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अरुणिमा सिन्हा की कहानी जीवन परिचय | Arunima Sinha Biography Story in Hindi

अरुणिमा सिन्हा की कहानी जीवन परिचय | Arunima Sinha Biography Story in Hindi

अरुणिमा सिन्हा भारत की ऐसी पहली महिला हैं जिन्होंने अपना एक पैर ना होने के बावजूद भी एवरेस्ट पहाड़ पर चढ़ने में सफलता हासिल की थी. अरुणिमा ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर दुनिया को दिखा दिया था कि अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा है तो कुछ भी मुश्किल नहीं है. अरुणिमा उन सब लोगों के लिए मोटिवेशन है जो अपनी जिंदगी में कुछ करना तो चाहते हैं लेकिन बाधाएं उनका रास्ता रोके रहती हैं. अरुणिमा के अनुसार सबके पास कुछ ना कुछ गुणवत्ता है बस उसे इस्तेमाल करने की जरुरत है.

arunima-sinha

पूरा नामअरुणिमा सिन्हा
जन्म सम्बन्धी जानकारी20 जुलाई 1988

अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश

शिक्षा एवं प्रशिक्षणमाउंटेनियरिंग पाठ्यक्रम

(नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग)

माता-पिता का नामN/A
पेशावॉलीबॉल, पर्वतरोही
प्राप्त पुरस्कार (Award)पदम् श्री,  तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड, अमेजन इंडिया
किताब (Book)बोर्न अगेन ऑन द माउंटेन (2014)
मुख्य उपलब्धिएवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली अपंग भारतीय महिला
पसंदीदा क्रिकेटरयुवराज सिंह
सोशल मीडिया कांटेक्ट ट्विटर (https://twitter.com/sinha_arunima?lang=en @sinha_arunima)

फेसबुक

(https://www.facebook.com/TheArunimaSinha/ Arunima Sinha)

इंस्टाग्राम (arunimasinhaofficial)

कुल कमाई (Net worth)N/A

अरुणिमा सिन्हा का जन्म एवं शिक्षा  (Arunima Sinha birth and education)

अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश में जन्म लेने वाली अरुणिमा सिन्हा के  जन्म दिन की तारीख 20 जुलाई 1988 है. इनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश से ही पूरी हुई थी. उसके बाद अरुणिमा सिन्हा ने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग, उत्तरकाशी से माउंटेनियरिंग कोर्स किया था. हालांकि इनको पढ़ाई-लिखाई से ज्यादा खेल कूद रुचि थी.  इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर वॉलीबॉल भी खेला है, हालांकि ये वॉलीबॉल एवं फुलवाल दोनों की अच्छी खिलाड़ी थी. इसके लिए अरुणिमा सिन्हा ने काफी प्रैक्टिस भी की थी.

अरुणिमा सिन्हा का परिवार (Arunima Sinha Family)

अरुणिमा एक भले ही उत्तर प्रदेश के छोटे से कस्बे संबंधित हों लेकिन इनकी सोच बहुत ऊंची है..  इनके पिता सेना में इंजीनियर हुआ करते थे लेकिन जब अरुणिमा सिर्फ 3 साल की थी, तभी इनके पिता ने इस दुनिया को छोड़ दिया था. वहीँ इनकी माँ भारत के हेल्थ डिपार्टमेंट में सुपरवाइजर हुआ करतीं थीं.

अरुणिमा सिन्हा का शुरुआती करियर (Arunima Sinha career)

अरुणिमा सिन्हा बचपन से ही वॉलीबॉल एवं फुटवॉल खेलने में ध्यान दिया करतीं थीं, अरुणिमा अपनी मेहनत के दम पर वॉलीबॉल में नेशनल खेल चुकी थी. खेलते समय ही इन्होंने नौकरी करनी चाही एवं सीआईएसएफ की एक पोस्ट के लिए आवेदन किया था. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, एक दिन ट्रैन हादसे में इनके साथ हुई दुर्घटना ने इनके करियर को पूरी तरह बदल कर रख दिया.

अरुणिमा सिन्हा ट्रेन एक्सीडेंट (Arunima Sinha story)

  • सीआईएसएफ की परीक्षा में शामिल होने के लिए अरुणिमा को दिल्ली जाना था. 21 अप्रैल 2011 को अरुणिमा ने लखनऊ से दिल्ली जाने वाली ट्रैन पद्मावती एक्सप्रेस से अपना सफर तय करने का निर्णय लिया. जब अरुणिमा लखनऊ से निकली तो ट्रैन में सफर के दौरान कुछ बदमाशों ने इनसे सोने की चेन एवं बैग छुड़ाने की कोशिश की. जब अरुणिमा ने इन बदमाशों या चोरों का विरोध किया तो बदमाशों ने अरुणिमा को चलती ट्रैन से नीचे फेक दिया. अरुणिमा के एक इंटरव्यू के अनुसार “अरुणिमा जब नीचे गिरी तो इन्होंने देखा कि दूसरे ट्रैक पर भी एक ट्रैन आ रही है. लेकिन जब तक अरुणिमा खुद को पटरी से हटा पातीं, ट्रैन इनके पैर को कुचलते हुई आगे बढ़ गई. अरुणिमा के अनुसार इसके बाद की घटना उनको याद ही नहीं हैं .” लोगों द्वारा बाद में बताया गया था कि ये हादसा रात में हुआ था और इनके पैर के ऊपर से लगभग 49 ट्रैन निकली थीं.
  • उसके बाद गांव के लोगों द्वारा अरुणिमा को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां डॉक्टर्स ने इनकी जान बचाने के लिए इनके एक पैर को काट दिया. जिससे अरुणिमा की जिंदगी तो बच गई लेकिन इन्हें अपना एक पैर गवाना पड़ा. यह एक खिलाड़ी के लिए दुनिया के सबसे बड़े सदमे से कम नहीं आंका जा सकता. इस घटना ने अरुणिमा को बहुत बड़ा झटका दिया था, अरुणिमा सिन्हा  से किस्मत ने भारत के लिए वॉलीबॉल खेलने का मौका छीन लिया था.

दुघर्टना के बाद अरुणिमा सिन्हा की ज़िन्दगी का सफर (After accident)

  • इस घटना के बाद भारत के खेल मंत्रालय ने अरुणिमा को 25 हजार रुपय देने की घोषणा कर दी. इसके साथ ही सीआईएसएफ की नौकरी देने के लिए इनकी सिफारिस की गई. खेल राज्य मंत्री अजय माकन के द्वारा भी अरुणिमा को बेहतर इलाज के लिए 2 लाख रूपए दिए गए. इसके अलावा भारतीय रेल विभाग ने अरुणिमा को रेलवे में नौकरी करने का ऑफर दिया.
  • 18 अप्रैल 2011 को इनको आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में इनके नकली पैर की स्थापना की गई. इस मेडिकल कॉलेज में इनको 4 महीने तक भर्ती किया गया था एवं दिल्ली की एक निजी कंपनी ने अरुणिमा सिन्हा को कृत्रिम पैर लगवाने का खर्च दिया था.
  • हालांकि पुलिस ने अरुणिमा पर आत्माहत्या करने या ट्रैन की पटरी गलत तरीके से पार करने के आरोप लगाए थे. जब इस केस पर कोर्ट का फैसला आया तो उसमें पुलिस को गलत ठहराया गया और कोर्ट ने आदेश दिया कि भारतीय रेलवे अरुणिमा को 5 लाख की राशि मुआवजे के रूप में दे.
  • अरुणिमा सिन्हा ने हमेशा अपनी लड़ाई खुद ही लड़ी है, इतना ही नहीं अरुणिमा सिन्हा अपनी मेहनत की बदौलत सन् 2012 में सीआईएसएफ की हेड कांस्टेबल के लिए होने वाली परीक्षा पास कर चुकी हैं.

अरुणिमा सिन्हा को कहां से मिली प्रेरणा (Arunima sinha inspiration)

जब अरुणिमा अस्पताल में थी तो इन्होंने कुछ नया कर दिखाने का फैसला लिया और वो था ऊँचे-ऊँचे पर्वतों पर अपने देश का झंडा लहराना. अरुणिमा को नई ऊर्जा देने का काम उस समय चल रहे एक टीवी शो “टू डू समथिंग” ने किया था. इनको दूसरी सबसे बड़ी प्रेरणा भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह से मिली थी, जिन्होंने कैंसर जैसी बीमारी को हराकर फिर से अपने देश के लिए खेलना का जज्बा दिखाया था. इसके बाद अरुणिमा सिन्हा जब अस्पताल से इलाज कराने के बाद निकली तो इन्होंने भारत की पहली बार माउंट एवेरेस्ट की चोटी पर पहुंचने वाली महिला बछेंद्री पाल से मिलने की योजना बनाई. इसके बाद अरुणिमा सिन्हा पर माउंट एवरेस्ट पर अपने देश का झंडा फैराने का जूनून सवार हो गया, इसके लिए इनके भाई ओमप्रकाश ने इन्हें माउंट एवरेस्ट की ऊंचाइयां छूने के लिए प्रेरित किया था.

अरुणिमा सिन्हा कैसे बनी पर्वतरोही  (Arunima sinha remarkable achievement)

  • अरुणिमा को हर तरफ से माउंट एवरेस्ट पर फतह करने के इस नामुमकिन कारनामे को करने की प्रेरणा मिली, जिससे इनके इरादे और मजबूत हो गए. इन्होंने 2012 टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन से पर्वतरोहण प्रशिक्षण लेने के लिए फैसला लिया था. फिर साल 2012 में सिन्हा ने एवरेस्ट की चढ़ाई करने की तैयारी के लिए आइलैंड पीक पर चढ़ाई की, जिसकी ऊंचाई 6150 मीटर की है.
  • दो साल तक कड़ी मेहनत से प्रशिक्षण लेने के बाद अरुणिमा ने दुनिया की सबसे उच्चतम चोटी पर पहुंचने का मन बनाया. 17 घंटे की कठिन चढ़ाई करने के बाद ही ये एवरेस्ट की ऊंचाई तक पहुँच सकीं थी. टीएसएफ की ट्रेनर सुजान महतो के साथ अरुणिमा सिन्हा ने 21 मई सन् 2013 को सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी की.
  • इनको एवरेस्ट समिट पूरा करने के लिए कुल 52 दिन लगे थे. उस समय अरुणिमा की उम्र सिर्फ 26 साल की थी. ऐसा करने के बाद अरुणिमा भारत सबसे पहली ऐसी विकलांग महिला बन गई हैं जिन्होंने एवरेस्ट पर जीत हासिल की है.
  • एक विकलांग होने के बाद भी अरुणिमा में इतना जज्बा था कि एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचना भी आसान हो गया, इस सफलता के दौरान इन्होंने एक कपड़े पर भगवान शंकर एवं विवेकानन्द को धन्यवाद लिखकर वर्फ में दफन कर दिया था.
  • इन्होंने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए सभी महाद्वीपों के सर्वोच्च शिखर पर चढ़ने और भारत के राष्ट्रीय ध्वज को चोटी पर फहराने का निर्णय लिया था. जिसके चलते अरुणिमा ने अभी तक छह चोटियों में चढ़ने का काम पूरा कर लिया है जिनमें से एशिया में एवरेस्ट, अफ्रीका में किलिमंजारो, यूरोप में एलब्रस, ऑस्ट्रेलिया में कोस्यूस्को, अर्जेंटीना में एकांकागुआ और इंडोनेशिया में कारस्टेंस पिरामिड आदि शामिल हैं.

अरुणिमा सिन्हा को मिले पुरस्कार (Arunima Sinha awards list)

  1. अरुणिमा को भारत सरकार की तरफ से 2015 में पदमश्री नाम के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो कि भारत का चौथा सबसे बड़ा सम्मान है. पदमश्री पुरस्कार को भारत में किसी एक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले इंसान को दिया जाता है.
  2. अरुणिमा को वर्ष 2016 में तेनजिंग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड भी दिया गया. इस पुरस्कार को भारत में दिये जाने वाले अर्जुन पुरस्कार के समान माना जाता है, जो कि खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले को दिया जाता है.
  3. इसके अलावा के भी इन्हें राज्य स्तर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है. इसी साल इनके द्वारा दिए गए योगदान को देखते हुए अरुणिमा सिन्हा कोप्रथम महिला पुरस्कार से सन् 2018 में सम्मानित किया गया.
  4. उत्तर प्रदेश सरकार ने अरुणिमा के विकलांग होते हुए भी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के जज्बे को सलाम किया और इनाम के तौर पर 25 लाख चेक दिया गया था. जिसमें भारत की केंद्र सरकार ने 20 लाख एवं 5 लाख समाजवादी पार्टी की तरफ से दिए गए थे.

अरुणिमा सिन्हा के विवाद ( Arunima Sinha controversy)

एक बार अरुणिमा सिन्हा को भगवान शिव के मंदिर के अंदर जाने से रोक दिया गया था. इस बात को इन्होंने सबके सामने ट्विटर पर रखा और कहा कि “मुझे इतनी तकलीफ माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने पर नहीं हुई थी, जितनी महाकाल मंदिर (उज्जैन) में शंकर जी के दर्शन दौरान हुई है. यहाँ के लोगों ने मेरी अपंगता का मजाक बनाया है.” इसके चलते अरुणिमा ने अपने ट्वीट में पीएमओ को टैग किया एवं साथ ही राज्य के मुख्यमंत्री ऑफिस के ट्वीटर अकाउंट को टैग किया. इस पूरी घटना की जानकारी स्वयं अरुणिमा सिन्हा  द्वारा 25 दिसंबर 2017 को 3 बजकर 25 मिनट शाम में दी गई थी. जिसके बाद महाकाल के मंदिर के मुख्य पुजारी ने जबाब में कहा कि इस मामले की जांच सीसीटीवी कैमरे के मदद से की जाएगी. जबकि मंदिर के सूत्रों के अनुसार सुरक्षा की वजह जांच हो रही थी, जिसमें अरुणिमा सिन्हा ने सुरक्षा कर्मियों से बहस की और नाराज होकर चली गई. 

अरुणिमा सिन्हा की किताब (Arunima Sinha book)

  1. अपनी जिंदगी की कठिनाइयों में किए गए संघर्ष को अरुणिमा ने एक किताब के जरिए व्यक्त किया है. जिसका नाम “बोर्न अगेन ऑन द माउंटेन” है. इस किताब को दिसंबर 2014 में हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी के हाथों से लॉन्च कराया गया था. अरुणिमा का कहना है कि इस किताब में मैंने अपने अनुभव लिखे है जो बहुत से लोगों को मोटीवेट कर सकते हैं.
  2. अरुणिमा ने कहा कि हम तब तक कमजोर नहीं है, जब तक हम खुद हार नहीं मान लेते. हमारे देश का हर इंसान कुछ भी कर सकता है चाहे वो विकलांग ही क्यों ना हो, बस उसके अंदर आत्मविश्वास होना चाहिए. इसी आत्मविश्वास को जगाने के लिए मैंने इस किताब की रचना की है. जिससे में अपनी सोच को हर उस इंसान तक पहुंचा सकूं, जो अपने आप को किसी से कमजोर समझता है.

अरुणिमा सिन्हा पर आने वाली फिल्म  (Arunima sinha movie)

नवंबर 2017 में सुनने में आया था कि फरहान अख्तर ने  भारत की पर्वतरोही अरुणिमा पर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं, जिसमें कंगना रनौट को मुख्य भूमिका में देखा जा सकता है. हालांकि निश्चित तो कह नहीं सकते क्योंकि पहले इसमें कृति सेनन को मुख्य भूमिका के लिए लेने की बात सामने आयी थी. इस फिल्म  के बारे में फरहान अख्तर ने बताया कि फिल्म को भी भाग मिल्खा भाग की तरह बनाया जाएगा. जिसमें एक एथलीट के द्वारा किए गए संघर्ष को दिखाने पर मुख्य फोकस किया जाएगा.

भविष्य में अरुणिमा क्या करना चाहती हैं (Arunima sinha future plans)

अरुणिमा का कहना है कि वो इनाम में मिल रहे पैसों का उपयोग करके विकलांग लोगों की मदद करना चाहती हैं. पंडित चंद्र शेखर आजाद अकादमी नाम से अरुणिमा एक संस्था खोलना चाह रही है जिसमें विकलांगता का शिकार बच्चों को हर प्रकार से मदद की जाएगा.

अरुणिमा सिन्हा कोट्स (Arunima Sinha Quotes in Hindi)

  1. ट्रैन में जब चोर लोगों से उनका पैसा छीन रहे थे तो सब चुप-चाप उनकी बात मन रहे थे. लेकिन मैं एक स्पोर्ट्समेन हूँ और मेरे खिलाड़ी वाले जमीर ने उन चोरों के सामने झुकने से मना कर दिया, वो चार थे और उन्होंने मुझे ट्रैन से नीचे फेंक दिया. लेकिन मेरे स्वाभिमान को मुझसे अलग नहीं कर सके.
  2. ट्रैन हादसे के बाद जब मैं ठीक होने वाली थी, उसी समय मैंने देखा कि अखवार, न्यूज चैनल्स मेरे बारे में कितना गलत दिखा रहे हैं. यहाँ तक कि मुझ पर इल्जाम लगाया गया कि मेरे पास टिकट नहीं था इसलिए में चलती ट्रैन से कूदी थी. कुछ लोगों ने एटीएम हत्या करने के आरोप लगाए उस समय मेरी आवाज नहीं सुनी गई क्योंकि हम छोटे परिवार से थे. लेकिन मैंने उस दिन ठान लिया कि मैं एक दिन इन सब के मुँह पर ताला लगा दूंगी फिर मैंने सोचा वॉलीबॉल नहीं तो क्या हुआ मैं पर्वतरोही बनकर दिखाउंगी. “
  3. हमारी दुनिया में लोग किसी की शारीरिक स्थिति से ही निश्चित कर लेते है कि हम किस लायक हो सकते हैं. लेकिन मेरी अंतरात्मा ने एवरेस्ट समिट को पूरा करके दिखाने की ठान ली थी. “जिस दिन आप ने सोच लिया कि आप ये कर सकते उस दी पूरी दुनिया मिलकर भी आपको अपने लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती.
  4. बछेंद्री पाल ने मुझसे कहा था, कि अरुणिमा तुमने इस हालत में एवरेस्ट श्रंखला जैसी मुश्किल ऊंचाई को छूने के लिए अपने मन को मना लिया है अब तो सिर्फ लोगों को दिखाना रह गया है. क्योंकि मन पर जीत सबसे बड़ी जीत है.
  5. कमजोर या विकलांग होना हमारी मनोदशा पर निर्भर करता है. अगर कोई दिमाग से विकलांग है तो उसके शरीर के मजबूत होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. लेकिन वहीँ तुम दिमाग से मजबूत हो तो शरीर की विकलांगता तुम्हे लक्ष्य तक पहुंचने में बाधा नहीं बन सकती.

One comment

  1. Amit mani pandey

    arumima sinha ka bachpan kha beeta is ke baare me bataye aur jb in ke pita ki death hui thi to us samay ye kha rahti thi

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