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मेनका गांधी का जीवन परिचय | Maneka Gandhi Biography in Hindi

मेनका गांधी का जीवन परिचय (Maneka Gandhi Biography in Hindi)

मेनका गांधी भारत की जानी मानी नेहरु – गांधी परिवार से संबंध रखने वाली एक सदस्य हैं जोकि न केवल एक राजनेता बल्कि एक लेखिका भी हैं, जिन्होंने कई विषयों पर किताबें लिखी हैं. ये फिलहाल मोदी जी की कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री हैं. इन्हें लोग संजय गांधी जी की विधवा के नाम से भी जानते हैं. इनके संजय गांधी से मिलने के बाद से लेकर अब तक के जीवन की कहानी आज हम इस लेख में आपको बताने जा रहे है.

Maneka Gandhi

जन्म एवं परिचय (Birth and Introduction)

क्र. म. (s.No.) परिचय बिंदु (Introduction Points) परिचय (Introduction)
1. पूरा नाम (Full Name) मेनका संजय गांधी
2. जन्म (Birth Date) 26 अगस्त, 1956
3. जन्म स्थान (Birth Place) नई दिल्ली
4. पेशा (Profession) राजनेता, लेखिका, पशु अधिकार कार्यकर्ता एवं पर्यावरण
5. राजनीतिक पार्टी (Political Party) भारतीय जनता पार्टी
6. अन्य राजनीतिक पार्टी से संबंध (Other Political Affiliations) जनता दल (1988 – 1998) एवं निर्दलीय (1998 – 2004)
7. राष्ट्रीयता (Nationality) भारतीय
8. उम्र (Age) 62 साल
9. गृहनगर (Hometown) नई दिल्ली
10. धर्म (Religion) सिख (शादी से पहले) एवं हिन्दू (शादी के बाद)
11. जाति (Caste) ब्राह्मण
12. वैवाहिक स्थिति (Marital Status) विवाहित (अभी विधवा)
13. राशि (Zodiac Sign) कन्या

मेनका गांधी का शुरूआती जीवन (Early Life)

मेनका गांधी का जन्म दिल्ली के रहने वाले एक सिख परिवार में हुआ, जोकि आर्मी से संबंध रखता है. इनके पिता भारतीय आर्मी अधिकारी थे और साथ ही इनके अंकल भी एक मेजर जनरल थे. मेनका को बचपन से मॉडलिंग का बहुत शौक था, जिसके चलते वे स्कूल में कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया करती थी.

मेनका गांधी की शिक्षा (Education)

मेनका ने दिल्ली में लॉरेंस स्कूल में शुरुआती स्कूल की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, इसके बाद की पढ़ाई के लिए वे महिलाओं के लेडी श्री राम कॉलेज में गई. और फिर उन्होंने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में जर्मन का अध्ययन किया.

मेनका गांधी का व्यक्तिगत जीवन (Personal Life)

मेनका जी की संजय गांधी जी के साथ पहली मुलाकात सन 1973 में मेनका के अंकल मेजर जनरल कपूर के बेटे वीनू कपूर की शादी के दौरान एक कॉकटेल पार्टी में हुई थी. हालाँकि संजय गांधी ने मेनका को इससे पहले एक ब्रीफ स्टिंट मॉडलिंग कांटेस्ट के दौरान देखा था, और उन्हें देखते ही संजय को उनसे प्यार हो गया. फिर एक साल बाद सितंबर सन 1974 में संजय गांधी के साथ मेनका आनंद ने शादी कर ली. और वे मेनका आनंद से मेनका संजय गांधी में परिवर्तित हो गई. जब इनका विवाह संजय गांधी जी के साथ हुआ तब उनकी उम्र केवल 19 वर्ष थी. इन्होंने सन 1980 में एक बेटे को जन्म दिया जिसका नाम है वरुण गांधी. ये भी राजनीति से संबंध रखते हैं और भारतीय जनता पार्टी के एक राजनेता हैं.

मेनका गाँधी परिवार की जानकारी (Family Detail)

1. पिता का नाम (Father’s Name) स्वर्गीय कर्नल तरलोचन सिंह आनंद
2. माता का नाम (Mother’s Name) अम्तेश्वर आनंद
3. अंकल का नाम (Uncle’s Name) मेजर – जनरल कपूर
4. पति का नाम (Husband’s Name) संजय गांधी
5. बेटे का नाम (Son’s Name) वरुण गांधी
6. सास का नाम (Mother-in-law Name) इंदिरा गांधी
7. ससुर का नाम (Father-in-law Name) फिरोज गांधी
8. जेठ का नाम (Brother-in-law Name) राजीव गांधी
9. जेठानी का नाम (Sister-in-law Name) सोनिया गांधी
10. भतीजे का नाम (Nephew’s Name) राहुल गांधी
11. भतीजी का नाम (Niece’s Name) प्रियंका गांधी

मेनका गांधी का राजनितिक करियर (Political Career)

मेनका गांधी अपने पति संजय गांधी के साथ राजनीतिक यात्राओं में साथ में जाती थी. उन्होंने उनके अभियानों में काफी मदद भी की. मेनका ने सन 1977 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. दरअसल मेनका को मॉडलिंग के साथ – साथ लेखन का भी काफी शौक था. उस दौरान मेनका एक राजनीतिक पत्रिका ‘सूर्या’ की संस्थापक बनी. इस पत्रिका में इंदिरा गांधी का एक इंटरव्यू छपा था. जिससे कांग्रेस पार्टी को आम जनता के बीच अपनी छवि सुधारने में मदद मिली थी. यह संजय गांधी की अचानक मृत्यु थी जिसने मेनका को वर्ष 1982 में राजनीति में प्रवेश करने के लिए मजबूर कर दिया. संजय की मृत्यु के बाद मेनका गांधी परिवार के साथ सारे संबंध तोड़ कर प्रधानमंत्री हाउस से बाहर निकल गई. और फिर मेनका ने निम्न राजनीतिक पार्टी के लिए कार्य करना शुरू कर दिया.

  • ‘संजय विचार मंच’ :- गांधी परिवार से अलग होने के बाद मेनका ने अपनी खुद की एक राजनीतिक पार्टी ‘संजय विचार मंच’ के नाम से शुरू की. इस पार्टी का मुख्य फोकस युवाओं के रोजगार और सशक्तिकरण पर था. इस पार्टी ने आंध्रप्रदेश राज्य से चुनाव लड़ा. और चार सीटों पर जीत हासिल की.
  • जनता दल :- सन 1988 में ‘संजय विचार मंच’ पार्टी का जनता दल के साथ गठबंधन हो गया. और मेनका गांधी को इसके महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था. पार्टी ने सन 1989 में अपना पहला चुनाव जीता. तब मेनका को पर्यावरण मंत्री के रूप में नियुक्ति मिली, और सन 1989 से सन 1991 तक वे इसमें कार्यरत रहीं. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पशु कल्याण के लिए एक अलग विभाग बनाया. उसके द्वारा न केवल पशु कल्याण के क्षेत्र में बल्कि देश के ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा के लिए भी कई कानून बनाये गये थे.
  • निर्दलीय नेता के रूप में :- वर्ष 1996 में मेनका ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पीलीभीत से सफलतापूर्वक चुनाव लड़ा. मेनका ने सन 1998 में भी चुनाव में जीत हासिल की. वर्ष 1999 में मेनका ने भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया, हालाँकि वे उस समय इसमें शामिल नहीं हुईं थी. किन्तु उस दौरान मेनका गांधी जी को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था. इस दौरान मेनका ने ओएएसआईएस (ओल्ड ऐज सोशल एंड इनकम सिक्यूरिटी) प्रोजेक्ट में कई सुधार करने शुरू किये. इसके परिणामस्वरुप नया पेंशन सिस्टम (एनपीएस) आया जिसे सन 2004 में लागू किया गया था. अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों को ध्यान में रखते हुए मेनका ने लोगों के कल्याण के लिए कई कार्य किये. जैसे मेनका ने गोद लेने से सम्बंधित कानूनों को आसान बनाया था और साथ ही सड़कों में रहने वाले बच्चों के लिए उस दौरान उन्होंने एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था.
  • भारतीय जनता पार्टी :– इसके बाद सन 2004 में मेनका गांधी पूरी तरह से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गई. और उन्होंने पीलीभीत से फिर से आम चुनाव लड़ा और जीत अपने नाम की. पीलीभीत में मेनका ने काफी विकास कार्य किये जिसके चलते लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया और उन्हें वोट दिए जिसके चलते ही उन्हें यह जीत हासिल हुई. वे सन 2009 तक इसमें कार्यरत रही. इसके बाद मेनका ने ओनला से लोकसभा चुनाव लड़ कर फिर से जीत हासिल की और इस बार उन्होंने सन 2014 तक कार्य किया. सन 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मेनका ने फिर से पीलीभीत से ही चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

मेनका गांधी पर्यावरण विद के रूप में (Maneka Gandhi as Environmentalist)

मेनका गांधी जी को पर्यावरण एवं जानवरों के प्रति काफी प्रेम था. इसलिए वे अक्सर उनके कल्याण के लिए कार्य किया करती थी. इसलिए उन्हें पर्यावरण विद के रूप में भी जाना जाता है. मेनका ने पशु अधिकारों के मुद्दे को सबसे आगे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सन 1995 में वे जानवरों पर प्रयोगों के नियंत्रण और उनकी देखभाल के उद्देश्य के लिए कमिटी की अध्यक्ष बनीं. समिति के सदस्यों ने उन प्रयोगशालाओं में अचानक जाँच करना शुरू की. जहाँ जानवरों पर रिसर्च की जाती थी. मेनका ने जानकारों के कल्याण के लिए ‘पीपल फॉर एनिमल’ नाम की संस्था की शुरुआत की. इसके अलावा मेनका ने लोगों को जानवरों के कष्टों के बारे में जागरूक करने के लिए टेलीविज़न पर ‘हेड्स एंड टेल्स’ नामक शो की शुरुआत की. मेनका ने जानवरों की सुरक्षा के लिए कई नियम बनाये. और इस तरह के कार्य मेनका ने पर्यावरण विद के रूप में जानवरों के कल्याण के लिए किये.

मेनका गांधी जी के राजनीतिक पद (Political Positions Held)

मेनका गांधी जी के अब तक के राजनीतिक कार्यकाल में वे निम्न पद पर आसीन रहीं –

  • मेनका गांधी जी के राजनीति में कदम रखने के बाद उनकी पहली नियुक्ति सन 1988 में जनता दल के महासचिव के रूप में हुई.
  • इसी के एक साल बाद 9 वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में इन्हें चुना गया था. उसी वर्ष वे राज्य की केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री बनी.
  • सन 1990 में मेनका गांधी जी को राज्य के केन्द्रीय कार्यक्रम लागू करने के लिए चुना गया था.
  • इसके बाद सन 1996 में वे 11 वीं लोकसभा के लिए चुनी गई और इस बार उन्हें विज्ञान और प्रोद्योगिकी एवं पर्यावरण और वन संबंधी कमिटी के सदस्य के रूप में चुना गया था. इसकी सदस्य वे सन 1997 तक बनी रही.
  • सन 1998 में मेनका फिर से 12 वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं और उन्हें 1 साल तक राज्य की केन्द्रीय समाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री बनाया गया.
  • इसके बाद सन 1999 में इन्हें 13 वीं लोकसभा में चुनने के बाद राज्य की सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्री के पद के लिए फिर से नियुक्त किया गया.
  • सन 2001 में मेनका गांधी जी को राज्य के केन्द्रीय कार्यक्रम लागू करने और पशु देखभाल के अतिरिक्त चार्ज के साथ स्टेटिस्टिक्स के लिए चुना गया था.
  • फिर सन 2002 में मेनका गांधी जी को विदेश मंत्रालय की समिति के सदस्य के रूप में चुन कर उन्हें इसमें शामिल किया गया. वे इसमें सन 2004 तक कार्यरत रहीं.
  • सन 2004 में मेनका ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया. और वे 14 वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं. इस दौरान उन्हें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति, सलाहकार समिति और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का सदस्य बनाया गया.
  • भाजपा के इस कार्यकाल के दौरान बाद में सन 2007 में मेनका गांधी जी केवल स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति का सदस्य बनी हुई थी.
  • सन 2009 में अगस्त महीने में उन्हें रेलवे समिति का सदस्य बनाया गया और फिर इसी साल ये सितम्बर में सरकारी बीमा समिति की अध्यक्ष और अक्टूबर में जनरल पर्पस कमिटी की सदस्य चुनी गई.
  • इसके बाद सन 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई, तब मेनका गांधी जी उनकी केबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में नियुक्त हुई थी. और तब से अब तक वे इस पद पर आसीन हैं.

उपलब्धियां (Awards and Achievements)

मेनका गांधी जी ने अपने अब तक के जीवन में निम्न अवार्ड एवं उपलब्धियां हासिल की हैं –

  • मेनका ने सबसे पहले ‘सुप्रीम मास्टर चिंग है इंटरनेशनल एसोसिएशन’ द्वारा 20,000 डॉलर के चेक के साथ शाइनिंग वर्ल्ड कम्पैशन अवार्ड जीता था.
  • इसके बाद सन 1992 में मेनका को अवार्ड मिला था, यह अवार्ड आरएसपीसीए की ओर से दिया गया लार्ड एर्स्किन अवार्ड था.
  • फिर मेनका को सन 1994 में साल की पर्यावरणविद और शाकाहारी के रूप में पुरस्कार दिया गया था.
  • इसके 2 साल बाद यानि सन 1996 में मेनका गांधी जी को ‘प्राणी मित्र’ पुरस्कार से नवाजा गया था. इसी साल महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन ने उन्हें पर्यावरणीय काम के लिए सम्मानित भी किया था.
  • सन 1999 में मेनका ने वीनू मेनन एनिमल एलाइज फाउंडेशन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड पर जीत हासिल की थी.
  • इसी साल भगवान महावीर फाउंडेशन के द्वारा उन्हें हिंसा और शाकाहार के क्षेत्र में बेहतरी के लिए सम्मानित किया गया. और साथ ही डेवलिबेन चैरिटेबल ट्रस्ट ने भी उन्हें सम्मानित किया.
  • मेनका ने सन 2001 में चेन्नई में अंतर्राष्ट्रीय महिला एसोसिएशन वुमन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड भी अपने नाम किया.
  • इन सभी के अलावा पर्यावरण और पशु कल्याण क्षेत्र में मेनका गांधी जी के द्वारा किये गए कार्य के लिए उन्हें साल 2001 में दीनानाथ मंगेशकर आदिशक्ति पुरस्कार एवं रुक्मिणी देवी अरुंडेल एनिमल वेलफेयर अवार्ड प्रदान किया गया, फिर साल 2008 में इसी क्षेत्र में उन्हें एसीजी जयकार अवार्ड भी दिया गया.  

लेखिका के रूप में (As a Writer)

ये तो हमने अपको पहले ही बाता दिया है कि मेनका गांधी जी एक लेखिका भी है अब आइये यह देखते हैं कि उन्होंने अपने लेखन करियर में कौन – कौन सी किताबें लिखीं –

क्र. म. किताबों के नाम
1. द पेंगुइन बुक ऑफ़ हिन्दू नेम्स
2. द कम्पलीट बुक ऑफ़ मुस्लिम एंड पारसी नेम्स
3. द पेंगुइन बुक ऑफ़ हिन्दू नेम्स फॉर गर्ल्स
4. द पेंगुइन बुक ऑफ़ हिन्दू नेम्स फॉर बॉयज
5. ब्रह्मा’स हेयर
6. इन्द्रधनुष एवं अन्य कहानियाँ

विवाद (Criticism)

मेनका गांधी अक्सर अपने टिप्पणियों के कारण विवादों में पाई गई है. जून 2017 में एक फेसबुक लाइव सेशन के दौरान, उन्होंने एक टिप्पणी की थी कि ‘पुरुष आत्महत्या नहीं करते हैं’. इस टिप्पणी के चलते मेनका को काफी नकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली. इससे उन्हें कई सवालों में घेर दिया गया था. फिर उस दौरान लोगों द्वारा यह बोला गया कि भारत में आत्महत्या के 68 % मामले पुरुषों के होते हैं. 

इस तरह से मेनका का अब तक का जीवन एवं राजनीतिक करियर काफी अच्छा एवं थोड़ा उतार – चढ़ाव वाला रहा है. उम्मीद है कि आगे वे अपने बेहतर कार्यों के चलते जीत हासिल करती रहेंगी, और आगे बढ़ती रहेंगी.

Other Links:

  1. संजय गांधी का जीवन परिचय 
  2. प्रणब मुख़र्जी का जीवन परिचय

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