आल इंडिया होम रुल लीग | All India home rule league in Hindi

आल इंडिया होम रुल लीग (All India home rule league in Hindi)

आधुनिक भारत के इतिहास में होम रूल लीग आंदोलन एक महत्वपूर्ण घटना हैं, और इस लीग की स्थापना करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने भारत के राष्ट्रवाद में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. होम रुल लीग आंदोलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुआ था, इस आंदोलन की शुरुआत 1916 में बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने की थी.

All India Home Rule League

होम रुल लीग के उद्देश्य (Objectives of Home Rule League)

होम रुल लीग का उद्देश्य स्वराज्य की स्थापना के साथ ही राजनैतिक शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना, भारतीयों में अंग्रेजों के अत्याचार के विरुद्ध  जागरूकता पैदा करना, कांग्रेस के सिद्धांतों को लेकर चलते हुए राजनैतिक गतिविधियों में अपना अलग स्थान ग्रहण करना और ब्रिटिश सरकार में अपने राजनैतिक प्रतिनिधियों की मांग करना था.

कैसे हुयी होम रुल लीग की शुरुआत? (How did Home rule League get started)

  • 1907-1915 तक इन्डियन नेशनल कांग्रेस में नर्म दल का ज्यादा प्रभाव था. ये राजनीति का निर्माण काल था जिसमें एनी बेसेंट और कुछ नर्म दल के नेता जी.के.गोखले और फिरोज शाह मेहता का प्रभाव था. 1914 में तिलक को जेल से छोड़ दिया गया था लेकिन तिलक वापिस इंडियन नेशनल कांग्रेस में नहीं लौट सके थे क्योंकि वहां पर फिरोज शाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे नर्म देल के नेताओं का तिलक से विरोध था. स्थितियों में तब बदलाव आया जब 1915 में गोखले और मेहता का देहांत हो गया और एनी बेसेंट की मदद से तिलक वापिस कांग्रेस में शामिल हो गये.
  • उस समय प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था, उग्रवादीयों और नर्म दल के नेताओं के साथ ही इंडियन नेशनल कांग्रेस और मुस्लिम लीग का एकीकरण भी हो गया था. इन कारणों ने इंडियन नेशनल कांग्रेस में जान फूंक दी थी और इसीलिए एनी बेसेंट और तिलक को भारत में राजनैतिक सुधार की उम्मीद दिखाई दी, इस तरह एनी बेसेंट और तिलक ने ये आंदोलन शुरू किया, हालांकि दोनों की जगह और समय अलग-अलग था लेकिन दोनों ही होम रुल लीग का उद्देश्य देश में स्वराज्य की मांग करना ही था.

बाल गंगाधर तिलक द्वारा स्थापित आल इण्डिया होम रुल लीग (All india Home Rule league founded by Bal Gangadhar Tilak)

1915 तक भारत में अंग्रेजों के प्रति उदारवादी नीतियों की जगह उग्रवादी विचारधारा ने ली थी, ऐसे में बाल गंगाधर तिलक ने आल इंडिया होम रुल लीग की स्थापना की थी. आल इंडिया होम रुल लीग की स्थापना अप्रैल 1916 में पूना में हुयी थी जो कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, सेन्ट्रल प्रोविंस और बरार में ही फैला था. इसकी 6 शाखाएं थी और कई सारी मांगे थी जिनमें स्वराज, भाषाई आधार पर राज्य का गठन और स्थानीय भाषा का शिक्षा को शामिल करना था. इसी दौरान बाल गंगाधर तिलक को इतनी प्रसिद्धि मिली थी कि उन्हें लोकनायक कहा जाने लगा और उन्होंने ये नारा दिया था “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार हैं, मैं इसे लेकर रहूँगा”.

आल इण्डिया होम रुल लीग के प्रति सरकार का रवैया (Government’s Attitude towards All India Home Rule League)

मद्रास में छात्रों को राजनैतिक मीटिंग में उपस्थित होने से प्रतिबंधित कर दिया गया. लोकमान्य तिलक को पंजाब और दिल्ली में आने से प्रतिबंधित कर दिया गया, जून 1917 में एनी बेसेंट और उनके एसोशियेट बी. पी. वाडिया और जोर्ज अरुन्दले को गिरफ्तार किया गया था.

एनी बेसेंट लीग द्वारा स्थापित होम रुल लीग (Annie Besant launched the Home Rule League)

  • एनी बेसेंट महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली आयरिश थियोसोफिस्ट महिला थी. उन्होंने भारत के चेन्नई में थिओसोफ़िकल सोसायटी की अद्यार (Theosophical Society Adyar )स्थापना की, उन्होंने अपना समाज सुधर भारत की स्वतंत्रता के संघर्ष में बिताया था.
  • एनी बेसेंट ने स्वराज्य के लिए एक राजनैतिक संस्था होम रुल की स्थापना की जो भारत में ब्रिटिश एम्पायर से मुक्त स्वराय की मांग करता था और ऑस्ट्रेलिया, कनाड़ा, साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड जैसे स्वराज की मांग करता था.
  • एनी बेसेंट ने लीग की स्थापना 1 अगस्त 1916 में मद्रास में की थी और इस लीग में पूरे देश को शामिल किया गया था. इसके ओर्गेन्जाइन्ग सेक्रेटरी जोर्ज अरुंडेल थे. जोर्ज अरुन्दले के साथ मुख्य कार्य को सम्भालने वाली बी.डब्ल्यू वाडिया और सी.पी रामास्वामी अय्यर थे.
  • होम रुल लीग में मोतीलाल नेहरु,जवाहर लाल नेहरु, भूलाभाई देसाई, चितरंजन दास, मदन मोहन मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना,तेज बहादुर और लाला लाजपत राय भी शामिल हो गए, 1917 में रशिया में हुयी क्रान्ति ने होम रुल लीग को सकारात्मक तरीके से प्रभावित किया.
  • बेसेंट की लीग की स्थापना हालांकि पुरे भारत के लिए हुयी थी लेकिन इसमें ज्यादा थियोसोफिकल सोसायटी के सदस्य ही थे. 1916 से शुरू हुए इस संगठन में एक साल के भीतर 27,000 सदस्य बन गये थे. होम रुल लीग वाद-विवाद, लेक्चर्स और पढने के लिए जगह का आयोजन करता था. इस लीग से पेम्फलेट भी बांटे जाते थे जो लोगों को आंदोलन के बारे में बताते थे. लीग में काफी शक्तिशाली सदस्य थे और हजारों लोगों ने ब्रिटिश सरकार को याचिकाए दी.
  • होम रुल लीग को चेन्नई में तमिल ब्राह्मिन और उत्तर प्रदेश के कायस्थ, कश्मीरी ब्राह्मिन, कुछ मुस्लिम,हिन्दू तमिल अल्पसंख्यक,कुछ युवा गुजराती उद्योगी और मुंबई और गुजरात के वकील और व्यापारी शामिल हुए थे.
  • लीग में थिओसोफी, सामजिक सुधार, प्राचीन हिन्दू ऋषियों द्वारा दिए गये सिद्धांतों को शामिल किया गया था. लीग ने बहुत बड़ी संख्या में लोगों की फिलोसोफी को प्रभावित किया क्योंकि तब तक ब्राह्मो समाज और आर्यसमाज ज्यादा संख्या में लोगों तक नहीं पहुंचा था.
  • होम रुल लीग में भाग लेने वाले बहुत से युवा जैसे चेन्नई के सत्यामुरी, कोलकाता के जीतेन्द्र बनर्जी, जवाहरलाल नेहरु आयर इलाहबाद के खालिक ज़मान, जमुनादास द्वारकादास और इन्दुलाल याजनिक इत्यादि आगे चलकर बड़े राजनीतिज्ञ बने.
  • होम रुल लीग ने मुंबई में 2600 सदस्यों की मीटिंग करवाई और 10,000 से 12000 तक लोगों ने शांताराम चोल में एकत्र हुए जिनमें सरकारी कर्मचारी और औद्योगिक मजदूर शामिल थे. लीग ने सिंध, गुजरात, यूनाइटेड प्रोविंस, उड़ीसा और बिहार में राजनैतिक जागरूकता का अभियान चलाया.
  • 1917 में एनी बेसेंट की गिरफ्तारी ने आंदोलन को तेज कर दिया,और ये गाँवों तक पहुच गया. 1917 के अंत तक एनी बेसेंट मोंटेगू द्वारा भारत को जिम्मेदार सरकार देने के वादे से प्रभावित हो गयी थी और लीग को समाप्त कर दिया.  

दोनों होम रुल लीग की समाप्ति (The decline of Both Home Rule League)

  • 1918 में होम रुल लीग कई कारणों से बंद हो गया था. 1917 में मोंटफोर्ड ने ब्रिटिश पार्लियामेंट में मोंटफोर्ड रीफोर्ड प्रस्तुत किया था, जिसमें भारत के लिए एक जिम्मेदार सरकार का वादा किया गया. और इस मोंटफोर्ड रिफोर्म के कारण ही एनी बेसेंट प्रो-ब्रिटिश बन गयी.
  • गांधीजी की सक्रियता के कारण देश का युवा राजनीति में सक्रिय हो गया था, जिसके कारण भी होम रुल लीग में कमी आई. महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन के बाद से होम रुल लीग का प्रभाव कम होने लगा. 1920 में जब आल इण्डिया होम रुल लीग ने गांधीजी को अपना प्रतिनिधि चुना और ये इन्डियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हुआ तब इसका अंत हो गया.

इन्डियन होम रुल लीग और होम रुल लीग (Indian home rule league and Home Rule league)

इन्डियन होम रुल लीग और होम रुल लीग को बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने एक साथ शुरू नहीं किया. तिलक ने जहां अप्रैल 1916 में इन्डियन होम रुल लीग की स्थापना की थी वही बेसेंट ने सितम्बर में होम रुल लीग की शुरुआत की. 1917 के अंत तक दोनों लीग को मिलाकर कुल सदस्यों की संख्या 40,000 थी. मोंटेगू की घोषणा क बाद बेसेंट ने लीग को समाप्त कर दिया था लेकिन तिलक ने नहीं किया.

तिलक और एनी बेसेंट के लीग में अंतर (Comparison between Tilak’s Home Rule League and Annie Besant’s Home Rule League)

  • तिलक का आल इण्डिया होम रुल लीग आंदोलन काफी व्यवस्थित था और बहुत से स्वयंसेवी इससे जुड़े थे जबकि एनी बेसेंट का आंदोलन पुरे देश में फैला हुआ था इसलिए थोडा कम व्यवस्थित और कम संख्या के स्वयंसेवी थे, मुहम्मद अली जिन्ना ने भी होम रुल लीग से ही राजनीति में भाग लेना शुरू किया था.
  • तिलक ने केसरी, महाराटा और यंग इंडिया में लिखकर होम रुल लीग का प्रचार-प्रसार किया था जबकि एनी बेसेंट ने अपने 2 न्यूज पेपर न्यू इंडिया और कॉमनवेल(Commonweal) के माध्यम से इसकी पब्लिसिटी की थी. एनी बेसेंट की लीग में तिलक की लीग की अपेक्षा 200 शाखाएं थी लेकिन ज्याद संख्या में होने के कारण सब अव्यवस्थित थी

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