द्वारा बतौर पीएम रहते हुए किए गए कार्य

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वाजपेयी जी ने कई तरह के महत्वपूर्ण फैसले लिए था और भारत को और मजबूत देश बनाने की कोशिश की थी.

परमाणु परीक्षण (Nuclear Test)

प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी जी के दूसरे कार्यकाल में मई, 1998 में राजस्थान में परमाणु परीक्षण किया गया था. इस परीक्षण के सफल होने के साथ ही भारत की गिनती भी उन देशों में होने लगी, जिनके पास परमाणु बम थे.

पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए कार्य

  • वाजपेयी जी ने पाकिस्तान के साथ पीस (PEACE) स्थापित करने के लिए कई सारे कदम उठाए थे और इन्हीं कदमों में से एक कदम दिल्ली-लाहौर बस सेवा थी. इस बस सेवा को फरवरी, 1999  में शुरू किया गया था और इस बस सेवा को शुरू करने का मकसद दोनों देशों के बीच दोस्ती का रिश्ता बनाना था.
  • बस सेवा के अलावा कश्मीर मुद्दों को हल करने के लिए भी कई तरह की वार्ता वाजपेयी जी की सरकार द्वारा पाकिस्तान के साथ की गई थी. लेकिन पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध शुरू करके भारत सरकार द्वारा दोनों देशों के बीच में शांति स्थापित करने के लिए की जाने वाली सारी कोशिशों पर पानी फेर दिया था.
  • वाजपेयी जी की सरकार के समय हुए कारगिल युद्ध में भारत की विजय हुई थी और इस युद्ध को जीत कर वाजपेयी जी ने अपने आपको सफल पीएम साबित कर दिया था.

साल 1999 में फिर गिरी बीजेपी सरकार

वाजपेयी जी को साल 1999 में फिर से एक बार अपने पीएम पद को छोड़ना पड़ा था, क्योंकि बीजेपी को अपना समर्थन देने वाली पार्टी, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझागम (एआईएडीएमके) ने अपना समर्थन इस पार्टी से वापस ले लिया था. जिसके कारण नेशनल डेमोक्रेट एलायंस टूट गई थी और बीजेपी की सरकार फिर से गिर गई थी. इस बार वाजपेयी जी केवल 13 महीने के लिए ही पीएम बन पाए थे.

13 अक्टूबर 1999 को फिर बने पीएम

  • केंद्रीय में सरकार गिरने के बाद फिर से चुनाव हुए और फिर से नेशनल डेमोक्रेट एलायंस केंद्र में अपनी सरकार बनाने में कामयाब हुई. इस बार फिर से वाजपेयी जी को पीएम बनाया गया.
  • वाजपेयी जी ने 13 अक्टूबर 1999 को पीएम पद के लिए शपत ली थी और वो साल 2004 तक पीएम पद पर बने रहे थे. ये प्रथम बार था कि जब किसी नॉन कांग्रेस नेता ने अपना कार्यकाल पूरे पांच साल तक सफलतापूर्ण किया था.

कंधार हाईजैक (Kandahar hijack)

जिस वक्त वाजपेयी जी देश के पीएम थे उसी वक्त काठमांडू से नई दिल्ली आने वाले एक प्लेन को हाईजैकट कर लिया गया था. इस प्लेन में काफी संख्या में भारतीय नागरिक सवार थे और इन सबकी जान के बदले आतंकवादियों ने भारत सरकार से आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर को छोड़ने की मांग रखी थी. लोगों की जान बचाने के लिए वाजपेयी जी ने मौलाना मसूद अजहर सहित कई आतंकवादियों को रिहा कर दिया था और वाजपेयी जी के इस फैसले की निंदा की गई थी. दरअसल ये प्लेन भारत से होकर गुजरा था और भारत सरकार अगर थोड़ी समझ से काम लेती तो इस प्लेन को आतंकवादियों से छुड़ाया जा सकता था.

पाकिस्तान देश के साथ फिर की वार्ता                        

पाकिस्तान देश के साथ विवादों को सुलझाने के लिए वाजपेयी जी ने एक बार फिर से कोशिश की थी और इन्होंने आगरा शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था. इस शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के उस वक्त के राष्ट्रपति को बुलाया गया था. हालांकि ये वार्ता भी सफल नहीं हो पाई थी क्योंकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने कश्मीर के हिस्से को छोड़ने से इंकार कर दिया था जो कि उनके कब्जें में है.

भारतीय संसद में हुआ था हमला

साल 2001 में जब भारतीय संसद पर हमला हुआ था उस वक्त वाजपेयी जी जी हमारे देश के पीएम थे. साथ ही इनके कार्यकाल के दौरान ही गुजरात में दंगे भी हुए थे और इन दंगों की वाजपेयी जी ने आलोचना की थी.

साल 2005 में ली रिटायरमेंट

साल 2004 के हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी पार्टी को हार मिली थी और देश में फिर से कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाली. वहीं साल 2005 के आखिरी महीने में एक रैली में भाषण देते हुए वाजपेयी जी ने राजनीति से रिटायरमेंट लेने की घोषणा की थी और इन्होंने अपनी पार्टी की जिम्मेदारी लाल कृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन को सौंप दी थी.

अटल बिहारी वाजपेयी की पसंदीदा चीजों के बारे में जानकारी (Likes) –

अटल बिहारी वाजपेयी को कई तरह की चीजों के शौक है और उनकी रुचि कविताओं के अलावा गानों में भी है. उनकी कुछ पंसंदिता चीजे इस प्रकार से है:

पसंदीदा खाना (Favourite Food)प्रॉन, चाइनीज खाना, अलवर मिल्क केक, खीर, हलवा,मालपुआ और इत्यादि
पसंदीदा राजनेता (Favourite politician)डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी
पसंदीदा लीडर (Favourite leader)गांधी जी और जवाहर लाल नेहरू
पसंदीदा एक्टर (Favourite Actor)संजीव कुमार, दिलीप कुमार
पसंदीदा अभिनेत्री (Favourite Actress)सुचित्रा सेन        
पसंदीदा गाना (Favourite Song)कभी कभी मेरे दिल में ख्याल….
पसंदीदा कवि (Favourite Poet)हरिवंश राय बच्चन, रमनथ अवस्थी, सूर्यकांत त्रिपाठी, बाल कृष्णा शर्मा नवीन

वाजपेयी जी से जुड़ी अन्य जानकारी Other Information about Vajpayee:

  • जिस टाइम गुजरात स्टेट में दंगे हुए थे उस समय इस स्टेट के सीएम नरेंद्र मोदी थे, जो कि बीजेपी पार्टी के ही नेता थे. इस राज्य में हुए दंगों को लेकर वाजपेयी जी ने बिना किसी डर के, अपने पार्टी के सीएम यानी मोदी जी की भूमिका पर सवाल उठाए थे और कहा था कि इन्हें अपना राजधर्म सही से नहीं निभाया है.
  • जिस वक्त वाजपेयी जी अपनी लॉ की पढ़ाई कर रहे थे उस समय देश का विभाजन हो रहा था और इस पार्टीशन के चलते होने वाले दंगों के कारण इन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी.
  • साल 1924 में हुए क्विट इंडिया मूवमेंट में वाजपेयी जी और इनके भाई प्रेम ने भी हिस्सा लिया था और इस मूवमेंट में हिस्सा लेने के कारण इन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था. हालांकि 23 दिनों तक जेल में रखने बाद इन्हें ब्रिटिश पुलिस ने रिहा कर दिया गया था.
  • दिल्ली से लाहौर तक चलाई गई बस सेवा में खुद वाजपेयी जी ने सफर किया था और उनके साथ अन्य बीजेपी के नेताओं ने भी इस बस में ट्रेवल किया था.
  • वाजपेयी जी के एक भाषण को सुनकर जवाहर लाल नेहरू इनकी प्रतिभा से आकर्षित हुए थे और उन्होंने इनके प्रधान मंत्री बनने कि घोषणा पहले ही कर दी थी.

वाजपेयी जी को मिले पुरस्कारों के बारे में जानकारी (Awards)

अटल जी के अपने जीवन में किये कार्यो को देखते हुए उनका विभिन्न पुरुस्कारों का हक़दार होना तो निश्चित ही है, इनके द्वारा प्राप्त पुरुस्कारों कि सूची निचे दी गई है.

संख्या           पुरस्कार का नामकिस साल मिला पुरस्कारकिसके द्वारा दिया गया अवॉर्ड
1पद्म विभूषण1992भारत सरकार
2डॉक्टर ऑफ लेटर 1993कानपुर विश्वविद्यालय
3लोकमान्य तिलक पुरस्कार1994भारत सरकार
4उत्कृष्ट संसदीय पुरस्कार1994भारतीय संसद
5भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार1994भारत सरकार
6भारत रत्न2015भारत सरकार
7बांग्लादेश लिबरेशन वार सम्मान 2015बांग्लादेश सरकार

 वाजपेयी जी से जुड़े विवाद (Controversy) –

वाजपेयी जी को हमेशा से ही एक साफ नेता के तौर पर देखा जाता है और इनके साथ किसी भी तरह का विवाद नहीं जुड़ा हुआ है. हालांकि जिस वक्त बाबरी मजिस्द को गिराया गया था, उस वक्त वाजपेयी जी की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए थे. क्योंकि इस मजिस्द के खिलाफ उस वक्त बीजेपी के कई नेताओं द्वारा रैली निकाली गई थी.

वाजपेयी जी की कुल संपत्ति (Total Assets)

वाजपेयी जी के पास कुल 2 मिलियन डॉलर की संपत्ति है. इसके अलावा इनके पास दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश इलाके में एक फ्लैट भी है, जिसकी कीमत करोड़ रुपए में है. इस वक्त ये अपने परिवार के साथ सरकार द्वारा दिए गए घर में रहते हैं और ये घर कृष्णा मेनन मार्ग में स्थित है.

वाजपेयी जी की सेहत (Health now, Death News)

वाजपेयी जी इस वक्त कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं और इस वक्त इनका इलाज एम्स अस्पताल में चल रहा है. साल 2001 में इनकी घुटनों की रिप्लेसमेंट की सर्जरी में हो रखी है और साल 2009 में स्टोक के कारण ये इम्पैरेड स्पीच का शिकार हो गए थे. इसके अलावा ये लोगों को भी पहचान ने में अस्मर्थन हैं.

 भारतीय राजनीति में ऐसे काफी कम नेता हैं जिन्होंने निस्वार्थ होकर हमारे देश को अपनी सेवाएं दी हुई हैं और इन्हीं महान नेताओं में से एक नाम वाजपेयी जी का भी है. इन्होंने अपने जीवन काल में केवल अपना देशधर्म ही निभाया है और इसी की वजह से इनका सम्मान हर किसी के द्वारा किया जाता है.

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One comment

  1. 1924 me birth day or 1924 me hi 23 din ki jail ye kese ho sakta

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