एनी बेसेंट का जीवन परिचय | Annie Besant Biography in Hindi

एनी बेसेंट का जीवन परिचय (Annie Besant Biography in Hindi)

भारत की स्वतंत्रता के दौरान देश के अंदर बहुत से क्रांतिकारी थे. लेकिन भारत को आजाद कराने में न सिर्फ भारत के लोगों ने संघर्ष किया, बल्कि इसमें अन्य देशों के कुछ लोगों ने भी भारत को आजाद कराने में अपना समर्थन दिया. जी हाँ ब्रिटेन जोकि भारत पर राज कर रहा था उसी के साम्राज्य में कोई ऐसा भी था जो भारत को आजाद कराने में भारतियों का साथ दे रहा था, वह थी एनी बेसेंट. जोकि एक प्रसिद्ध सामाज सुधारक, महिलाओं के अधिकारों के लिए कार्य करने वाली कार्यकर्ता, लेखिका थीं. इनका जन्म तो ब्रिटेन में हुआ था लेकिन इन्होने भारत को अपना दूसरा घर बना लिया था. वे भारतीयों को उनका अधिकार दिलाना चाहती थी. इनके जीवन एवं भारत में उनके द्वारा किये गये कार्य के बारे में जानने के लिए यहाँ पढ़ें.

Annie Besant

जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र.म. (s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name) एनी बेसेंट
2. अन्य नाम (Other Name) एनी वुड
3. जन्म तिथि (Birth Date) 1 अक्टूबर, 1847
4. जन्म स्थान (Birth Place) क्लेफम, लंदन, यूके
5. मृत्यु (Death) 20 सितम्बर, 1933
6. मृत्यु स्थान (Death Place) अडयार मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
7. उम्र (Age) 85
8. प्रसिद्धि (Famous) एनी बेसेंट के सुविचार एवं नारीवादी विचारधारा
9. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
10. पेशा (Profession) सामाज सुधारक, महिला अधिकार कार्यकर्ता, लेखिका और थियोसोफिस्ट
11. प्रसिद्ध (Famous As) लंदन स्कूल बोर्ड की सदस्य
12. धर्म (Religion) इसाई (लेकिन बाद में इन्होने धर्म परिवर्तित कर लिया था)
13. नागरिकता (Nationality) ब्रिटेन
14. गृहनगर (Hometown) लंदन
15. संस्थापक / सह – संस्थापक (Founder / Co – Founder) सेंट्रल हिन्दू स्कूल, नेशनल हाई स्कूल एवं महिलाओं के लिए बेसेंट कॉलेज
16. आंदोलन (Movement) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
17. शिक्षा (Education) बिर्कबेक, यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन
18. राशि (Sun Sign) तुला

शुरुआती जीवन एवं शिक्षा (Early Life and Education)

एनी बेसेंट लंदन के एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा हुई थीं. उन्होंने अपने पिता को 5 साल की उम्र में खो दिया था. उनकी माँ ने उनका पालन पोषण किया. एनी की माँ बहुत परिश्रमी महिला थी, उन्होंने अपने परिवार का समर्थन करने के लिए लड़कों के लिए एक बोर्डिंग हाउस खोला था. किन्तु उनकी माँ अकेले यह सब करने में असमर्थ थी, इसके चलते उन्होंने एनी की देखभाल और उसकी शिक्षा के लिए अपने एक दोस्त एलेन मर्रीएट का सहारा लिया. एलेन की छत्र छाया में रहते हुए एनी ने अच्छी शिक्षा प्राप्त की.

अपनी शुरूआती दिनों के दौरान, उन्होंने यूरोप की यात्रा की. इस यात्रा के दौरान उन्हें उनके भविष्य के लिए अपनी सोच और अपने दृष्टिकोण का निश्चय करने में बहुत मदद मिली. एनी ने बिर्कबेक साहित्यिक और वैज्ञानिक संस्थान में पार्ट टाइम शिक्षा भी प्राप्त की थी. एनी हमेशा उन कारणों के लिए संघर्ष किया करती थी जो उन्हें सही लगता था.    

परिवार की जानकारी (Family Detail)

1. पिता का नाम (Father’s Name) विलियम वुड
2. माता का नाम (Mother’s Name) एमिली मोरिस
3. पति का नाम (Husband’s Name) फ्रैंक बेसेंट
4. बेटे का नाम (Son’s Name ) आर्थर डिगबाय बेसेंट
5. बेटी का नाम (Dauther’s Name) माबेल बेसेंट

व्यक्तिगत जानकारी (Personal Detail)

जब वे केवल 20 साल की थी तब उनकी शादी 26 साल के फ्रैंक बेसेंट के साथ हुई. वे दो बच्चों की माँ बनी. ईसाई धर्म को मानने वाले फ्रैंक से शादी करने के बाद एनी ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गई थी. लेकिन शादी के कुछ ही साल बाद एनी का ईसाई धर्म पर से विश्वास उठने लगा था. वे उनकी आस्था पर भी सवाल उठाने लगी थी और साथ ही इस समुदाय से वे अलग भी हो गई. और इस तरह से वे अपने विचारों के चलते अधिक कट्टरपंथी बन गई थी. इस कट्टरपंथी विचारधारा और धर्म को लेकर एनी और उनके पति के बीच मदभेद होने लगे, जिसके चलते सन 1873 में उन्होंने एक – दूसरे से अलग होने का फैसला कर लिया और वे दोनों कानूनी रूप से अलग हो गये. एनी ने अपने बच्चों की कस्टडी भी खो दी, क्योंकि फ्रैंक बेसेंट ने अदालत में यह साबित कर दिया था कि वह अपने बच्चों की देखभाल करने के लिए योग्य नहीं है.

अपने पति के अलग होने के बाद समाज के एक नेता, चार्ल्स ब्रैडलाफ एनी के सबसे अच्छे दोस्त बने, और उन्होंने कई मुद्दों पर उनके साथ मिलकर काम किया और साथ ही उन्हें नॉर्थम्प्टन के लिए संसद के सदस्य के रूप में नामित किया. एनी अपने कट्टरपंथी विचारों के लिए व्यापक रूप से पहचानी जाने लगी थी. उन्होंने खुले तौर पर महिलाओं के अधिकार, जन्म नियंत्रण , फैबियन समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए अपने विचारों को व्यक्त किया था.

लेखिका के रूप में (As a Writer)

शादी के बाद, बेसेंट ने अपने लेखन कौशल को जाना और बच्चों के लिए छोटी कहानियां, लेख और किताबें लिखना शुरू कर दी. एनी ने अपने दोस्त चार्ल्स ब्रैडलाफ के साथ मिलकर चार्ल्स नॉवेल्टन की एक पुस्तक प्रकाशित की थी और साथ ही वे दोनों नेशनल सेक्युलर सोसाइटी और साउथ प्लेस एथिकल सोसाइटी में शामिल हुये. इसके बाद जल्द ही उन्होंने पूरी तरह से पारंपरिक सोच पर सवाल उठाना शुरू कर दिया. एनी ने चर्च के विरुद्ध भी कई लेख लिखे. और उन्होंने खुले तौर पर चर्च की स्थिति की निंदा की. इसके बाद 1870 के दशक में उन्होंने नेशनल रिफॉर्मर एनएसएस समाचार पत्र में एक छोटे सप्ताहिक कॉलम के लिए लिखना शुरू किया. एनएसएस और एनी दोनों का एक ही लक्ष्य था – एक धर्मनिरपेक्ष राज्य बनाना, और ईसाई धर्म द्वारा प्राप्त विशेष अधिकारों को समाप्त करना.

सार्वजनिक वक्ता (Public Speaker)

अपने पति से अलग होने बाद वे एक सार्वजनिक वक्ता बनी. दरअसल सन 1887 में वह लंदन के बेरोजगार समूह द्वारा आयोजित ट्राफलगार स्क्वायर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में एक सार्वजनिक वक्ता के रूप में दिखाई दी. इसके बाद सन 1888 में एनी लंदन की मैच गर्ल्स की हड़ताल में सक्रिय रूप से शामिल हुईं. उन्होंने उनके बेहतर वेतन और शर्तों के लिए हड़ताल के उद्देश्य से महिलाओं की एक समिति बनाई. इस हड़ताल में उन्हें बहुत लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ, और अंततः स्थिति में सुधार हुआ और वेतन बढ़ गया. सन 1888 में ही एनी मार्क्सवाद में शामिल हो गई और इसकी सर्वश्रेष्ठ वक्ता बन गई. उसी वर्ष वे लंदन स्कूल बोर्ड के लिए चुनी गई.

इस दौरान वे लंदन डॉक हड़ताल में भी शामिल हुई थीं. मैच गर्ल्स की हड़ताल की तरह इसे भी बहुत अधिक सार्वजनिक समर्थन प्राप्त हुआ. एक सार्वजनिक वक्ता बनने के बाद एनी ने अलग – अलग जगह की यात्रा करते हुए लेक्चर देना शुरू कर दिए और वे दिन – प्रतिदिन के मुद्दों पर बोलने लगीं. अपने सार्वजनिक भाषणों के माध्यम से उन्होंने सरकार से विकास, सुधार और स्वतंत्रता की मांग की. एनी बेसेंट ने अपने लेखन और सार्वजनिक भाषणों के माध्यम से एक लोकप्रिय दर्जा प्राप्त किया था. यह तब की बात थी जब उन्होंने अपने दोस्त चार्ल्स ब्रैडलॉफ के साथ मिलकर जन्म नियंत्रण पर एक किताब प्रकाशित की थी. इसके बाद उन्हें लोग जानने लगे थे. इस पुस्तक में एक मजदूर वर्ग के परिवार में बच्चों की संख्या को सीमित रखने की आवश्यकता बताई गई थी ताकि वे खुश रहें. हालाँकि उस समय उनके इस विचार की अत्यधिक विवादास्पद चर्च द्वारा निंदा भी की गई थी.

राजनीतिक गतिविधियाँ (Political Activism)

शादी टूटने के बाद एनी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने लगी. उस समय वे कुछ समाजवादी संगठनों से प्रभावित हुई थी जिससे उनकी राजनीतिक सोच में तेजी आई. उन्होंने इरिश में देखा कि कुछ लोग किसानों की जमीनों को हड़प रहे हैं, इसलिए उन्होंने इरिश के किसान के पक्ष में बोलना शुरू कर दिया और साथ ही इसके लिए उन्होंने इरिश होम रुलर्स के साथ अपना संपर्क मजबूत किया. इस दौरान उन्होंने एक इरिश लेखक जॉर्ज बर्नार्ड शॉ के साथ दोस्ती की. फिर इरिश रिपब्लिकन फैबियन ब्रदरहुड के मेनचेस्टर मार्टियर्स ने उनकी राजनीतिक सोच को बदल दिया. जिसके बाद उन्होंने फैबियन समाजवाद पर सार्वजनिक भाषण लिखना और देना शुरू कर दिये. इस तरह से ये राजनीतिक गतिविधियों में दिखाई दी.

थियोसोफी (Theosophy)

एनी सन 1875 में थियोसोफिकल सोसाइटी की संस्थापक मैडम ब्लावाट्स्की से मिली. इस सोसाइटी की स्थापना ‘यूनिवर्सल ब्रदरहुड ऑफ ह्यूमैनिटी’ के उद्देश्य को पूरा करने के लिए की गई थी. इससे पूरे विश्व में सभी राष्ट्रों के बीच भाईचारा फ़ैलाने पर बढ़ावा दिया गया. एनी उनकी शिष्या बन गई और उनके विचारों को अपनाते हुए, एनी सन 1887 में थियोसोफी में परिवर्तित हो गई. सन 1889 में वे थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य बनी. इसके बाद उन्होंने सन 1890 में फेबियन सोसाइटी और मार्क्सवादियों के साथ अपने सम्बन्ध तोड़ दिए. सन 1891 में उनकी गुरु मैडम ब्लावाट्स्की का निधन हो गया. इसके बाद पहली बार एक थियोसोफीकल सोसाइटी के सदस्य के रूप में सन 1893 में उन्होंने भारत की यात्रा की और भारत की स्वतंत्रता और प्रगति में भाग लिया.

अडयार और बनारस में थियोसोफिकल सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन के दौरान उन्हें सन 1906 में इस सोसाइटी के अध्यक्ष के लिए नामांकित किया गया था. उस दौरान एचएस ओलकोट इस सोसाइटी के अध्यक्ष थे जिनकी मृत्यु हो गई थी. फिर वे इस सोसाइटी की अध्यक्ष बन गई, और अपनी मृत्यु तक वे इसकी अध्यक्ष बनी रही. अपनी अध्यक्षता के दौरान उन्होंने सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक, राजनीतिक जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर ध्यान दिया. इन क्षेत्रों में दर्शनशास्त्र के अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने सन 1908 में ‘थियोसोफिकल ऑर्डर ऑफ सर्विस एंड संस ऑफ इंडिया’ की स्थापना की थी. उन्होंने थियोसोफिकल शिक्षा के लिए भारत के लोगों को बढ़ावा देना शुरू किया.

भारतीय स्वतंत्रता सैनानी के रूप में (As a Indian Freedom Fighter)

  • एनी बेसेंट एक महान और साहसी महिला थीं, जिन्हें एक स्वतंत्रता सैनानी के रूप में जाना जाता था. क्योकि उन्होंने लोगों को उनकी वास्तविक स्वतंत्रता दिलाने में मदद करने के लिए कई युद्ध लड़े थे.
  • वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी शामिल हुईं थीं, और उन्होंने भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने का अभियान शुरू किया.
  • एनी भारतीय लोगों की संस्कृति, परंपरा को काफी पसंद करती थी, और उनकी मान्यताओं को समझती थी. उन्होंने सन 1893 में भारत आने के बाद भारत को अपना घर बना लिया और अपने बुलंद भाषण से भारतीय लोगों को गहरी नींद से जगाना शुरू कर दिया. एक बार महात्मा गांधी जी ने भी उनके बारे में कहा था कि एनी ने भारतियों को गहरी नींद से जगाया है.
  • जब वे सन 1908 में थियोसोफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष बनीं, तो उन्होंने भारतीय समाजों को बौद्ध धर्म से हिन्दू धर्म की ओर लाने के लिए मार्गदर्शन करना शुरू किया. साथ ही उनकी शिक्षाओं पर जोर दिया.
  • एनी ने लड़कों के लिए ‘द सेंट्रल हिन्दू कॉलेज’ नाम से एक स्कूल भी खोला. उन्होंने खुद को भारत की समस्या समाधानकर्ता के रूप में व्यक्त किया.
  • एनी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अभियान पर कड़ी मेहनत की और भारत की स्वतंत्रता की मांग करते हुए विभिन्न पत्र और लेख लिखे.
  • एनी न्यू इंडिया समाचार पत्र की एडिटर भी बनीं और देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज उठाई.
  • ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह करने के लिए उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. दिलचस्प बात यह थी कि देशभर के अलग – अलग भारतीय राष्ट्रवादी समूहों ने उनकी गिरफ़्तारी के लिए विरोध किया. जिसके कारण उन्हें रिहा कर दिया गया था. उनकी रिहाई ने ब्रिटिश शासन से भारतीयों की स्वतंत्रता की धारणा को मजबूत कर दिया था. लोगों में आत्मविश्वास की उम्मीद जगी.
  • एनी ने भारत में भी महिलाओं के अधिकार, मजदूरों के अधिकार, जन्म नियंत्रण अभियान और फैबियन समाजवाद जैसे कारणों के लिए संघर्ष किये.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष (President of Indian National Congress)

  • भारत आने के बाद सन 1916 में लोकमान्य तिलक के साथ उन्होंने ऑल इंडिया होम रूल्स लीग की शुरुआत की. और भारत में लोकतंत्र को बढ़ावा देने के लिए होम रूल आंदोलन चलाने में मदद भी की.
  • इरिश राष्ट्रवादी प्रथाओं पर बना यह देश का पहला राजनीतिक दल था, जिसने सरकारी बदलाव की मांग की. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विपरीत इस लीग ने एक साल तक काम किया था.
  • एनी ने वाराणसी में एक सामान्य हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पंडित मदनमोहन मालवीय के साथ मिलकर कई प्रयास किये. फिर सन 1917 के अक्टूबर में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की गई, इसमें एनी द्वारा शुरू किया गया ‘द सेंट्रल हिन्दू कॉलेज’ इसका पहला घटक कॉलेज बना.
  • एनी सन 1917 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. इन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष के रूप में चुना गया था.

अपने पति से अलग होने के बाद ये भारत थियोसोफी सम्बंधित धार्मिक आंदोलन के लिए आई थी, लेकिन बाद में वे भारत के लिए एक स्वतंत्रता सैनानी एवं प्रमुख नेता बन गई.

समाज सुधारक (Social Reformer)

एनी बेसेंट एक प्रसिद्ध समाज सुधारक थीं जिन्होंने इंग्लैंड और भारत दोनों देशों के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया था. भारत में महिलाओं के अधिकारों के बारे में बोलते हुए उन्होंने अपने महान और निरंतर सामाजिक कार्यों के माध्यम से खुद को सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं में से एक के रूप में साबित किया. वह हमेशा पारम्परिक हिन्दू रीती – रिवाजों के पक्ष में महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ी, क्योकि वे प्राचीन हिन्दू विचारों का बहुत सम्मान करती थी. एक समाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने जीवन के दौरान, उन्होंने कई समाजिक कार्य किये, और साथ ही उन्होंने कई बार सामाजिक विषयों पर लेक्चर भी दिए.    

मृत्यु (Death)

सन 1931 में वह गंभीर रूप से बीमार हो गई. 2 साल तक बीमार रहने के बाद उन्होंने 20 सितंबर, 1933 को ब्रिटिश भारत के मद्रास प्रेसीडेंसी के अडयार में अंतिम साँस ली. उनका अंतिम संस्कार भारत के बनारस शहर में गंगा नदी में किया गया था, यह उनकी इच्छा थी. मरने के बाद एनी बेसेंट को सम्मानित करने के लिए उनके नाम पर भारत के चेन्नई शहर में थियोसोफिकल सोसाइटी के पास एक बसंत नगर बनाया गया है. इसके साथ ही उनके द्वारा शुरू किये गये एक स्कूल को उनके सम्मान में बेसेंट हिल स्कूल नाम दिया गया है.

उपलब्धियां (Achivements)

  • एनी बेसेंट नेशनल सेक्युलर सोसाइटी में एक प्रसिद्ध वक्ता, थियोसोफिकल सोसाइटी की सदस्य, सबसे प्रसिद्ध लेक्चरर और एक लेखिका थी.
  • एनी को लंदन स्कूल बोर्ड में टावर हैमलेट्स के लिए चुना गया था.
  • एनी ने सन 1922 में भारत में ‘हैदराबाद नेशनल कॉलेजिएट बोर्ड’ की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.
  • एक थियोसोफिस्ट के रूप में उनकी निरंतरता के चलते वे सन 1923 में भारत के राष्ट्रीय अधिवेशन की महासचिव बनीं.
  • सन 1926 में थियोसोफी पर उनके लेक्चर देने के बाद उन्हें विश्व शिक्षक घोषित किया गया था.
  • एनी जब सन 1907 में थियोसोफिकल सोसाइटी की अध्यक्ष बनी थी, तब उसका मुख्यालय मद्रास के अडयार में बनाया गया था जोकि वर्तमान में चेन्नई में है.

सुविचार (Quotes)

  • भारत एक ऐसा देश है जिसमे हर महान धर्म को एक घर मिलता है.
  • एक पैगम्बर हमेशा अपने अनुयायियों की तुलना में बहुत बड़ा होता है, और साथ ही उन लोगों की तुलना में बहुत अधिक उदार भी होता है जो उनके नाम के साथ खुद को जोड़ते हैं.
  • भारत में मेरा जीवन है, जब से सन 1893 से मैंने भारत में अपना घर बनाया है तब से मैंने अपने आप को केवल एक उद्देश्य के लिए समर्पित किया हैं, वह है भारत को उसकी प्राचीन स्वतंत्रता वापस दिलवाना.
  • जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उस व्यक्ति का शरीर मर जाता है, लेकिन उसने जो अच्छे कर्म किये है वह उसके कारण हमेशा जीवित रहता है. इसलिए कहते हैं कि वह एक जीत के रूप में जीवित रहता है और एक जीव के रूप में मृत होता है.
  • जब आप जानते हैं कि आप निम्न स्तर का कार्य करते हैं तो आप पाप कर रहे होते हैं. अतः जहाँ ज्ञान नहीं है वहां पाप होता है. यही पाप की परिभाषा है.
  • बिना सोचे समझे कोई राजनीति नहीं की जा सकती है.
  • इंग्लैंड की सबसे बड़ी भूल थी, भारत की गाँव प्रणाली का विनाश करना.
  • भारत में एक अकेला धर्म संभव नहीं है, लेकिन सभी धर्मों के लिए एक सामान्य आधार को मानना, उदारता को बढ़ाना, धार्मिक मामलों में सहनशीलता की भावना आदि संभव है.

इस तरह एनी बेसेंट एक ऐसी शख्सियत थी जिन्हें ऑल राउंडर कहना गलत नहीं होगा. एनी के द्वारा इंग्लैंड एवं भारत में किये गये कार्यों को भी नकारा नहीं जा सकता, जोकि काफी प्रभावशाली थे. एनी एक महान महिला थी जिन्होंने भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष भूमिका निभाई थी.

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