अमर्त्य सेन का जीवन परिचय | Amartya Sen Biography in Hindi

अमर्त्य सेन का जीवन परिचय (Amartya Sen Biography in Hindi)

अमर्त्य सेन देश के जाने-मने अर्थशास्त्री, लेखक और फिलोसोफर हैं. समाज के पिछड़े और गरीब तबकों के लिए न्याय, सम्मान और समानता के रास्ते खोलने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा हैं. उन्होंने भोजन की कमी और भुखमरी से बचने के कई उपाय बताये, जिससे यूनाइटेड नेशन ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स बनाने में सहायता मिली उन्हें टाइम मैगजीन के दुनिया के 50 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया गया. उनके रिसर्च के सब्जेक्ट्स सोशल चॉइस थ्योरी, इकनोमिक थ्योरी, एथिक्स और पोलिटिकल फिलोसोफी, वेलफेयर इकोनॉमिक्स थ्योरी, डेवलपमेंटल इकोनॉमिक्स और जेंडर स्टडीज थे.

Amartya Sen

क्र. म. (SNo.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम ((Full Name) अमर्त्य सेन
2. जन्म (Birth Date) 3 नवम्बर 1933
3. जन्म स्थान (Birth Place) बंगाल के शान्तिनिकेतन में
4. पेशा (Profession) इकोनोमिस्ट
5. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
6. उम्र (Age) 85 वर्ष
7. गृहनगर (Hometown) शान्ति निकेतन, पश्चिमी बंगाल
8. धर्म (Religion) हिन्दू
9. जाति (Caste) ब्राह्मिण
10. वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
11. राशि (Zodiac Sign) वृश्चिक

अमर्त्य सेन :प्रारम्भिक जीवन (Amartya Sen: Early Life)

  • अमर्त्य सेन का पैतृक मकान पुराने ढाका के वारी में था. उनके पिता ढाका में केमिस्ट्री में प्रोफेसर थे, और बाद में वेस्ट बंगाल पब्लिक सर्विस कमिशन के चेयरमेन भी बने. सेन के नाना रबिन्द्र नाथ टैगोर के विश्व भारती के स्कूल और कॉलेज में संस्कृत और प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के परम्पराओं के बारे में पढाते थे.
  • 1941 में अमर्त्य सेन ने ढाका के सेंट ग्रेगरी स्कूल में प्रवेश लिया और भारत पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार भारत शिफ्ट हो गया,यहाँ उन्होंने विश्व-भारती यूनिवर्सिटी स्कूल से आगे की शिक्षा ली. अमर्त्य सेन को बचपन से संस्कृत, गणित और फिजिक्स जैसे विषयों के प्रति रुझान था.
  • अमर्त्य सेन ने 1940 के दशक में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों और इसके प्रभाव को बहुत निकट से देखा था जिससे उन्हें ये समझ आया था कि समाज में होने वाली हिंसा का पहला शिकार गरीब व्यक्ति ही बनता हैं क्योंकि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति कुछ दिन के लिए घर में रहकर हिंसा समाप्त होने का इन्तजार कर सकता हैं लेकिन गरीब को रोजगार की तलाश में बाहर निकलना ही पड़ता हैं. यही से उन्हें इकोनोमिक्स के नये सिद्धांतो को प्रतिपादित करने की प्रेरणा मिली

अमर्त्य की पारिवारिक जानकारी (Amartya Sen:Family Information)

अमर्त्य सेन की पहली पत्नी नाबनीता देव सेन से उनके 2 बच्चे अन्तरा सेन और नंदना सेन थे, लेकिन 1971 में उनका तलाक हो गया. अमर्त्य ने 1973 में इवा कोलोरनी (Eva Colorni) से शादी की और उनके भी 2 बच्चे हुए, 1985 में पेट के कैंसर के कारण ईवा का देहांत हो गया.  1991 में अमर्त्य ने एमा जोर्जिना रोथस्चिल्ड से शादी की.

पिता (Father) आशुतोष सेन
माता (Mother) अमिता सेन
पत्नी (Wife) एमा रोथ्स्चिल्ड (Emma Rothschild)-(वर्तमान)
नाना (Maternal grandfather) क्षितिमोहन सेन

 अमर्त्य सेन का करियर (Amartya Sen Carrier)

  • 1953 में कोलकाता में प्रेजिडेंसी कॉलेज से प्रथम श्रेणी के साथ बी.ए. इकोनॉमिक्स में स्नातक की, इसके बाद 1955 में कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से उन्होंने बीए किया और यही से एमएमए करके पीएचडी की. इसके बाद वो ऑक्सफ़ोर्ड, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के साथ ही भारत में भी पढाया हैं.
  • अमर्त्य सेन मात्र 23 वर्ष की उम्र में जादवपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के हेड नियुक्त हुए और यहाँ  1956 से 1958 तक पढाया. इसके बाद वो वापिस कैंब्रिज यूनिवर्सिटी गये और पी.एच.डी की पढाई की. 1959 में उन्होंने “दी चॉइस ऑफ़ टेक्निक्स”  में थीसिस सबमिट की.
  • अमर्त्य सेन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में 1963 से 1971 तक पढाया. इसके बाद ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में 1977 से 1988 तक जबकि 1988 से 1998 तक अमर्त्य सेन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर इकोनॉमिक्स और फिलोसोफी पढाने का कार्य किया.
  • 1998 में सेन को कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में मास्टर नियुक्त किया गया जहां 2004 तक वो इसी पद पर रहे, इसके बाद हावर्ड में वो लामोंट यूनिवर्सिटी (Lamont University) के प्रोफेसर बनकर लौटे.
  • अमर्त्य सेन ने 2005 से 2007 तक एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटेनिका एडिटोरियल बोर्ड के एडवाइजर के तौर पर काम किया था,जिसके वो सदस्य भी थे.

अमर्त्य सेन द्वारा किये गये महत्वपूर्ण कार्य (Important works done by Amrtya Sen)

  • अमर्त्य सेन का शुरूआती काम किनेथ एरो (kenneth arrow’) द्वारा दिए गये इम्पोसिबिलीटी थ्योरम पर आधारित था. प्रसंता पटनायक के साथ मिलकर अमर्त्य ने उन परिस्थितियों को समझाया जो कि इंट्रासिटीविटिज को हटती है. इसके बाद अमर्त्य ने अपना काम अलग से आगे बढाया एवं 1970 में एक किताब निकाली जिसमें उन्होंने एरो की प्रारंभिक थ्योरी को समझाया, उनकी मुख्य थीम यूटीलीटेरिएज्म के स्केपटीसिज्म (scepticism) थी.
  • सेन ने अपना करियर कुछ ऐसे मुद्दों को दिया जिसके कारण उन्हें कोनसाइंस ऑफ़ हिज प्रोफेशन कहा जाता हैं. उनका 1970 में आया  मोनोग्राफ कलेक्टिव चॉइस एंड सोशल वेलफेयर (Collective Choice and Social Welfare )उन समस्याओं की तरफ ध्यान दिलाता जिसमें व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों और इससे जुड़े मुद्दों की बात होती हैं, जिसके कारण ही  रिसर्चर्स का ध्यान बेसिक वेलफेयर की तरफ जाता हैं और उन्हें इससे प्रेरणा मिलती हैं.  
  • सेन ने गरीबी को आंकने के लिए नये मेथड दिए जिसके कारण ही गरीबों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए उपयोगी जानकारी मिली. उनके असमानता पर किये गये  थ्योरिटीकल काम ने ये समझाया कि क्यों कुछ गरीब देशों में महिलाओं की संख्या पुरुषों से कम हैं जबकि लड़कियों के जन्म की संख्या ज्यादा एवं मृत्यु दर कम हैं. सेन ने बताया कि लिंग अनुपात में इस तरह का असंतुलन लड़कों को जीवन में ज्यादा मौके मिलने के कारण हैं.
  • अमर्त्य सेन ने एशियन देशों में महिलाओं की कम संख्या के लिए कई आर्टिकल्स लिखे जिसमे उन्होंने इसके कारणों को समझाया और बताया महिला-पुरुष जनसंख्या में संतुलन के लिए लडकियों की भ्रूण-हत्या और महिला मृत्यु दर को नजर-अंदाज नही किया जा सकता.
  • अमर्त्य सेन ने समाज में गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वालो की संख्या को ही गरीबी का मानक माना, और किसी भी समुदाय में गरीबी के स्तर को मापने के लिए एक कोम्प्लिकेटेड इंडेक्स भी बनाया.
  • 1943 में बंगाल में पड़े अकाल ने अमर्त्य सेन को काफी विचलित कर दिया था, उन्होंने देखा कि भोजन की उपलब्धता में कोई कमी नहीं थी लेकिन समाज के एक वर्ग के कारण भोजन महंगा हो गया था एवं जरुरतमन्द लोगों तक नहीं पहुँच पा रहा था क्योंकि ग्रामीण मजदूर अपनी नौकरीयां खो रहे थे,और इस कारण आवश्यक भोजन खरीदने के लिए पैसे भी नहीं बना पा रहे थे. उन्होंने 1981 में लिखी अपनी किताब पावर्टी एंड फेमाइनस: एन एसे ओन एंटाईटलमेंट एंड डेप्रिवेशन (Poverty and Famines: An Essay on Entitlement and Deprivation ) में इसे समझाया भी था. बाद में सेन ने दुनिया के कई हिस्सों में पड़े अकाल का अध्ययन किया और बताया कि अकाल तब भी पड़ सकता हैं जब समाज के किसी विशेष वर्ग को रोजगार मिलना बंद हो जाए और वो भोजन ना खरीद पाए. सामान्यत: इन परिस्थितयों में अर्थशास्त्री उस वर्ग को पैसे देने का सुझाव देते हैं लेकिन सेन ने इसका समर्थन नहीं किया. उनका मानना था कि भोजन की बिक्री पर नियन्त्रण से आर्थिक स्वतंत्रता समाप्त होती हैं. भोजन की विक्रय दर बढाने या पीड़ित को आर्थिक सहायता देने के स्थान पर भोजन को परिस्थितयों के अनुसार आम-वर्ग की उपलब्धता में लाया जाना चाहिए.
  • अमर्त्य सेन के कार्यों और सिद्धांतों का राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं पर भी प्रभाव पड़ा. इस कारण इन संस्थाओं ने से ऐसी नीतिया बनाई जिसमें आम-जन के आजीविका के तरीकों को बढ़ाया जा सकेऔर आर्थिक असमानता में कमी लाने का प्रयास किया जा सके.
  • हाल ही में कांग्रेस पार्टी के प्रमुख राहुल गाँधी जी ने देश के गरीबों के लिए न्यूनतम आय योजना (न्याय योजना) लाने की घोषणा की है. यह न्याय स्कीम अमर्त्य सेन के इंडेक्स ऑफ पॉवर्टी (Human Poverty Index (HPI)) पर आधारित है. इंडेक्स के अनुसार गरीबों में कई श्रेणियां होती हैं, जैसे गरीब,बहुत ज्यादा गरीब और अन्य. जैसे यदि किसी परिवार की आय 4,000 या 8000 प्रति माह हैं, तो उस परिवार को 12,000 तक पहुंचाने के लिए प्रति माह 4000 या 8000 रूपये की सहायता दी जायेगी. हालांकि इस तरह के परिवारों को पहचानना मुश्किल होगा, इसके लिए एनएसएसओ और सीएसओ की मदद लेनी होनी , इसके लिए पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा.

 अमर्त्य सेन द्वारा लिखी किताबें (Books written by Amrtya Sen)

 उन्होंने अपनी पहली किताब कलेक्टिव चॉइस एंड सोशल वेलफेयर में न्याय, समानता और प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की बात की थी.  1982 में अमर्त्य ने गरीबी और अकाल पर जो निबंध लिखा उसमें भोजन की उपलब्धता,कुपोषण और अकाल के कारणों पर प्रकाश डाला. 1984 में उनका डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स,रिसोर्सेज,वेल्यूज और डेवलपमेंट पर किया गया कार्य भी प्रकाशित हुआ.

उनकी लिखी किताबों की सूची काफी लम्बी हैं,जो इस सारिणी में दी गयी हैं.  

किताब वर्ष
चॉइस ऑफ़ टेक्निक्स 1960
ग्रोथ इकोनॉमिक्स 1970
कलेक्टिव चॉइस एंड सोशल वेलफेयर 1970
ऑन इकनोमिक इनइक्वेलिटी 1973,1997
पोवेर्टी एंड फेमाइन 1981
यूटीलिटेरिएनिज्म एंड बियोंड,बर्नार्ड विलियम्स के साथ  (Utilitarianism and Beyond (jointly with Bernard Williams, 1982
चॉइस,वेलफेयर एंड मेजरमेंट 1982
कमोडिटीज एंड कैपबिलिटीज 1985
दी स्टैंडरड ऑफ़ लिवींग 1987
ओन एथिक्स एंड इकोनॉमिक्स 1987
हंगर एंड पब्लिक एक्शन (जीन ड्रेज के साथ संयुक्त रूप से) 1989
इनइक्वलिटी री-एक्जामिनड़ 1992
दी क्वालिटी ऑफ़ लाइफ (मरता नुस्स्बौम के साथ) 1993
डेवलपमेंट एज फ्रीडम 1999
रेश्नेलिटी एंड फ्रीडम 2002
दी आर्गुमेंटीव इंडियन 2005
आइडेंटिटी एंड वोइलेंस:दीइल्यूजन ऑफ़ डेस्टिनी 2006
दी आईडिया ऑफ़ जस्टिस 2009
एन अनसर्टेन ग्लोरी:इंडिया एंड इट्स कॉण्ट्राडिक्शन (जीन ड्रेज के (Jean Drèze) के साथ संयुक्त रूप से) 2013
दी कंट्री ऑफ़ फर्स्ट बॉयज 2015

 अमर्त्य सेन को मिले सम्मान (Amrtya Sen: Awards and Achievements)

  • नोबल पुरूस्कार: अमर्त्य सेन ने 1998 में वेलफेयर इकोनॉमिक्स और सोशल चॉइस थ्योरी में दिए योगदान के लिए नोबल प्राइज मिला था. उनकी कार्य समाज के गरीब लोगों के उत्थान के लिए था, इस कारण भी उन्हें नोबल के चयनित किया गया था. सेन को अकाल के समय किये गये कार्यों के लिए प्रोत्साहन दिया गया, क्योंकि उनके कार्यों से विकास के साथ ही इन परिस्थितयों में होने वाले अन्न की कमी  के से बचने के लिए दिए गये सुझावों को प्रायोगिक स्तर पर एप्लाई करना सार्थक रहा.
  • नोबल पुरूस्कार से काफी पहले 1954 में उन्हें एडम स्मिथ प्राइज मिल चूका था.
  • 1999 में उन्हें भारत रत्न से सुशोभित किया गया.
  • 2011 में उन्हें यूएसए में नेशनल ह्यूमेनिटीज मेडल मिला.
  • इसके अतिरिक्त अमृत्य सेन को मिले अवार्ड में फ्रांस का कमांडर दी ला लेजन का सम्मान (Commandeur de la Legion d’’Honneur), ब्राजील का ओर्डेम डो मेरीटो सिएंटीफीको, यूके का ऑनरेरी ऑफ़ कम्पैनियन, मैक्सिको का दीएजटेक ईगल,यूके का एडिनबर्घ मैडल, यूएसए का जॉर्ज मार्शेल,यूएसए का एजीन्होवर मैडल और एकोनिमिक में नोबल प्राइज मिला है.

अमर्त्य सेन वर्तमान में भी देश की आर्थिक व्यवस्था में प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से योगदान देते हैं. अमर्त्य पिछले 50 वर्षों से यू.एस में रह रहे हैं लेकिन उन्होंने भारत की नागरिकता को ही प्राथमिकता दी हैं. वो नोबल पुरुस्कार प्राप्त करने वाले वो पहले एशियन अर्थशास्त्री जबकि छठे भारतीय है.

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  1. जय प्रकाश नारायण जीवन परिचय
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