अजीत डोभाल का जीवन परिचय | Ajit doval Biography in Hindi

अजीत डोभाल का जीवन परिचय (Ajit doval Biography in Hindi)

भारत ने गत कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि काफी मजबूत की हैं, विकासशील देश से एक कदम आगे बढकर अब भारत को एक सशक्त राष्ट्र में माना जाता हैं. इसके पीछे भारत सरकार और इनसे जुड़े सभी अधिकारियों का योगदान हैं. इसी तरह विगत कुछ वर्षों में राष्ट्र की सुरक्षा और इससे जुड़े मुद्दों में जिस तरह से परिवर्तन आये हैं, उसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को माना जाता हैं. देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने राष्ट्र सुरक्षा सलाहकार के तौर पर अजीत डोभाल को नियुक्त किया था और उनका प्रभुत्व विदेश और सुरक्षा मंत्री से भी ज्यादा रहा हैं.

Ajit Doval

क्र. म.(s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1.    पूरा नाम ((Full Name) अजीत डोभाल
2.    जन्म (Birth Date) 20 जनवरी 1945
3.    जन्म स्थान (Birth Place) पौरी,गढ़वाल,उत्तराखंड
4.    पेशा (Profession) पूर्व आइपीएस ऑफिसर, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर,वर्तमान में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार
5.    राजनीतिक पार्टी (Political Party) बीजेपी का करीबी माना जाता हैं,लेकिन वो अधिकारी हैं,इसलिए किसी राजनैतिक  पार्टी से सम्बद्ध नहीं कहा जा सकता.
6.    अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations)
7.    राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
8.    उम्र (Age) 74 वर्ष
9.    गृहनगर (Hometown) अजमेर,राजस्थान
10.           धर्म (Religion) हिन्दू
11.           जाति (Caste)
12.           वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित
13.           राशि (Zodiac Sign) कुंभ राशि

अजीत डोभाल का प्रारंभिक जीवन (Early life)

  • अजित डोभाल के पिता इंडियन आर्मी में ऑफिसर थे. उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर मिलिट्री स्कूल से ली थी, और आगरा यूनिवर्सिटी से 1967 में इकोनॉमिक्स में मास्टर किया था. ग्रेजुएशन के बाद ही उन्होंने आइपीएस की तैयारी करनी शुरू कर दी थी, और 1968 में वो केरल कैडर से आईपीएस ऑफिसर बने थे.

अजीत डोभाल के परिवार की जानकारी (Ajit doval Family information)

पत्नी अनु डोभाल
पुत्र शौर्य डोभाल
पिता गुनानद डोभाल

अजीत डोभाल का करियर (Ajit doval Career information)

  • 1972 में अजित जी इंटेलिजेंस ब्यूरो से जुड़े थे,जहां उन्होंने 3 दशक बिताये. इस दौरान उन्होंने बहुत से सफल ऑपरेशन किये, इनमें नार्थ-ईस्ट,जम्मू और कश्मीर और यूके के ओपरेशन मुख्य हैं.
  • डोभाल ने मिज़ो नेशनल फ्रंट इंसरजेंसी (Mizo national insurgency) के समय लालडेंगा (laldenga) के 7 में से 6 कमांडर को जीत लिया था. लाल्देंगा एमएनएफ की चीफ थे. वास्तव में 1961 में मिजोरम में सुखा पड़ा था, और वहाँ के लोगों की सरकार से नाराजगी बढ़ गयी थी, 1966 तक तो अलग मिजोरम बनाये जाने की मांग उठने लगी,ऐसे में वहाँ हिंसा की वारदातें बढ़ गयी थी. लेकिन अजीत डोभाल एमएनएफ़ को टेबल पर ले आये थे और शांति के साथ ही वार्ता की जिससे वहाँ हिंसा खत्म हो गयी.
  • 1988 की गर्मियों में जब खालिस्तानियों के कारण पंजाब सरकार के साथ केंद्र भी परेशान थी, और स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी आतंक के सरगना सुरजीत सिंह पेंटा मौजूद था. तब अंदर जाना भी आसान नही था लेकिन अजीत डोभाल पाकिस्तान के आईएसआई (पाकिस्तानी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस) एजेंट बनकर पेंटा से मिले, उसे यही लगा कि ये व्यक्ति पाकिस्तान की भेजी हुयी मदद हैं जिससे वो खालिस्तानी आतंकवादी गतिविधियाँ कर सकेंगे, लेकिन उसकी उमीद के विपरीत डोभाल वहाँ अपना कम करने में सफल रहे, और उन्होंने बाहर सुरक्षा के लिये के तैनात फ़ोर्स को ना केवल जानकारी उपलब्ध करवाई बल्कि ऑपरेशन थंडर को सफल बनाने में पूरी मदद की, जिससे बिना किसी रक्तपात के सेना ने खालिस्तानियों को सरेंडर करवा दिया. वास्तव में पुलिस को तब लगा था कि मंदिर के अंदर केवल 40 लोग हैं लेकिन डोभाल ने बताया कि वहाँ कुल 200 लोग थे, उन्होंने ही सरकार को तैयार किया था कि वो वहाँ छापा मारने की जगह पानी और बिजली की सप्लाई बंद कर दे, और सच में इसका असर हुआ एवं उग्रवादियों ने आत्म-समपर्ण कर दिया. वास्तव में इस अंडरकवर मिशन से काफी पहले ही उन्होंने इस पर काम करना शुरू कर दिया था, इसके लिए वो इंडियन मिशन के साथ इस्लामाबाद तक गये थे,जहाँ उन्होंने पाकिस्तान में सिखों के धार्मिक स्थल पर होने वाली अलगाववादी गतिविधियों पर नजर रखी और साथ ही कुछ अन्य मुद्दों पर भी जासूसी की. अमृतसर स्वर्ण मंदिर का इतिहास जानने के लिए यहाँ क्लिक करें
  • डोभाल को 1990 में कश्मीर भेजा गया था. वहाँ उन्होंने उग्रवादियों के मुखिया को समझाकर अपने पक्ष में कर लिया, इस तरह दुश्मन के भीतर घुसकर उसी में से एक को अपने पक्ष में लाना उनकी कूटनीति थी.
  • डोभाल ने कांधार वाले मामले में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस फ्लाईट में 176 सदस्य और 15 क्रू मेम्बर थे. आतंकवादियों ने नेपाल से दिल्ली जाते विमान को हाइजैक कर लिया और इसे कांधार ले गये,जहाँ आतंकवादियों ने इसे पूरा कंट्रोल में ले लिया,जिसे छोड़ने के लिए उन्होंने मसूद अजहर, मुस्ताक अहमद और उमर सईद की रिहायी मांग की. तब अजीत डोभाल वहाँ बात करने गये और समस्या का हल निकाला. अजीत ने तब कहा था कि यदि आइएसआई का यदि उन्हें समर्थन नही होता तो भारतीय सेना उन्हें छुडा लेती.
  • अजित डोभाल को लन्दन के हाई कमिशन में मिनिस्टर के तौर पर नियुक्त किया गया था, इसके अतिरिक्त अजीत डोभाल पाकिस्तान में 7 साल तक रहे थे, उन्हें दाऊद इब्राहिम को लाना था और पाकिस्तान की खुफिया जानकारी भारत में देनी थी,लेकिन तब भी वो वहाँ पकड़े नहीं गये.

अजीत डोभाल को मिले सम्मान (Ajit Doval Awards and Achievements)

  • अजित डोभाल को आइपीएस की सर्विस जॉइन के बाद मात्र 6 महीनों में ही पुलिस मैडल मिला था. डोभाल उस वक्त सबसे कम उम्र के ऑफिसर थे जिन्हें ये सम्मान मिला था,क्योंकि सामान्यत: ये सम्मान लगभग 1 या आधा दशक बिताने के बाद मिलता हैं.
  • अजित डोभाल पहले पुलिस अफसर हैं जिन्हें 1988 में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. केपीएस गिल के साथ उन्हें भी खालिस्तानी मसले को हल करने का श्रेय दिया जाता हैं, और इस कारण ही अजित जी पहले पुलिस अफसर बने जिन्हें ये सम्मान मिला, इससे पहले केवल मिलिट्री से जुड़े लोगों को ही सम्मान दिया गया था.

रिटायरमेंट के बाद डोभाल का जीवन

  • जनवरी 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से रिटायर होने के बाद भी वो भारत की सुरक्षा सम्बन्धित मामलों में एक्टिव रहे, उन्होंने कुछ प्रसिद्ध न्यूज पेपर्स और जर्नल्स के लिए लिखने के अलावा सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में भारत की सुरक्षा सम्बन्धित मुद्दों पर लेक्चर्स भी दिए. रिटायरमेंट के बाद डोभाल ने 2009 के दिसम्बर में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की स्थापना की थी,जिसे भारत का थिंक टैंक माना जाता हैं. 2009 और 2011 में उन्होंने इंडियन ब्लैक मनी एब्रोड इन सीक्रेट बैंक्स एंड टैक्स हेवन्स पर 2 रिपोर्ट लिखी थी.  30 मई 2014 के दिन डोभाल भारत का पांचवा सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया.

क्या हैं एनएससी और क्या हैं डोभाल का पद?

डोभाल के बारे में जानते हुए ये जानना बेहद जरूरी हैं कि वो देश के किस सुरक्षा स्तम्भ से जुड़े हैं,और डोभाल का इसमें क्या पद हैं और उनके पास ऐसी कौनसी शक्तियाँ हैं जिनके कारण देश की सुरक्षा उनके लिए फैसलों पर निर्भर करती हैं.

  • भारत की सुरक्षा देखने के लिए एनएससी (नेशनल सेक्योरिटी काउंसिल) एक महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं इसके अतिरिक्त दो अन्य स्तम्भ स्ट्रेटेजिक पोलिसी ग्रुप और नेशनल सेक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड हैं. इस नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बोर्ड में सरकारी लोगों के अतिरिक्त बहुत से प्रतिष्ठित सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल होते हैं. जुलाई 2018 में इसका नया बोर्ड बना था,जिसके अध्यक्ष 2014-2016 में रशिया में भारत के एम्बेसडर रह चुके पीएस राघवन बने थे,उनका कार्यकाल 2 वर्ष का था.
  • नेशनल सिक्योरिटी काउन्सिल का गठन 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हुआ था, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के अतिरिक्त डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, डिफेन्स,वित्त विभाग,विदेश मंत्रालय के मिनिस्टर, नीति आयोग के डिप्टी चेयरमैन भी सदस्य के तौर पर शामिल होते हैं.
  • एनएससी को देश की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता रहा हैं,जिसमें दो अन्य स्तम्भ इसका सहयोग करते हैं, लेकिन कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी के द्वारा ही समस्त निर्णय की समीक्षा की जाती हैं और उन्हें प्रभावी बनाया जाता हैं. सीसीएस को स्वयं प्रधानमंत्री चेयर करते हैं जिसमें सुरक्षा,वित्त,विदेश और ग्रह मंत्रालयों के मंत्री भी शामिल होते हैं.
  • केंद्र सरकार ने नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर की चेयरमैनशिप में सिक्योरिटी पोलिसी ग्रुप (एसपीजी) बनाई हैं,जिससे देश के बाहरी,आंतरिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए नेशनल सेक्योरिटी काउंसिल को सहयोग किया जा सके.
  • अजीत डोभाल को स्ट्रेटेजिक पोलिसी ग्रुप का हेड बनाया गया,जो कि पहले से नेशनल सेक्योरिटी एडवाइजर थे. और इस तरह से अजीत डोभाल के पास पूरे एसपीजी की पॉवर मिल गयी, जिसमें 16 सदस्य हैं जिसमें निति आयोग के वाइस चेयरमेन कैबिनेट सेक्रेटरी, तीनों सेनाओं के चीफ, आरबीआई के गवर्नर, विदेश सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी, वित्त सेक्रेटरी और डिफेन्स सेक्रेटरी शामिल हैं.

अजीत डोभाल: नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (Ajit doval:national security adviser)

  • जून 2014 में डोभाल ने 46 भारतीय नर्सों को ईराक के टिकरित के हॉस्पिटल से सुरक्षित भारत पहुंचाया था. अजीत डोभाल ने ईराक की सरकार से कांटेक्ट किया और 5 जुलाई 2014 को आईएसएस के मिलिटेंट ने एर्बिल शहर में प्रशासन को नर्सेज सौंपी, और भारतीय सरकार ने 2 विशेष प्लेन से उन्हें कोच्ची पहुँचाया गया.   
  • आर्मी जनरल दलबीर सिंह सुहाग के साथ डोभाल ने म्यांमार में लडाकों के खिलाफ मिलिट्री ओपरेशन तय किया था . एनएससीएन ने मणिपुर में 17 जवानों को मार दिया, तब तुरंत ही भारतीय जवान म्यांमार गये और इस मिशन में 50 आतंकवादियों को मार गिरया. इसके पीछे अजीत डोभाल का दिमाग था, इसमें एक भी भारतीय कमांडर शहीद नही हुआ था.
  • 2016 में पाकिस्तान में हुयी सर्जिकल स्ट्राइक के लिए उन्हें ही जिम्मेदार माना जाता हैं. 35 से 50 आतंकवादियों को मारा गया, और उसकी फुटेज को 2018 में रिलीज की गयी.
  • डोकलाम के मुद्दे को डिप्लोमेटिक तरीके से सुलझाने के लिए विदेश सेक्रेटरी एस.जयशंकर और चायना में भारत के एम्बेसडर विजय केशव गोखले के साथ अजीव डोभाल को श्रेय मिलता हैं.

अजीत डोभाल से जुडी रोचक जानकारियाँ (Interesting facts about Ajit Doval)

  • अजीत डोभाल ने एक इंटेलिजेंस ऑफिसर के तौर पर मुस्लिम वेश में पाकिस्तान में 7 सालों तक रहे, जिसका वहाँ की सरकार और सुरक्षा बल को जरा भी अंदाजा नहीं हुआ. 
  • प्रधानमंत्री मोदी और अजीत डोभाल दोनों ही देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ आतंकवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए आक्रामक शैली को सही मानते हैं, और भारत द्वारा पाकिस्तान के हमलों के जवाब में की जाने वाली सर्जिकल स्ट्राइक इसी का परिणाम हैं. हालांकि डोभाल और मोदी के रिश्ते हमेशा विपक्ष के निशाने पर रहते हैं. अजीत डोभाल की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर के तौर पर जिम्मेदारियां काफी बढ़ गयी हैं उन्हें प्रधानमंत्री को देश के लिए आवश्यक आंतरिक और बहरी मामलों में सलाह देनी होती हैं,और कुछ सम्वेदनशील मुद्दों को प्रधानमंत्री के साथ देखना पड़ता हैं क्योंकि वो अब स्ट्रेटेजिक पोलिसी ग्रुप के चेयरमेन हैं.

अजीत डोभाल का वेतन(Ajit doval Salary):

  • 2016 में पीएमओ से मिली जानकारी के अनुसार अजीत डोभाल और एडिशनल प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा की एक ही तनख्वाह हैं और ये राशि 1,62,500 रूपये प्रति माह हैं.

डोभाल ने पाकिस्तान से जुड़े मसलों को जिस तरीके सुलझाया, उसके लिए पूरा देश उनका प्रशंसक बन चूका हैं. लेकिन ये भी सच हैं कि  डोभाल को राष्ट्रीय स्तर पर भले अब पहचान मिली हो लेकिन वो देश-हित में लम्बे समय से काम कर रहे हैं. डोभाल जिस क्षेत्र में हैं, उसकी महत्ता तभी बनी रहती है जब जानकारी की गोपनीयता रखी जाए, और शायद यही कारण हैं डोभाल के संदर्भ में उस हद तक जानकारी अब भी उपलब्ध नही हैं जितनी किसी मंत्री या अन्य सेलिब्रिटी की मिल जाती हैं, और किसी भी सरकारी वेबसाईट पर भी डोभाल की प्रोफाइल नही हैं. फिर भी उनकी अतुलनीय उपलब्धियों को देखते हुए उनके बारे में जिज्ञासा होना जायज हैं, इसी कारण थोड़ी बहुत जानकारी इन्टरनेट पर खोजी जाती हैं, जिसमे भी उनके जन्म और प्रारम्भिक जीवन के बारे  में जो जानकारी हैं वो अगस्त 2015 में मुंबई में उनके द्वारा उपलब्ध कराई गयी बायोग्राफी से मिली हैं, इसके अतिरिक्त उनकी बहुत ज्यादा निजी जानकारी और उनकी बहादुरी के बहुत से किस्से ज्यादा पता नहीं हैं.

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