आम आदमी पार्टी का इतिहास | Aam Aadmi Party History in Hindi

आम आदमी पार्टी का इतिहास (Aam Aadmi Party History in Hindi)

आम आदमी पार्टी भारत की एक राजनीतिक पार्टी है. जोकि सन 2012 से अस्तित्व में है. दरअसल सन 2011 में एक समाज सुधारक अन्ना हजारे एवं अरविन्द केजरीवाल जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ा आन्दोलन चलाया और जन लोकपाल बिल लाने की मांग की. उसके बाद उन दोनों के बीच कुछ मतभेद के चलते आम आदमी पार्टी नामक एक राजनीतिक पार्टी बनाई गई, जोकि तब से अब तक चल रही है. इस पार्टी की उत्पत्ति कैसे हुई एवं इसके इतिहास के बारे में विस्तार से आपको हम हमारे इस लेख में बताने जा रहे हैं.  

Aam Aadmi Party ka Itihas

आम आदमी पार्टी का परिचय (Aam Aadmi Party Introduction)

परिचय बिंदु

पार्टी का परिचय

पूरा नाम

आम आदमी पार्टी

अन्य नाम

आप (AAP)

चिन्ह

झाड़ू

अध्यक्ष

अरविन्द केजरीवाल

संस्थापक

अरविन्द केजरीवाल एवं उनके कुछ साथी

अधिकारिक लांच

26 नवंबर, 2012

विचारधारा

लोकतांत्रिक समाजवादी एंटी – करप्शन पोपुलिस्म

रंग

हरा

छात्र खंड

छात्र युवा संघर्ष समिति (सीवाईएसएस)

युवा खंड

आम आदमी पार्टी युवा खंड

महिला खंड

आप महिला शक्ति

श्रमिक खंड

श्रमिक विकास संगठन (एसवीएस)

ईसीआई स्टेटस

स्टेट पार्टी

राष्ट्रीय संयोजक

अरविन्द केजरीवाल

हेडक्वार्टर

206, रोउस एवेन्यु, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग, आईटीओ, नई दिल्ली, इंडिया – 110002 

 आम आदमी पार्टी की उत्पत्ति (Origin of Aam Aadmi Party)

आम आदमी पार्टी की उत्पत्ति अरविन्द केजरीवाल और अन्ना हजारे के बीच मतभेद के चलते हुई. दरअसल दोनों ही एक सामाजिक कार्यकर्ता थे जिन्होंने सन 2011 में जन लोकपाल बिल के लिए भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की शुरुआत कर देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का प्रण लिया था. उस समय यह आन्दोलन भारत में बहुत जोरों से चल रहा है. देश में अलग – अलग जगह से लोग इसमें शामिल हो रहे थे. किन्तु आपको बता दें कि एक तरफ जहाँ अन्ना हजारे इस आंदोलन को राजनीतिक रूप से बिलकुल अलग रखना चाहते थे, वहीँ केजरीवाल का यह मानना था कि राजनीति में स्थाई रूप से भागीदारी आवश्यक है, क्योंकि जन लोकपाल बिल के बारे में मौजूदा राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के माध्यम से ही इस पर प्रगति प्राप्त की जा सकती है, न कि केवल उनकी राय से. उन्होंने सोशल नेटवर्किंग सेवाओं का उपयोग करके इंडिया अगेंस्ट करप्शन संगठन द्वारा एक सर्वेक्षण किया, जिससे यह संकेत मिले कि लोगों द्वारा राजनीतिकरण के लिए व्यापक समर्थन मिला है.

इसके बाद अन्ना हजारे और केजरीवाल ने 19 सितंबर 2012 को खुलासा करते हुए कहा कि राजनीति में भूमिका को लेकर दोनों के मतभेद बदल नहीं रहे है. इसके बाद भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन में शामिल होने वाले जाने – माने कुछ लोगों ने केजरीवाल का समर्थन किया और कुछ ने जैसे किरण बेदी और संतोष हेगड़े ने उनका विरोध किया. किन्तु फिर भी 2 अक्टूबर महात्मा गाँधी जी की जयंती पर केजरीवाल ने यह घोषणा कर दी, कि वे एक राजनीतिक पार्टी का गठन कर रहे हैं. और इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर एक राजनीतिक पार्टी का गठन किया और इसकी घोषणा उन्होंने अधिकारिक रूप में 26 नवंबर 2012 को कर दी. यह वह दिन था जिस दिन सन 1949 में भारत के संविधान को अपनाया गया था.

इस पार्टी का नाम ‘आम आदमी पार्टी’ रखा गया, जिसका प्रतिनिधित्व अरविंद केजरीवाल ने किया था. इसके बाद मार्च सन 2013 में इसे भारत के चुनाव आयोग द्वारा एक राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड किया गया. और इस तरह से आम आदमी पार्टी की उत्पत्ति हो गई. 

आम आदमी पार्टी के संस्थापक (Founder of AAP)

आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल हैं जोकि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर से स्नातक हैं. इन्होने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में अपनी सेवा दी हैं. इमर्जेंट लीडरशिप के लिए रेमोन मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपनी एक बड़ी जीत हासिल थी. हालाँकि इस जीत से अधिक उन्हें इस बात का श्रेय दिया जाता है कि आम आदमी पार्टी के निर्माण में केजरीवाल को सिर्फ एक साल लगा और उन्होंने पूरे देश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इस आईआईटीयन ने नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र में कई बड़े बड़े राजनेता और यहां तक कि 3 बार निर्वाचित हो चुकी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी इन्होने हराया. फिर विधानसभा चुनाव के फैसले के बाद केजरीवाल ने 28 दिसंबर 2013 को दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला. हालाँकि उनके द्वारा प्रस्तावित जन लोकपाल बिल को जब कांग्रेस और भारतीयजनता पार्टी के द्वारा रोक दिया गया था, तब उन्होंने 49 दिनों में ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सन 2014 के आम चुनाव में उन्होंने बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव में लड़ने के लिए उतर गए, लेकिन वे मोदी जी के सामने टिक नहीं पाए और बुरी तरह से हार गए थे.     

आम आदमी पार्टी का अब तक का इतिहास (Aam Aadmi Party History)

आम आदमी पार्टी के अब तक के राजनीतिक इतिहास को आप नीचे दिए गये कुछ बिन्दुओं के आधार पर समझ सकते हैं 

  • ·        आम आदमी पार्टी को सन 2013 में भारत के चुनाव आयोग द्वारा राजनीतिक पार्टी के रूप में मंजूरी मिल जाने के बाद इस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली में अपने समर्थन जुटाने के लिए रैलियों का आयोजन कर दिल्ली में कांग्रेस सरकार पर हमला बोल दिया था.
  • ·        इसी वर्ष 4 दिसंबर को दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में यह पार्टी शामिल हुई, और 8 दिसंबर को इस पार्टी ने दिल्ली चुनाव में भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में एक शानदार शुरुआत की.
  • ·        इस विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने जो पहला मुद्दा उठाया था वह था फर्जी तरीके से बिजली की दरों और पानी के बिलों का उछाल. उस दौरान बिजली वितरण कंपनियों और पानी के टैंकर माफिया के साथ मिलीभगत के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया था.
  • ·        अरविन्द केजरीवाल ने शीला दीक्षित सरकार पर दबाव बनाने के लिए उपवास भी शुरू किया था, और इसे बड़े पैमाने पर लेकर गए थे. और फिर 14 दिन बाद केजरीवाल ने अपना अनशन तोड़ा. इस आंदोलन ने आम आदमी पार्टी को एक राजनीतिक ताकत दी थी. 
  • ·        लोकप्रिय समर्थन होने की वजह से दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 28 सीटें जीतने के बाद आम आदमी पार्टी ने राजनीतिक सर्किट में शानदार शुरुआत की थी. एक मामूली पार्टी होते हुए भी इतनी सीटें अपने नाम करना इस पार्टी की एक बहुत बड़ी कामयाबी थी.
  • ·        अरविंद केजरीवाल की यह पार्टी लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हुई, जिसके चलते सरकार के गठन पर दिल्ली के लोगों से सलाह लेने के बाद पार्टी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बाहरी समर्थन प्राप्त किया और फिर अपनी सरकार बनाई. और 28 दिसंबर को अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
  • ·        हालाँकि दिल्ली विधानसभा में इनकी संख्या की कमी के कारण वे अपने मुख्य लक्ष्य जन लोकपाल बिल पारित करने में विफल हो गए थे. इसलिए उस दौरान केवल 49 दिन में ही केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. फिर फरवरी, 2014 में इस पार्टी ने एक नये और पूर्ण जनादेश की मांग की.
  • ·        हालाँकि दिल्ली में फिर से चुनाव होने से पहले अप्रैल – मई 2014 में लोकसभा चुनाव आयोजित हुए थे. इस पार्टी ने 400 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा, और केवल 4 सीटें हासिल की, वो केवल पंजाब राज्यों से थी. जबकि परिणाम लोगों की पार्टी की अपेक्षाओं से कम था. लेकिन फिर भी दिल्ली के बाद पंजाब में इस पार्टी की एक मजबूत शुरुआत हुई थी, जहाँ इस पार्टी को जीत हासिल हुई.
  • ·        सन 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटें हारने के बाद भी इस पार्टी ने हार नहीं मानी और जल्द ही वापस आ गई. इस पार्टी ने सन 2015 में फिर से दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा, और तब भ्रष्टाचार को एक बार फिर से खत्म करने का वादा किया. इस बार इस पार्टी का आह्वान था कि –“पांच साल केजरीवाल”. उस दौरान उन्हें ‘मफलरमैन’ के रूप में जाना जाने लगा था, जो दिल्ली के मफलर – क्लैड एंटी करप्शन क्रूसेडर के लिए एक निक नेम था.        
  • ·        अरविन्द केजरीवाल के इस बार चमत्कारी प्रदर्शन के चलते सन 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीटें जीतकर एक इतिहास रच दिया था. और इस बार केजरीवाल की आप सरकार ने अपने 5 साल के कार्यकाल को भी पूरा किया था.
  • · अप्रैल सन 2015 को आम आदमी पार्टी ने भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ भी दिल्ली में एक रैली का आयोजन किया था.
  • ·        फिर सन 2017 में इस पार्टी ने गोवा विधानसभा चुनाव और पंजाब विधानसभा चुनाव दोनों लड़ा था. वे सभी सीटें हार गये और गोवा की जो 39 में से 38 सीटें उन्होंने जमा की थी उसे बचाने में भी वे नाकाम रहे, जिस पर उनके उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था.
  • ·        पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए वहां की एक स्थानीय पार्टी लोक इंसाफ पार्टी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन किया था. और इस गठबंधन को आप गठबंधन कहा गया. इसने कुल मिलाकर 22 सीटें जीती. जिनमें से 2 लोक इंसाफ पार्टी और 20 आम आदमी पार्टी ने जीतीं थी.
  • ·        इसके बाद सन 2019 के आम चुनाव में आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर से कुछ राज्यों से सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया. हरयाणा राज्य में पार्टी ने 3 लोकसभा क्षेत्रों पर चुनाव लड़ने के लिए दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया था.
  • ·        वहीँ उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद से इन्होने अपना पहला ट्रांसजेंडर उम्मीदवार भी उतारा था. इस सब के बावजूद भी आम आदमी पार्टी ने 40 में से 39 सीटें खो दी, जिसमें इस पार्टी ने 9 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों से चुनाव लड़ा था.  

आम आदमी पार्टी के नेता (AAP Leaders)

आम आदमी पार्टी के सूत्रधार अरविन्द केजरीवाल हैं, जिन्होंने कुछ ही समय में अपनी इस पार्टी का राजनीतिक स्पेक्ट्रम पर कब्जा जमा लिया. सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग और उच्च शिक्षित स्वयंसेवकों को शामिल करने के साथ ही इस पार्टी ने घर – घर जाकर प्रचार किया. आम आदमी पार्टी की राजनीतिक समिति में शामिल होने वाले कुछ नेताओं की सूची में गोपाल राय, कुमार विश्वास, मनीष सिसोदिया, प्रशांत भूषण, संजय सिंह और योगेन्द्र यादव आदि नाम शामिल हैं. भारतीय राजनीति में इसकी शुरुआत ने विभिन्न क्षेत्रों से कई प्रमुख नामों को इस पार्टी ने आकर्षित किया. जिसमें कैप्टेन गोपीनाथ जोकि एयर डेक्कन के संस्थापक है, मल्लिका साराभाई जोकि प्रख्यात डैन्सयूस हैं, मीरा सान्याल जोकि रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड – इंडिया की सीईओ हैं, समीर नायर जोकि स्टार टीवी के सीईओ हैं, वी बालाकृष्णन जोकि इनफ़ोसिस बोर्ड के सदस्य हैं और इसी तरह और भी लोग इस पार्टी में शामिल हुए. हालाँकि अब बहुत से लोग केजरीवाल की सोच के समर्थन में नहीं है. इसलिए बहुत से लोग इस पार्टी से अलग भी हो चुके हैं.

आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद की उपलब्धियां (Achievements of AAP)

  • ·        नई दिल्ली में आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने के बाद पार्टी ने सब्सिडी के माध्यम से 400 यूनिट तक की बिजली के बिल कम कर दिए.
  • ·        इस पार्टी ने पानी के मीटर (20 किलोलीटर तक) के लिए पानी भी मुफ्त में दिया.
  • ·        केजरीवाल की सरकार ने मल्टी – रिटेल क्षेत्र में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) को भी खत्म कर दिया. 
  • ·        इसके साथ ही अपने प्रमुख लक्ष्य पर डटे हुए आम आदमी पार्टी ने भ्रष्ट सरकारी अधिकारीयों पर रिपोर्ट करने के लिए नागरिकों के लिए एक भ्रष्टाचार विरोधी हेल्पलाइन की भी शुरुआत की.    

इस तरह से आम आदमी पार्टी ने अब तक कार्य किया, जिसमें इस पार्टी ने कई उतार और चढ़ाव का भी सामना किया.

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